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chapter 6

       अभय अपने गाव अपने घर के कुछ हि दूरी पे था

अभय अपना कदम आगे अपने घर की तरफ बढ़ाता है दिल मे बेचैनी हलचल खुशी एक साथ हो रही थी अभय चलते जा रहा था तभी वो रुक जाता है

अभय उस जगह पे रुका था जिस जगह से उसे किंडनैप किया गया था अभय उस जगह को गौर से देखता है फिर आगे बढ़ने लगता हैं

अभय अपने चारों तरफ देखते हुवे चल रहा था अपने गाव परोसी सभी को देख पुरानी यादे ताजा करते हुवे

आखिर कार अभय अपने घर के बाहर खरा था अपने घर को देखने लगता है अभय अपने घर को देख उसके आखो से आसु निकल परते है

अभय – मे आ गया मा भाई गुरिया

अभय अपने आसु साफ कर अंदर जाता है अभय जब आगन मे जाता है तो अभय को कोई दिखाई नही देता

सुबह के 11 बज रहे थे

अभय आगन मे बैग लिये खरा  चारों तरफ देखने लगता है सब जैसा का तैसा था अभय को फिर पुरानी यादे आने लगती है

तभी एक कमरे से दिशा बाहर निकल के आती है दिशा की नजर अभय पे जाती है जिसे देख दिशा जहा के ताहा रुक जाती है और अभय को उपर से नीचे तक देखने लगती है दिशा ने घुघट् डाला हुवा था लेकिन फिर भी अभय को साफ देख पा रही थी

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दिशा अभय को देखते हुवे मन मे

दिशा- ये हैंडसम लरका कोन है और बिना किसी के इज़ाज़त के अंदर कैसे आ गया

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अभय की नजर भी दिशा पे जाती है अभय दिशा को नही जानता था ना चेहरा दिखाई दे रहा था अभय दिशा को उपर से नीचे तक देखता है

अभय दिशा को देखते हुवे मन मे

अभय – ये कोन है चेहरा दिख नही रहा लेकिन ये मेरी बेहन तो नही है और मा तो हो ही नही सकती ये तो बहोत जवान खूबसूरत लग रही है

अभय दिशा को देखने लगता है दिशा अभय को

दिशा अभय के पास आके अभय को देख

दिशा – आप कोन है और बिना किसी इज़ाज़त के घर के अंदर कैसे आये

अभय दिशा के चेहरे को देखने की कोसिस कर रहा था लेकिन दिशा ने घुघट् डाला हुवा था तो दिशा अभय को देख पा रही थी लेकिन अभय नही देख पा रहा था अभय दिशा की आवाज सुन मन मे

अभय – कितनी मीठी प्यारी आवाज है कोयल की जैसे

दिशा अभय को सोचते देख

दिशा – मेने पूछा आप कोन है और घर के अंदर कैसे आये

अभय होस मे आते हुवे दिशा को देख

अभय – आपने जो कहा सही कहा कहा किसी के घर मे ऐसे ही बिना पूछे बिना इज़ाज़त के नही जाना चाहिये

दिशा अभय की आवाज सुन अभय को देख मन मे

दिशा – कितनी प्यारी अच्छी आवाज है

तभी अभय दिशा को देख

अभय – लेकिन ये मेरा घर है और मुझे अपने ही घर मे आने के लिये किसी के पर्मीसंन लेने की जरूरत नही है

दिशा के कानों मे अभय की बाते जैसे ही जाती है दिशा हैरानी से अभय को उपर से नीचे गौर से देखने लगती है दिशा के दिल मे हलचल होने लगती है दिमाग कई सारे बाते सोचने लगता दिशा अभय को देख कापते हुवे होठो से

दिशा – किया आप मेरे देवर जी अभय है

अभय दिशा की बात सुन हैरानी से दिशा को देखने लगता है और अपने मन मे

अभय – किया सामने जो है वो मेरी भाभी है क्या भाई ने सादी भी कर ली अरे एक मिनट मे 19 पार कर चुका हु तो समझ गया तभी तो सोचु मेरे घर मे ये नया चेहरा किस का है

वही दिशा का पूरा सरीर काप् रहा था दिल मे हलचल मची हुई थी दिशा के का दिमाग कई सारे सवाल लाये जा रहा था दिशा बैचेनी से अभय को देख अभय के जवाब का इंतज़ार कर रही थी

अभय दिशा को देखता है और आगे जाके दिशा के पैर छुटे हुवे

अभय – हा भाभी मे आपका एक लौटा देवर अभय हु

दिशा ये सुनते ही पथर् की बन जाती है दिशा जैसी खरी थी वैसी हि रेहती है दिशा को यकीन नही हो रहा था उसका देवर चार साल बाद लौट के आया है और अभी उसके सामने है

अभय दिशा को सांत कुछ ना बोलता देख हैरान हो जाता है और सोचने लगता है भाभी को किया हो गया है बोल कियु नही रही है

अभय – भाभी कहा खो गई कुछ तो बोलिये

अभय की आवाज सुन दिशा होस मे आती है और अभय के चेहरे को प्यार से देखने लगती है दिशा के आखो से आसु तप तप कर नीचे गिरने लगते है

अभय की नजर नीचे जाती जहा दिशा के आसु तप तप गिरे जा रहे थे

अभय हैरानी से दिशा को देखते हुवे

अभय – भाभी आप रो कियु रही है

तभी अचानक दिशा तेजी से अभय के गले लग फुट फुट कर रोते हुवे

दिशा – किया आप ही अभय है मेरे देवर आप झुठ तो नही बोल रहे ही ना

अभय हैरान था दिशा को ऐसा रोता करता देख लेकिन अभय को समझ मे आता है 4 साल बाद आया है तो सभी उसे बहोत मिस किये होगे

अभय अपना एक हाथ दिशा के पीट पे धीरे से रख सेहलाते हुवे

अभय – हा भाभी मे अभय ही हु मेरा किंड्नैप 4 साल पेहले हुवा था लेकिन मे वहा से भाग आया आप लोगो के पास अपनो के पास

अभय दिशा को अपने से अलग करता है और घुघट् के अंदर से ही दिशा के आसु साफ करते हुवे दिशा को देख

अभय – भाभी आप रोते हुवे अच्छी नही लगेगी मे अब आ गया हु ना

दिशा रोना बंद कर देती है और अभय को देख

दिशा – देवर जी लेकिन आप कहा थे 4 साल मे किया हुवा कैसे आप वहा से भाग कर आ गये

दिशा को ये बात बेचैन कर रही थी की उसका देवर 4 साल कहा कैसे रहा और कैसे वहा से भाग कर आया और दिशा को ये सब जानना था

अभय दिशा को देख

अभय – भाभी अभी तो आया हु साम को अच्छे से सभी को अपनी कहानी बताऊंगा

दिशा – माफ करना देवर जी मे भी कितनी पागल हु आप घर वापस आ गये यही बहोत बरी बात है बता नही सकती आज मे कितनी खुश हु आप को देख कर और मम्मी जी ननद जी देखेगी तो खुशी के बारे पागल हो जायेगी

अभय घर के चारों तरफ देख

अभय – अरे हा मे तो भूल ही गया था मा भाई गुरिया कहा

भाई ये सुनते ही दिशा सांत पर जाती है दिशा के आखो से फिर आसु गिरने लगते है जिसे अभय फिर देख हैरान हो जाता है

अभय – भाभी आप फिर रोने कियु लगी

दिशा रोते हुवे मन मे

दिशा – हे उपर वाले ये कैसी उलझन मे मुझे डाल दिया है एक भाई 4 साल कैद मे रेह कर वापस अपने मा भाई बेहन के पास आया है लेकिन मे कैसे बताऊं की उसका भाई इस दुनिया मे नही रहा कैसे बताऊं मे लेकिन बताना तो पड़ेगा ही

अभय – बोलिये ना मा भाई गुरिया कहा है

दिशा अभय को देख

दिशा – देवर जी मा खेत मे गई है और ननद जी स्कूल गई है और

दिशा को आगे केहने की हिम्मत नही हो रही थी लेकिन पूरी हिम्मत जुटा के रोते हुवे आपके भाई इस दुनिया मे नही रहे

अभय को ये सुन बहोत बरा धक्का लगता है अभय को अपने कानों पे यकीन नही रहा हो रहा था उसने किया सुना अभय दिशा को देख कापते हुवे होठो से

अभय – भाभी आप इस तरह का मजाक कैसे कर सकती है आपने जो कहा सच नही है ना

अभय का पूरा सरीर काप् रहा था

दिशा रोते हुवे अभय को देख

दिशा – काश ये घटिया मजाक ही होता देवर जी लेकिन ये सच है

दिशा अभय को सुरु से विनय के साथ कैसे कब हुवा सब पता देती है जिसे सुनने के बाद अभय घुटनों पे आ जाता है मुह से कोई शब्द नही निकल रहे थे लेकिन आखो से घर घर के आसु गिरे जा रहे थे अभय अचानक एक जोर दार चीख मारते हुवे रोने लगता है

अभय अपने दोनों हाथो को जमीन प रखे रोते हुवे

अभय – कियु कियु ऐसा कियु हुवा कियु 4 साल बाद मेने दर्द सहा हिम्मत जुटाई उस कैद से भाग कर अपने मा भाई बेहन की पास आने की लिये लेकिन जब मे आया तो आप मुझे छोर कर चले गये कियु भाई कियु आप हम सब को कियु छोर कर चले गये सायद मे यहा होता हो ऐसा कुछ नही होता हा मे होता यहा तो सायद भाई जिंदा होते सब मेरी गलती है मेरी मे उस दिन बाहर नही जाता तो ऐसा नही होता

दिशा अभय के पास जाके अभय के सर पे हाथ रख

दिशा – देवर जी किस्मत के आगे हमारी नही चलती और हा इसमें आप की कोई गलती नही है उसका बुलावा आ गया था वो चले चले एक ना एक दिन हमारा भी बुलावा आयेगा और हम भी इस दुनिया से चले जायेंगे तो अपने आप को दोस मत दीजिये आपको नही पता गुरिया सासु मा ने कितना दर्द सहा है सायद उपर वाले को हमारे उपर थोरी तरस आ गई अब आप ही है जो सासु मा ननद जी को इस घर मे खुसिया ला सकते है उन्हें खुश रख सकते है तो अपने आप को मजबूत रखिये

अभय नीचे जमीन पे झुका हुवा आसु बहा रहा था दिशा की बात सुन अभय मन मे

अभय – 4 साल मे कैद मे रहा लेकिन सच ये है वो कैद मेरे लिये फायेदे मंद रहा वहा मेने फाइटिंग सीखी अपनी बॉडी बनाई  वहा से मेने पैसे भी बहोत सारे लेकर आया यानी इस चार साल मे मुझे हर तरफ से फायेदा ही हुवा है अगर मेरा किंडनैप नही हुवा होता तो 25 साल तक पढाई करते रहता फिर कई साल तक नोकरी दुधता कमजोर का कमजोर रेहता आज मेरे पास जीतने पैसे है वो तो पूरी जिंदगी मे कमा नही पाता तो दर्द मे सिर्फ कुछ ही सहा है लेकिन असली दर्द तो मा गुरिया भाभी ने सहे मे रो नही सकता मे घर मे अकेला मर्द हु मुझे सभी को खुश रखना होगा और मे ये करुगा इतनी खुसिया दुगा की सब दर्द खतम हो जाये

अभय अपने आसु साफ करते हुवे दिशा को देख

अभय – सही कहा भाभी आप ने मुझे ही आप सब का ख्याल रखना है और मे आप सब का खयाल रखुंगा इसी लिये तो सब से लर कर आया हु

दिशा – मुस्कुराते हुवे दिपु के गाल को खिच ये हुई ना बात देवर जी

अभय आउच करते हुवे गाल को पकर दिशा को देख

अभय – भाभी दर्द हुवा जोर से

दिशा – हस्ते हुवे अच्छा मेने सुना है मर्द को दर्द नही होता

अभय – मुस्कुराते हुवे होता है भाभी बहोत होता है लेकिन मर्द अपने दर्द को सभी से छुपा के रखते है

अभय खरा होते हुवे

अभय – अब मे नहा लू ट्रेन मे सफर कर मेरा सर घूम रहा है

दिशा खरी होते हुवे अपना सर पकर

दिशा – हा सही कहा मे पानी घर देती हु आप नहा लीजिये

अभय – ठीक है भाभी

दिशा पानी भरने चली जाती है दिपु अपने कमरे मे आता है

अभय अपने कमरे को 4 साल बाद देख इमोसनल हो जाता है अभय चारों तरफ देखते हुवे बेड पे बैठ अपने मुह पे हाथ रख आखो मे आसु लिये

अभय – मुझे रोना नही है मुझे सब को हसाना है खुश रखना है कमजोर नही होना है मे एक मर्द हु हा मे रोयुगा नही लेकिन अकेले मे रो लुगा

अभय थोरी देर बाद नहाने जाता है दिशा बाहर हि खरी थी

दिशा – देवर् जी आप कहे तो आके पीठ साफ कर दु

अभय घबरा जाता है और शर्मा भी जाता है

अभय – हकलाते हुवे नही भाभी मे मे अकेले ही नहा लुगा

दिशा अभय की बात सुन समझ जाती है अभय शर्मा रहा है

दिशा – हस्ते हुवे कियु देवर जी को सर्म आ रही है

अभय नहाते हुवे अपने आप को साफ करते हुवे

अभय – हकलाते हुवे नही ती भाभी मे कियु सर्माउंगा

दिशा मन मे लगता है देवर जी बहोत सर्मिले है कोई ना आज ही आये है धीरे धीरे आदत पर जायेगी दिशा मुस्कुराते हुवे खाना निकालने चली जाती है

अभय नहाते हुवे मन मे बाप रे बच गया मुझे इतनी सर्म अभी कियु आ रही है मुझे तो सर्म नही आती थी मेने तो पायल उस बंदरिया के चुत को बिना सर्माये पकर लिया था

20 मिनट बाद

अभय कमरे मे अपने कमरे बदल रहा था तभी दिशा आते हुवे देवर जी

तभी अभय जल्दी से दरवाजा बंद करते हुवे

अभय – भाभी मे कपड़े बदल कर आता हु बस 2 मिनट

दिशा हैरान दरवाजे को देखती रेह जाती है और हस्ते हुवे

दिशा – ठीक है खाना निकाल दिया है आके खा लीजिये

दिशा फिर अपने कमरे मे आके बैठते हुवे उपर वाले का सुक्रिया अदा करते हुवे उपर वाले आप ने मेरी सुन ली और आपने देवर जि को भेज दिया आपका दिल से सुक्रिया

अभय रेडी होके दिशा के कमरे मे आता है दिशा अभय को देख

दिशा – देवर जी बहोत हैंडसम है आप उपर से बॉडी भी मस्त है लरकिया तो आप को देख आपके पीछे पर जायेगी

अभय बिस्तर पे बैठ दिशा को देख हस्ते हुवे

अभय – आपको ऐसा लगता

दिशा – लगता नही होगा देख लीजियेगा गा

अभय मन मे आपने सही कहा मेने देख लिया है अभय पायल के बारे मे सोच केह रहा था

अभय दिशा को देख भाभी मुझे अपने हाथो से खिलाइये ना

दिशा दिपु की बात सुन हैरान के साथ इमोसनल हो जाती है दिशा को यही चाहिये था एक प्यारा सा देवर

दिशा अपने हाथो से अभय को प्यार से खाना खिलाने लगती है

अभय खाना खाते हुवे दिशा को देख

अभय – भाभी खाना किसने बनाया है

दिशा – मेने बनाया है देवर जी कियु अच्छा नही बना

अभय दिशा के उंगली को मुह मे लेके चाटते हुवे

अभय – अच्छा बहोत अच्छा है

दिशा सर्म से लाल होते हुवे अपने हाथ खीच कर

दिशा – खाना खाइये देवर जी हाथ नही

अभय – हस्ते हुवे समझ गया भाभी

दिशा बस अभय को देखे जा रही थी और खाना खिलाये जा रही थी

10 मिनट बाद

खाना हो जाता है और अभय दिशा के गोद मे सर रख लेट जाता है

दिशा हैरान अभय को अपने गोद मे सर रख लेते देखती है तो दिशा को विनय की याद आ जाती है विनय ऐसे ही हमेसा दिशा के गोद मे सर रख लेट बाते करता था और दिशा विनय के बाल को सेहलाते रेहती

दिशा का हाथ अपने आप अभय के बालों पे चला जाता है और दिशा अभय के बाल को सहलाने लगती है अभय को ये एहसास बहोत अच्छा लगता है अभय को बहोत सुकून मिलता है

अभय – दिशा को देख भाभी अभी तक मेने आपका खूबसूरत चेहरा नही देखा ना आपने मुझे देखाया

दिशा थोरा इमोसनल होते हुवे – देवर जी इस चेहरे की खुशी रंग गायब हो गये है देख कर किया करेगे आपको मेरी सूरत अच्छी नही लगेगी

अभय कर बैठ जाता है और दिशा को देख

अभय आपका चेहरा देखना है भाभी आप जैसी भी है मेरी भाभी है

दिशा को अभय की बात सुन खुशी मिलती है

दिशा ठीक है मे अपने देवर जी को मना कैसे कर सकती हु

अभय खुश होते हुवे दिशा के घुघट् हटा देता है अभय जब दिशा को देखता है तो देखता रेह जाता है

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दिशा अभय को देख – किया हुवा कहा खो गय देवर जी

अभय होस मे आते हुवे दिशा के खूबसूरत चेहरे को देख

अभय – कसम से केह रहा हु भाभी आप बहोत ही खूबसूरत है चाँद की तरह उतनी ही मीठी आवाज भी है भाई की

तभी दिपु इमोसनल होते हुवे हुवे

अभय आप जितनी खूबसूरत है उतनी दिल की अच्छी भी है मे इतने बातो मे हि समझ गया लेकिन उपर वाले ने भाई आप के साथ अच्छा नही किया

दिशा दिपु को देख  – देवर जी जो होना था हो गया इसमें उपर वाले कि कोई गलती नही जो आया है उसे एक दिन जाना ही होगा

अभय दिशा को देख – अच्छा भाभी ये बताइये मेरे जाने के बाद किया किया हुवा इतना आप जानती है

दिशा अभय को सारी बाते बताने लगती है जिसे सुन अभय बहोत इमोसनल हो जाता है लेकिन उसी के साथ एक बात को लेकर हैरान भी

अभय दिशा को देख – एक मिनट आप ने कहा गुरिया का एक बॉयफ्रेंड है और गुरिया की सादी मा जल्दी ही कराने वाली है

दिशा अभय को मुस्कुराते हुवे देख – सही सुना एक महीने बाद आते तो आप अपनी गुरिया की सादी नही देख पाते

अभय हैरान होते हुवे – किया अच्छा हुवा मे जल्दी आ गया लेकिन वो लरका कोन है

दिशा – मुझे लगता है आपको खुद गुरिया से पूछ लेना चाहिये गुरिया आपको सब सच बता देती

अभय – ये भी सही मे खुश हु गुरिया ने अपने लिये खुद अपना लाइफ पाटनर ढूढ़ लिया है लेकिन ये बाते आराम से करुगा

दिशा अभय को देख ये भी सही है

अभी आसा अंदर आती है और पीछे जाके घास रख कर आगन मे आती है

दिशा अभय दोनों को पता लग जाता है आसा आ गई है

दिशा अभय को देख – जाइये अपनी मा के पास सासु मा आपको देख बहोत बहोत खुश होगी

अभय इमोसनल होते हुवे दिशा को देखते हुवे – जी भाभी

आसा हाथ पैर मुह धो कर बाथरूम से जैसे हि बाहर आती है सामने अभय को खरा देखती है अभय के पीछे दिशा खुशी के आसु लिये देखे जा रही थी

आसा अभय को देख एक जगह जम जाती है आसा बिना पलके झपकाये अभय को देखे जा रही थी अभय भी आखो मे आसु लिये दर्द भरी आवाज मे

अभय – माँ

आसा अभय को देख कापते होठो से – किया तुम मेरे लाल हो

अभय – रोते हुवे हा मा मे आपका लाल अभय मे वापस आ गया

अभय 4 साल मे बॉडी गोरा हैंडसम और हाईट चेहरा सब बदल गया था लेकिन इतना भी नही की कोई पहचान ना पाये अभय की आवाजे पेहले ही जैसे थी बस थोरी बदली थी

आसा बिना देरी किये तेजी से अभय के पास जाके जोर से अभय को अपने बहो मे भर के जोर जोर से रोते हुवे

आसा – मेरे लाल तु आ गया मुझे पता भी है तेरी मा मुझे कितना याद कर के रोती थी तेरे बिना एक पल कितना मुश्किल से गुजरता था बेटा हम ने तुझे बहोत याद किया बेटा रोज उपर वाले से दुवा मांगती थी मुझे मेरा बेटा लौटा दे आज उपर वाले ने सुन ही और तु आ गया

अभय भी अपनी मा को कस की पकर रोते हुवे

अभय – मा मेने भी आप सब को इस 4 साल मे बहोत मिस किया मे रोज आप सब को बहोत याद करता था मुझे आपके बिना वहा रहा नही जा रहा था बस मेने ठान लिया मे अपनी खूबसूरत प्यारी मा के पास कैसे भी लौट आऊगा और आज मे आ गया मा आपके पास सब के पास अपने घर

आसा अभय के चेहरे को पकर प्यार से देखते हुवे

आसा – अच्छा किया मेरे लाल तु आया गया नही तो जिदगी जैसे हमसे रूठ गई थी मुझे अच्छे से देखने दे तुझे तुम बहोत बरे हो गये हो और बहोत हैंडसम बॉडी भी बना ली है

अभय अपनी मा को देख  हस्ते हुवे

अभय – बेटे पे लाइन मार रही है मे नही पटने वाला

अभय की बात सुन आसा दिशा दोनों हैरान अभय को देखते है दोनों कि हसी छुट जाती है

आसा अभय के कान पकर  हस्ते हुवे

आसा – अच्छा मे तुझपे लाइन मार रही हु वाह बेटे वैसे ये बता मुझसे कियु नही पटेगा किया मे खूबसूरत नही हु

अभय अपने कान को पकरे हुवे आह करते हुवे दर्द मे

अभय – मा छोरो बहोत दर्द हो रहा है मे तो मजाक कर रहा था आप जैसी खूबसूरत इस कोई नही है मे तो आपसे कब का पट गया हु

  ( अभय मस्ती मजाक इस लिये करा ताकि आसा को हसा सके)

आसा अभय के कान छोर हस्ते हुवे – अब आया लाइन पे

आसा अभय के गाल पे हाथ रख प्यार से अभय को देख

आसा – अब तुम्हे अपने से दूर कही नही जाने दुगी हमेसा अपने सीने से लगा के रखुंगी

अभय – नही जाउंगा मा उस वक़्त 15 साल का कमजोर लरका था लेकिन अब नही हु अब कोई भी मुझे आप से दूर नही ले जा पायेगा और ना मे  आपको छोर कही जाऊंगा

आसा  अभय के गाल पे किस करते हुवे जाने भी नही दुगी कियुंकी फिर मुझे तुम दूर गये तो ही नही पाउंगी

अभय आसा को सीने से लगा के – फिर ऐसा नही होगा मा

दिशा – चलो अच्छा है अब अदिति बची है मे तो यही सोच रही हु अदिति आपको देखेगी तो उसका रिएक्सन् कैसा होगा

आसा दिशा को देख – सही कहा बहु अदिति के लिये तो अभय जान है उसका बहोत प्यार करती है अभय को अभय भी दोनों एक की जान बस्ती है एक दूसरे मे जब अदिति अभय को देखेगी तो खुशी से नाचने लगेगी

अभय – मुझसे भी रहा नही जाता मुझे गुरिया से जल्दी मिलना है उसे देखना है

दिशा आसा अभय को देख

दिशा – आप दोनों मा बेटे बात कीजिये कुछ कपड़े धोने है मे चली कपड़े धोने

दिशा कपड़े धोने चली जाती है

अभय आसा के पास जाके आसा को गोदी मे उठा लेता है आसा ये देख हैरानी के साथ डर के अभय को देखते हुवे

आसा – अरे मे गिर गई तो इस उमर मे हड्डी भी नही जुर् पायेगी बेटा

अभय आसा को देख हस्ते हुवे

अभय – मा आप तो अभी भी पूरी जवान है खूबसूरत है रही बात गिरने की तो मे आपको गिरने नही दुगा पेहले मे कमजोर बच्चा था अब नही हु

आसा मुस्कुराते हुवे अभय को देख – हा मे देख रही हु

अभय आसा को कमरे मे लाके बिस्तर पे लेता देता है और खुद आसा के साथ लेत जाता है दोनों मा बेटे एक दूसरे को देखने लगते है

आसा अभय को देख – यकीन नही हो रहा तुम वापस आ गये मेरे लाल अपनी मा के पास

अभय – मुझे भी यकीन नही हो रहा है मा की मे उस कैद से निकल आप के पास आ गया लेकिन ये सच है

आसा – हैरानी से लेकिन बेटा तुम थे कहा 4 साल कोन तुझे उठा के ले गया और कियु 4 साल कैसे रहे वहा कैसे भाग कर आये

अभय – मा सब आराम से बताऊंगा बस अभी इतना समझ लीजिये वहा भी था रोज आप सब को बहोत याद करता था सुबह उठता था तो आप की आवाज आप का खूबसूरत चेहरा देखने के लिये नही मिलता था तो अभय रो परता है

आसा अभय के सीने से सता के – ना बेटा रो मत मुझे भी बहोत याद आती थी मुझे भी तुम्हे सुबह जगाना और तुम जागते थे मुझे देखते थे तो मेरा दिन भी बन जाता था

अभय – मा को देख मुस्कुराते हुवे लेकिन अब रोज आपकी मीठी आवाज आपका खूबसूरत चेहरा देख पऊगा

आसा – हस्ते हुवे हा हा कियु नही तुम मुझे खूबसूरत केहते हो किया सच मे तुंझे मे बहोत खूबसूरत लगती हु

आसा अभय की आखो मे देखने लगती है अभय अपनी मा की आखो मे देख

अभय – हा बहोत बहोत अगर आप जैसी सेम दिखने वाली खूबसूरत  लरकी मुझे मिल गई तो मे उसके पैर पे गिर के कहुंगा प्लेस मुझसे सादी कर लो

आसा अभय कि बात सुन शर्मा जाती है

आसा – तुम भी ना बेटा 4 साल मे तुम बहोत बदल गये उसी के साथ अच्छी बाते भी करने लगे हो

अभय हस्ते हुवे – वो तो है लेकिन काश भाई होते तो ये खुशी और बढ़ जाती

आसा – इमोसनल होते हुवे सही कहा मेरी साल

अभय आसा को बहो मे लेके

अभय – मे हु ना मे आप सब का ख्याल रखुंगा मा वादा है मेरा

आसा – अभय जो कस के बहो मे भर मुझे पता है

तभी आसा देखती है अभय बाते करते हुवे सो गया है

आसा अभय के चेहरे को प्यार से देखती हुवे

आसा – कितना हैंडसम हो गया है मेरा लाल किसी की नजर ना लगे

आसा आगे झुक अपने होठ अभय की होठ पे सता के किस कर अभय को देखते हुवे

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आसा – लगता है मेरा लाल बहोत थक गया था सफर कर के सो जा अपनी मा के बहो मे ये पल के किये मे कितना तरसी हु

आसा भी सो जाती है आज दोनों मा बेटे सुकून की नींद सोने वाले थे

 ( नोट – आसा अभय दोनों के बीच मा बेटे का अभी प्यार ही है )

          ( साम 3 बजे )

आसा की नींद खुल जाती है आसा देखती है अभय आराम से सोया हुवा है आसा अभय के चेहरे को प्यार से देख

आसा – मुझे लगा ये अपना है लेकिन सुकर् है ये सच है मेरा लाल मेरे पास है

आसा फिर अभय के गाल पे किस कर उठने लगती तो अभय आसा के हाथ पकर अपनी तरफ खिचता है आसा सीधा अभय के ऊपर जाके गिरती है अभय आस को देखता है आसा अभय को

अभय – आप अकेले जा रही थी उठ कर

आसा अभय को देख – मुस्कुराते हुवे मुझे लगा तुम सो रहे हो

अभय -मुस्कुराते हुवे – जब आपने मुझे मीठी किस दी गालो पे तभी मे उठ गया

आसा – हस्ते हुवे अच्छा ये बात है

अभय – मुस्कुराते हुवे हा

आसा – अब छोर मुझे नही तो मेरी वजन से दू दब जायेगा

अभय  अपनी मा के कमर को पकर आसा को अपने से पूरा सता के

अभय आसा की आखो मे देख – आपका बेटा आपको संभाल सकता है मा

आसा अभय की आखो मे देख – अच्छा लेकिन अभी उठ जा समझे

आसा अभय के ऊपर से उठ सारी सही कर अब चल बाहर

अभय मुस्कुराते हुवे चलो

अभय फ्रेस् होता है फिर आसा भी अभय आसा के पास जाके

अभय – मा  मे गुरिया को लेने जा रहा हु

आसा अभय के हाथो को जोर से पकर अभय को डरते हुवे देख नही तुम बाहर नही जाओगे

अभय समझ सकता था अपनी मा की हालत को डर को

अभय आसा के चेहरे को पकर आसा को देख

अभय – मा मुझे पता है आप डरी हुई है और कियु डरी हुई है ये भी जानता हु लेकिन मा ऐसा फिर नही होगा दूसरी जो लोग बच्चो का किडनैप करते थे सब पकरे गये है अब मे भी कोई बच्चा नही रहा और मे हमेसा घर मे नही रेह सकता ना

आसा अभय को देख

आसा – मुझे नही पता लेकिन मुझे डर लग रहा है कही तुम गये और फिर वापस नही आये तो

अभय – आपकी कसम मा कुछ नही होगा

दिशा वहा आते हुवे आसा से

दिशा – सासु मा जाने दीजिये देवर जी को वो सही केह रहे जरा सोचिये खुद कैद से सब से बच भाग के आये है अब वो बचे नही रहे

आसा – ठीक है जा लेकिन जल्दी आना

अभय आसा के माथे पे किस करते हुवे

अभय – थैंक्स मा समझने के लिये एक मा का डर समझ सकता हु लेकिन चिंता मत कीजिये कुछ नही होगा

अभय दिशा को देख

अभय – थैंक्स भाभी मा को समझाने के लिये

दिशा – मुस्कुराते हुवे कोई बात नही अब आप जाइये अदिति की छुट्टी होने वाली होगी

अभय जाते हुवे ठीक है मे जा रहा हुई मा भाभी

आसा  अभय को जाते देख

आसा – किया करू डर तो लगेगा ही ना एक बार खो चुकी थी अपने लाल को फिर खो नही सकती

दिशा आसा के कंधे पे हाथ रख

दिशा – समझ सकती हु मे आपका दर्द सासु मा लेकिन इस बार देवर जी के साथ कुछ नही होगा वो सब से लर के भाग के सिर्फ आपके अदिति उनके के ही आये है

आसा दिशा को देख – सही कहा तुम ने बहु

अभय मस्त अपने जेब मे हाथ डाले निकल परता है अभय चलते हुवे जा रहा था लेकिन अभय अदिति के बारे मे ही सोच रहा था

अभय मन मे – मे 19 पार कर चुका हु गुरिया भी 18 पार कर चुकी है यानी गुरिया बरी हो गई है और गाव मे तो लरकियो की 18 होते ही सादी कर दी जाती है अच्छा हुवा जल्दी घर आ गया नही तो कुछ महीने और देर होती तो गुरिया की सादी नही देख पाता

अभय सोच से बाहर आके आगे देखता है तो मेन रोड आ चुका था अभय साइड मे खरा होके रिस्के का इंतज़ार करने लगता है और फिर सोच मे चला जाता है

अभय मन मे – भाभी ने कहा मा ने मंजूरी दे दी है यानी मा उस लरके से मिल चुकी हैं और भाभी भी लेकिन मेरा मिलना बाकी है कसम मेरी मा की अगर मुझे उस लरके मे थोरी सी भी गर्बर् दिखाई दी तो रात मे उसके घर मे जाके उसका गला काट दुगा लेकिन अगर लरका मेरी गुरिया के लायक होगा तो मे खुद दोनों की अच्छे से धूम धाम से सादी कराऊगा

तभी रिस्का आ जाती है अभय सोच से बाहर आके रिक्का मे बैठ जाता है रिक्सा चल परती है

रिस्का मे 4 सवारी और थे एक लरकी भी थी जो अभय को देखते हुवे

लरकी – किया हैंडसम लरका है यार अगर ये मेरा बॉयफ्रेंड बन गया तो मजा ही आ जायेगा

वही अभय बाहर नजरे को देखे जा रहा था अभय पीछे बैठा था और अभय के बगल मे ही लरकी बैठी थी लेकिन अभय लरकी को देख भी नही रहा था

लरकी अभय को देख मन मे – अरे इस लरके हो मे दिखाई नही दे रही हु किया यार बगल मे हु तो बैठी हु लगता है मुझे ही बात करनी पड़ेगी

लरकी अभय से सत् के – सुनिये

अभय पीछे लरकी को देख – हा

लरकी – आप कहा जा रहे है

अभय लरकी को ऊपर से नीचे तक देखते हुवे लरकी तो खूबसूरत है लेकिन मुझे उससे किया

अभय – नाचने जा रहा हु चलेगी किया आप

लरकी अजीब नजरो से दिपु को देखते हुवे लगता है पागल है ये

अभय लरकी को इग्नोर कर देता है

थोरी देर बाद अभय को यहा आना था आ जाता है अभय स्कूल नही बाइक शोरूम मे आया था बाइक लेने पैसे है तो इस्त्माल तो करना पड़ेगा ना दूसरी अपनी गुरिया को पैदल या रिस्का मे कियु ले जाये जब पैसा है बाइक भी अभी आ जायेगी

अभय शोरूम के अंदर जाता है और अभय एक बाइक पसंद करता है N125 देखने मे भी बहोत कमाल की लग रही थी

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अभय बाइक को देखते हुवे – हु अच्छा है काम चल जायेगा आगे की बाद मे सोचेंगे अभय कार्ड से पूरे पैसे पे करता है और बाइक पे बैठ निकल परता है अदिति को लेने

अभय जा ही रहा था की आगे रास्ते मे के साइड मे अभय को रंग बिरंगे फुल बिकते दिखाई देते है अभय फुल वाले के पास बाइक रोक नीचे उतर कर एक गुलाब का फुल लेता है और पैसे देखे फिर बाइक पे बैठ निकल परता है

घर से स्कूल 25 मिनट की दूरी पे थी पैदल अभय कुछ मिनट बाद स्कूल पहुँच जाता है और साइड मे बाइक खरा कर थोरा आगे जाके खरा होकर छुट्टी का इंतज़ार करने लगता है अभय टाइम देखता है तो 4 बजने मे 10 मिनट बाकी थे यानी 10 मिनट बाकी थे छुट्टी होने मे

अभय स्कूल को देख – मेरी तो पढाई छुट गई लेकिन मुझे उसकी परवाह नही पैसों की कमी नही है तो कोई परवाह नही गुरिया तेरे भाई आ गया है और मे तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हु तुमने मिलने तुझे देखने के लिये मेरा दिल इतना बेकरार है की ये 10 मिनट मुझे कई घंटे के बराबर लग रहे है

                 आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏🙏

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