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उसी रात

राहुल आज भी प्रीति के घर में था ,प्रीति राहुल के गोद में अपना सर रखे सोयी हुई थी ,राहुल बिस्तर से सटे दिवार से अपने को टिकाये हुए फ़ैला था और प्रीति के बालो को सहला रहा था,

‘राहुल जानते हो आज तुमने मुझे जन्नत दे दि,मुझे आज पता चला की मुझे प्यार करने वाले इतने लोग है ,तुम हो दीदी है ,आकाश है,.आकाश है ये उसने बड़े धीरे से कहा और शर्मा गयी जिसे राहुल ने भांप लिया ,उसने उसके प्यारे चहरे को देखा ,और निचे झुक कर एक प्यारी सी पप्पी उसके गालो में रशीद कर दि,..

‘तू जानती है ना की आकाश कभी तेरा नहीं हो सकता,वो तुझे दोस्त मानता है और उसके लिए दोस्त का मतलब दोस्त ही होता है,तू उससे जादा आशा मत कर बैठना मैं नहीं चाहता की तेरा दिल टूट जाए,’

‘मैं जानती हु यार पर आज जब उसने मुझे इतने प्यार से पकड़ा तो मैं उसकी और भी दीवानी हो गयी,कितना प्यारा है ना आकाश,’प्रीति ने अपना चहरा उठा कर राहुल के होठो को चूम लिया,

‘हा अब आकाश ही तो तुझे प्यारा लगेगा,मेरा पत्ता तो अब कट ‘राहुल के चहरे पर एक मुस्कान फ़ैल गयी और उसने प्रीति के गालो को हलके से दबा दिया ,

‘चल अब रात हो रही है मैं चलता हु ,’राहुल प्रीति को हटा के जाने लगा ,प्रीति ने उसका हाथ पकड़ लिया ,वो अभी भी उसी सलवार में थी ,

‘तू तो मेरी जान है पागल ,और जा ना आज मेरे साथ,घर में बोल देना की आकाश ने रोक लिया,’प्रीति के वक्ष उसके कुर्ती में बड़े आकर्षक लग रहे थे जिसपर राहुल की निगाह चले जाती है और वो उसे वह से हटाने में असमर्थ हो जाता है ,प्रीति को भी इसका आभास हो गया और उसने अपने होठो पर एक स्माइल ला कर अपना दुपट्टा निकल कर फेक दिया ,अब उसके आकर पूरी तरह से राहुल के सामने थे ,उसका गोरापन हलके बहार निकले हुए भागो से पता चल रहा था,और उसका विसाल आकार बीच की खाई से मापा जा सकता था ,अपनी सबसे प्यारी दोस्त को इस हाल में देख राहुल थोडा सकुचा गया ,अभी अभी तो इसे इस दलदल से निकालने की सोच रहे थे की ये अपने यौवन का जादू मुझपर ही चलाने लगी ,राहुल ने गहरी साँसे ली,

‘रुक कर क्या करूँगा,’उसने बड़ी मुस्किल से दिल को सम्हाल कर नजरे हटाते हुए कहा,प्रीति बिस्तर से उठती है और राहुल के पास आ जाती है ,उसके होठ राहुल के होठो से बस छूने वाले ही थे और उसकी सांसे राहुल की सांसो को बेकाबू कर रही थी,

‘जो तुम चाहो मैंने कभी तुम्हे मन किया है क्या,’राहुल के चहरे पर एक हसी आ गयी ,

‘अभी तो तू सुधरने वाली थी ,आकाश को अपना सबकुछ मानने वाली थी और अभी तू मुझे ये कह रही है ,’प्रीति के चहरे पर एक कातिलाना मुस्कान थी ,

‘आकाश तो मैं अपना सबकुछ मानती ही हु ,और मेरे जिस्म हो किसी ने भी भोगा हो ,मैंने मन में हमेशा आकाश का ही चहरा रखा है (ये बात तो राहुल भी जानता था,)और सुधरने की बात है तो इतनी पुरानी आदत है इतनी जल्दी कैसे छुट जायेगी ,और तुम क्या चाहते हो मैं किसी और के पास चली जाऊ,अब तो मैं अपना जिस्म सिर्फ 3 लोगो को दूंगी ,’राहुल को उसकी बात सही लगी पर 3 लोग का नाम सुन उसने अपनी आँखे चढ़ा दि ,

‘तुम्हे ,आकाश को अगर वो लेना चाहे तो और अपने पति को इडियट क्या हमेशा बिन बियाही रहूंगी ,’प्रीति की शरारत से राहुल का पसोपेज जाता रहा उसने अपनी निगाहे अब बिना किसी रोक टोक के उसके स्तनों पर टिका दि और धीरे से उसके होठो को अपने होठो में समां लिया ,

‘ऊह्ह ऊह्ह ,’राहुल ने अपने हाथो को आगे बढाकर उसके स्तनों पर जमाया और हलके से उसे मसलना शुरू किया

‘हम्म्म उह्ह राहुल रुको ना मैं कपडे बदलकर आती हु,’प्रीति ने थोडा कश्मसाते हुए एक अंगड़ाई राहुल के बांहों में ली,

‘तू इतनी सुन्दर मुझे आज तक कभी नहीं लगी ,तुम अब सलवार ही पहना करो और ऐसे ही प्यारी सी बिंदी लगाया कर,’

‘अआह्ह्ह राहुल राहुल ‘प्रीति राहुल से अपने को सटा लेती है राहुल ने उसके नितम्भो को दबाया था,और इससे वो विचलित हो गयी थी ,राहुल ने उसे अपनी बांहों में भरकर उसे बिस्तर में पटक दिया और खुद उसके ऊपर आ गया ,प्रीति के चहरे पर एक मादक मुस्कान थी ,

‘आई लव यू राहुल ,’प्रीति राहुल के गालो को अपने हाथो से सहलाया ,

‘चल झूटी,’

‘सच में यू आर बेस्ट ‘

‘अच्छा और आकाश ‘

‘वो तो …एक सपना सा है ना अच्छा ना बुरा बस मेरा एक सपना जिसे मैं सभी में जीना चाहती हु,’प्रीति की बातो में एक दर्द उतर आया जो राहुल को बिलकुल पसंद नहीं आया ,

‘चल तो फिर आज उस सपने को फिर जी ले,आँखे बंद कर (राहुल ने अपने हाथो से उसकी आंखे बंद की )और अपने सच्चे प्यार से प्यार कर ‘प्रीति ने अपने आँखों में आकाश की तस्वीर ला ली,राहुल ने अपने हाथो का कमाल दिखाना शुरू किया उसके बिखरे बालो को उसके कंधे से हटाया और अपने हाथो से उसके स्तनों हो हलके से सहलाकर उसके कपडे में से बहार झाकते भाग को अपने होठो से चाटना शुरू कर दिया ,उसने हलके से वह दांतों को गडाया ,

‘आअह्ह्ह्ह मेरी जान ‘प्रीति ने अपने हाथो से राहुल के सर को जकड लिए ,’मेरी जान ऊह्ह आह्ह आह्ह ‘

राहुल अब उसे चूसने लगा और थोडा जोर लगा के उसकी कुर्ती से बाहर निकलने की कोशिस की ,

‘रुको मैं जीप खोल देती हु,’प्रीति ने अपने को उठाने की कोशिस की मगर राहुल ने उसे फिर से पटक दिया

‘कहा ना आँखे बंद जो करना है वो मैं कर लूँगा ,’प्रीति के चहरे पर एक संतोष और मादकता की मुस्कान थी ,उसने फिर से अपनी आँखे बंद की ,और अपने हाथो को राहुल के सर पर लगा दिया ,राहुल उसके कानो के पास जाकर फुसफुसाया,

‘प्रीति मेरी जान मैं आकाश हु ,तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा आकाश मुझे प्यार करो ,करोगी ना ‘प्रीति मानो सम्मोहन ने चली गयी थी ,उसने अपने हाथो को बहुत दबाव से राहुल के सर पर जकड़ा ,राहुल ने उसके गालो को चुसना शुरू कर दिया ,

‘हां मेरी जान मैं तुम्हे सब कुछ दूंगी ,सब कुछ ,आपका ही है ना ,प्लीज् ले लो ना जान ,’प्रीति के आँखों में आंसुओ की कुछ धारे थी जिसे राहुल ने अपनी जीभ से चाट लिए .

‘मैं आज तुम्हे अपना बना लूँगा ,आज तुम्हे अपने प्यार से भिगोऊंगा ,तुम्हे इतना प्यार दूंगा की तुम दुनिया को भूल जाओगी,’राहुल ने अपने होठो को उसके होठो में लाकर टिका दिया वो बेचैन मछली सी तडफाने लगी और उसके होठो को भरपूर ताकत से चूसने लगी ,दोनों के जीभ आपस में टकराते और उनकी थूक एक दुसरे में मिलाने लगी राहुल की आँखे भी बंद हो गयी और उसे जो चहरा दिखा उससे उसका दिल जोरो से धड़कने लगा ,पर उसने अपनी किस तोड़ी नहीं उसके सामने नेहा का चहरा था उसे लग रहा था की यो उसे किस कर रहा है ,किस टूटने पर उसने अपनी आँखे खोली उसके सामने प्यारी सी एक लड़की अपना सब कुछ बिछाए पड़ी थी उसकी माथे की प्यारी सी छोटी सी बिंदिया उसे नेहा की याद दिलाने लगी और उसका सलवार से आती स्त्रियत्व की गंध उसे किसी दुसरे ही जहाँ में ले जाने लगी उसने अपनी आँखे फिर बंद की पर उसे अब भी नेहा का मुस्काता चहरा दिखा उसे परमिंदर और नेहा के बीच के सभी दृश्य याद आ गए और उसका लिंग अपनी पूरी जोर पर फुंकर मरने लगा उसने उसे शांति देने के लिए प्रीति के टांगो को खोला और कपडे के ऊपर से ही जोर से रगड़ दिया ,उसका तनाव इतना था की दोनों ही काप गए …

‘आह्ह्ह आकाश ,’….’आह्ह्ह दीदी …’दोनों के स्वर एक साथ ही निकले प्रीति ने फिर कुछ समझ कर अपनी आँखे खोली और राहुल को अपने गलती का अहसास हुआ ,वो उसे प्रश्नवाचक दृष्टी से देख रही थी ,पर राहुल के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,

‘तू अपने सपने में जी और मुझे अपने सपने में जीने दे,,,,’राहुल की बात से प्रीति का चहरा भी खिल गया वो एक बड़ी मुस्कान के साथ फिर से अपनी आँखे बंद कर ली और राहुल को अपने पास खीचते हुए उसके कानो में बोली ..

‘आजा भाई मुझे अपना बना ले मैं तेरी ही हु,’राहुल अपनी वासना में अब अँधा हो चूका था उसके कानो में ये बात जाते ही वो पागलो जैसे प्रीति को चूमना शुरू कर दिया,उसने अपने हाथो से उसके भरपुर निताम्भो को मसलना शुरू कर दिया ,

‘अआह्ह्ह राहुल आअह्ह्ह्ह,’

‘आआह्ह्ह ऊउम्म मेरी प्यारी दीदी ऊउम्म्माअ ऊउम्म्मा ‘राहुल ने उसके कंधे पर पड़े कपडे को फाड़ने जैसा खीचा जिससे प्रीति के कंधे का भाग नग्न हो गया ,राहुल ने अपनी थूक उसपर गिरा दि और उसे चाटने लगा ,प्रीति आनद के समुन्दर में तैर रही थी ,वो अपने सपनो के शहजादे को अपनी इज्जत सौपने के मजे में खोयी थी ,राहुल ने अपने हाथ पीछे पीछे कर कुर्ती की चैन खोल दि और बड़े उतावले होकर उसे निकल फेका प्रीति अब भी अपने ब्रा में थी जो राहुल को बिल्किल भी रास नहीं आ रहा था ,उसने तुरंत उसे निकल कर फेक दिया और उसके स्तनों को अपने हाथो और मुह में भर मसलने और चूसने लगा ,

‘आअह्ह्ह्ह हा हा आकाश मेरी जान ,मेरे प्यार ,मेरी जाआआआन आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ‘प्रीति की सिस्कारिया पुरे रूम में गूज गयी थी ,राहुल उनपर थूक रहा था फिर उसे चांट रहा था,उसके निप्पलो से जन्मो के प्यासे जैसा पि रहा था जैसे अभी उसमे से अमृत की धार निकल पड़ेगी ,

‘आह्ह्ह दीदी वाह ,कितने प्यारे है ऊम्म्म्म ,’

‘हां बही तेरे ही है ,तेरे लिए ही इनमे दूध भरा है चूस ले इसे ,’प्रीति का मादक स्वर राहुल के लिंग के नाशो को बर्दास्त नहीं हो पा रहा था,वो इतने तने हुए थे की जैसे अभी ही फट जायेंगे,जब भी प्रीति उसे भाई बोलती वो खुद को और जादा तना हुआ पाता था,

उसने अपने होठो को निचे लाते हुए उसकी गोरी गहरी नाभि पर अपने थूक छोड़ दिए उसके चूसने से पूरा पेट गिला हो चला था ,प्रीति अपने हाथो से उसका सर दबाये जा रही थी और और वो ‘दीदी दीदी मेरी प्यारी दीदी मुझे प्यार दे दो दीदी प्लीज दीदी ,’

वही प्रीति ‘आकाश मेरा सबकुछ तुम्हारा है ,आआह्ह प्लीज् प्लीज् आआह्ह्ह्ह ले लूऊऊऊओ इस्ससे ‘राहुल को जब अपने तनाव बर्दास्त नहीं हुआ तो उसने फिर प्रीति के होठो को अपने होठो में भर लिया और अपना लिंग उसकी योनी में पुरे ताकत से दबाने लगा उसे इतना भी होश ना रहा की अभी निचे के वस्त्र निकलने को बाकि है,दोनों अपनी आँखे मूंदे अपने सपनो में खोये हुए थे जब भी दोनों को उनके सपनो का चहरा स्पष्ट दिखाई पड़ता वो वासना और प्यार के मिलेजुले आग में जल उठाते थे ,प्रीति की योनी का गिलापन उसके अंतःवस्त्र तथा सलवार को पार करता बहार तक आ चूका था ,तभी राहुल को उस गिलेपन का आभास हुआ और उसने अपने सभी कपडे एक ही झटके में निकल दिए और उसके ऊपर पसर गया अब उसे ये गीलापन अपने लिंग पर अहसास हुआ उसने एक जोर का झटका मारा की प्रीति चुहक पड़ी

 

”प्लीज् अंदर कर सो ना ,’राहुल कपडे उतरने में लगे वक्त से थोडा सम्हाल चूका था ,उसे ग्लानी के भाव घेरने ही वाले थे की प्रीति ने अपनी आँखे खोली और हाथ बढाकर उसकी आँखे बंद कर अपने पास खीचा और उसके कानो में कहा …

‘प्लीज् भाई अंदर करो ना अपनी दीदी की चूत में डालो जल्दी ..’प्रीति के इस हथियार ने राहुल को फिर से बेकाबू कर दिया वो अपनी आंखे बंद कर अपने हाथ निचे ले आया और उसके नाड़े को खोलकर सलवार को उसकी पेंटी सहित उतर फेका अभी भी दोनों की आँखे बंद थी और राहुल का हाथ उसकी योनी को सहला रहे थे दोनों के शारीर की तपन एक दूजे में मिल जा रही थी और सांसे आपस में ही घुल जा रही थी ,योनी इतनी भीग चुकी थी की राहुल का हाथ गिला हो गया उसने देर ना करते हुए अपने लिंग को आराम देने की सोची जो फूलकर फटने वाला था,उसने अपने होठो को प्रीति के होठो के पास लाया ,दीदी मेरा प्यार लो ,

‘हां मेरी जान मेरे भाई ,मेरे आकाश मेरी जान ….’वो बोलते ही रही थी की राहुल ने उसकी छेद में अपना लिंग धीरे से सरका दिया ,उस अपार आनद में राहुल को सिर्फ और सिर्फ नेहा का मादकता से खिला चहरा ही दिखाई दे रहा था वही प्रीति ने एक लम्बी आह बरी जब तक की लिंग को उसने अपने में पूरा नहीं समां लिया ,,,दोनों दुनिया को भूल चुके थे ये भी की वो क्या कर रहे थे पूरी तरह हुए इस मिलन में बस मिलन ही बचा रह गया था ,मिलने वाले खो चुके थे ..ना जाने कब तक वो एक दूसरे के बहो में कसे हुए अपने आप को सामने की कोशिस करते रहे और राहुल ने अपनी कमर हलके हलके हिलानी सुरु कर दि,

‘आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आआअ काआआ शाआआ आअह्ह्ह्ह ‘प्रीति हर धक्के में आकाश का नाम जप रही थी उसकी आवाज इतनी भरी हो चुकी थी उसके मुह से बहार भी मुस्किल से आ रही थी दोनों खोये थे कुछ पता ही नहीं था जो था वो बस उन्माद था ख़ुशी थी ,प्यार और वासना की उचाईया थी ,आनद था …

‘दीदी आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् दीदी आअह्ह्ह्ह ह्हूउम्म्म्म हूमम्म ‘राहुल की सांसे भी भरी थी और आंखे बंद जब लिंग योनी की दीवारों में घुसता तो उससे उठाने वाला अपरिमित आनद दोनों को डूबा चूका था ,योनी का गीलापन लिंग को भिगोये हुए उसमे सामने की कोसिस में था वही योनी की दीवारे अपने को फैलाती सिकोड़ती हुई राहुल को अपने अन्दर और जादा तेजी से घुसाने का आमंत्रण दे रही थी ,लिंग और भी फूलने लगा था,और धक्के जोर पकड़ने हो थे

‘आआअ कक्क श ‘प्रीति ने भरी चीख मारी और अपने नाखूनों को राहुल के छाती पर पूरी तरह से गडा दिए …राहुल अब और भी जोर से धक्के मारने लगा था ,दोनों के कामरस के मिलन से एक लयबद्ध ध्वनी पुरे कमरे में फ़ैल रही थी और चप चप चप की आवाजो के बीच प्रीति की सिसकी गुमने लगी वो फिर पूरी तरह से तैयार थी अपने महबूब को अपने शारीर का एक एक कतरा देना चाहती थी ,पूरी तरह से उसकी होना चाहती थी ,

‘दीदी दीदी दीदी दीदी आअह्ह्ह्ह नहीं नहीं दीदी दीदी ‘राहुल ने अपनी पूरी ताकत हर धक्को में लगा दि ,लेकिन उसका लिंग अपने वीर्य को छोड़ने को तैयार ही नहीं था जिससे वो पागल सा हो गया था वो प्रीति को काटने लगा उसने उसके सतनो जो अपने दांतों से दबाया और पुरे ताकत से उन्हें गडा दिया ,उसके मास की मादकता से राहुल के दांतों को इतना सकून मिला की वो उसके कंधे पर अपने दांतों को गडा दिए और जोर जोर से धक्के मरने लगा ,प्रीति को मानो दर्द का आभास ही नहीं हो रहा था वो अपने नाखूनों से राहुल के पीठ पर कई निशान बना चुकी थी और उसकी प्यास जब चरम में थी तो उसने राहुल के स्तनों को काट लिया नाखूनों से पूरा पीठ ही छिल चुकी थी जिससे खून भी बहने लगी थी वही हाल प्रीति के जिस्म का भी था राहुल इतनी मजबूती से दांत गडाए था की खून का रिसाव शुरू हूँ गया पर परवाह किसे थी ,राहुल पागलो जैसे धक्के लगा रहा था और दीदी दीदी चिल्ला रहा था वही प्रीति आकाश की माला जप रही थी…

आख़िरकार वो क्षण आया जब दोनों प्यार की मंजिल पर पहुचे ऐसे तो प्रीति ने वो मंजिल दो बार देख ली थी पर ये अंतिम और निर्णायक था …

‘दीदी दि दि दि दि ईईईईईईईईईईइ ‘राहुल के चिल्लाने से पूरा कमरा गूंज गया और उसने अपने निर्णायक धक्को से अपना पूरा वीर्य प्रीति के अंदर छोड़ दिया वही प्रीति उस वीर्य के गर्म अहसास से एक बार फिर अपने शिखर पर पहुच गयी और दबे और बेबस सी आवाज में आकाश कहती हुई अपने नाखुनो को राहुल की कमर में गडा दिया और कामरस की फुहारे छोड़ने लगी….

जैसे एक तूफान आया और शांत हो गया …सब कुछ शांत हो चूका था ,,,योनी में लिंग फसा हुआ अपने ही वीर्य और योनी के कामरस से भीगा मुरझा रहा था,सांसे अब भी उखड़ी हुई थी पर किसी को फ़िक्र नहीं थी की उसे सम्हाले ,,,दोनों ही निढल हो चुके थे और किसी को उठाने की हिम्मत भी नहीं थी ……

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