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chapter 24

सुबह 9 बज चुके थे लेकिन अभय सोया हुआ था काजल अभय के कमरे मे आके देखती है अभय को सोता देख फिर चली जाती है

फोन की रिंग बजती है तो अभय जी नींद खुलती है अभय उठ कर बैठते हुवे नंबर देखता है और फोन उठा कर

अभय – गुड मोर्निंग प्यारी मा

आसा – लाला अभी सो कर उठा है किया

अभय – हा मा रात को देर तक बाते कर सोया इस लिये

आसा – अच्छा ये बात है

अभय – मा किस्सी

आसा मुस्कुराते हुवे – उम्मा पहोच गई किस्सी मेरी तेरे पास

अभय हस्ते हुवे – हा बहोत मोठा किस्सी था

आसा हस्ते हुवे – शैतान

अभय – अच्छा मा बाद मे बात करते है

आसा – हा ठीक है बाय

फोन कट

अभय बाहर आता है तो तो देखता है ममता अपनी बेटी को दूध पिला रही है ममता अपनी सारी से अपनी बेटी चुचे को धक रखा था

ममता की नजर अभय पे जाती – अरे देवर जी उठ गये क्या आप हमेसा इतनी लेत उठते है

अभय ममता के पास जाके चेहरे मे इस्माइल् लाते हुवे – अरे नही भाभी मे रोज सुबह उठ जाता हु लेकिन क्या है ना रात को सब से बात करते हुवे देर से सोया इस लिये

ममता अभय को देख मुस्कुराते हुवे – गर्लफ्रेंड तो जरूर होगी आप इतने हैंडसम जो है मुझे लगता है रात को गर्लफ्रेंड से ही देर तक बाते की होगी इस लिये लेत उठे

अभय हस्ते हुवे – अरे नही भाभी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है वैसे भी मेरी सादी फिक्स हो गई है ऐसे मे बाहर चक्कर चलाता हु तो मेरी बीवी को बता चला तो वो मुझे डोरा डोरा कर मरेगी

अभय की बात सुन ममता जोर जोर से हस्ते हुवे – हा ये बात आपने सही कही है

अभय हस्ते हुवे – इसी लिये मुझे मार नहीं खानी अच्छा भाभी मे आता हु

ममता – जी

काजल कमरे के दरवाजे पे खरी अभय ममता जो बाते करते देख सुन रही थी लेकिन काजल आगे नही आती अभय से बात करने

अभय काजल के साथ घूमने गया था तो अभय को पता था कहा जाना है हल्का होने अभय थोरि दूर एक पोखर था वही जाके हल्का होता है और वापस घर जाने लगता है लेकिन रात की घटना काजल की कही बात अभय की याद आ रही थी

अभय घर आके नहा कर रेडी होता है खाना रेडी था अभय बैठ खाना खा रहा था ममता अभय के पास ही बैठी हुई थी अभय खाना खाते हुवे ममता को देख

अभय – भाभी मेरी प्यारी भतीजी का नाम क्या रखा है आपने

अभय की बात सुन ममता अपनी बेटी को प्यार से देखते हुवे – आपकी प्यारी भतीजी का नाम – पूनम है

अभय – बहोत प्यारा नाम है पूनम

ममता – हु

खाना पीना होने के बाद अभय कमरे मे आके अपना बैग लेके बाहर आता है आगन मे ममता काजल खरे थे अभय एक नज़र भी काजल को नही देखता लेकिन काजल देख रही थी

ममता अभय को देख – देवर जी आप जा रहे है इतनी जल्दी क्या है साम को चले जाइये गा

अभय मुस्कुराते हुवे – अरे नही भाभी मुझे जाना होगा रुक नही सकता

ममता काजल को देख – मम्मी जी आप कुछ बोलिये ना

काजल अभय को देखती है अभय नजरे दूसरी तरफ किये था

काजल – बहु अभय बेटे को और भी जगह जाने है इस लिये जाने दो

अभय जल्दी से काजल ममता के पैर चुके – बाय बुआ भाभी

अभय फिर बाहर आके बाइक पे बैठ घर को देख एक गहरी सास लेते हुवे – चलो चलते है

अभय फिर बाइक चालू कर निकल परता अभय जब जा रहा था तो काजल देख रही थी अभय जब काजल की नज़र से दूर चला जाता है तब काजल अंदर चली जाती है

अंदर काजल जब जाती है तो ममता – मम्मी जी देवर जी कितने अच्छे थे ना कितनी अच्छी बाते मस्ती मजाक करने वाले लगे मुझे

काजल ममता को देख – हा सही कहा

        ( जीतू जीतू फोन पे )

जीत – बॉस आ रहे है

जीतू – मे तो बॉस से मिलने के लिये बेकरार हु

जीत – मे भी मेरे घर वाले भी

जीतू – सेम भाई और बॉस कि सादी मे नाचने के लिये भी

जीत – हा यार बात तो तूने सही कही

जीतू – यार क्या कभी हम बॉस को फिर वही shadow वाले रूप मे देख पायेंगे

जीत – कमीने तुमने किया बोल दिया

जीतू – अबे गढ़े किसी को पता नही चलेगा बता है ना हम कैसे बाते करते है

जीत – कमीने मे उसकी बात नही कर रहा मे बॉस के shadow वाले रूप की बात कर रहा हु जब बॉस shadow बनते है तो सिर्फ खून कि होली खेली जाती है बॉस shadow के रूप मे तभी आते है जब बॉस किसी को मारने का सोच लेते है

जीतू – हा जानता हु लेकिन बॉस को shadow रूप मे फिर से देखने के लिये मेरा दिल मचल रहा है

जीत – सच कहु तो मेरा भी

जीतू – अच्छा सुन खाने बॉस आने वाले है तो पार्टी का इंतज़ाम करना होगा

जीत – जानता हु चिंता मत कर हो जायेगा

जीतू – चल ठीक है बॉस जल्दी ही आने वाले होगे रेडी रेहना

जीत – ठीक है

फोन कट

       ( उदय बंगलो )

सुहाना जिस बंगलो मे रेह रही है वो टीनू का था जो अब सुहाना का हो गया है अब सुहाना अपनी मा पापा भाई के साथ रेह रही है

वही उदय का भी अपना एक बंगला है यहा उदय मौज करता है आज उदय जगमोहन को लेके आया था दोनो बैठे बाते कर रहे थे

जगमोहन – दमाद जी ये बंगला भी बहोत बरा खूबसूरत है

उदय – ससुर जी आपको पसंद आया तो आप रख लीजिये

जगमोहन हैरानी से – अरे नही नही आपने हमे पेहले ही बहोत कुछ दे दिया है

उदय – ससुर जी अब हम एक परिवार है आपका मेरा कुछ नही

उदय फिर रेड वाइन निकाल जगमोहन को देता है – लीजिये

जगमोहन वाइन लेते हुवे – बहोत मेहगी लग रही है

उदय – आपकी बात सही है लेकिन आप इसके बारे मे कियु सोच रहे है अब तो रोज पीने मिलेगी

जगमोहन उदय को देख – हा आपकी वजह से अब हम एक अच्छी लाइफ जी पायेंगे

उदय ग्लास आगे करते हुवे – तो इसी बात पे हो जाये

जगमोहन उदय मुस्कुराते हुवे दोनो अपना ग्लास तकराते है फिर वाइन गटक जाते है

उदय एक बंदे को इसारा करता है बंदा समझ जाता है और ठोरी देर बाद बंदा एक खूबसूरत जवान लरकी को लेकर आता है

जगमोहन लरकी को देख – दमाद जी ये लरकी कोन है

उसय मुस्कुराते हुवे – ससुर जी ये आपको मजे के लिये है सिल पैक

जगमोहन थोरे नशे मे जरूर था लेकिन पुरे होस मे था

जगमोहन गुस्से से उदय को देख – दमाद जी ये क्या घटिया हरकत है मुझे लगा नही था आप इतने गिरे इंसान होगे और आपको लगता है मे इतना गिरा हुवा हु जो अपनी बीवी को धोका देकर एक अपनी बेटी के उमर की लरकी के साथ छी आपने ये सोच भी कैसे लिया

उदय सांत रेहता है और लरकी को देख इसारा करता है लरकी इशारा समझ अपने एक एक कपड़े निकाल पुरा नँगा होके खरी हो जाती है

जगमोहन जैसे ही लरकी को पुरा नँगा देखता है जगमोहन का मन फिसलने लगता है

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जगमोहन आखे फ़ारे अपनी बेटी के उमर की लरकी के पुरे नंगे अंग को देखे जा रहा था लरकी सच मे खूबसूरत के साथ उसकी बॉडी भी कमाल की थी जगमोहन लरकी के बरे चुचे चूत को देखता रेहता है जगमोहन का लंड अब खरा हो जाता है

उदय जगमोहन को ऐसे आखे फ़ारे लरकी को देख समझ जाता है उसके ससुर का मन ढोल गया है

उसय कमरे से जाते हुवे – ससुर जी अब आप अमीर है और टॉप बिजनसमैंन के दमाद भी तो लाइफ अच्छे से मजे से जीने कि आदत दाल लीजिये मे बाहर हु मजे लीजिये

उदय दरवाजा बंद कर बाहर हॉल मे आके मुस्कुराते हुवे बैठ वाइन पीते हुवे – मे कमीना तो आपको भी कमीना बनना होगा ससुर जी तभी तो जोरि हमारी जमेगी

उदय एक घुट पीने के बाद सुफे पे टेक लगाते हुवे – दुनिया मे पता नही कितने लोग अपने आप को अच्छा इमानदार मानते है या अपने आप को समझते है लेकिन जब फायदा कही से मिलता है तो तुरंत गिरगिट की तरह बदल जाते है बस एक मोक्का मिलते ही अपनी इमानदारी खुदारि ईमान मान मर्यादा लार्ज सर्म सब छोर देते है हम इंसान ऐसे हि होते है

कमरे मे जगमोहन लरकी को ही देखे जा रहा था लरकी जगमोहन के पास आके जगमोहन के हाथ पकर अपने चुचे पे रख देती है जगमोहन लरकी के चुचे को नजदिक से देख पागल हो जाता है जगमोहन लरकी के चुचे को कापते हाथो दबाने लगता है लरकी आह उह्ह् करती है लरकी की आह उह्ह् वाली आवाज सुन जगमोहन पुरे जोस से भर जाता है

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और जोर जोर से लरकी के चुचे दबाने लगता है लरकी आह उह्ह् करती रहती है जगमोहन मन मे – आह मेरी बेटी की उमर की है लेकिन आह क्या कयामत है उसके चुचे दबाने मे मजा आ रहा है आह

लरकी फिर धीरे से लीचे बैठ जगमोहन का लंड बाहर निकाल जगमोहन को प्यार से देखती है और जगमोहन का लंड हाथ से पकर जिब से चाटती है फिर मुह मे लेके मजे से चूसने लगती है

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जगमोहन का पेहली बार था जब कोई उसके लंड को मुह मे लेके चूस रहा था जगमोहन को ये नया एहसास पागल और नई मजे कि दुनिया पे ले जा रहा था जगमोहन लरकी के बाल का पकर आखे बंद किये मजे से – आह करती रहो मजा आ रहा है आह क्या आज तो मजा आ गया लंड चुसा भी जाता है आज पता चला आह उफ्फ 1 मिनट बाद

जगमोहन रुक जाओ

लरकी रुक जाती है औद् जगमोहन को देखती है फिर बिस्तर पे जाके टांगे फैला के लेत जाती है और उदय को देखने लगती है

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उदय लरकी को ऐसा करता देख सामने का सीन देख जगमोहन के लंड से पानी टपक परता है जगमोहन अपना लंड पकर लरकी के पास जाके लरकी के ऊपर लेत जाता है

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उदय लरकी के चूत पे लंड रख लरकी को देखता है लरकी बस मुस्कुराते हुवे जगमोहन को देखते हुवे – दाल दीजिये

लरकी के केहते ही जगमोहन एक जोर का धक्का मारता है जगमोहन का 7 इंच का लंड लरकी के सील को तोरते हुवे पुरा अंदर घुस जाता है लरकी दर्द मे जोर से चिल्लाते हुवे रोने लगती है आखो से आसु निकल आते है लरकी अपने पैर दर्द से मारने लगती है

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जगमोहन को फिल होता है टाइट गर्म चूत जिसके अंदर उसका लंड है जगमोहन बिना रुके धक्का मारना सुरु कर देता है लरकी बिस्तर पकरे रोये जा रही थी लेकिन जगमोहन को रुक नही नही थी 3 मिनट बाद

जगमोहन कपड़े पेहन बाहर निकल आता है लरकी आखो मे आसु लिये बरी मुश्किल से उठती है और अपने कपड़े पेहन रेडी हो जाती है उदय का एक बंदा आता है और लरकी को लेके चला जाता है

    ( अभय ) दोपहर 12 बजे

अभय एक रोड साइड होटल मे आके बैठ नास्ता करने मे लगा हुआ था साथ मे दिशा से बाते भी कर रहा था

दिशा – कितने गंदे है आप खुद बैठ कर समोसे मिठाई खाके मजे ले रहे है और मुझे पता रहे है

अभय हस्ते हुवे – अरे बाबा तो साली जी से मगा के खा लो ना

दिशा मुह फुलाते हुवे – अब तो खाना ही परेगा आपके मुह मे पानी जो ला दिया है

अभय धीरे से मुस्कुराते हुवे – नीचे से तो पानी नही निकल आया ना

दिशा सर्म से लाल – छी छी गंदे फिर सुरु हो गये बिना गंदी बाते किये आपको रहा नही जाता

अभय हस्ते हुवे – ये बताओ मेरी प्यारी साली साहिबा क्या कर रही है

दिशा – क्या करेगी फोन मे गेम सीरियल देखती रहती है

अभय – अच्छा सुनो वापस आते वक़्त मिलने आयुगा तब थोरा मजे लेकर ही घर जाउंगा

दिशा शर्मा के – आप भी ना

अभय – अच्छा सुनो मे रखता हु

दिशा – जी ठीक है

फोन कट

अभय नास्ता कर बाइक लेके फिर निकल परता है 1.30 मिनट बाद अभय आखिर कार जीतू के पास पहोच ही जाता है अभय जीतू के गाव के छोटे चोक मे था और जीतू अभय को लेने आया था

जीतू अभय को देख बहोत खुश हो जाता है अभय बाइक से नीचे उतर जाता है जीतू अभय दोनो गले मिलते है

अभय जीतू को देख – कैसा है

जीतू खुश होते हुवे – बॉस आपकी कृपा से सब अच्छा है

अभय – जीत कहा है

जीतू – बॉस वो घर पे है

अभय – ठीक है चलो चलते है

जीतू – जी बॉस

जीतू अपने बाइक पे बैठ आगे जाने लगता है अभय जीतू के पीछे 2 मिनट मे ही अभय जीतू के घर के बाहर था

जीतू का घर भी घास फुस का था लेकिन ठोरी दूर जीतू का नया घर बन रहा था यानी काम चालू हो चुका था

जीतू – बॉस नया घर बनवा रहा हु

अभय देखते हुवे – बहोत खूब मेरी किस्मत अच्छी थी गाव मे ही बंगलो मिल गया

जीतू – चलिये बॉस अंदर

अभय – चलो

             जीतू – उमर 19 साल –

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              मा -कमला – उमर 40 साल

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              पिता – जोगी – उमर 41 sal

               बेहन – रूबी – उमर 18 साल

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  अभय जब अंदर जाता है तो कमला रूबी अभय को देख बहोत खुश हो जाते है हो भी कियु ना अभय की वजह से आज जीतू उनके पास है कमला अभय के गले लगते लग रोते हुवे

कमला – बेटा तु आ गया आज तेरी वजह से मेरा बेटा हमारे पास है हम सब तेरे कर्ज दार रहेगे बेटा सुक्रिया तूने एक मा को बेटा एक बेहन को भाई एक पिता को बेटा खोने से बचा लिया

अभय कमला के पीट सेहलाते हुवे – ऑन्टी रोना बंद कीजिये अकेले मेने कुछ नही क्या जीतू जीत सब ने मेरा साथ दिया

कमला अभय से अलग होते हुवे अभय को देख – जो भी हो सच ये है तुम ही हो जिसकी वजह से कई बच्चे आज अपने परिवार के साथ है

रूबी अभय के गले गलते हुवे रोते हुवे – आपका सुक्रिया भइया मेरे भाई को बचाने के लिये

अभय रूबी के सर पे प्यार से हाथ फेरते हुवे – रोना बंद करो रोते हुवे तुम अच्छी नही लगती हो

रूबी अभय से अलग होके आसु साफ करते हुवे – सच मे क्या

अभय हस्ते हुवे – हा

जीतू भी सब सीन देख बहोत खुश इमोसनल भी हो गया था

जीत का घर जीतू के घर से 1 घंटे के दूरी पे था और दोनो का घर अभय के घर से 3 घंटे की दूरी पे था

अभय सभी के साथ बैठ कर बहोत सारी बाते करने लगता है

कमला – बेटा वैसे तो जीत जीतू ने मुझे सब पता दिया है वहा किया कैसे हुआ किसने सोचा था कोई कमीना बच्चो को इस तरह से किडनैप करता होगा

अभय – ऑन्टी इस दुनिया हर बुरे काम होते है कुछ ऐसे भी इंसान होते है जो अपनी लालच और अपनी खोवाइस पुरी करने के किये कुछ भी कर जाते है

कमला – हा बेटा तूने सही कहा जब जीतू गायब हुआ बहोत ढूढने के बाद नही मिला तो क्या बताऊ ( केहते हुवे कमला रो देती है)

जीतू – मा रोना बंद करो अब तो मे हु ना आपके पास

कमला आसु साफ करते हुवे – हा लेकिन वो मनहुस पल याद आते ही रोना आ जाता है

अभय – ऑन्टी जिंदगी ऐसी ही होती है कब क्या हो जाये कहा नही जा सकता सब भूल जाइये

ठोरी देर अभय कमला रूबी से बाते कर जीतू के साथ बाहर आता है

जीतू – बॉस ये कमीना जीत आया नही जबकि उसको पता था आप आ चुके है

अभय – अरे आ जायेगा

तभी जीत बाइक लेके आ जाता है

जीतू – कमीने अब आ रहा है

जीत जल्दी से बाइक लगा के अभय को गले मिलते हुवे – बॉस माफ करना थोरा लेट हो गया

जीत अभय को देख – बॉस मेरी आखे तरस गई थी आपको देखने के लिये

अभय जीत के सर पे मारते हुवे – मे कोई लरकी हु जिसे देखने के लिये तेरी आखे तरस रही थी

जीत अपना सर सेहलाते हुवे – नही बॉस आपके सामने लरकिया भी कुछ नही है

जीतू – बस कर चल बॉस को गाव घुमा देते है

जीत – हा कियु नही

फिर अभय जीत जीतू गाव घूमते हुवे बहोत सारी बाते करते है आगे क्या कैसे करना है उसको लेकर भी बाते होती है

           साम 7 बजे

आँगन मे रूबी खाना बना रही होती है और अभय कमला जोगी जीतू बैठे बाते करने लगते है जीत नही था अभय ने जाने के लिये केह दिया था कियुंकी अभय सुबह जीत के घर जाने ही वाला था

जोगी – बेटा अभय तुमहारा हम बहोत बेसबरी से इंतज़ार कर रहे थे आज आये भी तो अपनी सादी के कार्ड लेके बहोत अच्छे

अभय मुस्कुराते हुवे – क्या करू अंकल मा पीछे पर गई सादी के लिये

कमला हस्ते हुवे जीतू को देख – मे भी जीतू के पीछे परने वाली हु इसकी भी सादी जल्दी ही करानी होगी ताकि मे हमे प्यारा पोता पोती दे दे जल्दी से

जीतू थोरा शर्मा के – मा आप भी ना

कमला हस्ते हुवे – मे मजाक नही कर रही एक बार घर बन जाये फिर देखना कैसे तेरी सादी करवाती हु

अभय मुस्कुराते हुवे – जरूर करवाना ऑन्टी मे भी आपके साथ हु

रूबी हस्ते हुवे – मे भी आपके साथ हु मुझे भी भाभी चाहिये जल्दी से

जीतू – तुम सब क्या बाते लेके बैठ गये

जोगी – वो बाते हो रही है सही है समझा और अभय बेटा तुमने हमपे एहसास किया है कभी नही भुलेगे हमारा एक हि बेटा घर का चिराग था लेकिन तुम से उस चिराग को बुझने से बचा लिया सुर्किया बेटा

कमला – हा आपने सही कहा नही तो हमारा क्या होता

अभय – बस भी करिये अब जीतू है यहा

ऐसे ही बाते सभी के बीच होती रहती है फिर खाना रेडी होता है सब मिल कर खाना खाते है फिर ठोरी बाते होती उसके बाद सब अपने कमरे मे चले जाते है

अभय कमरे मे

अभय अपनी मा अदिति से बाते करने के बाद दिशा पूजा सासु से बात करने मे लगा हुआ था

अभय – साली जी अपने जीजा पे भी थोरा ध्यान दिया कीजिये

पूजा मुस्कुराते हुवे – मे भला आपके उपर कियु ध्यान दु

अभय मुस्कुराते हुवे – सासु मा सुन रही है आपकी छोटकी किया केह रही है

तारा हस्ते हुवे – हा सुन रही हु दमाद जी

अभय – मेने सोचा था अपनी प्यारी साली जी को जब हम शोपिंग करने जायेंगे तो सोने का कुछ दिला

इतने मे पूजा जल्दी से प्यार से – जीजा जी दुगी ना आप पे ध्यान आप तो मेरे प्यारे दुलारे एक लोटे जा जीजा जी है

दिशा अपनी मा को देखती है तारा दिशा को और जोर जोर से हसने लगती है

दिशा पूजा को देख – छोटकी तुझसे तेज गिरगिट भी रंग नही बदलता होगा

पूजा हस्ते हुवे – जब मुझे जीजा जी प्यार से कुछ देगे तो साली का फर्ज़ है इज़त से लेले मे वही कर रही हु

तारा पूजा के गाल पे मारते हुवे – बेसर्म

अभय हस्ते हुवे – मेरी साली साहिबा मोक्के का फायदा अच्छे से उठाना जानती है

पूजा – एकदम सही कहा जीजा जी

अभय पूजा तारा से बात करने के बाद दिशा फोन लेके कमरे मे आके बात करने लगती है

अभय – मेरी जान रात को नींद नही आती तुम्हारे बारे मे सोच कर

दिशा बिस्तर पे लेती शर्मा के – अच्छा वो भला कैसे

अभय – तुम्हारी मुनिया को मेरा मुना बहोत याद करता है इस किये

दिशा की सासे तेज हो जाती है छाती उपर हो जाती है दिशा शर्मा के – ऐसी बाते करेगे तो मुझे भी नींद नही आयेगी

अभय – याद रखना सुहागरात की दिन पुरा कोटा फुल करुगा

दिशा मचल उठती है सासे तेज और तेज हो जाती है दिशा तकिये को बाहों मे कस के पकर नासिलि आवाज मे – कर लीजियेगा मेरे पति देव मे आपकी ही तो हु

अभय मुस्कुराते हुवे – मुझे किस्सी लेनी है

दिशा – ले लीजिये

अभय मुस्कुराते हुवे – तुम्हारी मुनिया पे

दिशा सर्म से लाल – आप कैसी बातें कर रहे है

अभय – फोन को मुनिया के पास रखो ना मे किस करने वाला हु

दिशा सर्म से लाल अभय की बात कैसे ताल सकती है दिशा धीरे से – ठीक है करती हु

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दिशा टांगे फैला के चूत के पास फोन करते हुवे सर्म से – हा कर लीजिये किस्सी

अभय मुस्कुराते हुवे – उम्मा उम्मा

दिशा को ऐसा फिल होता है जैसे सच मे अभय उसकी चूत को चूम रहा है ये सोच दिशा की सिसकिया निकल जाती है

दिशा फोन हटाते हुवे सर्म से – आप अब खुश कुछ ना कुछ गंदा आपके दिमाग मे चलते रेहता है

अभय – आई लोव यू मेरी जान

दिशा मुस्कुराते हुवे – आई लोव यू तु मेरे राजा

अभय – अब सो जाओ गुड नाइट

दिशा – गुड नाइट

फोन कट

दिशा अपनी टांगे फैला चूत को छुटे हुवे मन मे शर्म से – गीली हो गई

                 जीतू के घर – सुबह 10 बजे

अभय खाना पीना खाके रेडी था जीत भी आ गया था अभय को लेने अभय फिर जीत के साथ पहोच जाता है जीत के घर

                  जीत – 19 साल

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                   मा – जोती – उमर 41 साल

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                    पिता – चमन – उमर 42 साल

                      बेहन – गुलाबी – उमर 20 साल

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जीत – बॉस चलिये सब आपका बेसबरी से इंतज़ार कर रहे है

अभय जीत को देख – सबके सामने बॉस मत केह देना

जीत – जानता हु बॉस आप चिंता मत कीजिये

अभय जीत के साथ अंदर जाता है सभी अभय का ही इंतज़ार कर रहे थे सही अभय को देख बहोत खुश हो जाते है फिर वही अभय को सब इमोसनल होके सुर्किया करते है अभय सब को सांत करवाता है फिर आराम से बैठ बाते करने लगता है

जोती – बेटा तो तुम सादी कर रहे हो ये हुई ना बात आते ही सादी और मेरा एक है ( जोती जीत को देख) जल्दी ही उसके लिये लरकी देख लुगी

अभय हस्ते हुवे – हा कराओ कराओ जरूर ऑन्टी छोरना मत

चमन – बेटा आज हम खुश है मेरा घर का चिराग हमारे साथ है ये एहसान हम चुका नही पायेंगे

अभय – बस अंकल मेरे वही क्या जो मुझे करना चाहिये

गुलाबी – तुम नही जानते अभय जीत के जाने के बाद हम एक एक दिन कैसे जी रहे थे ( गुलाबी वो पल याद कर इमोसनल हो जाती है

अभय – दीदी मे समझ सकता हु फिल कर सकता हु मेरी मा बेहन सब मेरे बिना कैसे एक एक दिन गुजारे होगे हमे भी कैद मे रेह सभी की बहोत याद आती थी

जीत – मा पापा दीदी अभय वहा रोज सब को याद करता था लेकिन एक दिन सब बदल गया उसी के बाद मे जीत बाकी बच्चे अपने घर है

जोती – समझ सकती हु कितना प्यार होगा सब के बीच

अभय गुलाबी को देख – वैसे दीदी कितना इंतज़ार करना होगा मुझे अपने भतीजे भतीजी को देखने के लिये

गुलाबी शर्मा के – 4 महीने

अभय – अच्छा कोई ना इंतज़ार कर लुगा

जोती हस्ते हुवे – करना ही पड़ेगा

साम – 5 बजे

एक बार मे अभय जीत जीतू बैठे चिकन दारू का मजा ले रहे थे हा अभय जीत जीतू विजय सब दारू पीते है dp devil के कैद मे सब को दारू पिलाया जाता था

अभय एक घुट पीते हुवे – याद रखना घर वालो को पता चला तो तो तुम दोनो की टांगे तोर दूंगा

जीत जीतू डरते हुवे – नही बॉस ऐसा नही होगा

अभय – हा जायदा मत पीना नही तो घर मे सब को पता चल जायेगा

जीत जीतू – जी बॉस

बस किया बाते करते हुवे मस्ती मजाक करते हुवे पीते है फिर घर आ जाते है

अगली सुबह 10 बजे

अभय रेडी था अपने घर जाने के लिये एक रात काजल के यहा एक रात जीतू के यहा एक रात जीत के यहा रुक चुका था अब सादी की तैयारी करनी बाकी थी

अभय बाहर बाइक पे बैठा था जीत जोती गुलाबी सभी खरे थे

अभय सभी को देख – ऑन्टी तीन दिन पेहले ही आप सभी को आ जाना है याद रखियेगा कोई एक भी नही झुटना चाहिये सब को आना है

जोती हस्ते हुवे – समझ गई बाबा हम सब तीन दिन पेहले आ जायेंगे

अभय मुस्कुराते हुवे – ये हुई ना बात अच्छा अब मे चलता हु

जोती – अच्छे से जाना बेटा

अभय – जी ऑन्टी ( अभय जीत को देख) टिक है जीत मे चलता हु

जीत – ठीक है अभय अच्छे से जाना

अभय सब को बाय बोल जीतू के घर आता है और फिर सभी से मिलता है बाय बोल सीधा घर की तरफ निकल परता है

अभय – चलो जीत जीतू काजल बुआ सभी से मिल कार्ड दे दिया अब सादी की तैयारी करनी बाकी है बहोत काम बाकी है यार अभय के निकले 1 घंटे हो गये थे

अभय तेजी से बाइक लेकर रास्ते से होते हुवे जा रहा था 20 मिनट के बाद फिर खेतो वाले रास्ते से होकर जा रहा था आगे 10 मिनट बाद मैन रोड आने वाला था अभय को घर पहुँचने मे 2 घंटे और लगने वाले थे

अभय नॉर्मल स्पीड से बाइक लिये जा ही रहा था की अभय की नज़र दूर सामने परती है अभय देखता है एक वैन उसके आगे है उस वैन के आगे दो लरकी बाते करते हुवे रोड साइड से जा रहे है तभी जो वैन थी लरकी के पास रुक जाती है ये देख अभय की दिल की धरकन तेज हो जाती है अभय का दिमाग तेजी से कई बाते सोचने लगता है वैसा होता भी है

वैन से दो बंदे निकल कर दोनो लरकी के मुह बंद कर वैन के अंदर ले जाते है फिर वैन तेजी से भागने लगती है

अभय सब देख अभय का दिमाग घूम जाता है अभय बिना देरी किये तेजी से वैन का पीछा करने लगता है

अभय मन मे – दिन दहारे किडनैप लरकियो का रीजन तो बहोत है लरकियो के किडनैप करने के देखते है

अभय वैन के पीछे थोरा दूरी बनाये पीछा करता रेहता है 10 मिनट बाद मैन रोड आ जाता है कई गारिया छोटी से बरी तेजी से डोर रही थी लेकिन अभय की नजर सिर्फ उस वैन पे थी

वैन मे 3 लरकिया और थी यानी पुरे पाच लरकिया थी लेकिन सभी बेहोस थे 40 मिनट तक अभय वैन का पीछा करता रेहता है आखिर कार वैन फिर मैन रोड छोर कर एक पतली कच्ची रास्ते को लेकर जाने लगती है जो सीधा जंगल की तरफ जाता था

अभय पूरी सावधानी से पीछा कर रहा था ताकि वैन वालो कि नजर मे ना आये अभय एक असेसन था तो अभय को चोरी छुपे कैसे किसी का पीछा करना है मारना है अच्छे से पता था 1 घंटे अंदर जाने के बाद वैन एक बहोत पुरानी बंद परी कंपनी थी वही वैन रुक जाती है

अभय बाइक जंगल मे एक जगह लगा के झारियो मे छुप कर देखने लगता है अंदर से 6 लोग और आते है और वैन से लरकियो को उठा के अंदर लेके जाने लगते है

अभय सब देखते हुवे मन मे – ये कोई छोटा मोटा मामला नही यहा लरकियो के सप्लाये किया जा रहा है अभय अपने बैग को खोलता है और अंदर देख मन मे – लगता है मुझे आज फिर शैडो बनना परेगा आह यार मेने सोचा था घर आने के बाद कोई खून खराबा नही लेकिन ये साले सब माफी के लायक नही है

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अभय रेडी होमर एक असेसन के रूप मे आ जाता है अभय का चेहरा धक्का हुआ था आगे पीछे हथियार थे अभय के दोनो हाथो मे भी (shadow assassin) अभय किसने सोचा था आज मुझे इस रूप मे आना परेगा तो चलो खूनी खेल सुरु करते है

                 आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏

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