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आज एक गजब की शांति मेरे दिल में थी,हो भी क्यों ना दीदी को उनका इंसाफ मिल चूका था ,मैं बहुत ही इत्मिनान से लेटा हुआ था ,दीदी मेरे विशाल सीने के घने बालो में सर छुपाये एक छोटी बच्ची की तरह मुझमे समां जाने की कोशिस कर रही थी,हम दोनों हो शांत थे और दीदी कभी अपना चहरा मेरे सीने पर रगडती कभी मेरे बालो से खेलती थी ,

‘दीदी ,’बहुत देर तक दीदी की कोई हरकत ना देखकर मैंने कहा,

‘ह्म्म्म ‘दीदी हलके से

‘कुछ बोलो ना,’

‘क्या ‘

‘मैं कुछ बात बोलू ,’

‘हम्म्म’मैं दीदी के बालो को सहलाता रहा ,और वो मेरे छाती के बालो को ,

‘दीदी आपको देबू कैसा लगता है ,वो आपसे बहुत प्यार करता है .’दीदी ने अपना चहरा ऊपर उठा कर मेरी और देखा,

‘भाई प्लीज ,अब और नहीं ,तूने देखा ना ,पहले परमिंदर फिर मनीष,साला जिससे भी प्यार की उसने मुझे धोखा दे दिया ,’मैं दीदी को और दुखी नहीं करना चाहता था,

‘अच्छा पर अविनाश ने तो नहीं दिया ना धोखा,सब थोड़ी ना एक जैसे होते है,’दीदी ने अपनी आँखे बड़ी कर मुझे देखा ,

‘वो तो बहुत अच्छे है,पर देख ना जो अच्छा निकला उसने अपनी बहन बना लिया ,’

‘ह्म्म्म मतलब की आपके भाई लोग ही अच्छे होते है,जैसा की मैं है ना,’मेरे और दीदी के चहरे पर एक मुस्कान खिल गयी ,

‘हां मेरे भाई ,मेरे नसीब में किसी अच्छे इन्शानो की गर्ल फ्रेंड नहीं बहन बनना ही लिखा है ,आयशा कितनी लक्की है ना की तेरे जैसा बॉयफ्रेंड उसे मिला ,’मैंने दीदी के चहरे को पकड़ कर अपने पास खीचा ,

‘ये बात अपने दोस्त को समझाओ ना,’दीदी की एक हसी निकल गयी ,

‘वो तो कब से राजी हो जाती तू ही फट्टू है तो वो बेचारी क्या करेगी ,’दीदी ने हस्ते हस्ते मेरे सर पर एक प्यारी से चपात मार दि,

‘अरे दीदी पहली बार है ना यार समझा करो ,लेकिन दीदी एक चीज बोलू,उसे जब भी देखता हु मुझे तुम्हारी ही याद आ जाती है ,और जानती हो उसे मैं पसंद ही इसलिए करता हु क्योकि वो मुझे तुम्हारी याद दिलाती है ,’दीदी मेरी बातो को सुन थोड़ी इमोशनल हो गयी उनकी आँखों में प्यार के कुछ आंसू आ गए थे ,

‘मेरा प्यारा भाई,तू कब बड़ा होगा रे ,जब भी तुझे देखती हु तू मुझे वही छोटा सा नन्हा सा शांत भोला भाला सा मेरा प्यारा भाई लगता है ,’दीदी मेरे मुह को अपने हाथो में दबा दि और मेरे गालो में एक जोरदार सा किस कर दि की मेरा पूरा गाल ही गिला हो गया,

‘क्या दीदी मैं बच्चा थोड़े ना हु,’मैंने उस गीलेपन को साफ़ करते हुए कहा,’

‘मुझे तो लगता है ,’मुझे एक शरारत सूझी

‘अच्छा लेकिन आप तो कहती थी की मेरा बहुत बड़ा हो गया है,,’मेरे चहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गयी

‘अरेएएए ‘दीदी के चहरे पर एक मुस्कान तेरी पर थोड़ी ही देर में उनका चहरा गंभीर हो गया,

‘क्या हुआ दि ,’दीदी में मुझे बड़े ही प्यार से देखा और मेरे माथे पर एक किस कर दिया

‘भाई कितने दिन हो गए ना हम ऐसे साथ समय ही नहीं बिता पाय ,मैं भी कहा उस कमीने के प्यार में पड़ गयी थी,’

‘हा दीदी और प्लीज् आप देबू के बारे में सोचना जरुर वो बहुत ही अच्छा लड़का है ,और मैंने उसकी आँखों में देखा है वो आपसे बहुत प्यार करता है,आप भी जिंदगी में आगे बड़ो और खुश रहो मुझे इसके अलावा क्या चाहिए ,’

‘ओके भाई पर अभी नहीं ,अभी तो मुझे मेरे भाई का प्यार उसे दिलाना है ना ,और मुझे अपने भाई को बहुत सा प्यार करना है ,और तुझसे जादा मुझे कोई प्यार कर सकता है क्या,’दीदी ने मुझे इतने प्यार से देखा की मेरे मन का सैलाब फुट पड़ा और मैंने उन्हें कसकर अपने सीने से लगा लिया ,कुछ ही देर में मैंने दीदी का चहरा उठाया उन्होंने मेरी आँखों में कुछ आंसू देखे और अपने होठो से उसे पि लिया और मेरे होठो पर अपने होठो को टीका दिया हमारा होठ बस टिके थे उनमे कोई भी हलचल नहीं हो रही थी,अगले ही पल मैंने उनके उपरी होठो को अपने होठो में ले लिया ,दीदी की एक आह ऐसे निकली जैसे तपते हुए तवे में पानी छिड़क दिया गया हो ,

‘ह्म्म्म ह्म्म्म ‘मैं पुरे लिज्जत से उनके होठो को अपने होठो में भरकर उनका रस पीना शुरू किया ,दीदी ने अपने स्तनों को मेरे सीने में दबाना शुरू कर दिया ,जब हमारा ये चुम्बन टुटा तो दोनों की आँखों में पानी था ,और होठो में एक मुस्कान ,

‘मैं तरस गयी थी भाई इस प्यार के लिए ,’मैंने दीदी के आँखों से लुडकता पानी अपने हाथो से पोछा ,

‘तो क्यों नहीं आई मेरे पास ,’दीदी ने एक गहरी सांस ली,

‘शायद मैं कही और उस प्यार को तलाश रही थी ,मैं भी कितनी पागल हु ना,तुम्हे अपना सब देने का वादा किया और किसी और की तलाश में लग गयी ,’

‘नहीं दीदी आप सही हो ,मैं आपका भाई हु,हमें एक समय पर रुक ही जाना था ,और ‘दीदी ने मेरे होठो पर अपने उंगलिया रख दिए ,

‘नहीं भाई हमें कही नहीं रुकना था ,और अब हमें अपनी दीवारों को तोडना होगा ,यही तो वो प्यार है जिसकी मुझे और तुम्हे तलाश है ,भाई ये हवस नहीं है ,मेरे अंदर उस दवाई का डोस होते हुए भी मैं इतने दिनों तक किसी से सम्बन्ध नहीं बनायीं इसका कारन तुम्हारा ही तो प्यार था,और अगर ये हवास होता हो शायद मेरे लिए रुकना मुस्किल हो जाता ,हम उतने आगे निकल गए जितना एक कपल जाने के बाद कभी रुक नहीं पाता पर हमारे प्यार ने मुझे दवाई के असर के बाद भी रोके रखा और तुम्हे इतनी उर्जा होते हुए भी ,ये हवास में संभव नहीं था भाई ,ये प्यार ही है,हमरे बीच का प्यार ,जहा हमें एक दुसरे से कुछ नहीं चाहिए बस एक दूजे की खुसी चाहिए,’मैं दीदी के मासूम चहरे को देख रहा था ,उनकी बड़ी बड़ी आँखे ,उनके नर्म गुलाबी होठ,उनके फुले हुए गाल जो चिकनाई से चमक रहे थे ,आँखों में भरा पानी जो उनकी उज्वल आँखों को और चमका रहा था,उनके काले बाल जो उनके कमर तक जाते थे और उनकी कमर के नीच की वो गोलाईया जो किसी नर्म नर्म किसी इद्रधनुष की तरह थे ,उनकी मासूमियत पर मैं अपनी जान दे देना चाहता था ,उनके लिये जहा की हर ख़ुशी उनके कदमो में रख देना चाहता था ,शायद मुझे मेरा प्यार दिखने का और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था की आख़िरकार मैं क्या कर डालू की दीदी के चहरे पर एक हसी आ जाए ,उनकी मुस्कान कभी भी नहीं जानी चाहिए ,मैंने प्यार से दीदी के गालो पर अपने हाथ ले गए ,मेरा स्पर्श इतना भावनाओ से भरा था की दीदी के मन ने भी उसे महसूस कर लिया ,वो मेरे हाथो को चूम गयी ,हमारे आँख आपस में मिले हुए थे एक पल के लिए भी हमें एक दूजे से दूर नहीं जाना था,

‘भाई आज हर दिवार तोड़ दो इस प्यार को आजाद कर दो की हम इस मुक्त गगन में खुलकर सांसे ले सके ,’मैं अब भी दीद के चहरे हो देख रहा था ,मुझे नहीं पता था की मैं कैसे दिवार को तोडूंगा,शायद दीदी भी इस बात को समझ चुकी थी,वो मेरे ऊपर झुकी और मेरे कानो में कहा ,

‘आज मेरी निकर भी उतर सकता है ,’दीदी की इस बात ने मुझपर एक करेंट की धार छोड़ दि ,एक झुनझुनी सी मेरे पुरे बदन में फ़ैल गयी थी,मैंने सर उठाया तो दीदी के चहरे पर मैंने शर्म देखा और होठो में मुस्कान ,मुझे खुद पता नही था की मैं कैसा रियेक्ट करू मैंने खुद को पूरी तरह से दीदी को सौपने का फैसला किया ,

‘दीदी अब मैं कुछ भी नहीं करना चाहता ,मैं बस आपका होना चाहता हु ,पूरी तरह से आपका ,मुझे नहीं पता मैं क्या करूँगा पर मुझे इतना पता है ,जो भी होगा वो मेरा प्यार होगा,’दीदी ने सजल नैनों से मेरे मस्तक पर एक चुम्बन का तिलक किया ,और अपने होठो से मेरे होठो को मिला दिया और हमारे बीच की सभी दूरिय उसी क्षण से ख़तम हो गयी ,हम अब एक ही थे और कोई दूजा ना था ,हम बस अपने को एक दूजे में समेटने की पूरी कोसिस कर रहे थे ना जाने कितने समय तक हम एक दुसरे के होठो को चूसते रहे थे हमारी सांसे थी पर मेरे लिंग में कोई भी अकडन नहीं थी और ना ही इसका भान ही रह गया,समय जैसे रुक सा गया हो ,हम एक दूजे को अपनी बांहों में भरे बस खो जाना चाहते थे ,मुझे तब थोडा होश आया जब मैं दीदी के टी शर्ट के अंदर अपना हाथ घुसाए था और उनकी पीठ को सहला रहा था ,उनकी नंगी पीठ पर अपने हाथो को चलते हुए मैंने उनके शर्ट को निकल फेका मेरा सीना पहले से ही नग्न था ,दीदी के नर्म स्तनों के आभास ने मुझे फिर से किस के खुमार से बहार निकला मैंने अपने हाथो से उन्हें दबाना शुरू किया पर होठो को नहीं छोड़ा दीदी भी अपने हाथो को मेरे सर पर कसली थी और पूरी शिद्दत से मेरे होठो को अपने में समां रही थी ,उन्हें शायद मेरे हाथो के हलचल तक का आभास नहीं हो रहा था ,पर जब मैंने पूरी ताकत से एक वक्ष को दबाया ,

‘आहह भाई थोडा धीरे ,’दीदी साँस लेती हुई बोल पायी उनकी सांसे उखड़ी हुई थी ,वो साँस ले पाती इससे पहले ही मैंने फिर से अपना मुह उनके मुह में घुसा दिया ,मैंने उन्हें पीठ के सहारे लिटाया और उनके ऊपर छा सा गया,मैंने दोनों हाथो से उनका चहरा पकड़ा और उनके होठो को छोड़ा फिर ,फिर उनके गाल ,उनकी आँखे उनकी नाक ,उनका माथा ,आँखों की पुतलिया,गरदन ,कन्धा ,छाती ,उजोर ,पेट ,नाभि ,…मैं बस चूसता गया मुझे नहीं पता था की मैं क्या कर रहा हु ,ना दीदी को ही पता था,हम बस खो से गए थे मैंने फिर उनके उजोरो को पकड़ा और उनके उन्नत निपलो को अपने होठो में समां लिया ,दीदी बस छटपटा रही थी ,

‘आः आःह भाई,आः आः आआअह्ह्ह्ह भाआआआआआई ,’मैंने अपने मन भर उसे चूसा जब तक की वो लाल नहीं हो चुके थे,मैं निचे आये दीदी का निक्कर और उनकी जन्घो के बीच का गीलापन मुझे दिखाई दिया मैंने अपने जनहो के बीच एक विशाल खम्भे सा दिखाई दिया ,जिसकी अकडन से अब मुझे दर्द होने लगा था,मैंने उसे आजाद कर दिया ,मैंने निकर के छोरो को अपने दोनों हाथो से पकड़ा,मैंने दीदी की और देखा दीदी काप रही थी ,वो एक दिवार थी जो मुझे हमेशा के लिए गिरानी थी ,जिसे गिराकर ही मैं दीदी को अपना बना सकता था,

‘दीदी ,’दीदी ने बड़ी मुस्किल से आँखे खोल मुझे देखा ,

‘निकाल दू ,’दीदी के चहरे में एक मुस्कान आ गयी ,एक प्यार उनकी आँखों में उतर गया ,

‘अभी भी पुच रहा है ,’मुस्काते हुए उन्होंने पूछा और मुझे अपने ऊपर खीच लिया मेरे होठो को फिर अपने होठो में भर लिया ,

‘मेरा प्यारा भाई ,’दीदी ने मेरे हाथो को निकर के और ले गयी वो मेरे आँखों में ही देख रही थी उनके चहरे पर अब भी वो मुस्कान थी और आँखों में वही प्यार ,मेरे हाथो में दबाव बनाते वो निकर को निकल डी और अपने पैरो से निकाल निचे फेक दि ,वो हमेशा की तरह कुछ नहीं पहनी थी ,पर मुझे इसकी फिकर ही नहीं थी ना ही मैंने ये देखने की जहमत ही की ,मैं तो फिर दीदी के होठो को चूसने लगा ,हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे मैं उनके ऊपर लेटा था ,और दीदी अपनी आँखे बंद किये बस खोयी हुई थी ,मेरा अकड़ा लिंग दीदी के गिले योनी में हलके हलके घिस रहा था,थोडा गीलापन से बिग कर लिंग भी फिसलने लगा मैंने एक दबाव दिया पर वो जन्घो से जा टकराया ,ऐसा कई बार होता रहा पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ,क्योकि ये बिलकुल स्वाभाविक तोर से हो रहा था ,मैं कोई मेहनत नहीं कर रहा था,मैंने तो दीदी को किस करने में डूबा हुआ था,पर दीदी ने मेरे लिंग को पकड़ा जैसा की उनका पहला मौका नहीं था उन्होंने उसे सही जगह लगाया ,वहा पहुचकर वो चिपिचिपा गिलापण मेरे लिंग को फिर से गेर लिए ,मैंने स्वभावतः फिर झटका मारा लेकिन ये क्या मेरे मुह से एक चीख सी निकली जो दीदी के होठो में खो सी गयी ,मेरी लिंग की चमड़ी ने पहली पर इस घर्षण का आभास किया था लेकिन उस अतिरेक आनद से बढकर ये दर्द नहीं था,मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और ,

‘आआह्ह्ह्ह भाऐईई भाऐईईईईईईई ‘

‘दिदीईईईईइ आह्ह्ह्ह ‘हमारा मिलन हो चूका था पर अभी तो उफान की शुरुवात भर थी ,

मैंने और दीदी ने आँखे खोलकर एक दूजे को देखा ,हम एक रहत की साँस ले रहे थे ,हमारी आँखे मिली दोनों के चहरे पर एक मुस्कान फैली और मैंने फिर एक जोरदार धक्का मार दिया ,

‘अआह्ह्ह ‘दोनों के मुह से निकला और दोनों एक दूजे को देख हस पड़े ,,,मैंने धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा ,मेरा लिंग दीदी के योनी रस से पूरी तरह से गिला हो चूका था और हम फिर एक गहन तन्द्रा में प्रवेश कर रहे थे जहा बस प्यार था और दुनिया की कोई शय नहीं हमारी आँखे फिर बंद होने लगी मैं तो किसी भी तरह से आंखे खोल भी पा रहा था पर दीदी की आँखे इतनी बोझिल हो चुकी थी वो अपनी आँखे खोल ही नहीं पा रही थी ,मेरे धक्के एक लय पकड़ चुके थे और हमारी सांसे और आंहे ,उसी लय में चल रहे थे ,समय खो चूका था ,और सारा जहा भी खो चूका था ,हम एक दुसरे को काट रहे थे ,चूस रहे थे चूम रहे थे ,पर हमें नहीं पता था की हम क्या कर रहे है ,कोई कण्ट्रोल हमरे ऊपर नहीं था ,ना हमारा ना और किसी का ,पहले धीरे धीरे आःह आह्ह से लेकर तेज तेज सांसे और आह उह ओह तक पहुच जाते फिर धीरे माध्यम तेज ये सिलसिला ना जाने कब तक चलता रहा ,हमें आँखे खोल एक दूजे को देखने की फुर्सत नहीं थी ,जैसे किसी ने कहा है ,”यहाँ हर पल ही रहती है मस्ती ,की सर झुकाने की फुर्सत नहीं है ,”

ये हमारे लिए पूजा थी ,प्राथना थी ,सजदा था,वो दुआ थी जिसमे पाना ना था,जो बस थी ,बिना किसी के परवाह के ,बिना किसी मांग के ,बिना किसी तलाश के ,बिना किसी चाह के ,हम थे और बस हम थे,,,…एक दूजे में ऐसे घुल रहे थे की पता लगाना भी मुस्किल था की मैं और तू अलग भी है ,बस मेरा मुझमे ना रहा जो होवत सो तोर ,तेरा तुझको सोपते क्या लागत है मोर…

सांसो में अपनी अंतिम गहराई तक हमें डूबा दिया ,जब लक्ष्य करीब आने को थी तो बस थोड़ी देर के लिए सांसे रुक गयी मेरे अंदर से एक विस्फोट हुए ना जाने कितनी ताकत से मैं धक्के लगाये जा रहा था लेकिन उस विस्फोट ने मुझे शांत कर दिया एक गढ़ा सफ़ेद ,चिपचिपा सा द्रव्य ,मेरे अंदर से निकल दीदी की योनी को भिगो दिया वही दीदी की योनी से ना जाने कितनी बार फुहारे निकल चुकी थी ,लडकियों की एक खासियत होती है की अगर वो प्यार की गहराई का आभास कर पायी और उससे सेक्स करे जिसे वो प्यार करती है तो वो एक नहीं कई चरम सुख (ओर्गोस्म )का अनुभव आसानी से कर पाती है ,एक सम्भोग में लगभग 7 तालो का ओर्गोस्म संभव है ,ऐसा शोधो ने पता लगाया है …दीदी ने भी आज किसी गहरे तालो पर इसका अनुभव किया था ,और मैंने भी ,तूफ़ान तो शांत हो चूका था पर जैसे हम जम ही चुके थे ,हमारे शरीर एक दूजे से अलग ही नहीं हो रहे थे ,हम पसीने से भीगी थे हमारी सांसे उखड़ी थी ,पर हमारे चहरे में एक परम शांति का आभास था,सबकुछ शून्य हो चूका था ,खो चूका था ,इतनी शांति का आभास मैंने कभी नहीं किया था,ऐसा लग रहा था जैसे मैं खाली हो चूका हु ,बिलकुल हल्का ….हम एक दूजे के चुमते रहे हमारे होठ जैसे कभी एक दूजे से ना बिछड़ेंगे वैसे ही चिपके रहे ,हमारे शरीर इ दूजे के पसीने से सने थे ,चहरा और होठ एक दूजे की लार से सने थे और दीदी की योनी से मेरा वीर्य अब बहार आने लगा था ,मेरे कमर अब भी हलके हलके चल रहे थे जो बड़ी आसानी से फिसल रहे थे पर मुझे रुकने पसंद ही नहीं आ रहा था और ना ही दीदी ही मुझसे अलग होना चाहती थी ,हम वैसे ही लेटे रहे वीर्य अब भी निकल रहा था पर किसे फिकर थी ,मेरे लिंग में कोई जादा ढीलापन नहीं था ,थोड़ी देर में वो फिर उसी आकर में आ गया फिर उसकी नशे तन गयी ,सायद दीदी के कामरस का पान कर वो जादा ही मोटा हो गया था ,जैसे की कामसूत्र ने कहा है की महिलाओ का कामरस पुरुषो के लिंग के लिए सबसे पोसक होता है ,मेरा लिंग पहले से जादा ताना हुआ लग रहा था और जादा मोटा ,दीदी को भी इसका आभास को चूका था ,उन्होंने बस मुझे देखा और मुस्कुराई..

‘मेरा प्यारा भाई,रुक बहुत गिला है पोछ दू ,’दीदी उठाने हो हुई लेकिन मैंने उन्हें दबा लिया जैसे मैं नहीं चाहता हु की वो मुझे एक पल के लिए भी छोड़ के जाए

‘नहीं दीदी रहने दो अच्छा लग रहा है ,’हम फिर रति क्रिया में डूब गए ये तब तक चला जब तक की थककर हमारी आँखे ना लग गयी रात भर ना मैं ही अलग हुआ ना उन्हें होने दिया …मेरा लिंग उनकी योनी में स्खलित होता और वही डूबा रहता,,,,,,,,

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