भाभी: माँ बोल रहे थे अभी तुम?
मैं: माँ, तुम मेरी अपनी सगी माँ भी होती तो तुम्हे चोदता मैं। मैं अगर राहुल की जगह होता तो मैं तेरी दूसरी शादी नहीं करता बल्कि तुझे विधवा ही अपने घर ले जा के लंड पे चढ़ाये रखता। मैं चाहे अपनी बीवी को छोड़ देता पर तुझे नहीं छोड़ता माँ। खैर राहुल ने तुम्हे मुझे सौंप के मेरा जीवन बना दिया। मेरे उम्र के शायद ही किसी लड़के को ऐसे भड़काऊ बदन की औरत पे चढ़ना नसीब होगा।
भाभी: तुम इतने गंदे कब से हो गए। बहुत गन्दी-गन्दी बातें करते हो तुम सुनील|
मैं: माँ, तुम्हारे बदन का किया हुआ है सब|
भाभी: मुझे तो अब ऐसा लगता है तुमने मुझे कभी भाभी की नज़र से देखा ही नहीं, सूरज के रहते भी मुझमे तुम एक चुदने वाली औरत देखते थे। मेरे बदन के अलावा तुम्हे कुछ दीखता नहीं है। मुझे गाय बोलते हो जैसे मैं बस एक मांस की बनवाट हूँ बिना दिमाग की। जैसे गाय बस खाती और फिर दुही जाती है, तुम मुझे खिलाते हो और दिन भर चोदते हो!
मैं: माँ, तुम सच कह रही हो। मैं जानता हूँ की तुमने अच्छी पढाई की है और फिर तुम काम भी किया करती थी। पर मैं तुम्हे एक पालतू जानवर की तरह पालना चाहता हूँ। मैंने तुम्हारे बदन से शादी की है तुमसे नहीं। वैसे विधवा औरतों की शादी तो किसी तलाक़शुदा बूढ़े से हो जाती है तुम्हे तो हट्टा-कट्टा जवान मर्द मिला है जो तुम्हारे जिस्म की हर अकड़न तोड़ सकता है। भाभी के भरे जिस्म को आलिंगन में करके उनको चाटते हुए मैंने कहा की – तुम्हे मेरे ही जैसे मर्द की जरुरत है जो तुम्हारे जिस्म को रगड़ सके। माँ तुम्हे खुश होना चाहिए की राहुल ने तुम्हे किसी बूढ़े को नहीं बेचा। राहुल जो चाहता था वो मैं कर रहा हूँ – तुम्हारे बदन की हिफाजत।
भाभी: मुझे पता है तुम्हारा बस चले तो तुम मुझे गाय की तरह खूंटे में बाँध कर रख दोगे| कहीं भी नहीं जाने देते अकेले। मुझे जैसी खुद की दासी बना रखा है।
मैं: हाँ माँ, मैं नहीं चाहता की तुम अकेली बाहर निकलो। वो डिलीवरी बॉय का याद है न- वो नीचे तुम्हारे फेर में रुका हुआ था। तुम अगर अकेली बाहर निकलोगी तो बिना चुदी तुम वापस घर नहीं आ पाओगी। फिर ये दिल्ली है, किसी अमीर की आँख पड़ी तो वो तुम्हे जीवन भर के लिए घर में खूंटे से बाँध देगा। तुम्हारे बदन की औरतें छुप के ही रहें तो अच्छा है। रोहन भैया भी रीता को नहीं निकलने देते होंगे। मैं जब बात करने आया था तो मैंने रीता को देखा भी नहीं था। गदराई औरतें हमेशा घरों की चारदीवारी के अंदर रखी जातीं हैं ताकि वो पालतू रहें।
भाभी: छी! कितनी गन्दी सोच है तुम्हारी
मैं: अच्छा मेरी गन्दी सोच है! और तुम जो सूरज भैया को बेटा बुला के चुदवाती थी वो क्या सोच थी? (भाभी झेप गयीं)। एक दिन में तो फैली नहीं तुम, रात दिन भैया से चुदवाती थी तब क्या सोच थी तुम्हारी? मैंने तो तुमसे कोई जबरदस्ती नहीं की, न ही तुम्हारे भाई और तुम्हारे पिताजी ने, तुमने खुद ही तो मुझे अपना बदन दिया है वो कैसी सोच है?
भाभी: मैंने तुमसे शादी की है!
मैं: मैंने तुम्हारे बदन से शादी की है, माँ।
मैं अब उनको जोर-जोर से चोद रहा था। वो सीसियाने लगीं मैंने अभी रफ़्तार और बढ़ा दी। लम्बी पेलम-पेल के बाद मैं उनके बदन पे निढाल हो गया। पूरे एक महीने हो चुके थे भाभी के बदन को मथते हुए पर मेरी ऊर्जा बढ़ते ही जा रही थी।
खाना खा-कर मैं सो गया। सुबह मैं ऑफिस जाने लगा तो भाभी से बोलै की – माँ, आज तुम्हे बाजार ले जाऊँगा और नए घर की शॉपिंग करेंगे।
शाम में भाभी के साथ शॉपिंग की, ढेर सारा सामान लिया फिर भाभी lingerie शॉप पे भी गयीं और खुद के लिए 3 bras लिए और ब्लाउज के kapde। घर पहुंच के मैंने पूछा –
मैं: माँ, तुमने कुछ दिन पहले ही तो bras लिए थें फिर क्या जरुरत पड़ गयी
भाभी: सुनील बेटे, वो चुस्त हो गए हैं, पहने रहने में दिक्कत होती है
मैं: तो फिर मत पहनों न, दिखाओ मुझे (मैंने भाभी के साड़ी का पल्लू उतर दिया और उनके ब्लाउज के ऊपर हाथ रखते हुए दोनों स्तनों को एक-दुसरे से दबाया, वो एकदम सख्त थे एक दुसरे से दबे हुए। वैसे नए वाले का क्या साइज है, माँ?
भाभी: 50 “
मैं: मालती ने लगता है जम कर मसले हैं इन थनों को। एक महीने में ही 48 ” से 50 ” कर दिया। देखा माँ, तुम्हारे बेटे ने क्या कर दिया। तुम बस देखती जाओ, तुम्हारे बदन का मैं क्या करता हूँ। मैंने भाभी के स्तनों को पीछे से नंगा करते हुए मसलने लगा और कहा- वैसे माँ, मेरे प्यार की निशानी कैसी लगी तुम्हे?
भाभी: क्या चाहते हो तुम? क्यों मसल रहे हो इन्हे?
मैं: माँ, ये कितने बड़े हैं। मसलने से ये जवान और सख्त रहेंगे। किसी भी मर्द तो हिला सकते हैं ये थन आपके। ये 50 ” वाले भी छोटे हो जाएंगे बेहतर है की आप इन्हे खुले रखो। मेरे से क्या शर्माना माँ!
फिर मैंने भाभी को बिस्तर पे पेट के बल लिटा के उनके थनों को पकड़े हुए उनके गांड को ठोकने लगा। क्या कसी औरत है तू माँ? तेरी गांड फाड़ूँगा मैं आज। भाभी भी मेरा साथ दे रही थीं। (तभी गेट की बेल बजी, आभा थी गेट पर)
मैं और भाभी चरम पे पहुंचने ही वाले थे सो मैंने उनके गांड की ठुकाई जारी रखी, हम दोनों आवाज़ें भी निकाल रहे थे जो शायद गेट तक सुनाई दे सकती थी पर दोनों के दोनों होश में नहीं थे। कुछ देर में मैं झड़ गया। भाभी जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगीं और मैं अपने। 2 मिनट रुक-कर मैंने गेट खोल दिया और बोला वो माँ जरा कपड़े बदल रहीं थीं। मैंने तब केवल हाफ- पैंट और टी-शर्ट पहन रखा था और भाभी ने उतेज्जक nighty डाली थी। आभा ने पहले मेरी तरफ देखा फिर भाभी की तरफ और बोली माँ जी इतना समय लग गया nighty डालने में। भैया की मदद ले लेतीं। और वो मेरी तरफ देख के मुस्काई। (शायद उसे हमारी आवाज़ें सुनाई दे गयीं थीं)
मैं चुपचाप अपने कमरे में चला गया । आभा भाभी के साथ किचन में आ गयी और बोली मुझे पता है की आप दोनों क्या कर रहे थे। आपकी आवाज़ें आ रहीं थीं। पर एक दुसरे को चोदते हुए भी आप दोनों एक दुसरे को माँ-बेटे बुला रहे थे। चुदाई में मज़े के लिए, हाँ!
रोहन भैया ने भी अपने गाँव से एक बड़े उम्र की आपके जैसी गदराई औरत को लाकर साथ रखा है। इसके पहले वाले किरायदार को माँ-बेटे बताकर रहते थे दोनों, घर में दिन भर एक दुसरे से चिपके। आप दोनों को पति-पत्नी बताया है। आपको भी भैया ने गाँव से चोदने के लिए लाया है न!
भाभी को पता था की उसे सब पता चल गया था। सो वो धीरे से बोलीं- तुम्हे मैं सब बता दूंगी पर तुम किसी को मत बताना। दरअसल मैं और सुनील पति-पत्नी हैं। मैं उसके बड़े भाई की बीवी थी। उनके देहांत के बाद हमारी शादी हो गयी। हमारे उम्र के अंतर की वजह से लोग शक न करें इसलिए हम माँ बेटे बताकर रहते हैं। आपस में माँ-बेटा एक दुसरे को तो सिर्फ सेक्स में उत्तेजना के लिए बोलते हैं।
आभा: कोई मज़बूरी रही होगी जो आपके मायके वालों ने आपकी शादी आपके देवर से ही करवा दी। आपने भी कम उम्र के लड़के से चुदने के लिए हामी भर दी, हाँ!
भाभी: लगता है वही गलती कर दी। छुप करके रहना पड़ता है! किसी को बता नहीं सकते की हम पति-पत्नी हैं, पर छुपा भी नहीं सकते क्यूंकि ये बात पता भी चल जायेगी। वैसे रीताजी उनकी बीवी हैं न?
आभा: नहीं दीदी (वैसे मैं आपको माँ जी बुलाया करुँगी!)। रीता रोहन भैया के गाँव की चाची लगेंगी। उनके मर्द ने रोहन भैया से पैसे उधर लिए थें। जब वो पैसे नहीं चूका पाए तो बदले में उनकी बीवी ही ले आये। दरअसल रीता पूरे गाँव में अपने बदन के लिए मशहूर थीं। सभी उसके बदन का भोग लगाना चाहते थे। रोहन भैया ने तरकीब निकाली की कैसे उनके निकम्मे पति को मजबूर करके रीता को शहर ले आएं। पहले उसे उधार दे दिया जो वो कभी चुका ही नहीं सकता था। जब उसने मन कर दिया तो बोला की उनके बिज़नेस में रीता काम कर सकती थी और ऐसे वो पैसे भी चुका देगी और घर पे भी अपने पति और बच्चे के लिए पैसे भेजा करेगी। रीता वैसे समझती थी पर उसकी भी इज्जत दांव पर थी सो वो तैयार हो गयी। गाँव में सबको ये कह दिया है की रीता उनके बिज़नेस में एक employee की तरह काम करती है। और पैसे कमाकर घर भेजती है। यहां उसे तीन साल से घर में रख-कर दिन-रात चोदते हैं।
भाभी: कैसी औरत है अपने पति और बच्चे को छोड़कर यहां नाजायज़ रिश्ते में रह रही है। और रोहन की वाइफ कहाँ रहती है?
आभा: माँ जी (हॅसते हुए)! वो रीता के आते ही घर छोड़ कर चलीं गयीं। उनसे एक बेटा था जो की विदेश में पढाई कर रहा है। औरतों के बदन ने कितने मर्दों का घर बर्बाद कर दिया! अब देख लो- सुनील भैया भी अच्छी जॉब करते हैं। कोई काम करने वाली से शादी करते, दोनों खूब कमाते और बहुत अच्छी जिंदगी जी सकते थे। पर आपके बदन के नशे में वो ऑफिस से आते ही आपसे चिपक जाते होंगे और फिर जब तक कल ऑफिस का समय नहीं होता होगा आपको चोदते होंगे। हैं ना, माँ जी?
भाभी: मैं भी काम कर सकती हूँ। पहले में जॉब करती थी। पर सुनील मुझे काम नहीं करने देता। मुझे बाहर अकेले निकलने तक को मना किया है।
आभा: माँ जी, सुनील भैया सही कर रहे हैं। बाहर वाले तो बाद में, रोहन भैया ही आपके फेर में पड़ जायेंगे अगर आप उन्हें दिखीं तो।
भाभी: तू भी ना!
आभा: माँ जी, आप बड़ी शर्माती हैं। रीता आपके ही उम्र की होगी पर वो एकदम खुली हुई है। मेरे सामने ही रोहन भैया उसे चूमते रहते हैं, और वो बिना किसी शर्म से उनके चिपकती है। आपको गर्व होना चाहिए की आपका देवर आपके बदन के नशे में ही सही आपके साथ रह के खुश है।
(आभा जब भी माँ जी बोलती जोर से बोलती, जिस-से मुझे सुनाई दे जाता। मुझे पता चल गया था की आभा को हमारे बारे में सब-कुछ पता चल गया था।)
मैं जान-बूझकर किचन की और आने लगा और भाभी को मधु दीदी बोल के पुकारते हुए कहा: मधु दीदी, खाना बन गया क्या?
आभा: भैया, मधु दीदी या मधु माँ? (और वो जोर-जोर से हसने लगी)
मैं शर्माता हुआ वापस दुसरे कमरे में जाने लगा। आभा बोली क्यों शरमाते हो भैया, मुझे सब कुछ पता है। ले जाओ अपनी माँ को भी, मैं थोड़ी देर में ही आवाज़ दूँगी खाना बन जाने पर। मैं भाभी के पास जाकर उनके बदन को nighty के ऊपर से ही मसलते हुए उन्हें उन्हें उनके कमरे की तरफ ले जाने लगा।
आभा: भगवान् ने क्या जोड़ी बनाई है! भैया आपकी माँ जितनी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखि। इन्हे कभी मत छोड़ना।
मैं: हाँ आभा, मेरी गाय माँ बहुत खूबसूरत है। (मैंने भाभी के होठों को आभा के सामने ही चूसते हुए कहा)। वहीं खड़े-खड़े मैंने भाभी की nighty उतार दी और उन्हें पूरा नंगा कर दिया।
आभा: ओह.. क्या गदराई औरत है आपकी मधु माँ! आप तो थक जाते होंगे इनकी चुदाई करने में।
मैं: हाँ, आभा…. (मैं भाभी को कमरे में लाते हुए बोला। फिर मैंने कमरे का गेट सटा दिया और भाभी की जोर-जोर से चुदाई शुरू कर दी )
कुछ ही देर में आभा खाना बना करके कमरे के अंदर आ गयी और मेरी और भाभी की चुदाई देखने लगी।
मैं हांफने लगा भाभी के बदन पर उछलते हुए। मैं अपना लंड भाभी के चुत में जोर-जोर से पेल रहा था। फच-फच के आवाज़ के साथ मेरा लंड और अंदर जाता जा रहा था।
आभा: भैया, बड़े भरे बदन की औरत है न मधु माँ, देखो कितना थका दिया इसने आपको। पर ये आपसे ही संभलेगी, आपके इतना ही हट्टा-कट्टा आदमी रख सकता है इसे खुश।
कुछ ही देर में मैं और भाभी झड़ गएँ। मैंने आभा से पानी लाने को कहा।
आभा: (तुरंत पानी ले आयी) भैया, ये लो।आपको मैं रोज गरम दूध दिया करुँगी आज से। ताकि आप माँ जी की चुदाई और हुमच-हुमच के करें।
आप दोनों थोड़ी देर में खा लेना, मैं चलती हूँ।
आभा चली गयी और फिर मैं भाभी को आलिंगन में करके उनके होठों को चूसने लगा। भाभी का नंगा मांसल जिस्म जब मेरे नंगे जिस्म से सटता था अजब सी सिरहन पैदा होती थी। उनके स्तनों का मर्म स्पर्श मेरे सीने से होता तो मुझे बड़ी उत्तेजना होती। मैंने उन्हें चूमते हुए कहा – माँ, तुम्हे मैंने बड़ी चूतड़ वाली ऑफिस की औरत के बारे में बताया था न। उसने अपने पति को तलाक़ दे दिया है। और ऑफिस के ही एक 25 साल के लड़के के साथ रह रही है।
भाभी: ऑफिस में ये बात सबको पता है?
मैं: नहीं माँ। मुझे पता है क्यूंकि वो लड़का मेरा दोस्त ही है। मुझसे हमेशा उसकी ही बातें किया करता था।
भाभी: वो शादी करेगा उस-से या फिर यूँही?
मैं: उसने अपने माँ-पिताजी से बात तो की है, पर वो अभी मान नहीं रहे। दरअसल प्रकाश (मेरा दोस्त) 25 साल का है और वो औरत 44 साल की।
भाभी: तुम्हारे दोस्त भी तुम्हारे ही तरह बड़े उम्र की औरतें चाहते हैं। (मैंने भाभी के ये बोलते ही उनके गालों को चूमते हुए उनके चूतड़ों पे हाथ रख-कर उनको खुद से और चिपका लिया)
मैं: बड़े उम्र की भरे बदन की औरतों में जो मज़ा है वो किसी और में कहाँ!
भाभी: तुमने जरूर उसे भी हमारे बारे में बताया होगा?
मैं: नहीं माँ, मुझे उसपे भरोसा नहीं है, वो तुम्हारे पे ही डोरे डालने लगेगा। उस औरत को भी उसने जिद से ही पाया है। वो बस सेक्स का भूखा है!
भाभी: और तुम? दिन भर मुझे चोदते रहते हो। कहाँ से आती है इतनी ऊर्जा? दोस्त भी ऐसे ही बनाएं हैं।
मैं: (भाभी को अपने ऊपर चढ़ाते हुए) उनके नितम्बों पे अपना हाथ रख-कर बोला- अच्छा माँ, एक बात बताओ, जब तुम अपने घर पे राहुल और सुमन के साथ रहती थी। तब भी तुम्हारा बदन पूरा कसा हुआ था। इतनी गदराई औरत घर पे होते हुए कभी तुम्हारे छोटे भाई राहुल या तुम्हारे पिताजी ने तुम्हारे साथ कुछ नहीं किया। देखो भाभी गुस्सा मत करना, मैं बस पूछ रहा हूँ। सूरज भैया अगर होते भी तो मैं खुद को ज्यादा दिन नहीं रोक पाता, और किसी-न-किसी दिन तुमसे चिपकने की कोशिश जरूर करता। इसलिए मुझे ये बात अजीब लगती है की तुम्हारे जैसी दुधारू औरत पास में होते दोनों में से किसी का मन नहीं किया होगा की तुम्हारे बदन को चखे। (मुझे भाभी कुछ मूड में दिख रहीं थीं आज सो मैं भी आगे बढ़ने लगा।)
भाभी कुछ बोल नहीं रहीं थीं। मैंने उनके आँखों में देखते हुए प्यार से कहा – बताओ न, माँ।
भाभी: पिताजी, नहीं। हाँ, राहुल कभी कभी मेरे से चिपकने की कोशिश करता था। हम तीनो भाई-बहिन एक कमरे में ही सोते थें। राहुल बीच में सोता था और रात में कितनी बार मुझे अपने से चिपका लेता था। शुरू में तो मुझे ये बात ऐसे ही लगी पर बाद में मुझे कुछ अटपटा सा लगा सो मैंने सुमन को बीच में सोने के लिए कह दिया। बस ये बात यहीं ख़त्म हो गयीं।
मैं: (भाभी को नीचे करके उनके ऊपर चढ़ते हुए) बेचारा राहुल, प्यासा ही रह गया। वैसे माँ, तुम्हारा भाई परसों आ रहा है। बचा के रखना खुद को, कहीं वो फिर न चिपकने लगे।
भाभी और हम दोनों हॅसते हुए एक दुसरे को चूमने लगे। करीब दस मिनट तक एक दुसरे के चेहरे को चाटने के बाद हम दोनों खाना खाने के लिए उठे।
भाभी को मैंने नंगे ही डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर खुद के जाँघों पर बैठा लिया और प्यार से उनको खिलाने लगा।
मैं: राहुल मुझसे पूछ रहा था की मैं तुम्हारा ध्यान रखता हूँ की नहीं माँ। मैंने उससे बोलै को वो खुद ही आके देख ले।
खाना खाने के बाद मैंने भाभी की उँगलियों और होठों को चूस-चूस कर साफ़ किया। उन्हें पानी की जरुरत नहीं पड़ी। भाभी को बाहों में भरे मैं बिस्तर पे लिटाने लगा। उन्होंने बोला की वो पिशाब करेंगी। मैंने उन्हें बाथरूम में फर्श पर खुद के ऊपर बैठा लिया। मैं दीवाल से पीठ टिका के बैठा हुआ था।
और फिर मैंने बोला- माँ, करो न पिशाब। मैंने भाभी के दोनों मांसल पैरों को खुद के पैरों के बीच कर रखा था। भाभी के पिशाब से हम दोनों के पैर भींग गए। जब भाभी ने पूरा पिशाब कर लिया हम फिर भी वहीं बैठे रहे। मैंने भाभी के जाँघों को सहलाते हुए बोला की माँ तुम्हारे पिशाब की गंध बहुत अच्छी लगती है।
ऐसी गदराये चुस्त बदन की औरतों की जाँघों को मीचने से वो बड़ी उत्तेजित हो जाती हैं। मैं उनके जाँघों पे अपने हाथ फेरने लगा।
मैं: (भाभी के मुँह को अपने तरफ करके उनके होठों को चूसते हुए) माँ और करो न पिशाब!
भाभी: छी! चलो यहाँ से। और भाभी उठने लगीं।
भाभी ने अपने हाथ जमीन पर रख-कर जैसे ही अपने चूतड़ को मेरे जाँघों से उठाने की कोशिश की, मैंने उनके हाथ ज़मीन से हटा कर उनके स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें दुबारा ऐसे बिठाया की उनकी जांघें मेरी जाँघों के ऊपर थीं और मेरा लैंड उनके चूतड़ में घुसा हुआ। भाभी फिर भी ज़ोर लगा रहीं थीं। उन्हें ऐसे रोकना मुश्किल था सो मैंने उन्हें बाथरूम की फर्श पे ही पेट के बल लिटा दिया और खुद उनके स्तनों को पकडे उनकी गांड में लंड घुसा के उनके ऊपर लेट गया।
स्तनों के नीचे से उनका बदन अब उनके पिशाब में पूरा भींग गया था। मैंने अपने एक हाथ को फर्श पे उनके पिशाब से भींगा के उनके गालों और होठों को गीला कर दिया। भाभी छी छी करके मुँह झटकने लगीं। मैंने भाभी के मुँह को अपनी तरफ करके उनके पिशाब से सने होठों को चूसने लगा। मैं एक तरफ उनके होठों, गालों को चूस रहा था और अपने लंड को धीरे-धीरे उनके पिछवाड़े में धक्का दे रहा था। पिशाब के बदबू से पूरा बाथरूम भर गया था और मैं भाभी के पिशाब से सने नंगे मांसल बदन चिपके होने से खुद भी पिशाब से सन गया था।
पिशाब तो बह ही चूका था पर भाभी के बदन का गीलापन भी हमारे बदन के एक-दुसरे से मसलने से कम हो रहा था। भाभी का बदन अभी भी लथ-पथ ही था उनके पिशाब में की मैं उन्हें उठा के बैडरूम में ले आया और उनको बाँहों में करके उनके स्तनों को चूसने लगा।
भाभी के बदन के आगोश में जो मादक अहसास था वो मुझे मदहोश किया जा रहा था। मैं उनके बाहों के बंदिश में उनके मखमली मांसल बदन को मसले जा रहा था। बैडरूम में पंखे और हमारे बदन के आपस में मसलने से पिशाब का गीलापन सूख रहा था पर बैडरूम में पिशाब की बदबू आ गयी थी।
मैं: (भाभी के आँखों में देखते हुए) क्या औरत है तू माँ! तेरे पिशाब में भी मादक गंध है!
भाभी: छी! मेरे पिशाब को चाट रहा है तू बेटे।

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.