(दो महीने पहले )
मैं,राहुल और डॉ चुतिया तीनो पूरी मेहनत से उस शातिर दिमाग को ढूंढने में लगे थे ,मेरा और डॉ का शक अविनाश पर था ,मैं दीदी को अविनाश से दूर ही रखना चाहता था पर वो उसकी ओर आकर्षित होती जा रही थी ,उन्होंने एक दिन अविनाश को प्रपोस भी कर दिया लेकिन अविनाश ने उन्हें कहा की तुम तो मेरी बहन जैसी हो ,दीदी का सपना चूर चूर हो गया वो उस दिन खूब रोई ,अविनाश मुझे दीदी को सम्हालने को कहा ,उसकी इन बातो से मेरे शक की सुई घूमी और मैंने सीधे सीधे सोचना शुरू किया ,हमने अविनाश की फंडिंग का पता किया उसमे से कुछ ऐसे शख्स थे जो प्रीति ने ग्राहक हुए थे ,लेकिन उन्होंने अविनाश को फंडिंग किसी और वजह से की थी ,जो की पूरी तरह से बिजिनेस था ,
इधर दीदी का दिल टूट चूका था और मनीष उनके करीब आ रहा था ,मैं और राहुल भी उसे पसंद करते थे और वो दीदी को प्रपोस भी कर चूका था इसलिए हमने दीदी को सम्हालने के लिए उसकी मदद की थोड़े ही दिन में हमने उन्हें बिक्लुल नार्मल कर दिया ,और उन्होंने मनीष का पप्रपोसल भी हमारे कहने पर एक्सेप्ट कर लिया,लेकिन मनीष ने दीदी से इतना प्यार जताया की दीदी उससे बहुत प्यार करने लगी थी ,अभी तक मेरे और दीदी के जिस्मानी सम्बन्ध भी कम हो चुके थे और मैं आयशा की और दीदी मनीष की और जादा ध्यान देने लगे था ,आयशा मुझसे लगभग पट चुकी थी पर मैं उसे प्रपोस नही कर पा रहा था ,वही प्रीति राहुल के बहुत ही करीब हो गयी थी और उनमे एक प्यार का रिश्ता जन्म ले रहा था,,,दीदी मनीष के प्यार में डूबने लगी थी ,हम सभी इससे बहुत खुस थे,लेकिन फिर हमें एक बात पता चली
डॉ चुतिया ने पता लगाया की प्रफुल्ल पहले एक डॉ के पास काम करता था जो की मनीष के पापा है , वही से हमने मनीष और उसके पापा के ऊपर नजर रखी,उसके पापा तो सामान्य लगे पर मनीष की हरकते कुछ अजीब लगी ,पता लगाने पर पता चला की वो जितना सीधा लगता था उतना है नहीं ,उसका उठाना बैठना कई बड़े लोगो से था ,प्रफुल्ल के नौकरी छोड़ने के बाद भी वो उसके साथ मिलता रहा और उससे ही वो दवाई बनवाई थी ,फिर परमिंदर से दोस्ती की जो की विक्की और नानू का दोस्त हुआ करता था और बहुत बड़ा लड़की बाज था ,मनीष को विक्की और नानू की आदतों का पता था इसलिए उसने परमिंदर पर ही भरोसा दिखाया ,और उसे अपने धंधे में मिला लिया क्योकि उसे पता था की वो तो लडकिय पटा नहीं पायेगा ,उसने लडकियों के दम पर अपने कांटेक्ट अच्छे किये इसी के चलते प्रीति और कुछ दूसरी लडकियों को भी युस किया ,और ये काम वो परमिंदर के भरोसे कर रहा था ,विक्की नानू तक को इसकी खबर नहीं लगी की इसके पीछे कोण है,पर ये तो अभी ट्रेलर ही था वो ऐसी लडकियों की फौज खड़ा करना चाहता था,और उसका सबसे बड़ा शिकार थी कॉलेज की सबसे सुंदर लडकिय नेहा और आयशा पर यही उससे गलती हो गयी नेहा तो फसकर भी निकल गयी ,और आयशा फस ही नहीं पायी ,और उसे मुसीबत में डाल गयी ,मनीष के सभी कांटेक्ट को मिलाने पर प्रीति ने भी अधिकतर के साथ सेक्स करने को स्वीकार किया ,पर मैं जल्दबाजी नहीं करना चाहता था और मैंने और सुबूतो को इकठ्ठा करना ही सही समझा ,इसी दौरान मनीष ने दीदी के साथ सेक्स की कोशिस की पर दीदी ने साफ़ मना कर दिया वो उसे बहुत चाहती थी पर वो दूध की जली थी ,मनीष ने उन्हें काबू में करने के लिए उन्हें राजनितिक पार्टी में ले जाना शुरू किया जो दीदी को बहुत पसंद था ,,बड़े लोगो से मिलवाना और लीडरशिप,दीदी के अविनाश से सम्बन्ध भी सामान्य हो गए बल्कि उसके लिए इज्जत और भी बढ़ गयी दीदी उसकी पार्टी भी ज्वाइन कर ली,मनीष दीदी को इम्प्रेश करने के लिए उन्हें लोगो से मिलवाता था लेकिन वो कभी इतनी इम्प्रेस नहीं हो पाई की अपना जिस्म दे दे ,लेकिन ये भी मनीष की गलती निकली क्योकि एक सिंपल लड़के की इतनी पहचान ने हमारा शक और पुख्ता किया ..
इधर किसी बड़े साबुत की तलाश में हम देबू से मिले जो दीदी का दीवाना था हमने देबू पर भरोसा जताया और उसे अपने साथ मिला लिया दीदी के बारे में सुनकर उसके आँखों में आंसू आ गए ,उसकी आँखों में मैंने दीदी के लिए प्यार देखा जो मैंने कभी और किसी लड़के के आँखों में नहीं देखा था,मुझे वो लड़का भा गया और मैंने उसने भी अपना सब कुछ छोड़कर हमारी मदद करने की ठान ली,उसने मनीष और अविनास का मोबाईल हेक किया और उनके सभी कॉल हम सुनने लगे ,दो तीन दिनों में ही साफ़ था की अविनाश बिलकुल ही क्लियर है और मनीष ही फसाद की जड़ है ,वो बेहद बेचैन था क्योकि उसे कोई भी लड़की नहीं मिल पा रही थी और ग्राहक उस पर प्रेसर डाल रहे थे उसकी आखिरी उम्मीद नेहा दीदी ही थी ,लेकिन यही फिर से उसकी गलती निकली ,हमें नेहा दीदी के मोबाईल का इस्तमाल उसे फ़साने में किया और ये यकीं दिला दिया की वो उससे सेक्स करने को राजी है और उस होटल के कमरे में उसे मिलना है,आखरी कंफरमेशन डॉ ने उसके अकाउंट की जानकारी निकलवा कर उस होटल के वेटिंग रूम में दे दि,जिसके बाद मैंने आखरी लड़ाई लड़ने की ठान ली और वो हमारे चुंगुल में था…
डॉ ने मनीष के मुह में लगा कपडा खोला जैसे लग रहा था की वो कुछ बोलना चाहता हो ,उसकी हसी से सारा कमरा गूंज गया वो एक शैतान की हसी थी,उसके चहरे पर धधकते अंगारे और आँखे बिलकुल सुर्ख लाल हो चुकी थी ,दीदी अब भी उसके पैरो के पास पड़ी उससे यही पूछ रही थी की तुमने ये क्यों किया…
‘क्यों किया क्योकि मैं पवार चाहता था,क्यों किया क्योकि मैं तुम जैसी रंडियो को नग्गा कर बाजार में नचाना चाहता था,क्यो किया पूछती है साली रांड,मुझे पैसा चाहिए पवार चाहिए और तेरे जैसी सभी लडकिय मुझे मेरे निचे चाहिए ,’मनीष की बातो से जहा दीदी स्तब्ध थी वही मैं गुस्से से भरा हुआ उनके पास आता हु ,लेकिन डॉ ने मुझे इशारे से वही रोक दिया और आँखों से कहा की रुक नेहा को बोलने दे,आग तो मेरे तन मन में भी बड़क चुकी थी पर डॉ के कहने से मैं समझ गया की पहले नेहा दीदी को बदला लेने दो ,,
‘मैं तुमसे प्यार करती थी मनीष ,और इतना बड़ा धोखा ,’
‘धोखा हा हा हा ,धोखा …साली तू मुझसे प्यार नहीं करती थी तू तो मेरे पास मजबूरी में आई थी जब तेरे चूत की आग बुझाने वाला कोई नहीं रहा तो मेरे पास आयी ,मैं तो तुझे कब से लाइन मार रहा हु और तू ,तू तो पटी उस परमिंदर से क्यों ,क्योकि उसका बड़ा था ना हा हा हा (मनीष पर मनो शैतान सवार था ,)और फिर भी मुझे घास नहीं साली ,हा तुम तो मेरे अच्छे दोस्त हो पर ये सब मैं कैसे कर सकती हु मैं वैसी लड़की नहीं हु,कोण कहता था ,और फिर उस अविनाश के पीछे पड़ गयी ,मैं सरीफा बना सीधा साधा बना पर नहीं ,और जब उसने भी तेरी गांड में लात मारा तब जाकर तू मेरे पास आई साली ,’तब तक एक जोरदार तमाचा मनीष के गालो में पढ़ चूका था ,ये हाथ दीदी का था ,
‘मैं सच में तुम्हे प्यार करने लगी थी ,और ये तुम जैसे लडको के दिमाग की हैवानियत है की तुम लोगो के लड़की सिर्फ एक चीज है जिसका इस्तमाल करो और फेक दो ,लड़की का जिस्म फकत जिस्म नहीं होता उससे उनका मन और रूह भी जुडी होती है,तुमने मेरे जिस्म को पाना चाहा लेकिन तुमने मेरी रूह को भी मारा है,सर तेरे कारण मुझे जानवरों की तरह रौंदा गया,मेरे जैसी ना जाने कितनी लडकियों की रूह तक तुमने बेच दि,इसकी सजा तूम्हे मिलेगी ,ऐसी की तुम्हारा रूह तक काप जायेगा ,तुमने कई लडकियों को इस हालत में लाकर खड़ा कर दिया है की सायद अब वो किसी से प्यार ना कर सके ,प्यार के नाम से ही घिन आने लगी है अब तो ,इतनी हैवानियत जो तुमने की है उसका बदला तुमसे ले कर रहूंगी ,’दीदी का तन किसी गर्म सलाख की तरह लाल हो रहा था ,उनके बातो की तपन से माहोल शांत था और सबको बस ये इन्तजार था की दीदी क्या करने वाली है,दीदी ने पास पड़ा लोहे का सरिया उठाया और उसके पैरो में दे मारा,मनीष के मुह से दर्द की चीख निकली पर उसके चहरे पर अब भी मुस्कान थी ,
‘जानती है ना की कैसे तीन लडको ने तुझे घंटो तक रौंदा था,हा हा हा ‘दीदी के चहरे पर एक कातिलाना मुस्कान थी ,
‘तू ये सब बाते कर के बच नहीं सकता मरेगा तो तू तड़फ तड़फ के ही ,’दीदी ने वो सरिया उसके कंधे पर घुसा दिया उसके मुह से फिर एक दर्दनाक चीख निकली ,जिससे दीदी के चहरे पर एक शकुन के भाव आये ,
‘जानता है जलील होना किसे कहते है,दर्द किसे कहते है ,’प्रीति जो अब तक सब चुपचाप देख रही थी वो आगे आ गयी ,
‘जनता है जब कोई गैर मर्द तुम्हेरे जिस्म को रौंद रहा हो और कुछ ना कर पाने की आत्म गलानी किसे कहते है ‘कहते हुए प्रीति ने अपने पैरो को उसके जन्घो के बीच दे मारा ,इससे पहले उसके मुह से चीख निकले दीदी ने सरिया उसके मुह में घुसा दिया, उसके होठो को काटता वो सरिया जबड़े से बहार निकल गया ,अब वो चीख भी नहीं पा रहा था ,और पूरी आवाज उसके मुह में ही दबी रह गयी,इधर देबू कपने लगा था ,राहुल ने उसे सम्हालते हुए उसे वहा से जाने के लिए कहा,वो मुड़ा ही था की
‘रुको मुझे मिर्च नमक और तेल और एक कढाई और कुछ लकडिया चाहिए ‘दीदी की बातो को सुनकर मनीष गु गु करने लगा उसकी आँखों में आतंक साफ दिख रहा था ,पर सरिया घुसे होने पर वो कुछ नहीं कह पाया ,दीदी ने हस्ते हुए वो सरिया बहार खीच लिया ,अब मनीष के मुह से खून की धार निकल पड़ी पर वो कुछ बोलने में अश्मर्थ था ,वो सायद माफ़ी मांग रहा था पर उसकी आवाज स्पष्ट नहीं थी ,दीदी का आदेश सुनते ही राहुल और देबू वह से निकल गए ,दीदी ने पास पड़े टेबल को उसके सामने रखा और आराम से बैठ गयी ,प्रीति ने सवालिया नजरो से उन्हें देखा ,
‘अरे आराम से मरेंगे इस मदरचोद को इतनी जल्दी क्या है ,’दीदी हलके से हसी उनकी हसी में इतनी क्रूरता थी की एक बारी मेरा दिल भी जोरो से धडक गया डॉ मेरे पास आये और मेरा हाथ पकड़ कर
‘आकाश इसे करने दो जो करना चाहे इतने दिनों से अंदर ही अंदर जलती रही है ,आज इसके मन का भड़ास नहीं निकला तो शायद ये कभी किसी से वो प्यार नहीं कर पायेगी और प्यार बिना इसकी जिंदगी नारख सी हो जानी है ,’मैंने भी सहमती में अपना सर हिलाया ,कुछ देर तक दीदी उसे युही घुर के देखती रही वो दर्द का आदि हो चूका था ,खून बंद ही नहीं हो रहा था ,अब वो रो रहा था चिल्ला रहा था पर कुछ भी करने को मुह खोलता तो दर्द की लकीरे उसके चहरे पर साफ़ दिखाती ,दीदी और प्रीति के चहरे पर उसके दर्द को देखकर एक हलकी मुस्कान आ जाती थोड़ी देर बाद ही प्रीति ने पास पड़ा एक लकड़ी का टुकड़ा उठा लिया ,और मनीष के सर में हाथ फेरते हुए बड़े प्यार से कहा ,
‘जानते हो मेरी जान जब चुद सुखी हो और कोई जबरदस्ती तुम्हारे चुद और गांड में एक साथ घुसता है तो कितना दर्द होता है ,(वो थोड़ी देर रुकी )नहीं जानता मेरा बाबु ,मैं बताती हु ‘मनीष आक्रांत नजरो से उसे देख रखा था ,उसकी नजरे ही उसका डर का सबब बताने को काफी थी,प्रीति ने दीदी को देख जिनके चहरे की मुस्कान और फ़ैल गयी थी ,प्रीति लकड़ी के टुकडे को उसके कटे हुए होठो के पास खुरेदने लगी और जीभ के कटे हिस्से में घुसा के हिला दि ,मनीष का बंद ही नहीं हो पा रहा था ,उसके जबड़े लटके हुए थे ,वो दर्द से छटपटाने लगा ,पूरी कुर्सी हिलने लगी थी,
‘दर्द होता है ‘प्रीति ने बड़े प्यार से पूछा ,मनीष बस रो रहा था ,और प्रीति चिल्ला पड़ी
‘मुझे भी होता था मदरचोद ,हा मैं दवाई के असर में थी ,पर मेरे जमीर को ही मार डाला तुम लोगो ने एक वैश्या या यही कहा था ना तूने रंडी ,रंडी बना दिया ना तूने मुझे ,’प्रीति एक जोरदार झापड़ और लगा देती है ,उसके आँखों में आंसू थे ,मनीष का जबड़ा लटक गया और मुह से खून और लार मिलकर टपकने लगी ,आंसू तो मेरे अर दीदी के आँखों में भी थे ,तभी राहुल आता है उसके हाथो में एक बैग था ,देबू शायद घर जा चूका था ,
‘तेल गर्म करो कढाई में और नामक मिर्च मुझे दो ‘राहुल तुरंत कुछ इटे लाकर लकडिया जलाता है और कड़ी में तेल गर्म करने लगता है ,इधर दीदी नमक उठाती है और प्रीति को इशारा करती है ,प्रीति सरिये को उठा कर दीदी से पूछती है कहा पर ,
‘जहा तेरा मन करे ‘प्रीति सरिये को उसके जन्घो में घुसा देती है फिर दूसरी जांघ में मनीष ना चिल्ला पा रहा था और ना ही कुछ कर पा रहा था उसका दर्द बस उसकी आँखों से दिख रहे थे ,वो छूटने को छटपटाता पर कोई फायदा नहीं था,वो दहशत भरी आँखों से उन्हें देख रहा था ,उसके आखो में आसू थे ,दीदी नमक ले जाकर उसके जख्मो में छिड़क देती है वो दर्द से काप जाता है दीदी और प्रीति के आँखों में आंसू थे और चहरे पर हैवानियत लेकिन जब जब वो छटपटाता था दोनों के चहरे पर एक अपार शकुन दिखाई देता था,दीदी ने मिर्च प् पेकेट फाड़ा और उसके मुह में डाल दिया वो दर्द से बस छटपटाता हुआ बेहोश हो गया उसका सर निचे को झुक गया मिर्च ने अपना असर दिखाया और खून तो कम हो गया और लार बहने लगी ,लेकिन दीदी ने उसे हिलाया ,
‘नहीं नहीं तू इतने जल्दी बेहोश नहीं हो सकता तू इतने जल्दी मर नहीं सकता तुझे अभी और तद्फाना है ,नहीं नही ,’प्रीति ने अपने नजर दौड़ाये और साथ रख ठंडा पानी जो उसके पर्श में ही था ले आई और पूरा उसके ऊपर डाल दि ,पानी कंटेनर में होने की वजह से बिलकुल ठंडा था ,जिससे मनीष को होश आया लेकिन उसकी इतनी हिम्मत नहीं हो पा रही थी की वो सर उठा ले वो जितने जल्दी हो सके मरना चाहता था ,दीदी ने उसका से उठाया,और कुर्शी के पीछे के सिरे से लगा दिया वो बेबस निगाहों से दीदी को देख रहा था ,दीदी उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली अभी तो तुझे दर्द मिलना बाकि है मेरी जान ,और उबलते तेल के तरफ इशारा किया ,मनीष की रूह तक काप गयी उसकी आँखे अब पथरा चुकी थी वो बस देख रहा था ,उसके हाथ पैर चलने बंद हो चुके थे ,दीदी ने उस छूती सी कढाई को देखा जिसमे तेल उबल रहा था ,यो अपना दुपट्टा निकल कर उसके सिरे को पकड़ी और कडाही पकड़ कर उसके पास आ गयी ,प्रीति ये देख कर जोरो से रोने लगी जैसे ना जाने कब से ये रोना दबा के राखी हो दीदी ने उसके सर पर से तेल को डालना सुरु किया,दीदी की आत्मा से एक रुदन निकला जैसे वो खली हो रही हो वो दोनों चीख चीख कर रो रही थी . मनीष तड़फता रहा ,इतना छटपटाया की आखिर में खुर्सी समेत गिर गया उसके मुह के इतना जख्मी होने पर भी स्की चीखे निकल रही थी जैसे उसकी आत्मा जल रही हो ,उसके शारीर में फलोले थे और वो आख़िरकार निढल पड़ा था ,पर उसकी सांसे चल रही थी ,दीदी और प्रीति पुरे खाली हो चुके थे …..
थोड़ी देर एक गंभीर शांति का वातावरण बन चूका था,दीदी ने मुझे देखा और मुझसे लिपट गयी ,
‘भाई इसने तुझे भी बहुत तडफाया है ,अभी ये जिन्दा है ,अब इसे मार डालो ,’मैं दीदी से अलग हुआ हाथो में सरिया लिया अब तक उसके पुरे शारीर में फफोले थे वो हलके हलके साँस ले रहा था ,उसे देखकर ही मेरा पूरा गुस्सा शांत हो चूका था ,मैंने राहुल को देखा मेरी दशा उससे छुपी नहीं थी हम एक नार्मल इन्सान ही थे ,दीदी और प्रीति ने जो किया वो उनके सालो का गुस्सा था ,हमें भी उस पर गुस्सा था पर इन दोनों के इस रूप को देखकर हमरी आत्मा शांत हो चुकी थी ,मुझे कुछ ना करता देख प्रीति सामने आई और हाथो से सरिया लेकर उसके गले में घुसा दिया ,,
राहुल प्रीति के पास आकर उसे गले से लगा लिया यही मैं दीदी को अपनी बांहों में भर लिया …डॉ वह खड़े खड़े कुछ सोच रहे थे ,थोड़ी देर बाद रक् कोई कुछ नहीं बोल रहा था ,असल में कोई कुछ बोलने की हालत में भी नहीं था,आख़िरकार डॉ ने ही बात की शुरुवात की ,
‘तुम लोग यहाँ से चले जाओ,बाकि मैं सम्हाल लूँगा,और हो सकता है की पोलिश तुमसे पुछ्ताज करने आये तो डरना मत ,विक्की और नानू के लापता होने का केस पहले ही चल रहा है,पर उसमे तुम नहीं फसोगे ,पर इसके केस में नेहा के मोबाईल से उसे लास्ट कॉल गया था,तो पुछ्र्ताज हो सकती है बोल देना की दोस्त था ,और अभी से लेकर रोज कम से कम 15 दिनों तक उस्क्व नंबर में कॉल करते रहना ,ताकि उन्हें लगे की तुम्हे भी नहीं पता की वो लापता है,हो सके तो एक दो दिन में उसके पापा को भी कॉल कर लो ,और तुमने उसे लास्ट बार कब देखा था,डॉ ने नेहा दीदी से पूछा ,
‘दो दिन पहले,’
‘नहीं तुमने उसे आज देखा है ,मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ,स्टेज पर अविनाश के साथ ,तुम्हारे साथ राहुल और आकाश भी थे और मैं भी था ,सबका बयां लिया जायेगा सबको यही कहना है…और अविनाश को अभी कॉल करके उसके पहने शर्ट की तारीफ करो की बहुत क्यूट दिख रहे थे ,और पूछो की मनीष कहा है ,मुझसे बात किया और स्टेज से उतरकर गायब हो गया ,और रही कमरा फुटेज की बात तो तुम तीनो वापस जाओ और एक दो फुटेज वहा से खिचावाओ ताकि उसे देबू आज के फुटेज में ऐड कर सके ,’हम सब डॉ की बातो को धयान से सुन रहे थे ,और वहा से निकलकर हमने ऐसा ही किया…..

