तू लौट के आजा मेरे लाल – Update 5

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Chapter 5

  जिन लोगो को नही पता बता दु एक दिन छोर रात 9 से 10 के बीच मे update देता हु यही मेरा टाइम है फिक्स

    ( पास्ट ) विनय के सादी के 15 दिन बाद

विनय दिशा को लेकर ससुराल जाता है पूजा अपनी बेहन को देख बहोत खुश हो जाती है और जाके गले मिलती है विनय अपनी सासु मा के पैर छु आशीर्वाद लेता है फिर फिर अंदर जाते है

विनय अपनी सासु मा के साथ बातें करने लगता है तो वही पूजा दिशा एक कमरे मे बैठ बातें करने मे लग जाते है दोनों आमने सामने बैठे हुवे थे

पूजा दिशा को देख

पूजा – दीदी आप कैसी है जीजा जी घर वाले सब कैसे है किया आपका वहा दिल लग तो रहा है ना आप वहा खुश तो है ना

दिशा अपनी बेहन की बात सुन पूजा को देख

दिशा – तुम्हारे जीजा बहोत अच्छे है और बहोत प्यार भी करते है मुझे सासु मा तो मुझे अपनी बेटी की तरह प्यार करती है ननद जी भी बहोत अच्छी है कहु तो सभी दिल के अच्छे और साफ है मुझे तो वहा सब के साथ रेह कर सुकून मिलता मे अपनी खुश किस्मती मानती हु की मे उनके घर की बहु बनी

अपनी दीदी की बात सुन पूजा दिशा को देख

पूजा – आपकी बातो से समझ आ रहा है सब बहोत अच्छे है मे आपके लिये बहोत खुश हु दीदी

दिशा पूजा को देख थोरा दुखी आवाज मे

दिशा – बस एक इंसान की कमी मुझे या सब को खलती है देवर जी का अगर वो होते तो घर और भी खुशहाल होता

पूजा को पता था अभय के बारे मे

पूजा – दीदी मुझे पता है अगर वो होते तो यकीन से केहती हु आपका प्यारा लाडला देख देवर होता और आपके आगे पीछे घूमता रेहता

पूजा ये केह हसने लगती है

दिशा पूजा की बात सुन हस देती है फिर पूजा को देख मुस्कुराते हुवे

दिशा – तुमने सही कहा मेरा लाडला देवर होता और मेरे आगे पीछे घूमता तो मुझे भी अच्छा लगता

पूजा दिशा देख मुस्कुराते हुवे

पूजा – अगर आपका लाडला आपके पीछे किसी और चीज को लेने के लिये परता तो आप किया करती हा

पूजा ये केह दिशा को मुस्कुराते हुवे देखने लगती है

दिशा पूजा को देख पूजा की बातो को समझने लगती है और जब दिशा को समझ मे आता है पूजा के केहने का मतलब तो दिशा पूजा के कान पकरते हुवे दिखावे वाले गुस्से मे पूजा को देख

दिशा – 18 की भी नही हुई है और तेरे दिमाग मे ये सब चलता है हा बोल लगता है तु भूल गई है मे तेरी बरी बेहन हु

पूजा दिशा के हाथ पकर अपनी कान को चुराते हुवे आह करते हुवे

पूजा – दीदी दीदी प्लेस दर्द हो रहा है छोर दीजिये ना मेने तो थोरी मस्ती की बस

दिशा पूजा के कान छोर देती है पूजा अपने कान को सेहलाते हुवे

पूजा – इतना जोर से कोन कान पकरता है

दिशा – गलत बोलेगी तो सजा तो मिलेगी ही

तभी कमरे मे विनय आता है तो दिशा पूजा विनय कि तरफ देखते है

विनय को को देखता है

विनय – लगता है दोनों बहनो मे बातें हो रही है

पूजा विनय को देख

पूजा – सही कहा जीजा जी आप बताइये आपकी बात हो गई मा से

विनय – हा हो गई अब आप बताइये साली जी आप कैसी है

विनय फिर जाके दिशा के पास बैठे जाता है

पूजा विनय को देख मुस्कुराते हुवे

पूजा – मस्त हु आपके सामने हु आप बताइये

विनय थोरा दुखी आवाज मे दिशा को देख

विनय – एक अच्छी खूबसूरत बीवी मिली जो मेने सोचा नही था लाइफ मे जो है जो मिला उसी मे बहोत खुश हु लेकिन फिर भी अभय के बिना हर खुशी हर पल फीकी पर जाती है

विनय की बात सुन दिशा पूजा भी दुखी हो जाते है

दिशा विनय के कंधे पे हाथ रखी है तो तो विनय होस मे आता है और दोनों को देख

विनय – माफ करना मे हर अच्छा पल बर्बाद कर देता हु

दिशा – आप ऐसा मत बोलिये हमे भी उनकी कमी खलती है

  विनय सभी से बहोत सारी बातें करता है गाव घूमता है

          ( रात – 10 )

कमरे मे दिशा विनय बिस्तर पे लेते हुवे थे विनय दिशा को बहो मे लिये हुवे था दोनों के फेस आमने सामने थी दोनों एक दूसरे को देख बातें कर रहे थे

20 मिनट बाद

विनय दिशा को पूरा नँगा कर देता है और फिर खुद नँगा हो जाता है और दिशा के ऊपर आ जाता है विनय फिर दिशा के चुत मे लंड दाल देता है दिशा आह करती है विनय धक्के पे धक्का मारने लगता है

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दिशा मजे से लेती सिसकिया लेने लगती है चुदाई का फूल मजा उठाने लगती है कमरे मे फच् फच् आह उह्ह् की आवाज गुज रही थी 9 मिनट बाद दोनों एक साथ झर जाते है

 फिर दोनों एक दूसरे कि बहो मे सिमट कर सो जाते है

विनय 2 दिन अपने ससुराल रेहता है फिर दिशा और पूजा को लेके घर आ जाता है

असल मे पूजा आना चाहती थी तो दिशा न सिर्फ न दिन के लिये मानी कियुंकी दिशा नही चाहती थी मा अकेली रहे तो पूजा एक दिन रेह विनय छोर आयेगा

अपनी दीदी के ससुराल आने के बाद पूजा सब से मिलती है बातें करती है और पूजा को भी समझ मे आ जाता है सभी दिल के कितने अच्छे है

पूजा अदिति दोनों की बहोत बनने लगती है दोनों एक दूसरे से बहोत बातें करते है

                दिन महीने गुजरने लगते है

        ( 3 महीने बाद )

घर मे फिर से मातम छाया हुवा था विनय अब इस दुनिया को अपनी मा बेहन बीवी सब को छोर उपर वाले के पास चला जाता है

( असल मे विनय को साप ने काट लिया था जब विनय हल्फा होने गया था होस्पिटल ले जाते जाते विनय दम तोर देता है और अपनो को इस दुनिया को छोर चला जाता है )

बता नही उपर वाला किया चाहता था आसा की लाइफ मे सुरु से खुसिया सायद लिखी ही नही थी पेहले अभय फिर विनय आसा ने अपने दोनों लाल को खो दिया तो जोकि आसा के किये ये बहोत बरा सदमा था

आँगन मे विनय की लास परी हुई थी और सीमा विनय के सीने पे सर रख फुट फुट कर रोये जा रही थी

दिशा विनय के लास पे पास घुटनों पे बैठी अपनी चुरिया हाथो को जमीन पे पटक तोरे जा रही और रोये जा रही थी

अदिति का हाल अपनी मा की तरह ही बहोत बुरा था अदिति अपने भाई की लास के पास बैठे फुट फुट कर रोये जा रही थी

आसा विनय के सीने पे हाथ रख विनय की लास को हिलाते हुवे

आसा – रोते हुवे विनय बेटा उठ ना देख मा से मजाक मत कर तु मुझे छोर कर कैसे जा सकता है मेने अभय को खोया है अब तु भी अपनी मा को छोर कर जायेगा हा बोल ना मेरे लाल तु सुन रहा है ना उठ जा ना अपनी मा की बात नही मानेगा

अदिति विनय के सीने से लिपट कर रोते हुवे

अदिति – भाई ऐसा मत कीजिये प्लेस अगर आप भी अपनी गुरिया को छोर कर चले जायेंगे तो मे किसको अपना भाई कहूगी मे किसके हाथ मस्ती करुगी कोन मुझे खतरों से बचायेगा मेरा ख्याल रखेगा

अदिति अपने भाई के चेहरे को को पकर देख

भाई प्लेस उठ जाइये ना आपकी गुरिया आप को पुकार रही है किया आप अपनी गुरिया की बात नही मानेंगे अगर आप मेरी बात मान नही उठे तो मे आपसे नाराज हो जाउंगी आपसे कभी बात नही करुगी भाई उठ जाओ ना प्लेस

अदिति विनय के सीने से लिपट फुट फुट कर रोये जा रही थी

दिशा विनय की सर के पास बैठी विनय के सर को सेहलाते हुवे रोते हुवे विनय के चेहरे को देख

दिशा – मेने उपर वाले से जैसा पति मांगा था आप उसने कई अच्छे थे मुझे यकीन नही हो रहा था की मुझे आप जैसा नेक दिल पति मिला मा जैसी सास मिली भी बेहन जैसी ननद मेने इतना मांगा था ऊपर वाले से मुझे उससे कही अधिक मेला मुझे एक अच्छा परिवार मिला लेकिन कियु लेकिन कियु उपर वाले तूने हमारे साथ ऐसा कियु किया घर मे एक यही थे देवर जी के जाने के बाद फिर कियु तुम्हे हमारे उपर तरस नही आता हमे और कितना दर्द दुख देगा उपर वाले जवाब दे मुझे जवाब से मुझे

दिशा भी विनय के सीने पे सर रख रोने लगती है

गाव के पास पास के कई लोग आके अंदर का सीन देख कर जा रहे थे जो भी अंदर का सीन देखता सबकी आखो से आसु निकल आते

पूजा अपनी मा के साथ भागते हुवे आती है और जब अंदर का सीन देखती है तो पूजा के भी पैर काप जाते है

पूजा विनय के पास जाके विनय के सीने का पकर जोर जोर से रोने लगती है तो वही तारा जाके अपनी बेटी दिशा और बाकी सभी को संभालने लगती है

तारा के आखो से भी आसु बहे जा रहे थे तारा बहोत खुश थी ये जान की उसका दामाद और असुरल वाले बहोत अच्छे और दिशा को एक अच्छा परिवार मिला है लेकिन अब सामने का मंजर देख तारा का भी दिल रो रहा था

1 घंटे तक आसा अदिति दिशा विनय को सीने से लगाये रोते रहे लेकिन अंतिम संस्कार तो करना था ना

आसा के परोसी मे से कुछ लोग आगे आके विनय को ले जाते है फिर विनय का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है

आज का दिन भी आसा और सभी के लिये काला दिन था

 2 दिन तक घर मे रोना धोना होते रेहता है ना को खाना खाना है ना कोई अपने आप पर ध्यान दे रहा था

पूजा तारा भी रुक गई थी घर की सभी की हालत देख

पूजा तारा एक कमरे मे बैठे हुवे थे तारा पूजा को देख

तारा – पूजा बेटी पता नही किस की नजर लग गई है इस घर मे अभी जो हालत है सभी का ऐसे ही चलता रहा तो बहोत बुरा हो सकता है

पूजा आखो मे आसु लिये

पूजा – तो मा हम किया करे बोलिये

तारा – मे जाके दिशा बेटी को समझाती हु तुम जाके अदिति को सांझाओ

पूजा – ठीक है मा मे कोसिस करती हु

तारा – कोसिस नही करना ही होगा नही तो

पूजा – समझ गई मा मे जाती हु

पूजा अदिति के पास तारा दिशा के पास चली जाती है

आसा अपने कमरे मे फुट फुट कर रोये जा रही थी

पूजा अदिति के पास जाती है अदिति बिस्तर पे लेती तकिये को पकरे सीने मे दबाये रोये जा रही थी पूजा अदिति के पास जाते बैठ जाती है

पूजा – अदिति मुझे पता है तुम्हे कितना दर्द हो रहा होगा तुमने अपने दोनों भाई को खो दिया और जो दर्द तुम सेह रही हो उसका अंदाज़ा सायद मुझे भी नही है लेकिन मुझे इतना पता है अपनो के खोने का दर्द बहोत बरा होता है

पूजा अदिति को देखती है जो रोये जा रही थी आसु बहाये जा रही थी

पूजा – देखो अदिति किसी अपने के जाने से जिंदगी जिंदगी जीना मुश्किल हो जाता है लेकिन जीना परता है तुम्हे भी जीना पड़ेगा खुद के लिये और खास कर अपनी मा के लिये अगर तुम ऐसे ही कमजोर परती रही और अपनी मा को नही संभाला तो तुम उन्हें भी खो दोगी

मा के खोने की बात सुन अदिति का रोना एकदम से बंद हो जाता है और अदिति पूजा को देखने लगती है

पूजा अदिति को देख

पूजा – हा अदिति तुम्हे अपनी मा के लिये अपने आप को संभालना होगा और खुद को भी

अदिति को पूजा की बात अच्छे से समझ मे आ जाती है पूजा उसे किया समझाना चाहती हो

तारा भी दिशा को अच्छे से समझा देती है फिर दिशा अदिति आसा को संभालने लगते  है

            (   1 साल बाद  )

पूजा तारा के समझाने की वजह से दिशा अदिति ने समय रेहते आसा को संभाल लिया एक साल हो गये थे

आसा दिशा अदिति सभी की जिंदगी और भी दुखत हो चुकी थी जिंदगी मे कोई रंग नही था बस आसा अदिति के लिये जि रही थी अदिति अपनी मा के लिये और दिशा दोनों के किये

जिंदगी जीना था जी रहे थे पर खुसिया घर से सब से कोसो दूर थी

अदिति विनय के जाने के बाद के एक महीने बाद फिर से अपनी पढाई मे जोरों सोरों से लग जाती है

अदिति के ऊपर एक जिमेदारी आ गई थी अदिति को पता था अब उसके दोनों भाई नही रहे और एक दिन उसकी मा उसकी भी सादी करा देगी लेकिन अदिति चाहती थी की पढ लिख कर कोई नौकरी करे ताकि अपने दम पर वो अपनी मा को थोरा अच्छी लाइफ दे सके

घर मे अदिति दिशा मस्ती मजाक करते रेहते थे लेकिन सिर्फ आसा के लिये ताकि आसा को थोरा अच्छा फिल करा सके लेकिन आसा को भी सच पता था

सच ये था की हर रात सब अपने कमरे मे रोया करते थे

    (  विनय के जाने के 1 महीने पेहले ) साम 8 बजे

दिशा आँगन  मे खाना बनाने मे लगी हुई थी तभी आसा पास मे रखी कटिया पे जाके बैठ जाती है दिशा भी अपनी सासु मा को देखती है

आसा दिशा को देख

आसा – आखो मे आसु लिये मेने अपने दोनों करेजे के टुकरे को खो दिया है उपर वाले न मेरे दोनों लाल को मुझसे छीन लिया लेकिन बहु तुम जवान हो सादी के तीन महीने बाद ही तुम विधवा हो गई अकेले जिंदगी नही जी जाती बहु एक औरत की लाइफ मे एक मर्द का होना बहोत जरूरी है और ये मुझसे अच्छा कोई नही समझ सकता इस लिये तुम अब दूसरी सादी कर लो

दिशा सब्ज़ी काट रही थी आसा की बात सुन दिशा आखो मे आसु लिये आसा को देखती है

दिशा – मम्मी जी आप मुझे जाने के लिये कहेगी तो में चली जाउंगी लेकिन मे जाना नही चाहती मुझे उनसे प्यार था मुझे आप से ननद जी से भी इस घर से भी है तो मे इस घर को छोर कही नही जाउंगी यही मेरा घर है मुझे आप की सेवा करनी है मे जानती हु एक औरत की लाइफ मे एक मर्द का होना बहोत जरूरी है लेकिन मुझे दूसरी सादी नही करनी मुझे आपके साथ रेहना आप का पूरी लाइफ ख्याल रखना है

आसा रोते हुवे आसा को देख

आसा – बेटा लेकिन तुम समझ रही रही हो  तुम्हारे पास पूरी जिंदगी परी हुई है

दिशा – रोते हुवे पता है लेकिन मुझे आप के साथ रेहना है इस घर मे रेहना है

बस आसा ने बहोत समझाया लेकिन दिशा नही मानी और दूसरी सादी नही कि ना आसा अदिति घर को छोर कर गई

   ( अदिति अब 17 साल की हो चुकी थी )

     ( अभय 18 साल का हो चुका था )

   (  DP DEVIL 👹 )

3 साल अभय dp devil के कैद मे रेह कर ट्रेनिंग करता रहा आखिर कर आज अभय विजय जीत जीतू की ट्रेनिंग पूरी हो जाती है उसी के साथ सभी टेस्ट पार कर टॉप 1 मे आ जाते है

सीधे सीधे कहु तो वहा कोई नही था जो अभय की टीम को टक्कर दे सके अभय जैसा चाहता था वैसा ही हुवा dp devil की नजर मे अभय आ हि गया

      ( 4 महीने बाद )  रात 9 बजे

कमरे मे अभय अपने दोस्तो के साथ आमने सामने घेरा बना के बैठे हुवे थे आज सभी बहोत खुश थे कियुंकी अभय की टीम को मिसन मिला था

मिसन था एक अमीर बिजनसमैन को मारना जिसका नाम – पवार सिंह  55 साल का

अभय सभी के बीच उसी बंदे की कुंडली रखी हुई थी और सभी वही देख रहे थे

विजय पवार सिंह की फोटो को देखते हुवे अभय से

विनय – बॉस किया हम सच मे इस बेकसूर हो मारने वाले है

जीत अभय से

जीत – बॉस विनय भाई सही केह रहे है किया हम सच मे अपना हाथ किसी बेकसूर को मार खून से रंगने वाले है

जीतू – किया हम पवार को मार उसके अपने को दर्द देने वाले है

अभय पवार की फाइल पढ़ रहा था साथ मे सभी की बातें भी सुन रहा था अभय सभी को देख

अभय – मुझे ये बताओ हम यहा कियु है हमे ट्रेनिंग कियु दी गई है देखो हम यहा से भागने वाले है लेकिन ऐसा नही होता तो हमे जिंदा रहने के लिये मिसन करना ही परता या हम ना कर खुद को मार देते यही दो रास्ते होते हमारे पास लेकिन हमे यहा नही रेहना है यहा से भाग कर अपने घर अपने लोगो के पास जाना है तो एक रास्ता हमारे पास है

अभय की बात सुन सभी हैरान से अभय को देख एक साथ – वो किया है बॉस

अभय तीनों को देख

अभय – हम पवार को नही मारेगे उसे जिंदा छोर देगे और उसे कहेगे कही दूर चला जाये और गायब हो जाये जब तक dp devil का काम खतम नही हो जाता

जीत हैरानी से अभय को देख

जीत – लेकिन भाई हमे dp devil को सबूत भी तो देना परता है

अभय सभी को देख मुस्कुराते हुवे – उसका भी प्लान है मेरे पास अब सो जाओ सुबह मिसन पे जाना है

जीतू विजय जीत – यस बॉस

फिर सभी अपने अपने बिस्तर पे जाके लेत जाते है अभय बिस्तर पे लेता हुवा अपनी मा बेहन भाई के बारे मे सोच आखे बंद कर देता है

     ( सुबह 10 बजे ) dp devil के ऑफिस मे

अभय जीतू जीत विनय चारों पूरी तरह से तैयार खरे थे dp devil अपनी कुर्सी पे इसटाइल् मे अपने चेहरे पे मास्क लगाये बैठा अभय और सभी को देखे जा रहा था.

गोपाल आके अभय जीत जीतू विजय के शरीर मे जेहर दाल देता है और गर्दन के पीछे ट्रेक डिवाइस भी अंदर दाल देता है फिर साइड मे जाके खरा हो जाता है

dp devil – अभय की टीम को देख मुस्कुराते हुवे यकीन नही हो रहा नये नये आये तुम बच्चे सभी को पीछे छोर टॉप 1 पे आ गये मे तुम सब से बहोत खुश हुवा

dp devil अभय को देख मुस्कुराते हुवे

dp devil – तुम तुम्हारा नाम अभय है ना

अभय सभी dp devil के सामने सर झुकाये खरे हुवे थे

अभय dp devil की बात सुन नजरे नीचे किये ही

अभय – जी आप ने सही कहा मेरा नाम अभय है

dp devil – मुझे पता है तुम्हारे बारे मे तुम्हारी टीम टॉप 1 पे है लेकिन तुम भी सब से टॉप 1 पे हो मेने देखा तुमने अकेले ही टॉप 5 के लोगो एक साथ अकेले ही हरा दिया मुझे लगता है तुम आराम से अकेले 10 टॉप ट्रेंड असेसन् को हरा सकते हो तुम मे बहोत काबिलियत है बहोत खूब अगर ये मिसन् अच्छे से कर लोगो को तुम सब को बरा इनाम दिया जायेगा और रेहने के लिये अच्छा कमरा खाना पीना सब कुछ और आगे भी मिसन मिलते रहेगे

अभय जीतू विनय जीत एक साथ जोर से – हम जरूर अपना मिसन पूरा कर के आयेगे

dp devil- मुस्कुराते हुवे बहोत खुश

dp devil फिर दो लोगो को बुलाता है दोनों ने भी मास्क पेहना था हाथो मे गन भी थे

dp devil दोनों को देख – इन लोगो को छोर आओ बाहर

दोनों गार्ड अभय सभी को लेकर जाने लगता है दोनों आगे आगे अभय सब पीछे पीछे चल रहे थे

पेहला गेट आता है गार्ड पासवर्ड दाल खोलते है फिर दूसरा फिर तीसरा तब जाके दिपु बाहर आते है अभय जीतू जीत विनय सभी हैरान थे और मन मे यही सोच रहे थे कोई भी इंतनी टाइट सिक्योरेटि से बाहर कभी निकल हि नही सकता है

गार्ड 1 अभय सभी ये आगे बाइक को दिखाते हुवे वो बाइक से तुम दोनों को ये जंगल पार करना है

गार्ड 2 – अभय को रास्ता का नक्सा तो एक छोटे से दिवाइस मे था देते हुवे ये तुम लोगो को रास्ता बतायेगा कैसे इस जंगल से बाहर जाना है

अभय दिवाइस लेते हुवे  – जी समझ गया

गार्ड – ठीक है जाओ और अपना मिसन कर के आओ

फिर दोनों गार्ड अंदर चले जाते है

अभय दो कदम आगे जाता है और सामने देखता है तो दूर दूर से बरे बरे जंगल थे अभय फिर पीछे सभी को देख कर

अभय – रेडी हो तुम सब

तीनों – यस बॉस

अभय को बॉस इस लिये जीत जीतू विजय कहते है कियुंकी अभय टीम का कप्तान है नही ब्लकि अभय की वजह से ही आज तीनों टॉप पे आ पाये है अभय ने सब की बहोत मदद कि कई बार दुसरे टीम से भी बचाया अभय दिमाग और ताकत मे सब से आगे था इसी लिये जीत जीतू विजय पुरे दिल से अभय को बॉस मानने लगे

अभय बाइक पे बैठ जाता पीछे विजय दूसरी बाइक पे जीतू और साथ पीछे जीतू बैठ जाते है

अभय पीछे देख विजय को दिवाइस देते हुवे

अभय – विजय तुम मुझे रास्ता बताते रेहना किस तरफ जाना है

विजय – यस बॉस समझ गया

जीत बाइक अभय के सामने रोक देता है अभय जीत जीतू को देख

अभय – तुम दोनों मेरी पीछे साथ मे रेहना और हा रास्ते मे जितने मोर आयेगे वहा मे निसान लगाते जाना समझ गये

जीत जीतू – यस बॉस समझ गये

अभय बाइक चालू करते हुवे आगे देख

अभय – कियुंकी ये जंगल बहोत बरा घना है जब हम मिसन कर आयेगे तो हमसे रास्ते वाला दिवाइस ले लिया जायेगा तो फिर जब हम यहा से भागेगे तो उसके बिना जंगल से बाहर नही निकल पायेंगे लेकिन हम अभी निसान लगा देगे किस मोर पे कहा जाना है तू हम आराम से जंगल से निकल पायेंगे

विजय जीत जीतू – समझ गये बॉस

अभय – चलो फिर

अभय फिर तेजी से जंगल मे पतले रास्ते से उभर खाबर् गढ़े से होते हुवे जाने लगता है अभय के पीछे हि जीतू था और अभय से जैसा कहा था कोई मोर आता जीतू जल्दी से बाइक रोक देता और जीत जाके पेर पे छुपा के ताकि कोई देख ना सके निसान लगा देता

अभय को कैसे भी मिसन पूरा कर के कल साम तक आना था नही तो सब मारे जायेंगे

   10 बजे से जंगल मे गये जंगल से बाहर आने मे अभय को साम हो जाती है हा पूरा दिन लग जाता है बिना रुके तक जाके सभी के एंड पे पहुँच पाये थे

अभय बाइक रोक सभी को आराम करने के लिये केहता है बस यहा से सेहर कुछ दूरी पे था कियुंकी बरी बिल्डिंग अभय सभी को साफ दिख रही थी

सभी बैठे हुवे खुले हवा का मजा ले रहे थे सभी को आजादी वाली फीलिंग आ रही थी

विजय अभय को देख

विजय – बॉस वो साला dp devil कमीना उसे पता था हमे जंगल से बाहर आने मे साम हो जायेगी फिर रात को हम मिसन करेगे फिर सुबह ही वापस साम तक लोटेगे साले ने एक दिन भी ज्यादा नही दिया

जीत विजय की बात सुन अभय को देख

जीत – सही कहा विजय ने बॉस वो कमीना बहोत चालाक तेज है

अभय तो बिल्डिंग को देख आजादी वाली फीलिंग ले रहा था और दोनों की बातें सुन दोनों को देख

अभय – अबे पागल कमीनो अगर वो इतना चालाक तेज नही होता तो किया आज तक जो सभी लोगो से बच कर रेह पाता किया आज वो अभी तक इतना बरा धंधा खोल उसका बॉस बना परा है बन पाता कभी दिमाग का भी इस्त्माल कर लिया करो

जीतू अभय की बात सुन हस्ते हुवे

जीतू – आपने सही कहा बॉस इस दोनों के पास कोई दिमाग ही नही है

विजय जीत दोनों घूर के जीतू को देखने लगते ही

अभय बिल्डिंग को देखते हुवे जीतू से – तुम्हारे पास भी कौन सा दिमाग है

अभय की बात सुन जीतू का मुह बन जाता है तो वही विजय जीत जीतू को देख हसने लगते है

    (  परजेंट  )

ट्रेन कुछ मिनट मे अपने आखरी मंजिल पे पहुँचने वाला था और बाकी बच्चे यात्री भी

अभय खरा होके अपना बैग कंधे पे रख गेट के पास आके खरा हो जाता है और बाहर देखते हुवे अपनी मा बेहन भाई के बारे मे सोचने लगता है

अभय – मे आ गया मा भाई गुरिया  बस 40 मिनट बाद मे आपके पास आपके आखो की सामने रहुंगा

पायल जो सीट पे बैठी थी अभय को जाते देख लिया था पायल एक नजर मा पापा को देखती है फिर धीरे से खरा होके अभय के पास जाके पीछे खरी हो जाती है

अभय पीछे देखता है तो पायल अपना बतिसी दिखाते हुवे खरी थी

अभय पायल को देख

अभय – तुम मेरा पीछा छोरोगी या नही एकदम जोक की तरह चिपक रही हो यार तुम

पायल अभय से पूरा सत् कर अभय कि आखो मे देख

पायल – मेरे राजा अपने मेरे खजाने को पकरा है मजे लिये है तो कैसे मे आप का पीछा छोर दु सादी तो आपको मुझसे करनी ही होगी

अभय  पायल को देख

अभय – मेरा इरादा वैसा कुछ करने का नही था समझी

पायल अभय के और करीब सत् के अपने गुलाबी होठ अभय के होठ के पास लाके

पायल – जो भी है आपने मेरे खजाने को छु कर अंदर की आग को भरका दिया है जिसे आपको ही ठंडा करना होगा समझ गये मेरे राजा

तभी ट्रेन धीमा होता है और अपनी मंजिल पे रुक जाता है

अभय पायल बाहर देखते है

पायल जल्दी से अभय को देख

पायल – जल्दी से मुझे आप अपना मोबाइल दीजिये

अभय – नही दुगा

पायल अभय को देख

पायल – नही देगे तो मे चिल्ला चिल्ला के सब को बता दुगी आपने मेरे खजाने को पकरा था

अभय डर जाता है और जल्दी मोबाइल निकाल पायल को देते हुवे

अभय – तुम सच मे लरकी ही हो ना

पायल अभय का फोन लेते हुवे अपना नंबर डाइल करते हुवे

पायल – कियु आपने मेरा खजाना छूके पकर के भी मुझसे ये पूछ रहे है की मे लरकी नही हु

पायल अभय को फोन देते हुवे अभय को देख

पायल – किया आपको मेरे बरे बरे संतरे दिखाई नही दे रहे या फिर दिखा दु यकीन हो जायेगा

अभय पायल को देख

अभय – तुम लरकी हो लेकिन एक नंबर हि गुण्डी हो

अभय फिर नीचे उतर स्टेशन से बाहर जाने लगता है

पायल अभय को जाते देख

पायल – मे गुण्डी हु तो आप मेरे गुण्डे है मेरे राजा

पायल फिर अभय का नंबर ले लिया था तो पायल मेरा राजा नाम से सेब कर लेती है

पायल – मेरे राजा आप मेरे पास वाले गाव मे ही रेहते है तो मे आपको ढूढ़ ही लुगी बस मेरा इंतज़ार करना

अभय स्टेशन से बाहर आता है तो बहोत सारे रिस्का वाले खरे चिल्ला रहे थे यहा जायेगी ये रिस्का वहा जायेगी

अभय को अपने गाव का नाम सुनाई देता है अभय देखता है एक रिस्का वाला आवाजे लगाये जा रहा था

अभय जाके उस रिस्का मे बैठ जाता है 10 मिनट बाद रिस्का फूल हो जाता है और रिस्का लालपूर निकल परता है

अभय आगे बैठा बाहर देख रहा था अभी अभय बहोत खुश था चेहरे पे खुशी साफ दिख रही थी और खुश भी कियु ना हो आज 4 साल बाद नर्क से अपने आप को बचा के निकल अपने घर अपनी मा भाई बेहन के पास जा रहा था

    (   पास्ट ) रात 10 बजे

अभय अपने दोस्तो के साथ मिसन कर वापस आ गया था और सभी कमरे मे बैठे बातें कर रहे थे

विजय अभय को देख

विजय – भाई किया दिमाग लगाया है आप ने हमने पवार को मारा भी नही और नकली सबूत लेकर dp devil को दे दिया और उसको पता भी नही चला

जीत – सचमे बॉस आप कमाल हो आप नही होते तो हमारा किया होता बता नही

जीतू – इसी लिये तो अभय भाई हमारे बॉस है

अभय – मुस्कुराते हुवे बस अब हमे एक मिसन और मिल जाये फिर हम यहा से निकल जायेंगे अपने लोगो के पास

असल से अभय ने पवार को नही मारा बल्कि उसको सचाई बता दी और उसे कुछ दिनों महीनों के लिये चुप कर रेहने को कहा

लेकिन उससे पेहले अभय से पवार से इटिंग करवाई अभय पवार को बिस्तर पे लेता कर जानवर का चामरा चिपका देता हो फिर गले पे जानवर का खून दाल देता अब देखने मे लग रहा था पवार मारा गया है अभय फिर फोटो सबूत के लिये खिच देता है

अभय पवार से

अभय – देखिये छुपने से काम नही चलेगा वो कमीना न्यूज़ पे नजर रखता है इस लिये आप अपने कुछ लोगो को केह चारों तरफ झूठा न्यूज़ फैलवा दीजिये की आप मर गये और अपने घर वालो को समझा दीजियेगा कैसे लोगो के सामने नाटक करना है दिखाना है और कोई आपका फेक अंतिम संस्कार जल्दी हि करवा देना नही तो आप तो मरेगे ही हम भी मारे जायेंगे फिर उसके बाद सभी के नजर मे मत आना जब तक वो कमीना मारा नही जाता

पवार अभय को देख

पवार – तुम लोगो से मेरे लिये इतना सब किया ही अपनी जान जोखिम  मे दाल के ये एहसास मे कभी नही भुलुगा कभी भी किसी भी चीज या मदद कि जरूरत परे बिना झिझक चले आना

तो यही हुवा था

      (  7 महीने बाद  ) अब पुरे चार साल बाद

             ( अभय अब 19 पार कर चुका था )

अभय को मिसन मिल हि जाता है असल मे मिसन बहोत थे लेकिन दूसरे टीम को डे दिया जाता था वो की जायदा खतरा वाला मिसन नही होता था इस लिये अभय की टीम तो नंबर 1 थी तो मिसन भी इतना बरा हि मिलता

अभय मिसन के लिये रेडी था या कहे भागने के लिये रात को ही अभय ने जो पैसा सोना था बराबर बराबर कर बैग मे रखवा लिया था किस्मत भी रही की किसी को सक नही हुवा और सही सलामत बाहर निकल आये

बाहर आते ही अभय तीनों को देखता है तीनों अभय को फिर सभी मुस्कुराते है और बिना देरी किये बाइक पे बैठ तेजी से जंगल से निकल परते है

अभय जीतू जीत विजय थोरी दूर गये ही थे की एक जोर दार धमाका सभी को सुनाई देता है पीछे

अभय सभी जल्दी बाइक रोक पीछे देखते है तो अभय सभी को आसमान मे धुवा ही दिखाई दे रहा था लेकिन अभय समझ जाता है किया हुवा है

अभय की आखो मे आसु आ जाते है बाकी सब की भी

अभय  तीनों को देख

अभय – चलो हमे रुकना नही है

अभय फिर तेजी से आगे निकल परता है

असल मे गोपाल ने dp devil के ऑफिस में बहोत पेहले चोरी छुपे रिबोट बम लगा दिया था अभय सभी के बाहर जाते ही गोपाल रिबोट दबा देता है और अपने साथ dp devil को भी लेकर चला जाता है गोपाल जीना नही चाहता था अपने परिवार के पास जा भी नही सकता था तो बस यही एक रास्ता बचा था गोपाल के पास

बाकी जितने बच्चे थे उन्हे कुछ नही हुवा था बस dp devil का ऑफिस मे ही धमाका हुवा था और हर तरफ लोग भागने लगते है

    ( साम 8 बजे )

अभय सेहर पहुँच फोन बूथ से इंस्पेक्टर नितिका को फोन कर सब बताने लगता है ताकि जितनी जल्दी हो सके dp devil के बचे लोगो को पकर लिया जाये

नितिका – फोन पे – मे तुम्हारी बातो पी कैसे यकीन करू

अभय – आपको यकीन करना होगा मेडम बाकी आप की मर्ज़ी और हा मेरे पास सबूत भी है लेकिन वो मे आगे कुछ दिन बाद आपके पास बहुचवा दुगा यकीन कीजिये

नितिका – ठीक है मे यकीन करती हु

  फोन कट

अभय जीतू जीत विजय को देखता है तो तीनों अभय को गले लगा लेते है तीनों अभय की वजह से हि आज dp devil के कैद से आजाद हो पाये थे

जीतू अभय को देख

जीतू – बॉस आप को हम कभी नही भुलेगे आप हमारे बॉस थे रहेगे आप की वजह से आज हम अपने घर जा पायेंगे अपनो से मिल पायेंगे

जीत अभय को देख

जीत – हा बॉस अगर आप नही होते तो सायद हमे मरते दम तक उसी नर्क मे रेहना परता आप का ये एहसास कभी नह भुलेगे

विजय – आप तो मेरे लिये बरे भाई जैसे है और आपने मेरा पूरा ख्याल रखा और आज हमे बाहर भी निकला

जीत जीतू विजय – आप कभी भी हमे याद करेगे एक आवाज मे हम आपके सामने होगे बॉस

अभय तीनों को देख मुस्कुराते हुवे

अभय – तुम तीनों की बिना मे भी कुछ कर नही पाता मेरे दोस्तो खैर हमे कुछ दिन रुक कर किसी ऐसे वक्ति को धुधना होगा जिसको हम सोना बेच सके

जीतू जीत विजय – समझ गये बॉस

10 दिन लगते है अभय को इस सब मे अभय सोने को बेच देता है और सभी अपना खाता atm सब कुछ खुलवा लेते है फिर अभय सभी को अपना हिस्सा दे देता है और अपना उसी के साथ गोपाल का हिस्सा अपने खाते मे जमा करवा लेता है

    ( 11 वे दिन सुबह  ) 9 बजे

अभय सभी घर जाने के लिये रेडी थे अभय ने टिकट निकलवा लिया था अभय जीतू जीत को देख

ठीक है सब हो गया है याद रखना पुलिस को पता लग ही जायेगा फिर वो तुम दोनों को बुला की पूछ ताछ जरूर करेगे लेकिन मेने जितना बताया है उतना ही की केहना है समझ गये तुम दोनों

जीत जीतू एक साथ – समझ गये बॉस आप चिंता मत कीजिये

अभय फिर विजय को देख

अभय – विजय के टकले पे मारते हुवे और तुम बेवकूफ मेरे साथ चलने के लिये कहा था लेकिन तुम्हे मजे करते हुवे बुवा के घर होते हुवे आना है पता भी है जब मे घर पहुँचूगा तो तेरी मा मेरा दिमाग खा जायेगी

विजय – अभय को मस्का मारते हुवे बॉस प्लेस मा को आप संभाल लेना ने अगले ही दिन घर आ जाउंगा

अभय – ठीक है अगले दिन घर नही पहुचा तो तेरी खैर नही समझा

विजय – समझ गया बॉस मा कसम अगले दिन आ जाउंगा

अभय – ठीक है फिर

अभय फिर सभी से गले मिलता है और अभय जीत जीतू को देख

अभय – मे जा रहा हु जैसे ही सारे मामले सांत होगे हम फिर मिलेंगे

जीत जीतू – इंतज़ार रहेगा बॉस उस पल का

अभय – मुस्कुराते हुवे बाय बोल रेलवे स्टेशन की तरफ निकल परता है

जीतू जीत विजय अभय को जाते देख – कसम से बॉस कमाल के बंद है तेज दिमाग उतना की ताकतवर ऐसे हि नहीं हमारे बॉस है

अभय PBA रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर 2 पे ssa जाने वाली ट्रेन मे खिरकी वाली सीट जोकि अभय की थी बैठ जाता है और बाहर की तरफ देखने लगता है

बार बार अनाउसमेंट हो रही थी pba ट्रेन 10 मिनट मे ssa के लिये रवाना होगी 10 मिनट बाद ट्रेन खुल जाती है और ट्रेन अपनी मंजिल की तरफ निकल परता है

     ( पास्ट ) यही पे खतम होता है

     ——++++

                            ( परजेंट )

रिस्का अभय की घर के आप आके रुकती है अभय नीचे उतर रिक्से वाले को पैसा देता है और रिस्का वाला चला जाता है

अभय अभी मैन रोड पे खरा था अभय अपने घर की तरफ देखता है तो दिपु को वही जगह दिखाई देती है यहा से उसे किंडनेप कर लिया गया था अभय को वो पल याद आने लगते है

अभय आगे थोरा देखता है तो अभय को अपना घर दिखाई दे रहा था अभय अपना कदम आगे बढ़ाता है और अपने घर जाने लगता है

        आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏🙏

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