तेरे प्यार मे… – Update 139 | FrankanstienTheKount

तेरे प्यार मे …. – Adultery Story by FrankanstienTheKount
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#139

रुडा बहन के लंड ने राय साहब के गुरुर को निशाना बनाते हुए बड़ी चालाकी से खेल खेल दिया था .उसने ऐसा माहौल बनाया की जैसे वो खुद पीड़ित है और हमारे चुतिया बाप को तो अपनी शान हद से जायदा प्यारी थी . पर हम भी पक्के वाले थे अगर आज हार जाते तो फिर आशिको की लिस्ट में हमारा कभी जिक्र होता ही नहीं.

“सामाजिक वयवस्था को बनाये रखने के लिए बरसो से कुछ कायदे चले आ रहे थे , जिनमे से एक है की विधवा का पुनर्विवाह नहीं हो सकता. इस से ताना बाना टूटेगा. ” पिताजी ने कहा

मैं- क्या गजब चुतियापा है ये . एक विधवा अपनी मर्जी से अपने जीवन को नहीं संवार सकती पर रसूखदार लोग जब चाहे नियमो की बत्ती बना कर अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकते है , तो राय साहब समाज के ठेकेदार मत बनिए और यदि बनना भी है न तो मैं पूछता हूँ ये न्याय का पुजारी तब कहाँ गया था जब आपका छोटा भाई गाँव की बहन बेटियों को अपने बिस्तर में खींच रहा था . क्या उन औरतो की अपनी मर्जी थी उस काम में. न्याय का बीड़ा उठाने का इतना ही शौक है तो चाचा की खाल क्यों नहीं खींची आपने .

मैं जानता था की पिताजी के पास मेरे सवालो का कोई जवाब नहीं था .

मैं- और ये मादरचोद गाँव वाले जब इनकी बहन बेटियों की इज्जत तार तार हो रही थी तब ये साले किस बिल में छुप गए थे , कहाँ गयी थी इनकी मर्दानगी तब. लाली को लटकाने में ये सब लोग बड़े उतावले थे जैसे की इनको बहादुरी का मेडल मिला हो पर अपनी बेटियों-बहुओ पर अत्याचार करने वाले ठाकुर जरनैल सिंह के सामने इनमे से किसी की जुबान तक नहीं खुली . मैं पूछता हूँ क्यों. जो लोग अपने हक़ के लिए खड़े नहीं हो सकते वो मेरी तक़दीर का फैसला करेंगे इस से गया गुजरा मजाक क्या होगा.

पिताजी- मजाक तो तुमने हमारा बना दिया है

.

मैं- मैंने नहीं आपके कर्मो ने. ये रुडा तो आपका बचपन का दोस्त था न ये ही छोड़ गया आपको और कर्मो की बात यदि ना ही हो तो बेहतर रहेगा , मुखोटे जब उतारे जायेंगे तो नंगे लोगो की कतार में सबसे पहले आप खड़े होंगे पिताजी .

“और आप चौधरी साहब, बहु भी बेटी का ही रूप होती है , माना की निशा महावीर की पत्नी थी पर ये कोई इनाम नहीं था जो महावीर जीत कर लाया हो. निशा को पुरे गाजेबाजे के साथ , विधिवत रूप से ही तो लाये होंगे न आप.मैं आपको बता देना चाहता हूँ की औरत कभी किसी की अमानत नहीं होती. वो गुरुर होती है . आपका बेटा गया क्या इसकी वजह निशा थी , आपका बेटा मरा अपने कर्मो की वजह से , खैर, मुझसे ज्यादा आप अपने बेटे को जानते होंगे. अपने दिल पर हाथ रख कर सोचिये क्या होता अगर निशा आपकी बहु की जगह आपकी बेटी होती. कैसा लगता जब आप उसे रोज विधवा के लिबास में देखते, कितने सपने जो आपने बेटी के लिए देखे थे वो रोज टूटते .” मैंने कहा .

मैं- चौधरी साहब, आप प्रेम के अस्तित्व को अपने झूठे अहंकार के आगे नकार रहे है आप. आप जिसने खुद प्रेम किया. यदि आप आज हमारे विरोध में खड़े है तो माफ़ करना सुनैना अगर आज जिन्दा होती तो धिक्कार ही होता उसे आप पर. मैं समझता हूँ आपकी वेदना को. आप अपनी मोहब्बत को नहीं पा सके. पर आप चाहे तो ये निशा अपना आने वाला जीवन सुख से जी सकती है . बहु समझ कर नहीं बेटी समझ कर इसके सर पर हाथ रख दीजिये. माना की राय साहब और आपके दरमियान बर्फ जमी है पर इसमें हमारा क्या दोष है. मैं सच कहता हूँ निशा से पहली बार मिला तब नहीं जानता था की वो क्या है . और अगर जानता भी न तो भी मैं उसका साथ नहीं छोड़ता .

“ये नहीं मान रही थी , इसने मेरे प्रेम निवेदन को स्वीकार नहीं किया था . ये जानती थी की अगर इसने ऐसा किया तो ये दिन जो हम देख रहे है जरुर आएगा. पर मैंने इसे अपनी माना है . मैंने इस से वादा किया की मैं इसके दामन को खुशियों से भर दूंगा. क्योंकि इसको भी जीने का हक़ है , दुनिया की कोई भी ताकत इसे मुस्कुराने से इसलिए नहीं रोक सकती क्योंकि ये विधवा है , इसी समाज ने क्या इसे जलील नहीं किया ताने नहीं मारे डाकन कह के , आज मैं कहता हूँ की ये डाकन नहीं है न थी . आप लोग अपने झूठे अहंकार के लिए हमें मरवा भी देंगे न तो हमारी चिता से उठता धुंआ आपकी नाकामी का ही होगा. क्योंकि आप सब जानते है की मैं सच कह रहा हूँ , चौधरी साहब निशा का हाथ मेरे हाथ में हक़ से दीजिये . उसे अपना आशीर्वाद दीजिये आप केवल महावीर के ही बाप नहीं थे, निशा के भी पिता है . अपने दर्जे को आज इतना ऊँचा कर दीजिये की फिर कभी कोई बहु और बेटी में फर्क ना कर पाए. ” मैंने कहा.

“कबीर सही कह रहा है , ” नंदिनी भाभी ने हमारा समर्थन किया.

भाभी- फूफा, तोड़ दो ये रीत पुराणी , आने वाली पीढ़ी को साँस लेने के लिए खुली हवा दो. आप लोग समाज में मोजिज लोग है आप समाज को नयी दिशा दिखायेंगे तो आपके लोग भी उसी रस्ते पर चलेगे. आपको सुनैना की कसम. आपको उस मोहब्बत की कसम जो आपने कभी की थी , उस समय आप ज़माने की बंदिशों को तोड़ नहीं पाए थे आज वक्त ने आपको फिर से ये मौका दिया है इन बच्चो को नया जीवन देकर आप अपने अतीत को इनमे जिन्दा कर सकते है .

चौधरी रुडा की आँखों से आंसू बह निकले. उसने अपनी पगड़ी उतारी और निशा के सर पर रख दी. ये एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम था जो आने वाले समय में बहुत दिनों तक याद रखा जाने वाला था . एक व्यर्थ की रुढ़िवादी परम्परा को तोड़ दिया गया था आज.

रुडा- हम सब से गलतिया होती है पर इन्सान वहीँ होता है जो गलतियों को सुधारने की हिम्मत रखे , आज एक गलती को सुधार दिया गया है आज के बाद किसी भी विधवा को डाकन नहीं कहा जायेगा. उसे अपनी जिन्दगी का पूर्ण अधिकार होगा.दोष हमारे विचारो का है हमारी दकियानूसी सोच का है पर अब ये सोच बदली जायेगी. निशा मेरी बच्ची कभी तुझे बड़े अरमानो से बहु बनाकर लाया था आज उतने ही अरमानो से तुझे बेटी बना कर नए जीवन की शुभकामनाये देता हूँ.इश्वर तेरे दामन को तमाम रौनके दे. तू सदा सलामत रहे खुश रहे.

हम दोनों रुडा के गले लग गए . धीरे धीरे मजमा खत्म हो गया . राय साहब के पास कहने को कुछ नहीं था . मैंने अंजू से चाय के लिए कहा और निशा के साथ चाची के चबूतरे पर बैठ गया . वो बस मुझे ही देखे जा रही थी

मैं- इस तरह मत देख मुझे मेरी जान

निशा- मुझे हक़ है

उसने अपना सर मेरे काँधे पर टिका दिया . हम दोनों ढलती शाम को देखने लगे इस बात से बेखबर की इस शाम के बाद एक रात भी आनी बाकी थी…………….

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