मैं अपने कमरे में लेपी लिए मशगूल था,तभी दीदी वहा आई,उन्होंने मेरे बिस्तर पर अपने को फैलाते हुए अपना मोबाईल निकला और मैसेज पड़ने लगी कभी कभी उनकी हसी मुझे सुनाई देती थी मैंने भी मुड कर उन्हें देखा ,
‘क्या हुआ दि किससे बाते हो रही है,’
‘कुछ नहीं यार मेरे कॉलेज वाला ग्रुप है,साले सभी पागल हो गए है,जिसे देखो प्यार मोहोब्बत आशिकी किये जा रहा है,पढाई की तो कोई बात ही नहीं करता,’मैं दि की बात सुनकर हस पड़ा,
‘क्या दी आप तो ऐसे बोल रही हो जैसे आप पढाई की बाते पसंद करती हो,’दि भी हस पड़ी,
‘फिर भी यार ,और बहुत सी चीजे है दुनिया में,अच्छा एक बात बता अगर मेरा कोई बॉयफ्रेंड हो तो तुझे कोई प्रोब्लम तो नहीं होगी,’मैं आश्चर्य से दी को देखा उनके होठो में एक शरारती मुस्कान थी पर मैं थोडा सीरियस था,
‘दी आप की जो खुसी हो वो करो इसमें मुझे कोई प्रोब्लम तो नहीं है,पर आप तो जानती हो ना आजकल के लड़के कैसे है,’दीदी ने मुझे अपने पास बुलाया और अपनी गोद में सोने का इशारा किया मैं उनकी गोद में सर रख लेट गया,वो मेरे बालो को सहलाने लगी,
‘हा भाई जानती हु पर मेरे भाई जैसे लड़के भी तो है ना,देख अभी तो मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है पर मनीष मुझे पसंद करता है,और उसने मुझे आज ही प्रपोस किया है ,तुम्हे क्या लगता है मनीष के बारे में ,’ मनीष का नाम सुन मैंने राहत की साँस ली,मैं जनता था वो बहुत सी सीधा साधा लड़का है और सालो से दीदी का दोस्त भी है,
‘मनीष गुड चॉइस दि पर उस डरपोक को इतनी हिम्मत कैसे आ गयी की आपको प्रपोस कर दे,’दीदी खिलखिला के हस पड़ी
‘अरे सब हमारे राहुल का कारनामा है उसी ने उकसाया है उसे,नहीं तो वो बेचारा सालो से बस दिल में रखे था,’ ‘साला राहुल इतना बड़ा कांड कर दिया और मुझे बताया भी नहीं साले को आने दो कल उसकी खबर लेता हु,’दीदी और मैं हस पड़े और दी ने मुझे एक प्यारी सी पप्पी गालो में रसीद की,
‘आकाश एक बात बोलू,राहुल का स्वभाव कैसा भी हो पर वो हमें बहुत प्यार करता है,’
‘जनता हु दी,मुझे दुःख है की जो काम आपके लिए मुझे करना था उसे उसने कर दिया,शायद मुझे पहले मनीष को हिम्मत देनी थी पर मैं आपके दिल का हाल ना समझ पाया और राहुल ने समझ लिया,’दी बड़े प्यार से मुझे देखे जा रही थी,
‘नहीं बही तेरी कोई गलती नहीं है असल में मुझे भी ये कन्फर्म नहीं था की मैं उसे प्यार करती हु की नहीं अभी भी नहीं हु बस हम अच्छे दोस्त है,और मैं अभी भी आगे नहीं बदना चाहती अभी मैंने उसे हां नहीं कहा है पर मुझे ख़ुशी है की उसने कम से कम अपने दिल की बात तो कह दि,’
तभी दि के मोबाईल में एक मेसेज आया और दीदी के चहरे के भाव में बदलाव सा महसूस किया, ‘क्या हुआ आप गुस्से में क्यों लग रही हो ‘
‘कुछ नहीं बस ऐसे ही,’और दीदी ने जल्दी से मोबाईल पे उंगली चलाये,सायद वो मेसेज को मिटा रही थी,मेरी दीदी ने आजतक कोई बात मुझसे नहीं छिपाई थी यहाँ तक की कोन उन्हें परेशां करता है से कोई छेड़ दे तो भी वो हमें इसे मजे लेकर बताती थी पर आज क्या हुआ,
‘दि आप मुझसे कुछ छिपा रही है,’दि थोडी हडबडा सी गयी जैसे सभी सच बोलने वालो के साथ झूठ बोलने पर होता है, ‘नहीं भाई कुछ भी तो नहीं ‘ तू सोजा भाई’
‘ठीक है पर आज आप मेरे साथ ही सोना’ दीदी के चहरे में डर साफ़ दिखाई दे रहा था,
‘नहीं भाई आज थोडा काम है कॉलेज का कर के ही सो पाऊँगी ,तू सो जा मैं आकर फिर यही सो जाउंगी ,’दीदी ने कभी मुझे मना नहीं किया था साफ़ था की दाल में कुछ काला है,
‘तो यही आके करो काम मैं कुछ नहीं जनता आप मेरे पास की रहोगी,’दीदी के चहरे पे मजबूरी के भाव आ गए वो मेरी बात को टाल नहीं सकती थी कभी टाला ही नहीं था,
‘ठीक है मैं अपना लेपी ले के आती हु,’थोड़ी देर बाद वो लेपी ले कर आई और अपना काम करने लगी,मैं उनको पकड़ के उनके बाजु में सो गया और सोचने लगा आखिर बात क्या होगी की दीदी मुझसे झूट बोलने लगी….

