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नेहा अपनी स्कूटी से एक क्लिनिक के पास रुकती है ऊपर लिखा था डॉ चुन्निलाला तिवारी यरवदा वाले (M.B.B.S.) जिसे देख कर नेहा के चहरे में मुस्कान आ गयी ये थे डॉ चिन्नीलाल जिसे लोग डॉ चुतिया या चुतिया डॉ भी कहा करते थे डॉ साहब थे तो ऍम बी बी एस पर वो एक मनोवैज्ञानिक ,दर्शनशास्त्री भी थे इसके अलाव भी उनके बहुत गुण थे जो आगे पता चलते जायेगा,नेहा अंदर गयी तो उसने देखा की डॉ अपनी नर्स मेडम मेरी मार लो के साथ गुफ्त्गुह फरमा रहे है,और उसके पिछवाड़े को अपने हाथो से सहला रहे है नेहा के चहरे की मुस्कान और बढ़ गयी ,मेरी के भाव से लग रहा था की डॉ ने अपनी उंगली उसके पिछवाड़े में घुसा दि है,

‘डॉ साहब क्या मैं अंदर आ सकती हु ,’डॉ चुतिया ने अचानक अपने हाथ मेरी के स्कर्ट से निकले तो मेरी उचक पड़ी,

‘अरे नेहा तुम तुमने तो डरा ही दिया था मुझे लगा कोई पेशेंट आ गया ,’चुतिया के चहरे पर मुस्कान फैली,

‘अरे चुतिया जी आपके पास कोई पेशेंट आते भी है जो आप डर रहे हो,’नेहा अब खिलखिला के हस पड़ी और टेबल के सामने रखे खुरसी पर बैठ गयी

‘और बताओ क्या चल रहा है काम हुआ की नहीं ,कुछ मिला तुम्हे ,’डॉ अब सीरियस था,

‘नहीं सर कुछ नहीं बस इतना ही पता चला की जैसे ही वो इंजेक्शन परमिंदर किसी को लगता था वो लड़की वासना के आगोश में डूब जाती थी और फिर सेक्स की अपरिमित भूख का शिकार हो जाती थी जिसे पूरा करना कठिन हो जाता था पर वो क्या है ये तो समझ ही नहीं आ पाया वो हरे रंग का लिक्विड है’नेहा ने अपने विडिओ से देखे सभी डिटेल्स डॉ को बताये,

‘पता नहीं साले को ये कहा से मिल गया ,पता लगाना पड़ेगा उससे भी जरुरी है ये पता लगाना ई उसने ये किसे किसे दिया है और इसका इलाज क्या है,’

‘ये तो पता चल गया है की किसे दिया है और इलाज तो आप ही कर सकते हो डॉ,’

‘कोई बात नहीं ,और विक्की और नानू का क्या करना है,उन्हें भी तो उनके किये की सजा मिलनी चाहिए ना,’

‘मिलेगी अभी तो उन्हें कुछ पता ना ही चले तो बेहतर है,उन्हें तो अभी ही जेल भेजा जा सकता है पर मैं नहीं चाहती की जो लडकिय इन सबसे दूर हो गयी है वो इन विडिओ के बहार आने से बेइज्जत हो जाये,उन्हें तो मैं सजा दूंगी पर थोडा मजा भी तो करने दो उनके साथ उन्हें भी तो पता चले की दर्द तकलीफ और जलील होना क्या होता है जब जिस्म की भूख इतनी बढ़ जाये की इज्जत का ख्याल ही ना रहे ,तो वो पीड़ा क्या होती है,’कहते कहते नेहा की आँखों में पानी आ गया साथ ही आँखे लाल अंगारे सी धधाकने लगी…

‘ओके जैसा तुम ठीक समझो,पर क्या कोई उस दवाई के असर के बाद भी अच्छी जिंदगी जी सकता है,’डॉ ने प्रश्न दागा,

‘अरे चूतिये जब जिंदगी में आफत आती है तो जीना भी सिखा देती है,’मेरी ने बड़े गंभीर लहजे में कहा था पर नेहा उसके अरे चूतिये बोलने के तरीके से हस पड़ी ,डॉ भी बड़ी आँखे किये उसे देखने लगा,

‘डॉ साहब एक बात पुछु,आप अपना निक नेम क्यों नहीं बदल लेते ये क्या चुतिया नाम रखा हुआ है ,’अब गंभीर होने की बारी डॉ की थी,

‘नेहा बात ऐसी है की गुस्सा और हँसी आदमी के जीने की पहचान है ,ये बतलाती है की कोई व्यक्ति जीवंत है की नहीं,जब मुझे कोई इस नाम से बुलाता है तो मुझे या तो गुस्सा आता है या हँसी तो मुझे पता लग जाता है की मैं भी जिन्दा हु,’डॉ की फिलासफी सुनकर नेहा के चहरे में भी मुस्कान आ गयी …

 

‘डॉ सर मुझे एक बात और पूछनी थी आपसे,आपको मनोविज्ञान का भी ज्ञान है,मेरी एक प्रोब्लम है,’

‘हा हा पूछो ना,’

‘मेरे भाई आकाश को तो आप जानते ही है,वो हमेशा से बड़ा ही सीधा साधा रहा है ,अपने काम से काम रखने वाला है,मैंने आजतक उसे किसी लड़की की तरफ आकर्षित होते नहीं देखा,और मुझे तो वो दिलो जान से चाहता भी है,पर मुझे एक चिंता सता रही है,अभी हाल में ही जब उसने परमिंदर और मेरी तस्वीरों को देखा था,तब से पता नहीं उसे कुछ हो गया है,मैंने उसके नजरो में अपने लिए ही वासना देखी ,इतना ही नहीं जिस दिन उसने फोटोज देखे उस दिन तो उसने मेरे स्तनों को भी सहलाया,मैं उससे बहुत प्यार करती हु और उसके लिए कुछ भी कर सकती हु पर मैं अपने भाई को यु वासना के आग में जलते नहीं देख सकती जो मुझे फील होती है,कभी तो लगता है मैं उसके लिए पूरी तरह खुल जाऊ और उसकी हवस को शांत कर दू पर मैं नहीं चाहती वो इस ग्लानी में जिए वो मुझे बहुत प्यार करता है,पर आजकल ये कभी कभी ही हो रहा है,वो मेरे अंगो को निहारता है और फिर बहुत ग्लानी से भर जाता है,वो कोई दूसरी लड़की पसंद करने को भी तैयार नहीं है डॉ साहब कुछ उपाय बताइए की वो नार्मल हो जाए..’नेहा बहुत ही परेशान हो गयी होती भी क्यों ना वो अपने भाई से बेतहासा प्यार जो करती थी,

‘हूमम्म मेरी बात ध्यान से सुनना तुम्हे कुछ चीजे बुरी लग सकती है पर ये मेरा फर्ज है और अब तुम्हारा भी,जहा तक मैं आकाश को जानता हु उसे पहले ही लडकियों में कोई इंटरेस्ट नहीं था,लेकिन है तो वो मर्द ही और वो भी गबरू मर्द ,उसके अंदर बहुत ही ताकत है जो उसे देख के ही समझ आता है और इतनी एनर्जी को सम्हालना बहुत मुस्किल होता है,मुझे तो लगता है उसने आज तक हस्तमैथुन भी नहीं किया होगा,और दिन ब दिन उसकी एनर्जी बड़ते ही जा रही है,वो इसे सम्हाल पता है क्योकि उसने कभी ऐसे विचार अपने मन में नहीं लाये कोई ऐसा दोस्त भी नहीं है उसका जो सेक्स से सम्बंधित बाते उससे करे राहुल भी उससे ये सब बाते करता डरता है ,और दुसरो की बात को वो इग्नोर कर देता है,दुस्र्री चीज की वो हमेशा से तुम्हारे साथ ही रहा है,साथ ही सोता है तो उसे लड़के और लडकियों के बीच का वो अंतर अभी तक समझ नहीं आया था जिससे वो सेक्सुअल विचारो की और प्रेरित हो जाय,उसे लड़की का मतलब दीदी ही समझ आता और बहन का मतलब एक अलग किस्म का प्यार,जिसमे वासना का नाम भी नहीं है,इतनी एनर्जी होने से और उसका उपयोग ना होने से आम आदमी पागल भी हो जाता है,(नेहा के चहरे पर चिंता के भाव गहरा गए ) लेकिन अब तक आकाश ने इस एनर्जी को तुम्हारे प्यार में और व्ययाम में और पढाई में लगा दिया,ये कंडीशन तो योगियों और ब्रम्ह्चारियो की होती है इस लिए आध्यात्म के मार्ग पर कई लोग पागल भी हो जाते है,इसलिए उन्हें खानपान का संयम नियमीत योग,प्राणायाम,और ध्यान व्यायाम करने कहा जाता है,इससे मन शांत होता है और विचार ही नहीं आते पूरी ताकत अध्यात्मिक विकाश में ही लगती है,पर आकाश तो ये सब नहीं कर सकता ना,,,अब हुआ ये है की उसे तुम्हारी फोटोज देखकर वो चीजे समझ आने लगी जिनसे वो अभी तक बचा हुआ था,और उसकी एनर्जी इतनी है की जब वो सेक्सुअल विचारो से भरता है तो वो पागलो जैसा हो जाता है,अब तुम उसकी दीदी ही नहीं रह गयी तुम एक लड़की भी हो उसके लिए उसे बाकि लडकियों में दिलचस्पी भी तो तुम्हारे बेपनाह प्यार की वजह से ही नहीं थी ना,तो अब कैसे पैदा होगी ,जब तक वो किसी लड़की में तुम्हारा चहरा नहीं देखता उसे प्यार की फेल्लिंग नहीं आएगी,लेकिन उसे अब सेक्सुअल विचार आने लगे है तो उसको शांत करना जरुरी है,…’डॉ की बातो से नेहा की चिंता डर में बदलने लगा,

‘कैसे???मैं अपने भाई को खो नहीं सकती डॉ कुछ तो उपाय होगा इसका ,मैं कुछ भी करुँगी आप बताइए तो ,’डॉ के चहरे पर नेहा का प्यार देखकर एक मुस्कान आ जाती है,

‘नेहा तुम कुछ नहीं कर सकती,’नेहा स्तब्ध हो जाती है,

‘अपने भाई के लिए मैं कुछ भी कर सकती हु ,आप बताइए डॉ मुझे अपना शारीर उसे देना है क्या मैं तैयार हु डॉ,वो जो मेरे साथ करना चाहे कर सकता है बताइए ना डॉ,’कहते कहते नेहा रोने लगी लेकिन डॉ के चहरे पर अब भी मुस्कान था,वो अपनी जगह से खड़े हुए और नेहा के सर को प्यार से सहलाने लगे,

‘तुम्हे कुछ नहीं करना है ,बस यही करना है,’डॉ साहब ने फिर फिलासफी झाड दि,नेहा आश्चर्य से आँखों में आंसू लिए डॉ को देखती रही,

‘अरे चूतिये सीधे बता दे ना बच्ची को इसकी भी लेने की फ़िराक में है क्या,मुझसे मन नहीं भरता तेरा,’मेरी ने बड़े प्यार से ये कहा,और साथ में अपने स्तनों को दबाकर इशारा किया ,डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी

‘हा नेहा तुम्हे कुछ नहीं करना है,बस उसे समझाना है की कुछ गलत नहीं है अगर आप मन में प्यार रखो,प्यार हवास से जादा ताकतवर है,अगर तुम उसे अपना जिस्म दे भी दो तो क्या होगा ,वो तुम्हे भोगेगा और फिर ग्लानी से भर जायेगा जो की किसी के लिए अच्छा नहीं होता,उसे अपने किये पर कोई पछतावा नहीं होना चाहिए,उसे लगाना चाहिए की ये बस वैसा ही प्यार है जो तुम अभी तक करते आय हो ,ये काम है तो बड़ी ही विचित्र पर आकाश को प्यार की भाषा का ही पता है उसे हवस का पता नहीं है,अगर दर्शन की भाषा में कहो तो उसका अनहत चक्र(heart chakra of 7 kundalini chakra) जादा विकसित है,बाकि चक्रों के मुकाबले,तो जब वो कुछ करे तो बस उसके साथ प्यार से पेश आओ उसे मत कहना की ये गलत है,उसे प्यार देना अगर उसे ग्लानी के भाव आय तो उसे समझाना की ये भी तो प्यार ही है,सिर्फ हवस से हवस ही बढेगी उसके अंदर जो तुम भी नहीं चाहोगी,उसकी वासना को प्यार में बदलने दो हो सकता है की वो तुमसे सेक्स करे हो सकता है ना भी करे उसे कुछ करने पर फ़ोर्स ना करो बस करने दो तुम अपना प्यार लुटाओ और देखो वो शांत रहने लगेगा उसकी एनर्जी फिर नए दिशाओ को खोज लेगी,क्योकि एनर्जी कभी स्थिर नहीं होती ये ओशो ने भी कहा है,वासना से ये निचे जाएगी और शांति में ये ऊपर….’नेहा का दिल अब शांत था उसने डॉ के हाथो को पकड़ चूम लिया …

‘thanks dr. so sweet of you..हा मैंने उसे उस दिन ये कहा था की गलत है,,पर जब मैंने उसे प्यार किया तो वो मेरे प्यार में खो गया..मुझे समझ आ गया है,की कैसे कुछ नहीं करना है,और यही करना है,’नेहा ने एक स्माइल दि और डॉ दे विदा लिया,डॉ अब मेरी की तरफ मुड़े,,उसके निताम्भो को अपने हाथो से दबा दिया

‘बहुत बोल रही थी चल अब सटर गिरा अब तेरे चिल्लाने का टाइम है..’मेरी के चहरे पर भी मुस्कान आ गयी,

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