दिलजले – Update 5 | Adultery Story

दिलजले - Adultery Story by FrankanstienTheKount
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दिलजले  #5


“भाई तू जो भी है मैं तुझे जानता भी नहीं और तू है की मेरी अमानत लिए घूम रहा है .मजाक करने के लिए तूने सही आदमी नहीं चुना ” मैंने उस से कहा .

वकील- मैं भला तुमसे क्यों मजाक करने लगा. मेरा काम था ये मैंने कर दिया, वैसे तो मैं ये देने दो महीने बाद आता पर क्या है न की मेरी बेटी की शादी होने वाली है और फिर मुझे समय नहीं मिलता सोचा पहले ये काम निपटा दू .

उसने एक पार्सल सा मुझे दिया और मुड गया . कांपते हाथो से उस पार्सल को पकडे मैं सोचता रहा की खोलू या नहीं . एक कोना फाड़ा ही था की तभी गाँव का एक लड़का दौड़ते हुए मेरे पास आया और हांफते हुए बोला- अर्जुन भैया , अभी चलना होगा मेरे साथ

मैं- क्या हुआ और तू घबराया हुआ क्यों है

लड़का- भैया, चलो मेरे साथ

उसके हाव भाव से मेरा मन आशंकित हो उठा . वो मुझे चिकित्सालय लाया जहाँ पर बापू था , खून से लथपथ आधा बदन जला हुआ , दर्द से तडपता हुआ . मेरे तो होश ही उड़ गए . धरती आसमान एक हो गए .समझ ही नहीं आया की हो क्या गया .

“बापूऊऊउ ” दहाड़ मार कर मैं रो पड़ा. उसे अपने सीने से लगाना चाहता था पर डॉक्टर ने मना किया .

“रे बाप है मेरा . कर कुछ डॉक्टर ” सुबकते हुए बोला मैं .

बापू की आँखे मुझे ही देख रही थी , उसने इशारे से मुझे पास आने को कहा .

“किसने किया ये बापू, तू नाम बता बस मैं साली दुनिया जला दूंगा तू इशारा कर ”

बापू ने कस कर मेरा हाथ पकड़ लिया और उठने की कोसिस करने लगा मैंने उसे सहारा दिया .

“हवेली ” बस इतना ही कह सका वो और साँस टूट गयी उसकी . कस कर आँखे मूँद ली मिअने परबहते आंसुओ को रोकने का जोर नहीं था मुझ पर . दहाड़े मार कर रोता रहा मैं अपनी बेबसी पर ये जानते हुए भी वो छोड़ कर जा चूका है मुझे. डॉक्टर को गाली बकते हुए मैं इलाज के लिए कहता रहा रोता रहा.

“संभाल खुद को अर्जुन ” निर्मला ने मुझे अपने आगोश में भरते हुए कहा .

“देख भाभी बापू गया छोड़ कर मुझे , कह न इस से बात करे मुझसे ”मैंने रोते हुए कहा

“शांत हो जा अर्जुन ” निर्मला ने मेरी पीठ थाप्थापते हुए कहा.

पर मैं कैसे शांत हो जाता , ले देकर एक ये ही तो था मेरी दुनिया के नाम पर , कह कर गया था ध्यान रखना जल्दी ही लौट आऊंगा और आया तो ऐसे, इस हाल में .जबसे होश संभाला था बस इसे ही तो देखा था . कहे तो क्या कहे . दिल साला इतना भारी हो गया था की टूट कर बिखर गया था ये अर्जुन.

“सरपंच जी नहीं रहे, अर्जुन नहीं रहे वो ” डॉक्टर की आवाज मेरे कानो में गर्म तेल सी पिघल गयी.

“किसने किया , कौन था वो ” मैंने गुस्से के उस लड़के का कालर पकड़ लिया जो मुझे बुलाने गया था .

लड़का- मैं नहीं जानता भैया, गाँव से थोड़ी दूर पर सरपंच जी की गाड़ी में आग लग गयी. गाड़ी में दो लोग जिन्दा जल गए, सरपंच जी की जीवटता थी की वो इस हालत में खुद यहाँ तक पहुँच सके.

आग की तरह गाँव में खबर फ़ैल गयी की सरपंच जी नहीं रहे. चिता की तैयारी होने लगी.

“अर्जुन, उठ चलना होगा ” लखन ने मेरे काँधे पर हाथ रखते हुए कहा .

कहने को तो मैं पेड़ को उखाड़ सकता था पर अर्थी उठाते समय मेरे हाथ थाम नहीं पाए उसे. कांपते पाँव से बापू को लेकर मैं शमशान की तरफ चल दिया. ढलती शाम की केसरिया रौशनी में बापू की चिता ध्हू धू करके जल उठी. धीरे धीरे करके गाँव वाले अपने अपने घर चले गए . आंच राख में बदलने लगी पर मैं वही बैठा उस तपत को अपने सीने में महसूस करने लगा. उस शाम बापू की चिता ही नहीं जली थी मेरा दिल भी जल गया था . पूरी रात मैं शमशान में बैठा रहा .

“कब तक बैठा रहेगा अर्जुन, जाने वालो के पीछे नहीं जाया जाता. जो रह जाते है उनको तो जीना पड़ता है चल घर चल ” निर्मला ने सुबह मेरा हाथ पकड़ कर वहां से उठाया और मुझे घर ले आई. लोग आते सान्तवना देने लोग जाते . पर जीना तो अकेले को पड़ता है न , इस घर में अब कोई मुझे नालायक कहने वाला नहीं था , अब कोई रोक टोक करने वाला नहीं था .

“कब तक गुमसुम बैठा रहेगा, थोडा बहुत तो खा ले ” निर्मला ने कहा

मैं- भूख नहीं है

निर्मला- ये दुनिया बड़ी जालिम होती है , इसमें जीना बड़ा मुश्किल है . जीने के लिए खाना भी पड़ता है .

मैंने रोटी के टुकड़े तोड़ तो लिए पर गले से निचे उतारना मुश्किल हो गया. लखन और निर्मला दिन रात मेरे साथ रहते पर फिर भी समय मुश्किल था मेरे लिए. कुछ दिन बीत गए थे इस घर का सन्नाटा खाए जा रहा था मुझे. जब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मैं बाबे के दरबार में जाके बैठ गया.

उस से कहना तो बहुत चाहता था, कहा भी बहुत था पर उसने कभी सुनी नहीं मेरी. वो मुझे देख रहा था मैं उसे.

“सुनता क्यों नहीं मेरी तू ” मैंने कहा

“वो जरुर सुनेगा तेरी ” मेरे पास बैठते हुए उसने कहा.

मैंने उसे देखा , उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और बोली- दुःख हुआ जो हुआ सुनकर, कुछ चीजो पर हमारा बस नहीं चलता लाडले . जो चले जाते है फिर लौट कर नहीं आते पर जो रह जाते है उनको तो जीना पड़ता है न यही नियम है . तुझे भी जीना होगा.

हाथ आगे करके उसने मेरे आंसू पोंछे और बोली- कभी खुद को अकेला मत समझना . बाबे ने दुःख दिया है सुख भी ये ही देगा.

मैंने अपना सर उसके काँधे पर टिका दिया और आँखे मूँद ली. तभी मुझे कुछ ध्यान आया…………

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