मालती ने भाभी के नितम्बों पे हाथ फेरते हुए कहा की चलो आज तुम्हारी गरमा-गरम मसाज करती हूँ। और फिर बिलकुल गाय की तरह भाभी को खींचते हुए मालती मालिश के लिए बिस्तर पे ले आती है। मेरी गाय जैसी भाभी आज मैं तुम्हे एक अच्छी गरम मालिश करती हूँ। और फिर मालती ने भाभी के कपड़ों को हटा कर पूरी नंगी कर दिया। उनके स्तनों को मसलते हुए कहने लगी – सुनील भैया जब आपके स्तनों की ऐसी मालिश करेंगे तो कितना मजा आएगा रे मधु घोड़ी। तेरे बदन को तार-तार कर देगा तेरा देवर। सुनील भैया ने भी क्या किस्मत पायी है, इतनी मांसल शरीर की मल्लिका उनकी बीवी बनेगी वो तो ये सोच के ही उत्तेजित रहेंगे हमेशा। (भाभी शायद अब समझ रही थी की क्यों मैं हमेशा उनके बदन के प्रति आकर्षित रहता था। दरअशल उन्होंने कभी ये सोचा ही नहीं था की उनके बदन में ऐसी कोई बात है। मुझे बस वो एक बच्चे की तरह देखती थीं जो थोड़ा नासमझ है और अभी बचपने में उनके बदन से चिपकने की जुगत में लगा रहता है)| उन्होंने मालती से कहा क्यों तुझे कैसे लगता है कि बड़े स्तन और बड़े नितम्ब पुरुषों को आकर्षित करते हैं। मधु दीदी एक बात बताओ भैया (उनके पति) उन्हें कितनी बार दिन में चोदते थे? भाभी शर्मायी पर कहा – 3 /4 बार । देख लो ज्यादार मर्द बीवी को एक बार ही तो चोदते हैं रात में। पर आपके पति आपको जब भी मौका मिलता होगा चोदते होंगे! है की नहीं?और सुनील भैया तो आपके बदन को छोड़ेंगे ही नहीं । उनकी उम्र ही क्या है! 25 साल भी नहीं होंगे अभी तो! – भाभी ने बोला 23 है सुनील की उम्र । (ये दूसरी जीत थी वो मालती से और सुनना चाहती थी)। मालती ने भाभी को पेट के बल पलट के विशाल उभरे नितम्बों पे तेल लगते हुए कहा और तुझे क्या चाहिए मधु दीदी 23 साल का लड़का इस बदन का मालिक होगा। सुनील भैया जैसा ही कोई जवान मर्द तेरे बदन की जरुरत पूरी कर सकता है। मधु दीदी तुम उसकी गाय बन जाना और वो तुम्हे जम के दुह दिया करेंगे। सुनील भैया के उम्र के मर्दों को बदन का कसाव ही सबसे आकर्षित करता है। ये आजकल के मर्द तो चाहते हैं खूब गदराई औरत मिले उन्हें। दिन भर बिस्तर पे भी पड़ी रहो तो इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता। चोदने के लिए ये तुम्हारे ऊपर चढ़ेंगे और तब इन्हे खुश कर दिया करो फिर दिन भर इनसे ग़ुलामी करवा लो।
मालती ने भाभी को उल्टा करके उनके जाँघों को मसलने लगी। जैसे ही मालती ने अपने हाथ भाभी के चुत कि तरफ ले जाना चाही भाभी ने सख्त मन कर दिया। मालती फिर भाभी के स्तनों का मादन करने लगी और बोली तू इतनी बड़ी घोड़ी है और इतनी शर्मीली। कितना मजा आएगा जब तू बेशरम होक अपने ही देवर से दिन-रात चुदेगी। इस शर्मीलेपन से तू और भी चुदासी लगती है। मालती ने फिर करीब आधे घंटे तक भाभी के बदन कि खूब अच्छे से मालिश कि और बीच बीच में उन्हें मेरा नाम लेकर उतेज्जित करती रही।
शाम 6 बजे जब मालती ने मुझे ये बातें कॉल पे बतायीं तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ (मुझे ये काफी बड़ी जीत लगी)। क्यूंकि जैसा मैं समझ पा रहा था भाभी चाहती थीं मैं उन्हें पत्नी के रूप में चाहूँ न कि केवल उनके बदन को। मैं समझ गया कि मुझे अब रात में वो बातें नहीं करनी होगी और उन्हें ये दिखाना होगा कि मैं उन्हें वाकई पत्नी के रूप मैं चाहता था। मैं मालती तो धन्यवाद् कहा और फ़ोन रख दिया। रात में जब मैं घर आया तो भाभी आज थोड़ी खुश भी दिख रही थीं। मैंने पूछा क्या बात है मेरी मधु आज बड़ी खुश दिख रही है तो वो झेप गयीं और अंदर अपने कमरे में चली गयी। मैंने decide कर लिया था कि कोई गन्दी बात नहीं करूँगा और अच्छे से पेश आऊंगा। मैं हम दोनों के खाने के बाद चुप-चाप दूसरी तरफ मुँह करके सो गया।
आज सुबह जब मालती आयी तो मैं घर पे ही था । मालती ने मुझे देखते हुआ कहा कि भैया आप भाभी का ध्यान नहीं रखते । मैंने कहा ऐसा क्यों? – वो बोली भाभी के पास बस एक ही nighty है और देखो वो भी इतनी छोटी, इन्हे बाजार ले जा के इनके साइज के 1 -2 nighty खरीद दो। भाभी ने तब nighty ही पहन रखी थी और उनके स्तन और नितम्ब बिलकुल बाहर निकले जैसे थे (भाभी को हालाँकि मालती कि बात थोड़ी चुभी भी क्यों मालती ने मेरा ध्यान भाभी के शरीर कि तरफ किया था!)। हालाँकि कितनी बार भाभी मालती के रहते हुए भी मेरे सामने इस nighty में रहती थी पर आज उन्हें शर्म सी आयी और वो कमरे में जा कर साड़ी बदल कर आ गयीं। मुझे भी बड़ी शर्म लगी क्यूंकि मुझे खुद ही उन्हें कपड़े खरीदने के लिए कहना चाहिए था। 8 दिन हो गए थे और भाभी घर के बाहर एक भी बार नहीं गयी थी। मैं तो बस उन्हें चुदने वाली मशीन कि तरह सोचा था अब तक पर मुझे एहसास हुआ कि वो भी एक औरत हैं और उनकी भी आकांक्षाएं होंगी । फिर मैंने भाभी से कहा कि शाम में मैं उन्हें बाजार ले जाऊंगा ।
मेरे जाने के बाद मालती ने भाभी से कहाँ – क्यों सुनील भैया को अपने बदन कि नुमाइश करा रही हो मधु घोड़ी। तूने जान बूझ कर भैया के सामने ऐसी तंग लिबास डाली थी न दीदी? खैर भैया बड़े सीधे हैं मैं होती उनकी जगह तो कहती कहाँ छोटी है ये nighty अब शरीर ही भाभी कि इतनी बड़ी है इनके साइज कि nighty आएगी भी कहाँ! भाभी मालती को अनसुना कर रही थी तब मालती ने कहा वैसे ये बात तो आपने देखि होगी- भैया ने तुरंत आपके लिए शाम में बाजार जाने को तैयार हो गए । भाभी ने कुछ नहीं कहा और कुछ देर के बाद मालती काम करके घर चली गयी ।शाम को मैं और भाभी बाजार में थे। हम एक lingerie स्टोर पे गए तो वहां भाभी को देखते ही दूकान वाले ने अपने स्टाफ को इशारा किया सबसे ऊपर वाली 48″ के शेल्फ की तरफ। और मेरी तरफ देख के बोला कि आप बाहर वेट कर लें और अपनी माँ को अंदर भेज दें। (मैं और भाभी दोनों चौंक गए ‘माँ’ शब्द सुन के)! दूकान वाले ने फिर कहा की यहां केवल लेडीज स्टाफ हैं और कोई समस्या नहीं आएगी। मैं वहीँ खड़ा रहा और कुछ देर के बाद भाभी 3 ब्रा 3 पैंटी और 2 nighty ले के बाहर आ गयीं। मैंने पेमेंट किया और फिर हम घर वापस आ गए। रात में भाभी ने आज की खरीदी हुई nighty में से एक पहना और मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ क्यूंकि ये और भी तंग थी। इसमें तो न केवल उनके उभार और बड़े लग रहे थे पर ये थोड़े ट्रांसपेरेंट टाइप की भी थी। मुझे समझ नहीं आया की भाभी ने ऐसा क्यों किया पर मैंने संयम बनाये रखा और इस बारे में कोई बात नहीं की। मुझे पता था की ये मेरी परीक्षा के दिन है और मुझे धैर्य से काम लेना होगा।भाभी आज पहली बार अपने बदन की नुमाइश कर रही थी। वैसे तो वो जल्दी लाइट बंद करने को कह देती थीं पर आज वो चुप चाप लेती हुई थीं। खैर कुछ मिनटों बाद मैंने लाइट बंद कर दी और हम सो गए।
अगले दिन मालती आयी तो भाभी ने वही nighty पहन रखी थी। हमारे घर में दो कमरे थे हालाँकि हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे लेकिन दूसरा कमरा हमेशा सजा रहता था ताकि किसी को (मालती को) ये न लगे की हम एक ही कमरे में सोते हैं (वैसे मालती को ये बात पता थी!)। उसने फिर भी जान-बूझकर मुझे सुनाते हुए भाभी से बोला की क्यों डर लग रहा था क्या रात में भैया को भी आपने खुद के कमरे में सुला लिया । भाभी पूरी घबरा गयीं और बोली नहीं तो! मालती ने बोला अच्छा मुझे भैया के कपड़े दिखे इसलिए बोला। मैंने चुप रहना ही मुनासिब समझा। मालती ने फिर भाभी को उनके nighty के लिए भी छेड़ा- लगता है आपके साइज की nighty मिलती ही नहीं है। पर ये तो और भी छोटी लग रही है क्यों दूकान पे try नहीं किया था क्या? भाभी ने झूठ बोला की नहीं।
मेरे जाते ही मालती भाभी के पास आके पीछे से चिपक गयी| अपने दोनों हाथ बढ़ा कर उसने भाभी के स्तनों को पकड़ लिया। भाभी के नितम्बों के फैलाव की वजह से उसके हाथ भाभी के स्तनों के उभार तक नहीं पहुंच पाए पर उसने स्तनों को साइड से ही पकडे हुए आपस में धीरे धीरे रगड़ते हुए बोला की कितनी चुदासी है रे तू। देवर को अपने बदन का गुलाम बना के मानेगी तू तो। पूरी गदराई हुई एक मोटी दुधारू गाय लग रही है तू इस कपड़े में। जिस दिन तूने सुनील भैया को इस बदन से चिपका लिया वो फिर तुझे पल भर के लिए भी अलग नहीं करेगा।वो तो सुनील भैया हैं जो तेरी हरकतों को अनदेखा कर रहे हैं अगर मेरे मर्द के सामने तू पूरे बदन ढक के भी खड़ी हो जाए तो वो तेरे बदन की सारी अकड़न तोड़ दे। मालती ने और जोर से अपनी पकड़ बढ़ाते हुए भाभी को धीरे से बोला की मैं ले चलती हूँ मेरी दुधारू गाय को दुहने। मालती ने पीछे से भाभी के स्तनों को पकडे पकडे ही किचन से बैडरूम में ले आयी। फिर भाभी के स्तनों को पकडे हुए उन्हें virasana के पोज़ में नीचे बैठाते हुए उन्हें उनके nighty के ऊपर के हुक खोलने को कहा। भाभी के नंगे स्तन अब मालती के हाथों के बीच पीस रहे थे। भाभी के स्तन इतने बड़े थें पर दूध से भरे और कठोर थे। मालती भाभी को नहवाने के लिए बाथरूम ले गयी । पर मालती ने स्तनों को पीछे से वैसे ही पकडे रखा था। बाथटब में पहले मालती ने पैर रखा फिर भाभी ने। मालती ने फिर भाभी को उनके अध्खुले nighty को उतार देने को कहा। बाथ-टब के एक कोने पे पीठ टिका के मालती बैठ गयी और खुद के ऊपर भाभी को बैठा लिया। भाभी के चूतड़ के नीचे वो दब से गयी थी। पर वो भाभी के स्तनों का मर्दन लगातार कर रही थी। भाभी के बालों को एक तरफ करके उसने भाभी के गर्दन और गालों को चूमा (जब मालती ने मुझे ये बताया तो आप सोच सकते हैं मेरी क्या हालत हूई होगी!)।
मधु दीदी सच बताओ तुम्हे नहीं मन करता सुनील भैया से चुदवाने का। गबरू जवान हैं वो। वैसे तो तू एक मर्द के लायक है नहीं पर सुनील भैया जवान हैं तेरी बदन की अकड़न ढीली कर सकते हैं वो। मैं तो तेरी जगह होती तो शादी के पहले ही उनसे चुदवा लेती। कितना मज़ा आता अपने पति के भाई के नीचे लेट के! तुम्हारे पति भी तो यही चाहते होंगे की तेरे बदन का मालिक कोई उनका सगा ही हो। मेरी मानों तो सुनील भैया से शादी-वादी की बात छोड़ो, अपने आप को लिटा लो उनके नीचे। देवर-भाभी के रिश्ते में पति-पत्नी वाली मादकता ले आओ। अपनी कोख भर लो अपने देवर के अंश से| दुनिया के लिए तुम दोनों देवर और विधवा भाभी होंगे और घर में दो मादक प्रेमी युगल। (भाभी बिलकुल मना नहीं कर रही थी मालती को बोलने से)। मालती ने फिर भाभी के नितम्बों और जाँघों को भी साबुन लगा के धो दिया फिर भाभी को नंगी बाहर ले आयी और टॉवल से उनके मांसल बदन को पोछने लगी। पूरे बदन को टॉवल से सुखाने के बाद मालती ने भाभी के पूरे शरीर की तेल से मालिश की और फिर मालती अपने घर चली गयी
आज तीसरा दिन था जब मालती ने भाभी के बदन से खेलते वक़्त मेरा नाम लिया था बल्कि उसने केवल मेरा ही नाम लिया था। और भाभी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। भाभी के nighty के choice को देख-कर मुझे और उनके थोड़े सहज बर्ताव को देख-कर मुझे ऐसा लग रहा था की शायद आज मुझे वो आदर की लकीर लांघ देनी चाहिए। जिस बदन के लिए में शादी के बाद से पिछले 10 -12 से उतेज्जित था उसे भोगने का समय आ गया था। मैंने वियाग्रा की 2 गोली ले ली। भाभी के गदराये बदन नशा मेरे ऊपर सवार हो गया था। मैंने सोच लिया था या तो आज उनकी इच्छा से हमारा सम्भोग होगा या फिर वियाग्रा के नशे में वो मुझसे चुदेंगी। मैंने मालती को देर तक रुकने को कहा और उससे बोला की अगर उसने भाभी को मेरे से आज रात चुदने के लिए राज़ी कर दिया तो मैं उसे आज ही उसको वादा किया हुआ पैसे दे दूंगा।
शाम में मालती लेट से 7 बजे घर आयी तो भाभी ने नयी वाली दूसरी nighty पहन रखी थी और स्तनों के उभर को छुपाने के लिए दुपट्टा रख रखा था अपने ऊपर। मालती ने भाभी के पास आके उनके दुपट्टे को हटाते हुए कहा की ये क्या है। भाभी ने कहा वो अच्छा नहीं लगता ऐसे! मालती ने उनके स्तनों को हाथ में लेते हुए कहा क्या अच्छा नहीं लगता! इतने अच्छे तो हैं, अब बड़े हैं तो हैं। जब आप मसलवाती थी इन्हे तब सोचना चाहिए था न। जिस तरीके से आप चुप-चाप बेसुध हो के अपने स्तन मसलवाती हो एक दिन तो ये किसी भी ब्रा में नहीं आएंगे। वैसे भी आज आप भैया से मसलवाओगी इन्हे। भाभी ने झुंझलाते हुए कहा – क्यों बकवास कर रही है तू? मालती: मैं बकवास कर रही हूँ! मुझसे तो दिन भर मसलवाती है भैया से क्या परेशानी है तुझे। दिन भर भैया मेहनत करते हैं तेरा पेट भरने के लिए। आज वो तुम्हे वापस घर भेज दें तो क्या तेरा बाप और तेरा भाई तुझे रखेंगे साथ में। यहां भैया ने महरानी की तरह तुझे रखा हुआ है, जो चाहेगी भैया ला देंगे तेरे लिए, पर तुझे भी तो भैया को तेरे बदन का आशिक बनाना होगा। सोच अगर भैया कल को शादी कर लेते हैं किसी दूसरी औरत से वो कभी भी तुझे यहां नहीं रहने देगी। तुझे घर से बाहर जरूर निकालेगी। मेरी मान लो मधु दीदी – सुनील भैया को अपने जिस्म के सागर में उतर जाने दो (मालती की बात का जैसे भाभी पे असर हो रहा था!)।
कहीं न कहीं भाभी को इस बात का डर था की मैं उन्हें हमेशा अपने साथ नहीं रखूँगा। पर उन्हें इस बात का भी शक था की मैं उनके बदन को बस हवस के लिए इस्तेमाल करना चाहता था, मुझे उनके साथ कोई रूहानी प्यार नहीं था। (वैसे तो ये सच था, मुझे उनके जिस्म से ही लगाव था पर जैसा मालती ने भाभी को बताया था मुझे उनके जिस्म की उतेजना जीवन भर उनके साथ रखने वाली थी)। मालती ने फिर अंदर जाकर बिस्तर सजा दिया और बेड को पूरा हिलाते हुए भाभी की ओर देखते हुए बोली ये झेल पायेगा आज की धक्कम-धुक्की। (मालती ने मुझे बिना बताये हलके नशे की गोली चाय में मिला के भाभी को पिला दी थी। इसका नशा करीब आधे घंटे बाद आता और सिर्फ अगले आधे घंटे तक ही रहता। बिलकुल भी हानिकारक नहीं था ये, मालती ने मुझे बाद में बताया।) फिर मालती ने भाभी को बिस्तर पे लिटा के उन्हें nighty उतारने को कहा और उन्हें उल्टा लिटा के उनके पीठ और फिर नितम्बों पे मालिश करने लगी। उसने दोनों नितम्बों को अलग करते हुए बीच के फांक को ज्यादा से ज्यादा अंदर तक देखने की कोशिश की। पर वो दोनों नितम्ब काफी सख्त थे वो छूटते ही ‘फट’ की आवाज़ के साथ फिर एक दुसरे में चिपक गए। मालती ने कहा मधु रंडी तेरे पूरे बदन में सख्ती आ गयी है। जितनी देर करेगी मधु घोड़ी तू उतनी ही तकलीफ होगी तुझे फिर से चुदने में। फिर मालती ने भाभी को पीठ के बल करके उनके स्तनों और जाँघों की खूब मसल मसल के मालिश की। भाभी की चूत बिलकुल साफ़ थी हमेशा की तरह और मालती ने उसमें भी थोड़े से तेल से मालिश कर दी। फिर भाभी को पूरी नंगी ही बिस्तर पे छोड़ वो निचे उतर के कुछ देर के लिए बाहर गयी और फिर वो दुसरे कमरे से वापस आते हुए भाभी के नंगे बदन को देखते हुए बोली – मधु दीदी तू अभी एक मांस का लोथरा दिख रही है जो गूथने के लिए बिलकुल तैयार है । खैर भैया आते ही होंगे तेरे बदन का हिसाब करेंगे वो आज। भाभी तुरंत अपने nighty के लिए उठी। पर मालती ने सारे कपड़े भाभी के जो की दुसरे कमरे में ही रहते थे एक ताले से लॉक कर दिया था। और मेन गेट जो बरामदे में खुलता था को खोल दिया था जो की दोनों रूम का कॉमन एरिया था। मेन गेट खुले होने की वजह से कोई भी बाहर लिफ्ट एरिया से ही बरामदे में देख सकता था और उसे दोनों कमरों के गेट भी बड़े साफ़ दीखते। भाभी उस कमरे से बाहर निकलती तो मुश्किल थी और निकलने पे भी उन्हें कुछ हाथ नहीं लगने वाला था। भाभी उसे डाँट भी नहीं सकती थीं क्यों वो भी आवाज़ लिफ्ट एरिया तक जाती।
मालती ने भाभी से माफ़ी मांगी पर बोला की वो ये उसके लिए ही कर रही है। कभी न कभी तो उन्हें मर्द के नीचे खुद को करना ही होगा! अच्छा है ये आज हो जाए। भाभी ने बिस्तर के चादर को ही ओढ़ लिया और चुप-चाप बेड पर लेट गयी। अभी चाय लिए भाभी को 25 मिनट हो चुके थे और तभी मैं पहुंच गया। मालती ने मुझे इशारा देते हुए भाभी वाले रूम में बुलाया, मैंने मेन गेट लगा दिया। भाभी तुरंत उठीं और मुझसे बोली की इसने दुसरे वाले गेट में ताला लगा दिया है और उसमें भाभी के कपडे हैं। मैंने तुरंत मालती को डांटते हुए कहा की वो ताला खोले और भाभी के कपड़े ले आये। मालती चली गयी कपड़े लाने और तभी मैंने देखा भाभी के शरीर से चादर उतर चूका था और वो बिस्तर पे बैठ गयी (शायद नशे ने असर कर दिया था!) । कसम से पहली बार भाभी को ऐसे नंगी देखा था। ये मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। दो विशाल दुधारू थन छाती पे, गुदाज गोरी मांस, खूबसूरत लाल चेहरा! मेरी नंगी बीवी वो पहली मेरी भाभी माँ थी मेरे सामने निर्वस्त्र थी! अब मेरे लिए खुद को संभालना मुश्किल हो गया था मुझे रहा नहीं गया और मैंने उन्हें बिस्तर पे पीठ के बल सीधी लिटा दिया, मैं एक-टक उनके निर्जीव होते बदन को देख रहा था और धीरे धीरे अपने कपड़े उतरने लगा| कपड़े उतारकर मैं भाभी के बड़े बदन के ऊपर चढ़ गया| जैसे ही मैंने उनको मीठे होठों को अपने होठों से चूसा वो भी अपने होठ चलाने लगी।
मुझे आज उनके अंदर की दबी चुड़क्कड़ औरत बाहर आती हूई दिखी। मैं उनके होठों को चूसते हुए उनसे बोला – भाभी माँ तेरा बेटा तुझे आज चोदेगा। उन्होंने धीरे से बोला – सूरज बेटे। (सूरज मेरे भैया का नाम था, मेरे लिए ये surpise था की भैया और भाभी एक दुसरे को माँ-बेटे बोल के चोदते थे)। मैंने धीरे से कहा – हाँ माँ, मेरी दूधवाली माँ। इतना कहना था की उन्होंने बाहों को मेरे ऊपर करके मुझे अपने आलिंगन में बाँध लिया और पूरे जोश से मेरे से चिपक गयीं। तभी मुझे एहसास हुआ की मालती पास खड़ी ये सब देख रही थी जैसे ही मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने नज़रे दूसरी तरफ कर ली पर वो हिली नहीं वहां से। मैं इस समय भाभी के गोश्त के सानिध्य से बिलकुल गरम हो गया था सो मैंने भी ध्यान नहीं दिया और वो वहीं खड़ी रही। मैं अब भाभी के पूरे चेहरे को एक बच्चे की तरह चाट रहा था उन्हें माँ माँ कह के पुचकार रहा था।
हम दोनों अब एक दुसरे के आगोश में समां गए। दोनों की तरफ से अपनी-अपनी मजबूती की आजमाइश होने लगी। भाभी जैसी कामुक औरत को काबू करना कुछ ही देर में मुश्किल लगने लगा। वो किसी जख्मी शेर की तरह मेरे होठों को चूस रहीं थीं।
भाभी- मेरा बेटा सूरज, प्यार कर न अपनी माँ से! मैं अच्छी नहीं लगती तुझे?
मैं(भरपूर उत्तेजना में)- तुम औरत नहीं गाय हो माँ, एक गदराई मोटी दुधारू गाय!
उत्तेजना में हम दोनों ने अपने आलिंगन का जोर बढ़ा दिया। इस कश्मकश में कभी भाभी ऊपर आती कभी मैं उनके ऊपर आ जाता। दरअसल भाभी के जोश में थोड़ा नशे का भी हाथ था। भाभी ने मेरे लंड को अपने चूत के ऊपर रख दिया फिर हम दोनों खूब जोर-जोर से एक दुसरे में समाने को हुमचने लगे।
भाभी के मांसल शरीर पे रगड़ने से मुझे असीम सुख की अनुभूति हो रही थी। पूरा कमरा मेरे उनके मादक आवाज़ों से भर गया था।
उन्होंने अपने दोनों पैर की ऐरियों से मेरे दोनों पैर का आलिंगन कर लिया था अब मैं उनके पूरे जकड़ में था। ऐसी स्तिथि में मैं अपने पूरे जोर से भाभी के अंदर समाने की कोशिश कर रहा था।
मैं: तेरे जैसी रंडी माँ भगवान् सबको मिले। क्या भरा बदन है तेरा माँ|
मेरी बात सुन के भाभी ने रफ़्तार बढ़ा दी, हम दोनों अब पसीने से लथ-पथ थे हालाँकि मुझे भाभी के बदन का पसीना और उतेज्जित कर रहा था । मालती ने सीलिंग फैन की स्पीड बढ़ा दी और बोली भैया तुम्हारी माँ अभी थकी नहीं है| मालती के सामने ही मैं अपनी भाभी की चुदाई माँ बोल के कर रहा था। ये बड़ा उतेज्जित करने वाला एहसास था।भाभी तो नशे में थी पर मैं पूरे होश में था। मालती के बोलते ही मैंने और जोर से हुमच-हुमच के भाभी को चोदने लगा। भाभी ने भी जोर बढ़ा दिया। इतने देर तक भाभी के बदन से चिपके रहने से भाभी के बदन की गंध मुझे लगी जो की मदहोश करने वाली थी। फैन तेज करने से पसीना सूखने लगा और फिर हम दोनों की गिरफ्त भी एक दुसरे के शरीर पे और सख्त हो गयी। दोनों ने गति इतनी तेज कर दी थी की पलंग जोर जोर से हिलने लगा था।मैं लगातार धक्के लगा रहा था और भाभी भी। बड़ी मजबूती से भाभी ने मुझे अपने गुदाज बदन से चिपका लिया था और मैं उनकी गदराई मांसल जाँघों और मजबूत बाँहों के बीच खुद को जकड़ा हुआ पा रहा था। भरे मांसल बदन की औरत की आगोश में जिस सुख की अनुभूति होती है मैं बता नहीं सकता। मैं असीम कामनावेश में उनके गोरे मांसल चेहरे को चाट रहा था और पूरी ताकत से उनके चूत में धक्के मार रहा था। 48 ” के दूध के थनों को अपने सीने से मसलते हुए मैं उनके बदन पे हावी होने की हर कोशिश कर रहा था। पर वो कोई चुदाई के लिए नयी औरत नहीं थीं। उनके बदन का हर हिस्सा भरपूर गदराया हुआ था और वो एक अनुभवी चुदक्कड़ महिला थीं जिन्हे पुरुष के बदन को अधीन करना आता था। उनके बदन के लम्बे स्पर्श ने मेरी उत्तेजना को शिखर पे पंहुचा दिया था मैं समझ सकता था सूरज भैया कितने उत्तेजित रहते होंगे। मुझे हर पल ये बात और उन्मादित किये जा रही थी की मुझे ये बदन जीवन भर के लिए मिला था। मैं इसे ऐसे ही जीवन भर मथ सकता था।

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