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दिलजले #9

मैंने उस बुजुर्ग को देखा उम्र में कोई सत्तर बरस का रहा होगा पर जिस मजबूती से उसने उस लाठी को थाम रखा था मुझे हंसी सी आ गयी पर कंट्रोल किया और पूछा- तुम कौन हो बाबा

“मेरा नाम भूषण है औरअब मैं चोकिदारी करता हूँ हवेली के आस पास ” उसने कहा

मैं- अच्छा भूषण बाबा, एक बात बता ये सुनसान इमारत की चोकिदारी करने की क्या जरुरत आन पड़ी भला, आस पास के हालात देख कर लगता तो नहीं की बरसो से किसी ने कदम भी रखा होगा यहाँ पर.

भूषण- तुझे क्या मतलब है इस बात से, जहाँ से आया है लौट जा वर्ना ठीक नहीं होगा.

मैं- अंजाम की परवाह नहीं मुझे आगाज देख कर लगने लगा है की कुछ तो बात है

भूषण- कैसी बात

मैं- बस इतना जानना चाहता हूँ की ये हवेली किसकी है

भूषण- ठाकुर शौर्य सिंह मालिक है इसके

मैं- कहाँ मिलेंगे ठाकुर साहब

भूषण- कहीं नहीं

मैं- क्या मतलब

भूषण- सोलह साल पहले हुए एक हादसे की वजह से ठाकुर साहब कोमा में है .

मेरा दिमाग सुन्न सा हो गया ये सुन कर एक इन्सान पिछले सोलह साल से बिस्तर पर पड़ा मौत का इंतज़ार कर रहा है और फिर भी इलाके में उसका इतना रसूख है .

मैं- तो यहाँ पर अब कोई नहीं रहता

अगले ही पल मुझे मेरी मुर्खता का अहसास हो गया क्योंकि ये बात तो कोई भी जान जाता इस सुनसान हवेली को देख कर.

मैंने नोटों की गड्डी निकाल कर भूषण के हाथ में दी और बोला-रख लो बाबा इसे.

भूषण के झुर्रियो भरे चेहरे पर तनाव आ गया और बोला- पैंतालीस साल से नौकर था मैं ठाकुर साहब का चंद नोटों में इमान खरीद लेगा मेरा लड़के.

मैं- नौकर था बाबा, अब तो नहीं है न रख ले

भूषण मुझे देखता रह गया उसके कांपते हाथो के साथ उसके ईमान को भी डोलते हुए देखा मैंने.मैं इतना तो जान गया था की भूषण मेरे लिए काम का होगा.

सांझ ढलने लगी थी , एक नजर जी भर कर हवेली को देखा और मैं वापिस मुड गया . बापू ने मरते वक्त हवेली ही क्यों कहा और ठाकुर शौर्य सिंह के साथ ऐसा क्या हुआ था की वो सोलह साल से जिन्दा लाश बन कर रह गया था . सबसे महत्वपूर्ण बात की मेरा इन सब लोगो से क्या लेना देना था . खैर, अपनी तलाश के लिए मुझे इस गाँव में रुकने की कोई जगह चाहिए थी और जैसी मेरी मुलाकात जय सिंह के साथ हुई थी उसके हिसाब से कोई मुझे रुकने देगा ये मुमकिन होने ही नहीं वाला था .

मैंने गाडी अपने गाँव की तरफ घुमा ली गाँव से बाहर आया ही था की एक जीप ने मेरी गाड़ी का रास्ता रोक लिया.

“इतनी तो जुर्रत नहीं होनी चाहिए लाडले की हमारा दीदार करने आओ और बिना मिले चले जाओ ” चांदनी ने जीप से उतरते हुए कहा

मैं– तेरे लिए ही तो इतनी दूर चला आया लाडली . वो तो तेरा भाई ने बन्दूक तान दी वर्ना उसी समय गले से लगा लेता तुझे लाडली

चांदनी- अच्छा जी इतनी हिम्मत हमारे गाँव में ही हमें गले लगा लोगे.

मैं- तू एक बार कह के तो देख तेरे गाँव में क्या क्या कर दू

वो मुस्कुरा पड़ी.

चांदनी- भैया से पंगा करने की क्या जरूरत थी

मैं- उस चुतिया ने गोली चलाई मेरे ऊपर

चांदनी- चुतिया मत बोल

मैं- अच्छा जी यार चाहे मर जाये पर भैया को चुतिया मत बोल , वैसे तू भी जानती है चुतिया तो है वो

चांदनी-अर्जुन

मैं-ठीक है,

चांदनी- यहाँ क्यों आया

मैं- तेरे लिए

चांदनी फिर मुस्कुरा पड़ी .

मैं- जबसे तुझे देखा है न अब कुछ दीखता ही नहीं

चांदनी- जानता है न मेरा भाई कौन है

मैं-तू हाथ तो थाम कर देख एक बार जान जाएगी अर्जुन कौन है

चांदनी- दिल्लगी करना चाहता है मेरे साथ

मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और उसे अपने सीने से लगाते हुए बोला- पहली नजर में सब हार बैठा हु तुझ पर लाडली, तू एक बार हाँ तो कह कर देख इशक करना है तेरे साथ

चांदनी- अच्छा लाडले, मैंने तो सुना है इश्क की बीमारी का इलाज नहीं मिलता

मैं-किसे चाहिए ये इलाज फिर

चांदनी- नागिन हूँ मैं डस लुंगी मेरा काटा हुआ पानी भी न मांगे

मैंने उसके चेहरे को ऊपर किया और अपने होंठ उसके गुलाबी होंठो से जोड़ दिए जीवन का प्रथम चुम्बन था ये साँस टूटने तक चुसे उसके होंठ और बोला- ले चख लिया जहर तेरा, अब तू जाने और ये जान जाने.

चांदनी ने मेरे सीने में मुक्का मारा और बोली- बदमाश कहीं का.

चांदनी के साथ वक्त का कुछ भी मालूम ही नहीं हुआ अँधेरा चढ़ने लगा था तो मैंने उस से विदा ली और अपने रस्ते बढ़ गया पर किस्मत साली धोकेबाज़ निकली . गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया. मेरे पास दूसरा टायर भी नहीं था , गाँव दूर अब क्या किया जाये मैं सोच ही रहा था ऊपर से अँधेरा चढ़ते जा रहा था की तभी , पीछे से एक आवाज आई.

“क्या हुआ बाबु कोई परेशानी है क्या ”

मैंने मुड कर देखा हाथ में लालटेन लिए…………….

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