कल सुबह मैं जल्दी उठा मेरी हालत बहुत ही खराब लग रही थी, मैंने देखा कि दीदी बाथरुम चली गई है चादर में खून के निशान लगे हुए थे जो हमारे प्यार की निशानी थे., मैं तो बस सोच रहा था की आगे क्या होगा, मैं डॉक्टर से मिलना चाहता था लेकिन उनसे क्या कहता है कि मैंने यह सब किया वह भी अपनी दीदी के साथ, मैं खुद को समझाने में लगा था लेकिन क्या समझा पाता मुझे कुछ नहीं पता मैंने अपने आप को संभाला और बाथरूम की तरफ चल दिया मैंने देखा कि दरवाजा खुला हुआ था. और दीदी अंदर पूरी तरह से नंगी नहा रही थी मैं उनके जिस्म को देखने लगा वह भरी भरी , संगमरमरी जिस्म जो किसी की भी नियत को डगमगा सकता है ,उनके वह उभार उनका पिछवाड़ा , मैं बस उन्हें देखता रहा…
उन्होंने जैसे ही मुझे पलट कर देखा उनके होठों पर एक मुस्कान थी जो बड़ी प्यारी लग रही थी ,नहीं लग रहा था हमारे बीच कुछ ऐसा हुआ है जो नहीं होना था वह अभी भी मुझे उतने ही प्यार से देख रही थी, जैसे पहले देखती थी, मेरी सांसे कुछ और बदती चली थी कुछ और मेरी धड़कन थोड़ी मध्यम थी थी.. उनका चेहरा पानी से भीगा हुआ था उनके बालों से पानी गिर कर उनकी जंघो तकआ रहा था , मैं अनायास ही उनकी तरफ बढ़ता गया मेरे चेहरे पर हम मासूमियत के भाव नहीं थे मैं फिर से उन को पाना चाहता था मैं फिर से उनका होना चाहता था मैं सिर्फ से अपनी जन्नत खोजने निकला था, मैं फिर से यह चाहता था कि मैं उनके साथ एक हो जाऊं, मैं उनके पास गया पीछे से दीदी को जकड़ लिया दीदी ने फिर मुस्कुरा कर मुझे देखा, मैं उनकी चाहतों में खोना चाहता था मैं उनकी बाहों में सोना चाहता था, मैं उनकी सांसो में रहना चाहता था, मैंने उन्हें किस किया, उनके गालों पर, उनकी बालों को अपने हाथों से सहलाया ,उनके वक्षों को मसलता गया, मेरे हाथ अब उनकी योनि पर थे उनके वह घुंघराले बाल जो उनकी योनि में को घेरे हुए थे, ना जाने कैसे एक उंगली मैंने उनकी योनि के अंदर डाली और धीरे-धीरे उसे अंदर बाहर करता रहा ,उनकी योनि गरम नरम मखमली और पानी से भीगी हुई थी वह काम रस का पानी था, मैं भी पूरा नंगा ही था मैंने अपने लिंग को जो अब तक पूरी तरह तन चुका था दीदी के गीले गीले गर्म-गर्म योनि में अंदर तक ले जाने लगा एक बार दीदी भी अपनी आँहो को नहीं रोक पाई उन्होंने पलटकर मुझे अपने आगोश में भरने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुई, मैंने उन्हें पीछे से पकड़ रखा था मेरी मेरे धक्के की स्पीड बढ़ती जा रही थी पहले धीरे-धीरे फिर जोर जोर से दीदी के मुंह से आहे निकलने लगी,
‘ आह आह आह आह आह भाई भाई भाई भाई आह आह आह आह आह आह भाई भाई धीरे भाई धीरे-धीरे और धीरे-धीरे थोड़ा तेज हां भाई ऐसे ही ऐसे ही आह आह आह आह आह आह आह रुक जाओ ना जाओ ना थोड़ी देर के लिए रुको ना, मुझे पलटो ना मैं तुम्हारा चेहरा देखना चाहती हूं ‘
वह पलट गई और मुझसे लिपट गई उन्होंने मेरे जीभ से जीभ मिला लिया और उनकी थूक मेरे मुंह के अंदर जाने लगी मैंने भी अपनी जीभ से जीभ से दीदी की गहराइयों को नाप लिया मेरे धक्के बड रहे थे. वह स्पीड पकड़ रहे थे, मैं और जोर से और जोर से और जोर से और जोर स दीदी और मेरी सांसे एक हो रही थी मुझे रुकना नहीं था, ना ही दीदी को हम बस एक होना चाहते थे, वह पानी की फुहार है जो हमारे तन में गिर रही थी मानो कोई आग ही आग हो, ठंडे पानी में भी हमारा शरीर तपाये जा रहा था, वह तपन ऐसी थी कि मुझसे सहा नहीं जा रहा था, मैंने दीदी का एक पैर उठाकर अपने हाथों में ले लिया और दीदी की योनि में जड़ तक जाने लगा, वह रगड़ कितनी मजेदार थी कि मैं रुकना नहीं चाहता था मुझे लग रहा था कि जैसे हमेशा मैं ही रहूं यही करता रहू, दीदी पास रखा साबुन उठाया और मुझे नहलाने लगी, मेरे पूरे शरीर पर उन्होंने साबुन मल दिया ,साबुन ने अपना कमाल दिखलाया हम दोनों का शरीर एक दूसरे में फिसलने लगा, दीदी के उन्नत वक्ष अब मेरा मुंह में थे,मैं उन्हें चूस रहा था दबा रहा था जैसे उनका दूध अभी पीना चाहता हूं, दीदी ने अपना हाथ मेरे सिर पर रख दिया और वह उसे अपनी और खींचने लगी दीदी की सांसे बढ़ने लगी थी और मेरी भी, हम बस अब झड़ने वाले थे मैंने दीदी को दबोचा उनके वक्षों में अपने दांत गड़ा दिए, Ek Aur Toofan आकर चला गया मैं अब दीदी के अंदर अपना गाढ़ा वीर्य डाले जा रहा था, डाले जा रहा था….
जैसे कभी यह खत्म ना हो, फिर भी ये खेल रुक नहीं रहा था मेरी स्पीड कम नहीं हो रही थी, दीदी ने मुझे नहलाया सहलाया और मेरे कानों पर धीरे से कहा भाई हो गया ना अब तो रुक जा, मैं दीदी के मासूम चेहरे को देखता रहा और अपना कमर तेजी से चलाता रहा उनके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर मैंने स्पीड और बढ़ा दी ,फिर से दीदी के मुंह से
“आह आह आह आह भाई भाई मेरा प्यारा भाई मेरा सबसे प्यारा भाई आई लव यू भाई भाई आह आह भाई मुझे अपना बना लेना हां हां हां भाई ऐसे ही हां भाई, और जोर से और जोर से हां हां”
फिर एक तूफान चल पड़ा फिर मैं दीदी के अंदर झड़ता गया दीदी ने फिर मुझे दबोच लिया और अपने नाखून मेरे पीठ पर गडा दिए, हमारे प्यार का यह सफर भी खत्म हो गया हम दोनों नहा कर बाहर निकले, दीदी ने तालियों से मुझे साफ किया और वह आईने के सामने अपने बालों को सवारने लगी, मैंने फिर से उन्हें पीछे से पकड़ा और उनकी योनि पर अपने हाथ फिराने लगा, दीदी ने मुड के मुझे देखा भाई तेरा मन नहीं भरा क्या, मैंने हंस कर उन्हें कहां दीदी अभी कैसे भर जाएगा…
मेरे और दीदी का चेहरा आईने में दिख रहा था, मैं दीदी के उन्नत वक्ष को अपने हाथों से सहला रहा था, मेरा लिंग फिर से अकड़ने लगा, मैंने पीछे से ही अपने लिंग को दीदी की योनि में रगड़ना शुरु किया और धीरे से उसे अंदर कर दिया दीदी के मुंह से फिर से आह निकली… क्या भाई फिर से मुझे हंसी आ गई लेकिन मैं अपनी हरकत जारी रखी ,धीरे-धीरे दीदी के भी योनि में गीलापन आ गया और उनके निप्पल खड़े होने लगे, मैंने उन्हें आईने के सामने झुका दिया अब दीदी का चेहरा आईने में दिख रहा था, और मैं उनके पीछे खड़ा हुआ, मेरी कमर अब तेजी से चलने लगी दीदी फिर से सिसकियां लेने लगी, मैंने दीदी के बाल को पकड़ा और जैसे कोई घोड़े की सवारी करता हो, वैसे ही दीदी को घोड़ी बनाकर घुड़सवारी करने लगा दीदी के उन्नति पृष्ठ दीदी के मेरे सामने थे उन्होंने अपने हाथों से दबा रहा था इतना मज़ा इतना नशा जैसे मैं जन्नत में हूं, मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह मुझे इतना मजा देगा और कोई नहीं मेरी दीदी देगी, मेरी प्यारी दीदी, इतनी प्यारी ,इतनी प्यारी जिसे मैं अपना पूरा जहान मानता हू, जिनके चेहरे पर एक शिकन भी आए तो मेरा दिल धड़कता है, जिनके चेहरे पर चिंता की एक लकीर भी मुझे बेचैन कर देती है आज मैं उन्हें भोग रहा था, मैं उनके मजे ले रहा हूं ,सिर्फ सिर्फ और सिर्फ क्या मैं अपनी वासना को पूरी कर रहा हूं, नहीं यह प्यार है ,,खाक का प्यार???? यह तो पूरी तरह से वासना थी.. नहीं नहीं यह तो प्यार है, मेरा प्यार मेरी दीदी का प्यार मेरी दीदी गलत नहीं कर सकती और मैं कैस मैं कैसे मैं कैसे गलत कर सकता हूं, नहीं नहीं अचानक मेरी स्पीड धीरे होने लगी मैं किसी सोच में किसी गहरी सोच में डूबने लगा, दीदी ने मुड़कर मुझे देखा मेरे चेहरे की चिंता उनसे छुपी नहीं थी वह जानती थी कि मैं क्या सोच रहा हू उन्होंने मुड़कर मुझे पकड़ लिया, मेरी आंखों में देखा मेरी आंखों में कुछ पानी आ चुका था ,मेरा जेहन दर्द से भर रहा था दीदी ने मुझे अपने हाथों से सहलाया ,
” भाई तु जो सोच रहा है वह तो सही है, लेकिन यह हमारा प्यार है, इसमें कोई सीमा नहीं है, नहीं हो सकती है, अगर तू दुखी है ,अगर तू दुखी है तो मत कर लेकिन याद रख तेरी दीदी को भी इसमें वही मजा मिलता है जो तुझे मिलता है, भाई मेरे प्यारे भाई आकाश प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़ दर्द में मत रहना, जो भी बात है खुलकर कर तेरी दीदी अब तेरी है पगले, तू नहीं जानता तूने मुझे कितना सुख दिया है, मैं तेरी हूं मैं अपने भाई की हु,और मुझे तेरा होने से कोई नहीं रोक सकता तू भी नहीं, अब से हमारे बीच यह आंसू नहीं आएंगे”
उन्होंने हाथ बढ़ाकर मेरे आंसू पोछें उनकी बातों से मेरा दिल हल्का हो गया था लेकिन लिंग में तनाव अभी भी था, मैंने फिर धीरे-धीरे धक्के देना शुरू किया दीदी की एक ही खिलाती हंसी सुनाई थी और दीदी फिर से अपना सर दर्पण के सामने कर दी दीदी के चेहरे का भाव बदल रहा था और मेरी स्पीड भी बढ़ रही थी, अब मेरे मन में कोई ग्लानि नहीं थी मैंने फिर से उनके बालों को पकड़कर अपनी तरफ खींचा दीदी हल्के से दर्द में चिल्लाई
” भाई आह आह आह आह” थप थप थप थप की आवाज से पूरा कमरा गूंज गया हमारी सांसे फिर से तेज होने लगी मैं आईने से दीदी का चेहरा देख रहा था उनके चेहरे पर आई खुशी महसूस कर रहा था जो बढ़ा रही थी,जो मेरा जोश बढ़ा रही थी, मैंने उनकी कमर को अपने हाथों से जोर से पकड़ा और पूरी ताकत से धक्के देने लगा धक्का देने लगा दीदी का कामरस मेरे लिंग को भीगा चुका था, और बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था दीदी के चेहरे पर असीम आनंद के भाव थे, और मेरा चेहरा लाल हुआ जा रहा था पता नहीं क्यों छूटने का मन ही नहीं कर रहा था, ना ही मेरा ना ही मेरे लिंग का.. हम दोनों ही इस लम्हें को और ज्यादा और ज्यादा देर तक रखना चाहते थे, लेकिन कब तक जब तक सांसे बंद हो जाए, मैंने अपनी पूरी ताकत अपने कमरे में लगा दी मेरा लिंग पूरी जड़ तक दीदी के अंदर जा रहा था, दीदी खुशी से आनंद से चमक रही थी उनके मुंह से सिसकारियां छूट जा रही थी उन्होंने अपने होंठों को अपने दांतों में दबा रखा था उनकी आंखे बंद थी उनका नंगा जिस्म पूरी तरह से चमक रहा था, मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी आखिरकार दीदी ने एक फुहार छोड़ी और वह निढल होकर जमीन में गिर गई… मैंने किसी तरह उन्हें अपने हाथों से संभाले रखा दी जैसे बेहोश हो गई थी, मैंने उन्हें उठाकर वैसे ही अपनी गोदी में उठाया और बिस्तर पर औंधे मुंह लिटा दिया, मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उसी स्पीड से फिर से अपनी कमर हिलाने लगा दीदी के नितंबों में पढ़ने वाली चोट की आवाज इतनी मादक थी एकलव्य लयबद्ध तरीके से आवाज में आ रही थी, दीदी मानो बेहोश थी और मैं उनकी कमर पर अपनी कमर को तेजी से खिलाया जा रहा था, मेरे धक्के अब बहुत तेज और बहुत ताकत से लगाया जा रहे थे, दीदी बस आह आह कर रही थी वह भी बहुत धीरे आवाज म दीदी ने फिर एक बार फुहार छोड़ी और फिर थककर चूर हो गई, लेकिन मैं, जैसे मेरे अंदर कोई जानवर आ गया हो मैं रुकने का नाम नहीं ले रहा था, मैंने दीदी के कमर को अपने हाथों से उठाया और पूरी ताकत से अपने धक्के बढ़ा दिया, मैंने दीदी के ऊपर लेट गया और उनके चेहरे को अपनी ओर खींचा उनकी आंखे बंद थी मैंने उनके होठों को अपने होठों में दबा लिया और उन्हें चूसने लगा, थोड़ी देर में दीदी ने जब आंख खुली तो मुझे अपनी नशीली आंखों से देखने लगी, मैं अभी उनके होंठों को चूस रहा था मेरे कमर और धीरे धीरे चल रहे थे दीदी की आंख खुलते ही मैंने कमर की स्पीड बढ़ा दी दीदी के चेहरे पर फिर एक स्माइल आ गई, उन्होंने मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ा और अपनी तरफ खींचा मेरे होठों को चूसने लगी जब हमारे होंठ एक दूसरे से अलग हुए पर दीदी ने हल्के से कहा
“भाई भाई सुनना जल्दी करना कॉलेज भी तो जाना है”
मैंने उठ कर फिर से उनके कमर को अपने हाथों में पकड़ा और तेजी से धक्के लगाने लगा दी दी दी दी थोड़ी देर ही मेरा साथ दे पाई और फिर झाड़कर चूर हो गई लेकिन इस बार दीदी ने मुझे रोका और पास से ही एक कपड़ा लेकर अपनी योनि को साफ किया और हंसकर मुझे कहा अब डाल… अब दीदी की योनि थोड़ी सुखी थी जिससे मेरे लिंग को अच्छी रगड़ मिल रही थी, जिससे मेरा मजा और बढ़ गया था मैंने तेजी दिखलाई और फिर से पूरी ताकत जुटा कर अंदर बाहर करने लगा, आखिरकार दीदी का गीलापन गीलापन फिर से बढ़ने लगा और मेरा लिंग फिर से दीदी की गहराइयां नापने लगा, थोड़ी देर के मेहनत के बाद ही मैंने अपना संपूर्ण गाढ़ा वीर्य दीदी के अंदर छोड़ने को तैयार हो गया, मैंने फिर से पूरी ताकत से धक्के लगाए और अपना पूरा वीर्य दीदी के अंदर धकेलता गया..
अब मैं बिल्कुल बेजान सा दीदी के ऊपर गिर पड़ा दीदी ने मुझे संभालते हुए अपने ऊपर लिया और मेरे लिंग को जो कि थोड़ा बेजान हो रहा था अपनी योनि में डाल लिया ताकि थोड़ा भी वीर्य बाहर ना जाने पाय, दीदी के ऐसा करने से मेरे लिंग में थोड़ी अकड़न फिर बढ़ गई और मैं दीदी की योनि में समाया हुआ उन्हें पकड़कर सोने लगा….
लगभग आधे घंटे हम दोनों ऐसे ही सोये रहे, हम एक दूसरे को किस करते, कभी मैं हल्के हल्के कमर चलाता, दीदी मुझे जकड़ लेती मेरे होठों को अपने होठों में भर लेती ,हम आधे घंटे तक ऐसे ही लेटे रहे… दीदी आखिरकार मन मारकर उठी और नहाने चले गई साथ मैं भी चल दिया, हम दोनों साथ नहाए और तैयार होकर बाहर निकल गया…..

