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chapter 18

सुबह हो जाती रोज की तरह दिशा आसा जल्दी उठ कर नहा धोके तैयार हो जाती है दिशा खाना बनाने की तैयारी मे लग जाती है तो वही आसा अभय को उठाते जाती है

आसा अभय के कमरे मे जाती है तो अभय होता ही नही आसा फिर अदिति के कमरे मे जाती तो अभय दिशा को चिपके सोये देखती है

आसा मुस्कुराते हुवे अभय के पास जाके कान मे धीरे से उठ जा मेरे लाल सुबह हो गई है अपनी मा की मिठी आवाज के साथ अभय अपनी आखे खोल आसा को देखता

अभय – गूड मोर्निंग मेरी प्यारी मा

आसा अभय के होठो पे किस करते हुवे – गूड मॉर्निग मेरे लाल

आसा अदिति को देखती है जो मुस्कुरा रही होती है

आसा मुस्कुराते हुवे – तेरी गुरिया जगी हुई है लेकिन मेरे आने पे भी आखे नही खोली मेने उसको जन्म दिया लेकिन तेरे जागने पे ही जागती है भाई की लाडली

अभय मुस्कुराते हुवे – जैसे मे आपका लाडला हु वैसे मेरी गुरिया मेरी लाडली है

अभय की बात सुन अदिति जो जगी हुई थी बस सोने का नाटक कर रही थी उसके चेहरे पे इस्माइल आ जाती है

आसा ये देख मुस्कुराते हुवे – जानती हु ठीक है जा रही हुई अपनी लाडली को भी उठा दे

आसा चली जाती है अभय को प्यार से देखता है और अदिति के गाल पे किस करते हुवे- उठ जा मेरी गुरिया

अदिति अंगराई लेते हुवे अभय के गाल पे किस करते हुवे – गूड मोर्निंग भाई

अभय मुस्कुराते हुवे – गूड मोर्निंग चलो चलते है

आदिरी मुस्कुराते हुवे – जी

दोनो भाई बेहन आँगन मे आते है दिशा खाना बनाने मे लगी हुई थी

अभय दिशा को देख – गूड मोर्निंग मेरी प्यारी

दिशा अभय कि बात सुन अभय को देख शर्मा के – गूड मोर्निंग

अदिति दिशा को देख हस्ते हुवे – किया बात है भाभी अब तो आप को भाई प्यारी केह रहे है ना वैसे गूड मोर्निंग

दिशा शर्मा के – गोड मोर्निंग ननद जी

अभय फिर हल्का होने जाता है उसके बाद सुबह की जोगिंग करने मे लग जाता है 20 मिनट जोगिंग करने के बाद अभय सीधा विजय के घर आता है अभय अंदर जाता है तो कोमल भी खाना बनाने मे लगी हुई थी

कोमल अभय को देख मुस्कुराते हुवे – आ गया किस्सी का भूखा

अभय मुस्कुराते हुवे – तुम तो देती नही फिर कियु बके जा रही हो

कोमल गुस्से से – किया कहा तुम ने

अभय को मारने के लिये दोरती अभय भागते अरे मेने तो मजाक मे कहा था अभय भागते हुवे कमरे मे जाता है जहा मिनिता बाल सवार रही थी अभय मिनिता के पीछे छुप जाता है

मिनिता हैरान हो जाती है

कोमल गुस्से से – मा आगे से हतो आज तो मे इसके दात तोर दूंगी

मिनिता अभय को बाहों मे लेते हुवे कोमल को देख – मेरे बच्चे ने तेरा क्या बिगारा है जो इसके पीछे परी हुई है

कोमल हैरानी से – आपके बच्चे को किस चाहिये मे नही देने वाली

मिनिता हस्ते हुवे – ठीक तुम मत देना हम तो देगे

मिनिता अभय के गाल पे किस करते हुवे – लो दे दिया

अभय कोमल के मजे लेते हुवे – तुझे नही देना मत दे वैसे भी तेरे किस मे जो मजा नही जितना ऑन्टी बुआ के किस मे है

कोमल अभय कि बात सुन और गुस्सा हो जाती है

तभी काजल आते हुवे अभय को देख – अरे अभय बेटा यहा चल किया रहा है ( काजल कोमल का देख) ये इतना गुस्से से लाल कियु है

मिनिता हस्ते हुवे – मे बताती हु ( मिनिता सब बता देती है)

काजल हस्ते हुवे – अच्छा ये बात है कोई बात नही तुम मत दो हम दो अपने प्यारे लाल को किस्सी देगे

काजल अभय के पास जाके गाल पे किस दे देती है

अभय कोमल को देख चीढाते हुवे मुस्कुरा के – देखा कई लोग है मुझे किस्सी देने वाले तुम नही दोगी तो भी चलेगा

कोमल गुस्से से – हा हा हा एक प्यारा छोटा बच्चा किस्सी का दीवाना

अभय – बहोत मार खायेगी मेरे से केह रहा हु

कोमल – मार के दिखा तांगे तोर दुगी

मिनिता काजल – बस करो लरना कोमल तुम खाना बनाने पे ध्यान दो

कोमल – अरे मे तो भूल ही गई थी

अभय मिनिता को देख – ऑन्टी कोमल के शादी का कुछ सोचा है

मिनिता अभय को देख – विजय के जाने के बाद ध्यान नही दे पाई लेकिन अब लरका धुधना सुरु कर दुगी

काजल – मेरे नजर मे कुछ करके है

अभय काजल मिनिता को देख – मेरे नजर मे कई है लेकिन एक है यकीन मानिये दोनो की जोरि बहोत मस्त रहेगी और वो कोमल का बहोत ख्याल भी रखेगा

मिनिता काजल हैरानी से – कोन है वो

अभय – उसका नाम है जीत जिसके बारे मे विजय भी अच्छे से जानता है हम 4 साल साथ मे रहे थे

विजय भी अंदर आते हुवे – मा बुआ भाई सही केह रहे है जीत बहोत अच्छा लरका है दीदी जीत की जोरि मस्त लगेगी

मिनिता – अगर तुम दोनो केह रहे हो तो मुझे यकीन है

अभय – मेरी शादी मे जीत आयेगा आप खुद मिल कर देख ले लेना बाकी आप विजय से भी अच्छे से उसके बारे मे जान लेना

काजल – ये भी सही है और जब वो आयेगा तब हम खुद मिल कर देख लेगे

अभय – सही है अच्छा मे चलता हु

मिनिता काजल – ठीक है मिलते है बेटा

अभय – जी

अभय बाहर आके कोमल को देखते हुवे – जा रहा हु गुस्से वाली लरकी

कोमल अभय को देख अभय के पास आके अभय के गाल पे किस करते हुवे अभय को देख – किस्सी दे तुमपे तरस आ गया इस लिये

अभय मुस्कुराते हुवे – थैंक्स ऐसे हि मुझपे तरस खाते रेहना

कोमल मुस्कुराते हुवे – अब जाता है या

अभय मुस्कुराते हुवे – जा रहा हु हमेसा गुस्सा करती रहती है

अभय फिर जाने लगता है कोमल अभय को जाता देख मुस्कुराते हुवे – इस जैसा पागल प्यारा लरका नही देखा मेने

अभय घर आता है आगन मे आसा अदिति खाट पे बैठे थे दिशा खाना बनाने मे लगी हुई थी बाते भी चल रही थी

अभय अंदर आता है आसा अभय को देख – आ गया जा जल्दी से नहा ले

अभय – जी मा

अभय टोवेल लेकर बाथरूम मे चला जाता है और नहाने लगता है तभी अभय दिशा को आवाज लगाता है

अभय – भाभी ओ भाभी

दिशा अभय की आवाज सुन – जी देवर जी

अभय – भाभी जरा मेरा पीठ रगर दो ना

दिशा आसा को देखती है तो आसा दिशा को देख – जा सकती हो

आसा की बात सुन दिशा शर्मा के अभय के पास जाने लगती है

आसा अदिति को देख – जाओ खाना देखो

अदिति मुस्कुराते हुवे – जी मा

अंदर अभय चड्डी मे था दिशा अंदर जाती है अभय को चड्डी मे देख सर्म से लाल हो जाती है

अभय दिशा को देख मुस्कुराते हुवे – आ गई जरा पीछे मा मैल रगर के छुरा दो

दिशा सर्माते हुवे – जी

दिशा अपनी सारी उपर कर अभय के पीछे खरी होकर अभय की पीठ रगर कर मैल छुराने लगती है 2 मिनट बाद

अभय खरा हो जाता है और दिशा के हाथ पकर् लेता है और दिशा को देखने लगता है दिशा सर्म से घबराते हुवे अभय को देख धीरे से

दिशा – जाने दीजिये ना मम्मी जी ननद जी पास मे ही है

अभय धीरे से – एक किस दो ना फिर चली जाना

दिशा शर्मा के – ठीक है ले लीजिये जल्दी से

अभय दिशा को बाहों मे लेना चाहता था लेकिन अभय पानी से गिला था अगर अभय दिशा को बाहों मे लेता है तो दिशा भी गिला हो जायेगी उसके बाद अभय को पता है मा दोनो की खबर ले लेगी इस लिये अभय दिशा से चिपकता नही और दिशा के चेहरे को पकर् दिशा के होठ पे होठ रख देता है                

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दिशा भी अपनी आखे बंद कर अभय का पुरा साथ देती है दोनो एक दूसरे के रस पीने चूसने मे लग जाते है 2 मिनट बाद

अभय दिशा को देख मुस्कुराते हुवे – मजा आ गया भाभी दिल कर रहा है और पीयू आपके होठो का रस

दिशा सर्म से लाल नजरे नीचे किये – किया अब मे जाऊ

अभय मुस्कुराते हुवे – जी मेरी रानी साहेबा

अभय की बात सुन दिशा बहोत शर्मा जाती है और जल्दी से बाहर आ जाती है अभय मुस्कुराते हुवे नहाने मे लग जाता है

दिशा घुघट् दाल फिर खाना बनाने मे लग जाती है लेकिन अभय की बात याद कर सरमाये जा रही थी

दिशा सर्माते हुवे मन मे – मे उनकी दिल की रानी वो मेरे दिल के राजा

अभय नहाने के बाद रेडी होता फिर मा के साथ बाते करता है शादी से लेकर खाना होने के बाद सभी खाना खाते है इसी मे 10 बज जाते है

आसा अभय आँगन मे खरे थे

आसा अभय को देख – बेटा हमारे गाव के पंडित के बारे मे जानते हो ना

अभय – जी मा जानता हु

आसा – ठीक है जाके उन्हें कहो वो कब आयेगे ताकि बाकी लोगो को भी बुलाया जा सके

अभय – ठीक है मा जाके मे पूछत कर आता हु

अभय बाइक लेके निकल जाता है अभय के जाते ही आरोही साइकल से अदिति के घर आती है अंदर जाने के बाद आसा की नजर आरोही पे परती है

आसा आरोही को देख – अरे बेटा आरोही अदिति से मिलने आई हो

आरोही – जी ऑन्टी कहा है अदिति

आसा – कमरे मे है जाओ मिल लो

आरोही – जी

आरोही कमरे मे जाती है तो अदिति बिस्तर पे बैठी मोबाइल चला रही होती है अदिति की नजर आरोही पे परती है तो अदिति हैरानी से

अदिति – आरोही तुम किया बात है आओ बैठो

आरोही अदिति के पास बैठते हुवे अदिति को देख – अरे वाह अब तो तेरे पास मोबाइल भी है

अदिति मुस्कुराते हुवे – हा भाई ने दिलाई है

आरोही -कितने की है

अदिति – 25 जाहर की है बस

आरोही चारो तरफ नजर दोराती है तो आरोही को अदिति के नये सेंडल कपड़े मेहगे मेकप् का समान गले मे लॉकेट नाक कान मे का

अदिति अब पेहले वाली गरीब अदिति नही दिख रही हालाँकि अभय ने सिर्फ थोरा ही कर्चा किया था लेकिन आरोही के लिये बहोत मेहगा था और अदिति का बदला रूप देख कर

आरोही मन मे – पेहले फटे पुराने कपड़े मे रहती थी अब देखो नये मेहगे कपड़े मोबाइल देखने मे भी बहोत ही खूबसूरत लग रही है पेहले से

अदिति – ये बताओ तुम कैसे हो

आरोही अदिति को देख मुस्कुराते हुवे – अच्छी हु लेकिन मेरी दोस्त के भाई के आने के बाद हमे भूल ही गई

अदिति आरोही को देख – ऐसा नही है यार तुम्हे पता है ना मे भाई के लिये कितना तर्पि हु 4 साल तक

आरोही – पता और मे समझ भी सकती हु

अदिति – थैंक्स लेकिन अब मोबाइल है ना तो अब बाते होती रहेगी

आरोही मुस्कुराते हुवे – हा ये तो है अब मे इसी लिये आये ताकि अपने दोस्त की हाल चाल पूछ सकु

अदिति – माफ करना मे अपने भाई के साथ वक़्त बिताने मे लगी हुई हु

इस लिये तुम सब से मिलने नही आ पाई

आरोही मुस्कुराते हुवे – अरे कोई बात नही अच्छा अपना नंबर देदो

अदिति मुस्कुराते हुवे – हा लिखो xxxxxxxxxx

आरोही अदिति का नंबर एड करते हुवे – चलो हो गया

आरोही तो – कब से स्कूल आना है आगे का किया प्लान है

अदिति – सच कहु तो फिल्हाल मे अपने भाई के साथ जी भर के वक़्त गुजारना चाहती हूँ आगे की आगे सोचुगी

आरोही – इसका मतलब स्कूल नही आओगी

अदिति – हा

आरोही – चलो ठीक है जैसा तुम्हे सही लगे मे अब चलती हु फोन पे अब बाते करते रहेगे

अदिति – जरूर करेगे

अदिति आरोही को बाहर छोरने के लिये आती है आरोही बाय बोल निकल परती है और अदिति फिर कमरे मे चली जाती है

आरोही साइकल से जाते हुवे कई सारी बाते सोचे जा रही थी

आरोही मन मे – अदिति ने तो मेरे भाई का नाम तक नही लिया हाल चाल तक नही पूछा इसी लिये मेने भी भाई के बारे मे बात नही थी मुझे पता है सुरु से अदिति मेरे भाई से प्यार नही करती है उसने मेरे भाई तो एक अच्छे पति के तोर पे चुना ना की प्यार के तोर पे लेकिन फिर भी एक बार मेरे भाई का हाल चाल पूछ लेती तो उसका क्या जाता

आरोही की दिल मे अदिति के लिये गुस्सा नफरत पैदा होने लगता है

वही अभय पंडित जी से बात कर घर आ जाता है एक कमरे मे आसा अदिति अभय बैठे हुवे थे

आसा – कब आयेगे पंडित जी

अभय – मा 2 बजे बोले है आयेगे

आसा -समझ गई ठीक है सभी को बोल दो 2 बजे से पेहले आ जाये

अभय – जैसा आप कहे मा

अभय बाहर आता है तो दिशा बाहर खरी सुन रही थी अंदर क्या बाते हो रही है दिशा अभय को देख सर्म से लाल होके कमरे मे भाग जाती है

अभय दिशा को सर्माते भागते देख मन मे – हाय इनका सरमाना

अभय घर से बाहर आके बाइक लेके विजय के घर जाता है

अंदर जाते ही काजल अभय को देख मुस्कुराते हुवे – क्या बात है बेटा कैसे आना हुआ

अभय काजल के पास जाके बाहों मे लेके आखो मे देख – अपनी हॉट बुआ को देखने आया हु

काजल सर्म से – तू भी ना फूफा को बता दु तुम उसकी बीवी को हॉट बोलते हो

अभय ये सुनते ही डर के काजल का छोर पीछे हटते हुवे – अरे आप भी ना फूफा को बताने की क्या जरूरत है मे नही बोलुगा ना फिर हॉट

काजल जोर जोर से हस्ते हुवे – बच्चा तो डर गया

अभय अजीब चेहरा बना के – हा तो फूफा जी से मुझे मार खाने क कोई सॉक नही है

मिनिता आते हुवे हस के – अच्छा ऐसा है तो बच कर रेहना

अभय मिनिता को देख मिनिता के पीछे जाके बाहों से लेके – वो तो रेहना हि पड़ेगा बुआ नही तो आप है ना

काजल हस्ते हुवे – अभय को देख बेटा मेरे भाई को पता चला ना की तुम तो भी मार खायेगा

अभय मिनिता को छोर फनी चेहरा बना के – लगता है मेरी दाल नही गलेगी यहा

काजल मिनिता अभय की बात सुन जोर जोर से हसने लगते है

अभय काजल मिनिता को देख – अच्छा सुनिये मे यहा ये बताने के लीये आया था पंडित जी 2 बजे आने वाले है तो आप सब 2 बजे से पेहले आ जाना ठीक है

मिनिता – अच्छा ये बात है ठीक है बेटा हम सब आ जायेंगे

काजल – जरूर आयेगे जल्दी हि आ जायेंगे तुम चिंता कर

अभय – अच्छा है अच्छा ये बताइये आप मे से कोन मेरी गर्लफ्रेंड बनेगी

मिनिता काजल हैरानी से अभय को देखते है काजल फोन निकाल किसी को कॉल करने लगती है

अभय ये देख हैरान कंफ्यूज मे काजल से – बुआ आप किसको कॉल कर रही है

काजल अभय को देख मुस्कुराते हुवे – तेरे फूफा को

अभय ये सुनते ही 90 के स्पीड मे भाग निकलता है बिना देरी किये

अभय को इतनी तेज भागता देख काजल मिनिता एक दूसरे को देख जोर जोर से हसने लगते है

काजल हस्ते हुवे – ये लरका जब भी आता है माहौल बदल देता है और हसा कर ही जाता है हमे

मिनिता हस्ते हुवे – आप ने सही कहा बहोत मजाकिया नटखट है

अभय बाइक लेके घर आता है और मधु को फोन करता है

मधु कमरे मे मा के साथ बैठी बाते कर रही थी अभय के बारे मे हि तभी फोन बजता है फोन देखती है तो बहोत खुश हो जाती है

मधु – भईया आप के बारे मे ही बात कर रही थी और आपका फोन आ गया

अभय मुस्कुराते हुवे – अच्छा क्या बात हो रही थी

मधु – मा मे आपके शादी को लेकर बात कर रहे थे

अभय – अच्छा ये बात है गुरिया मा को फोन दो

मधु – जी भाई ( मधु सिला को देख ) मा भाई बात करना चाहते है

सिला फोन लेकर – हा बेटा बोलो

अभय – छोटी मा पंडित जी 2 बजे आयेगे तो आप सब रेडी रेहना पेहले ही में खुद लेने आयुगा आप सब को

सिला – समझ गई बेटा हम रेडी रहेगे

अभय- ठीक है मा मे रखता हु

सिला – ठीक है बेटा

फोन कट

मधु सिला को देख – भाई ने क्या कहा मा

सिला मुस्कुराते हुवे – 2 बजे पंडित जी आयेगे तो हमे तैयार रेहना है तेरा भाई खुद आयेगा हमे लेने

मधु खुश होते हुवे – मुझे पता था भाई हमे खुद लेने आयेगे

सिला मुस्कुराते हुवे – लगता है तुम्हे बहोत जल्दी है भाई के घर जाने की

मधु सिला को देख – मा जल्दी तो होगी ही आज पेहली बार मे सब से मिलने वाली हु

सिला मुस्कुराते हुवे – मे भी

आसा बिस्तर पे लेती तारा को फोन करती है तारा फोन उठा के

तारा – हा बोलिये

आसा – 2 मजे पंडित जी आयेगे तो आप सब को पेहले हि आ जाना है

तारा बहोत खुश हो जाती है

तारा – जी हम पहुँच जायेंगे

आसा – कुछ बाते बताती है लेकिन आप आयेगी तो बैठ कर बाते करेगे

तारा – जी समझ गई

फोन कट

अभय अपने कमरे मे बिस्तर पे लेता मन मे – वैसे तो जीत जीतू को बुला लेता लेकिन अभी कुछ दिन हि हुवे है तो सही नही होगा शादी कि कार्ड देने जाउंगा तो जीत जीतू के परिवार वालो से भी मिल लुगा ये सही रहेगा अभी दोनो को परिवार के साथ रेहना अच्छा है

     ( दोहर 1 बजे )

  ( तारा के घर )

पूजा अपने कमरे मे रेडी होते हुवे मन मे – मुझे यकीन नही हो रहा मा को भी पता चल गया रात को जीजा दीदी कोन सा खेल खेल रहे थे और ऐसा होना हि था सब भूल लगे जो परे थे आवाजे भी बाहर तक आ रही थी ( पूजा सर्म से लाल होते हुवे ) जीजा दीदी मान गई आप दोनो को

पूजा फिर इमोसनल होते हुवे – पेहले तो लगा था मेरी दीदी पूरी जिंदगी बिधवा बन कर ही गुजार देगी दीदी को बिधवा के रूप मे जब भी देखती थी तो मेरा दिल रो देता था ( पूजा आसु साफ करते हुवे) लेकिन अब मे बहोत खुश हु मेरी दीदी फिर से सुहागन बनने वाली है

यहा तारा पूजा सभी रेडी होने मे लगे हुवे थे

   ( सिला के घर )

मधु भी तैयार होने मे लगी हुई थी और आज सब से जायदा हि खुश थी

मधु – मुझे अच्छे से तैयार होना होगा आज नई मा दीदी भाभी से सब से मिलने वाली हो अच्छे से रेडी नही हुई और मे बेकार दिखी तो सब कहेगे जैसी बेहन है अभय की कितनी बेकार दिखती है

यहा भी सभी रेडी होने में लगे हुवे थे

  ( विजय के घर )

एक कमरे मे काजल मिनिता रेडी होने मे लगे थे

काजल रेडी होते हुवे – सच कहु भाभी अभय की शादी देखने के लिये बहोत बेचैन हु इस कुछ दिनों मे ही अभय और सब से एक रिस्ता बन गया है

मिनिता काजल को देख – हा आपका केहना सही है अभय के घर जाके दीदी से बात कर की बहोत अच्छा फिल होता है

काजल – सही कहा भाभी आप ने

कोमल विजय भी रेडी होने मे लगे हुवे थे

वही अभय कार मे था हा अभय कार 🚘 कहा से लाया खरीदा या किसी से लेके आया बाद मे पता चलेगा

अभय सिटी बाजार जाके नास्ता जैसे मिठाई समोसे ठंडा सब लेने आया था सब आयेगे तो कुछ खिलाना तो पड़ेगा ही ना अभय सब लेने के बाद घर आ जाता है.

सारे समान को एक कमरे मे रख देता है अब बारी थी सब को लाने की

अभय मधु सब को आने के लिये निकल परता है आसा दिशा अदिति भी रेडी होने मे लगे हुवे थे

अभय मधु के घर पहुँच जाता है अंदर जाने के बाद अभय मधु के कमरे मे जाता है सामने मधु खरी थी पूरी रेडी होके मधु की नजर अभय पे जाती है मधु अभय को देख बहोत खुश हो जाती है

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मधु फ्रॉक मे बहोत खूबसूरत लग रही थी अभय की नजर ना चाहते हुवे मधु के बरे बरे दो उभार पे चले जाते है लेकिन अभय जल्दी से दिमाग से गंदे ख्याल निकाल फेकता है

तभी मधु आके अभय के गले लग जाती है अभय मुस्कुराते हुवे मधु को बाहों मे भर लेता है

अभय – गुरिया आज तुम बहोत खूबसूरत लग रही हो नये कपरो मे

मधु सर्माते हुवे अभय को देख – आप सच केह केह रहे है

अभय मधु के आखो मे देख – हा सच्ची लेकिन उस दिन से कम

अभय मुस्कुराते हुवे – ठीक है मा से मिल के आता हु

मधु हैरान कंफ्यूज से अभय को देख – भाई किस दिन से कम आपके केहने का मतलब समझी नही

अभय पीछे मूर मधु को देख मुस्कुरा देता है फिर चला जाता है मधु दिमाग का घोरा दोराती है तभी मधु को अभय की बात समझ मे आती है तो मधु से से पानी पानी हो जाती है

अभय सिला के कमरे मे जाता है तो देखता है सिला सारी सही कर रही थी सिला ग्रीन सारी मे बहोत कमाल की खूबसूरत हॉट लग रही थी अभय की नजर सिला के बवाल कमर और गहरी ढोरी पे चली जाती है तो अभय देखता ही रेह जाता है

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सिला की नजर अभय पे जाती है और सिला अभय को देख समझ जाती है अभय की नजर कहा है सिला थोरा शर्मा जाती है

सिला – बेटा तेरी नजर कहा है

अभय सिला को देख – छोटी मा आपकी गहरी ढोरी पे

सिला पूरी तरह हैरान हो जाती है अभय की बात सुन कर सिला बस अभय को देखती रहती है किया बोले समझ नही आता

अभय सिला को देख उसे एहसास होता है सामने उसकी अपनी मा नही है ना सिला उसके बीच उस तरह का प्यार रिस्ता बना है

अभय सिला के पास जाके नजरे नीचे कर – माफ करना छोटी मा

अभय मन मे – मे भूल जाता हु मेरी मा मेरे बीच जो प्यार रिस्ता है वही मे सब से उमीद नही कर सकता मेरी मा मेरे बीच सुरु से मस्ती मजाक वाला रिस्ता रहा है लेकिन मे अपनी कुछ आदत की वजह से एक दिन पक्का मार खायुगा

सिला अभय को देखती है फिर अभय का चेहरा पकर् उपर करते हुवे आखो मे देख हस्ते हुवे – अरे मे तो नाटक कर रही थी तुम तो डर गये मेरे लाल

अभय फनी चेहरा बना के – हे आप नाटक कर रही थी मुझे लगा आप मेरी पिटाई करेगी

सिला हस्ते हुवे – वो दिन कभी नही आयेगा तेरे उपर हाथ उठाने का सोच भी नही सकती मेरे लाल अच्छा ये बताओ तूने मुझे अच्छे से देख लिया तो अब बताओ मे दीदी से जायदा सुंदर हु या दीदी

अभय सिला को गौर से उपर से नीचे देखते हुवे – हु केहना मुश्किल है कियुंकी आप मा की तरह बहोत खूबसूरत है बाकी मे बता नही सकता कियुंकी आपका लाल हु ना इस लिये

सिला जोर जोर से हस्ते हुवे – एक बात बता दीदी पूछती तो सब बता देता

अभय – हा बता देता

सिला – तो मुझे कियु बता नही रहा

अभय सिला को देख मुस्कुराते हुवे – छोटी मा आप खुश मा से पूछ लेना आपको सब पता चल जायेगा लेकिन फिल्हाल देरी हो रही है चलिये

सिला मुस्कुराते हुवे – ठीक है दीदी से पूछ लुगी चलो अब

दोनो कमरे से बाहर आते है बाहर जोगिनाथ मधु खरे थे

जोगिनाथ सिला मधु को देख – हो गया मा बेटे के बीच बात चित और करना है तो कर लो हम इंतज़ार कर देगे कियु मधु बेटा

मधु हस्ते हुवे – जी पापा

सिला – जयादा मत बोलिये मेरा जितना मन करे अपने बेटे से बात करुगी

जोगिनाथ – मेने भी तो वही कहा है

अभय बीच मे आते हुवे – देरी हो रही है बाद मे बात लर लेना पापा चलिये

सभी बाहर आते है सामने कार देख हैरान हो जाते है

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मधु अभय को देख – भाई ये कार किसकी है

अभय मधु को देख मुस्कुराते हुवे – मेने नई ली है

मधु खुशी से – क्या सच मे

अभय – हा बाबा

मधु – मा पापा हम भाई की गारी मे जायेंगे

जोगिनाथ सिला – हा बाबा

अभय कार का दरवाजा खोलता है सिला जोगिनाथ पीछे बैठ जाते है मधु आगे अभय के साथ बैठ जाती है

मधु बहोत खुश थी आगे अभय के साथ बैठ कर

अभय गारी चालू करता है और निकल परता है अभय 10 मिनट मे घर पहुँच जाता है अभय सभी को अंदर लेकर जाता है आसा दिशा अदिति सब आँगन मे आते है

अभय आसा दिशा अदिति का परिचय मधु सिला जोगिनाथ को देता है

मधु जल्दी से जाके आसा के पैर छूटी है

आसा मधु के चेहरे को पकर् प्यार से देख – तो तुम हो मेरे लाल की दूसरी खूबसूरत गुरिया

मधु – जी बरी मा

मधु फिर दिशा के पैर छूटी है अदिति से गले मिलती है

आसा सिला के पास जाके सिला को देख – मेरे लाल ने बहोत खूबसूरत गुरिया के साथ बहोत खूबसूरत मा भी मिली है

सिला शर्मा के – आप भी ना दीदी

आसा सिला के गले लगते हुवे – तुम सब का स्वागत है मेरे परिवार मे

आसा – थैंक्स दीदी हमे अपने परिवार का हिस्सा बनाने के लिये

आसा अलग होते हुवे सिला को देख – अपनो को थैंक्स नही बोलते

सिला जोगिनाथ को देख – आप वहा कियु खरे है आइये बैठ कर बाते करते है

जोगिनाथ – जी भाभी

अभय आसा से – मा मे सासु मा पूजा को लेकर आता हु

आसा – ठीक है जा

अभय फिर तारा के घर पहुँच जाता है अंदर जाता है तो तारा पूजा पुरा रेडी खरे थे तारा पूजा दोनो बहोत खूबसूरत लग रहे थे पूजा तारा अभय को देख आ गये आप

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अभय तारा को देख – सासु मा आप मेरी किस्मत कितनी अच्छी है आपकी खूबसूरत बेटी मेरी मुझे मिल गई उसी के साथ खूबसूरत सासु मा भी ( अभय पूजा को देख अजीब फनी सकल बना के) बस एक बंदरिया मिल गई

अभय की बात सुन तारा जोर जोर से हंसने लगती है पूजा को बहोत गुस्सा आता है लेकिन अपने आप को सांत कर लेती है

पूजा अभय को देख प्यार से – जीजा जी आज बहोत अच्छा दिन है मे बहोत खुश भी हु इस लिये आप को छोर देती हु लेकिन अगली बार डोरा डोरा कर मारुगी

अभय मुस्कुराते हुवे – देखेंगे

पूजा जीब दिखा के – देख लेना

अभय तारा को देख – सासु मा जन्म कुंडली ले ली ना आप ने

तारा – जी ले ली है

अभय तो चलिये फिर अभय पूजा तारा बाहर आते है पूजा तारा नई कार को देख हैरान हो जाते है

पूजा अभय को देख हैरानी से – ये कार किसकी है

अभय पूजा को देख मुस्कुराते हुवे – हमारी है और क्या

पूजा हैरान होते हुवे – कब ली आप ने

अभय – आज हि जरूरत मेहसूस हुई ले ली बाकी बात बाद मे चलो बैठो

तारा पीछे बैठ जाती है पूजा आगे पहली बार कार मे बैठे थे तारा पूजा अच्छा लग रहा था अभय बिना देरी किये सभी को लेकर घर आ जाता है अंदर जब जाते है तो सभी आँगन मे बैठे हुवे थे विजय मिनिता काजल कोमल सभी आ चुके थे

आसा तारा को देख – आइये यहा बैठिये

तारा आसा के पास बैठ जाती है

आसा सिला तारा मिनिता काजल इन के बीच बाते होने लगती है

वही पूजा दिशा अदिति मधु कोमल अपना ग्रोप् बना कर बाते करने लगते है

दो बरे लोग थे मिनिता के पति भोला और सिला के पति जोगिनाथ तो दोनो अपने मे बाते करने लगते है

अभय विजय दोनो एक जगह बैठ ये भी बाते करने मे लग जाते है सभी आ चुके थे बस पंडित जी का इंतज़ार था

                   आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏

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