तेरे प्यार मे… – Update 128 | FrankanstienTheKount

तेरे प्यार मे …. – Adultery Story by FrankanstienTheKount
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#128


भैया- वो हुआ जो नहीं होना चाहिए था . पिताजी और चाचा में तल्खी इतनी बढ़ गयी थी की चाचा ने घर आना छोड़ दिया था . न जाने वो कहाँ गायब रहता . मैंने तहकीकात की मालूम हुआ की वो रमा के पास भी नहीं जाता उसने कविता से भी नाता तोड़ लिया था . कभी कभी वो कुवे पर आता. न जाने किस परेशानी में डूबा था वो . मेरे लिए बस ये ही एक समस्या नहीं थी ,एक और मुसीबत थी जो कैसे हल करनी है मैं बिलकुल नहीं जानता था वो मुसीबत थी महावीर .

मैं- कैसे भैया

भैया- वो पहले जैसा नहीं था वो अपने साथ ऐसी मुसीबत ले आया था जो सब कुछ तबाह करने वाली थी . महावीर ही वो आदमखोर था जिसके पंजो के निशान तुमने तालाब के छिपे कमरे में देखे थे . मेरा अजीज दोस्त अपने साथ एक ऐसा श्राप लेकर आया था . देहरादून के जंगलो में उसे न जाने किसने काटा . पर उसका असर बहुत हुआ महावीर पर. गाँव वालो पर इतनी दहशत कभी नहीं थी , हर कोई डरा हुआ था मैने और परकाश ने निर्णय लिया की उस आदमखोर को हम पकड़ कर रहेंगे ऐसे ही एक रात को मेरा सामना उस आदमखोर से इसी जंगल में हुआ मेरे सामने उसने एक हिरन मारा था पर मुझ पर हमला नहीं किया इस बात ने मूझे बहुत सोचने पर मजबूर कर दिया . जैसा तुमने नंदिनी के बारे में महसूस किया था ठीक वैसा ही .

धीरे धीरे उसने मुझसे मिलना छोड़ दिया. अकेला ही रहता वो पर दोस्ती ये ही तो होती है , एक शाम उसने मुझसे कहा की मैं उसे मार दू. ये सुन कर मैं हैरान रह गया . पूछा उस से की क्यों कहा उसने ऐसा तब उसने मुझे बताया की क्यों परेशान है वो . उस वक्त मेरा हाल भी ऐसा ही था जैसा तुम्हारा आजकल है . पर दोस्ती यही तो होती है की मुश्किल वक्त में अपने साथी को ना छोड़े . मैंने महावीर को पूरी जिम्मेदारी ली . वो खंडहर मुझे बहुत प्रिय था , उसकी ख़ामोशी मुझे सकून देती थी . मैं महावीर को चांदनी रात में वहां पर बंद कर देता था और सुबह ले आता था . सब ठीक होने लगा था ऐसा मैं सोचने लगा था .

मैं- फिर

भैया- पर इस जंगल में मेरी नजरो के सामने कुछ ऐसा भी हो रहा था जो नहीं होना चाहिए था या बदकिस्मती जिसे मैं देख नहीं पाया. महावीर ने रमा से नाता जोड़ लिया था न जाने कैसे. ये बात ज्यादा दिन छुप नहीं पायी और एक दिन चाचा ने महावीर को रमा के साथ देख लिया दोनों में लड़ाई हो गयी .चाचा ने महावीर को पीट दिया . पर उसके सीने में जो आग लगी उसने अपना काम बखूबी किया. रमा ने कुछ दिन बाद चाचा का साथ छोड़ दिया और महावीर के साथ मजे करने लगी. चाचा ने भी रमा को भुला दिया और कविता से नाता जोड़ लिया चूँकि रमा कविता की भी सहेली थी महावीर ने उसे भी अपने साथ जोड़ लिया. चाचा ये झटका सह नहीं पाया. दोनों में दुश्मनी हद से ज्यादा बढ़ने लगी थी .

काश ये सब मुझे पहले मालुम होता तो मैं संभाल लेता पर शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था .चाचा की परेशानी बढ़ रही थी चाचा एक रात मुझसे मिलने आया और बोला- अभी, महावीर का साथ छोड़ दे .

मैंने चाचा से पूछा की वो क्यों कह रहा है ऐसा चाचा ने मुझे कुछ नहीं बताया और वापिस मुड गया . पर तूफ़ान सर पर था और मैं हवाओ को नहीं भांप पा रहा था . महावीर ने काफी हद तक अपने आप पर काबू पाना सीख लिया था . मैं भी खुश था पर महावीर के मन में पाप ने घर कर लिया था . वो चाचा को ब्लेकमेल करने लगा.

ये मेरे लिए एक और झटका था .

मैं- कैसे और क्यों .

भैया- चाचा का सब कुछ एक झटके में महावीर ने हथिया लिया था . चाचा नफरत की आग में जल रहा था ऊपर से मेले में रुडा और चाचा की दंगल में लड़ाई हो गयी थी . चाचा ने ऐसा पाप किया जिसके लिए उसे मैं भी मार देता वो काम था अंजू का बलात्कार .रुडा से दुश्मनी के चलते चाचा ने मासूम अंजू को शिकार बना लिया. ये बात हमारी माँ को मालूम हो गयी थी , उन्होंने चाचा को खूब भला बुरा कहा और धमकी दी की पिताजी के सहर से आते ही वो उनको सब बता देंगी

चाचा ये हरगिज नहीं चाहता था क्योंकि जो भूल उस से हुई थी वो कोई नादानी नहीं थी जिसे माफ़ कर दिया जाये राय साहब अंजू को बेहद स्नेह करते थे . चाचा माँ के हाथ पाँव जोड़ने लगा पर माँ बहुत गुस्से में थी , उसी बीच चाचा का धक्का माँ को लग गया और वो सीढियों से गिर गयी , और ऐसी गिरी की फिर कभी उठ ही नहीं पायी .

महावीर सहर से अपने साथ एक कैमरा लाया था न जाने कैसे उसने इस घटना की फोटो खींच ली .

मेरी आँखों से आंसू बहने लगे,

मैं- माँ की हत्या चाचा ने की और आपने कुछ नहीं किया भैया

भैया- जब मुझे ये मालूम हुआ उस से पहले ही चाचा मर चूका था . महावीर का कैमरा नहीं मिलता मुझे तो मैं ये कभी नहीं जान पाता छोटे.

बहुत मुश्किल था जज्बातों को सँभाल कर रखना मैंने आंसुओ को बहने दिया इस दर्द का बह जाना ही ठीक था .

कुछ देर बाद भैया ने बोलना शुरू किया.

भैया-महावीर की रगों में हवस दौड़ने लगी थी . रमा और कविता के साथ जिस्मो के खेल में वो इतना मग्न था की उसने मुझसे भी नाता तोड़ लिया था , और जानता है उसने अपना ठिकाना कहाँ बनाया खंडहर के छिपे कमरे में . सहर से वो अपने साथ वो रंगीन किताबे लाया जो तूने देख ही ली होंगी वहां पर. खैर, एक रात फिर चाचा मुझसे मिलने आया और बोला- की महावीर उस से कुछ चाहता था .मैंने पूछा की क्या तो चाचा बोला की वो तेरी चाची के साथ सोना चाहता है . ये सुनकर मेरे कदमो तले से जमीन खिसक गयी मेरा इतना अजीज दोस्त जिसे भाई माना मैंने , जिसके राज को अपने सीने में दफन कर लिया वो मेरे घर की इज्जत से खेलना चाहता था . मुझे गुस्सा तो बहुत आया मैंने अगले दिन महावीर से मिलने का सोचा, चाचा ने बताया की उसने चाची की नहाती हुई नंगी तस्वीरे बना ली है और यदि चाचा ने उसकी बात नहीं मानी तो वो गाँव के घर घर में वो तस्वीरे फेंक देगा. ये बहुत बड़ी धमकी थी . मैंने महावीर से मिलने से पहले सोचा की चाचा और महावीर की खिंची हुई है क्या पता चाचा मुझे भड़का रहा हो महावीर के प्रति. मैंने सच का पता लगाने के लिए महावीर के ठिकाने की तलाशी ली तो मालुम हुआ की चाचा सही कह रहा था . चाची की तस्वीरों को मैंने जला दिया पर कुछ तस्वीरे वो भी मिली जिस से मुझे चाचा पर भी गुस्सा आया ये वो ही तस्वीरे थी जिनकी वजह से माहवीर चाचा पर दबाव बना रहा था . मैं बहुत गुस्से में भरा था , पर जब तक मैं चाचा के पास पंहुचा चाची ने मार दिया था उसे. मेरे लिए एक नयी मुसीबत और तैयार हो गयी थी .

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