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बड़े से गोदाम में एक खुर्सी पर बंधा वो शख्स अपने को छुड़ाने को तडफ रहा था ,पास ही मैं देबू और डॉ खड़े थे मैंने जैसे ही ये देखा की वो होश में आ रहा है,उसे कई घुसे मार दिए ,वो चिल्ला पड़ा ,डॉ ने मुझे इशारा किया और मैंने एक पड़ा हुआ कपडा उठा उसके मुह में ठूस दिया जब वो मुझे देखा तो उसकी आँखों में डर साफ़ था जिसे देखकर मेरे चहरे पे एक स्माइल सी आ गयी ,थोड़ी देर में दरवाजे पर दस्तख हुई मैंने फिर उसका चहरा ढंका और दरवाजा खोला सामने दीदी राहुल और प्रीति खड़े थे प्रीति को लाने मैंने ही कहा था क्योकि उस आदमी ने उसकी भी जिंदगी बर्बाद की थी ,दरवजा खोलते ही जैसे ही मैंने दीदी को देखा की चटाक एक जोरदार चांटा मेरे गालो में पड़ा ,इसे देखकर राहुल की हसी छुट गयी पर उसने अपना मुह दबा लिया ,

‘बहुत बड़ा हो गया है तू ,क्या समझता है तू अपने आप को हीरो है तू ,इतनी सी उम्र में ये सब काम करेगा तू ,दो लोगो को किडनेप करके मार दिया ,इतने बड़े लोगो से पंगा ले लिया और ये ,ये क्या है किडनेप करके ले आया समझता क्या है तू अपने आप को ,’मेरे चहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी लेकिन दीदी का चहरा गुस्से से तप रहा था वही उनकी आँखों में आंसू था और आवाज भरी रही ,मैं आगे बढकर उनको पकड़ने को हुआ पर फिर एक तडाक दुबारा मेरे गालो में पड़ा ,

‘मत छूना मुझे और मत कहना मुझे दीदी ,तुझे कुछ हो जाता तो ,कैसे जीती मैं दीदी अब पूरी तरह से रो पड़ी और आकर मेरे गले लग गयी मैं उनकी बालो को सहलाने लगा तभी राहुल ने मुझे इशारे से अंदर जाने को कहा ,हमं अंदर आ चुके थे पर दीदी अब भी मुझसे लिपटी थी ,

‘दीदी मैं बिलकुल ठीक हु ना,कुछ नही होगा आपके भाई को जबतक आपका प्यार मेरे साथ है ,दीदी ,ओ दीदी ,’मैंने दीदी के चहरे को उठाया और उनके गालो में एक चुम्बन दे दिया ,उनकी बड़ी बड़ी आँखे लाल हो चुकी थी वही गीली आँखे इतनी प्यारे लग रही थी मैंने उनके आँखों पर अपने होठ रख दिए ,

‘जिसने आपकी जिंदगी को बर्बाद किया आज आपको उसे सजा देनी है ,दीदी उसका चहरा देख शायद आप को यकीं ना हो पर हा इसी आदमी ने आपकी और ना जाने कितनी लडकियों की जिंदगी से खेला है ,और दीदी आप अपने भाई की सोच रही हो ,और उन सभी लडकियों का क्या वो भी तो किसी ना किसी की बहन होंगी ना ,’

‘मुझे तुझपर गर्व है मेरे भाई ,भगवान् ऐसा भाई सबको दे ,और ये कोई भी हो इसे तो मैं अपने हाथो से मरूंगी ‘दीदी ने मेरे गालो को हाथो से सहलाया और उस शख्स के तरफ मुड़ी डॉ चुतिया उस शख्स के चहरे से नकाब उठाते है उसके मुह में अभी भी वो कपडा ठूसा हुआ होता है ,उसे देखकर दीदी के चहरे के भाव पूरी तरह से बदल गए उनके पैर लड़खड़ाने लगे ,वो गिरते हुए बची मैंने दौड़कर उन्हें सम्हाला वो उस शख्स के पास लड़खड़ाते हुए जाती है और उसके पैरो में बैठ जाती है ,

‘मनीष ….’दीदी के आवाज में एक रुदन था जैसे किसी ने दिल ही चिर दिया हो ,उनकी आवाज सुनकर मेरे जेहन से एक हाय निकल गयी ,

‘आखिर क्यों ,इतना बड़ा धोखा प्यार का नाटक क्यों,’दीदी रोने लगी है और मनीष के चहरे में एक हसी के भाव है …

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