सशा को भी ये अहसास होने लगा था था कि अब शायद उसके पापा झड़ने वाले हैं इसलिए उसने अपने आपको पूरी तरह उनके हवाले कर दिया, जगदीश राय सशा के सिर को पकड़कर जोर जोर से अपना लंड उसके मुंह मे पेल रहा था।
और फिर अगले ही पल जगदीश राय के बदन में एक तेज़ लहर उठी और वो भलभला कर झड़ने लगा, उसके लंड से वीर्य की बौछार होने लगी जो सशा के गले मे जाकर उसे तृप्त कर रही थी।
सशा भी एक मझे हुए खिलाड़ी की तरह जगदीश राय के पानी की आखिरी बून्द भी पी लेना चाहती थी, जब जगदीश राय पूरी तरह झड़कर शांत हो गया तो सशा ने जीभ की नोंक से सुपाड़े के छेद से निकल रही वीर्य को भी चाट लिया।
जगदीश राय: “ .उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस” ओह्हहहहहह बेटी उम्ह्ह्ह्ह्ह.”
जगदीश राय लगातार सिसकता ही जा रहा था।
सशा की जीभ आखिरी बार पूरे लंड पर घूमने लगी और वो उसे चाट कर साफ़ करने लगी , लंड पूरा साफ़ होने के बाद उसने सुपाड़े को अपने होंठो में एक बार फिर से भरकर चूसा और फिर अपने होंठ उसपे दबाकर एक ज़ोरदार चुम्बन लिया।
कुछ देर आराम करने के बाद जगदीश राय सशा को बेड पर सुला देता है और उसकी छोटी सी कुंवारी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगता है कुछ ही देर में सशा उत्तेजना से तड़पने लगती है।
जगदीश राय झुक कर उसकी चूत को धीरे से चूम लिया और दरार को नीचे से ऊपर तक चाटा, कई कई बार चाटा और समूची चूत को मुंह में भर लिया और झिंझोड़ डाला.
आनन्द के मारे सशा के मुंह से किलकारी निकल गई. फिर ऊपर हाथ ले जाकर उसके दोनों मम्मे पकड़ लिए और चूत का दाना, वो छोटा सा भागंकुर अपनी जीभ से टटोलने लगा और इसे अपनी मुंह में लेकर चूसा और चूत की गहराई में जीभ घुसा कर प्यार से, बहुत ही निष्ठा पूर्वक उसकी शर्बती चूत चाटने लगा.
वो बेचारी इतना सब कैसे सहन कर पाती, बदले में वो अपनी चूत उठा उठा कर अपने पापा के मुंह पे मारने लगी.
अब जगदीश राय अपनी नाक चूत की गहराई में रगड़ता हुआ चाटने लगा.
मुश्किल से 5 ही मिनट बीता होगा की वो आ गई… भलभला कर झड़ गई.
‘हाय पापा…’ वो इतना ही बोल पाई और अपनी जांघें ताकत से अपने पापा के सिर पर लपेट दीं और झड़ने लगी.
चूत रस का नमकीन स्वाद जगदीश राय मुंह में आ गया. करीब दो तीन मिनट तक वो यूं ही अपने पापा सिर को अपनी चूत पर जांघों से दबोचे रही फिर धीरे से पैर खोल दिए और चित लेट के गहरी गहरी साँसें लेने लगी.
जगदीश राय उसकी जांघ पर सर रखे हुए लेटा रहा.
‘प्लीज पापा, मेरे पास आओ!’ उसकी आवाज बदली बदली सी थी जैसे किसी कुएं के भीतर से बुला रही हो.
जगदीश राय ऊपर खिसक कर उसके पहलू में लेट गया और उसे अपने सीने से लगा लिया. वो मासूम अबोध किशोरी सी अपने पापा से चिपक गई और अपनी अंगुली से उनकी छाती पर जैसे कुछ लिखती रही.
‘क्या लिखा मेरे सीने पर?’ जगदीश राय उसका सिर प्यार से सहलाते हुए पूछा
‘ऊं हूँ!’
‘बता ना?’
‘म्मम्म कुछ नहीं…’ वो बोली और जगदीश राय अपनी बांहों में कस लिया.
कैसा लगा ये सब?’ जगदीश राय उसे चूमते हुए पूछा
साशा :‘बहुत अच्छा बहुत ही प्यारा प्यारा. जब आप मेरी चूत चाट रहे थे तो जैसे मेरे बॉडी में फूल ही फूल खिल गये थे, सारे बदन में रंगीन फुलझड़ियाँ सी झर रहीं थीं. मैंने सोचा भी नहीं था कि ये सब इतना मस्त मस्त लगेगा!’ वो बोली.
‘और अब कैसा लग रहा है?’
‘लग रहा है मैं बहुत हल्की फुल्की सी हो गई हूँ. मेरे भीतर से कुछ बह के निकल गया है जो मुझे हरदम बेचैन किये रहता था.’सशा ने बताया.
कुछ ही देर बाद जगदीश राय सशा की छोटी छोटी टाइट चूचियों को पूरा मुँह में भरकर चूसने लगा।उसके छोटे छोटे निप्पल को दाँतों से काटने लगा।5 मिनट में ही जगदीश राय ने दोनों चूचियों को काट कर चु कर लाल कर दिया।अंब सशा भी पूरी गरम होकर सिसियाने लगी।
दोनों पूरी तरह से गर्म हो चुके हैं जगदीश राय अपने लंड को सशा की छोटी सी कुंवारी चूत पर रगड़ने लगता है सशा अपनी गांड उपर उठाकर लंड को जल्द से जल्द अंदर लेना चाहती है लेकिन जगदीश राय सशा को और गर्म कर देना चाहता है ताकि उसको कम से कम दर्द हो।
तब सशा ने जगदीश राय के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर दबाया, तो जगदीश राय के लंड का सुपाडा उसकी चूत की फांको को फेलाता हुआ, छेद पर जा लगा,सशा की कुँवारी चूत की फाँकें जगदीश राय के लंड के सुपाडे के चारो तरफ फैेलाते हुए कस गई, अपनी चूत के छेद पर अपने पापा के लंड का गरम सुपाडा महसूस करते ही उसके बदन में मानो हज़ारो वॉट की बिजली कोंध गई हो,सशा का पूरा बदन थरथरा गया….
सशा की चूत उसकी चूत से निकल रहे कामरस से एक दम गीली हो चुकी थी, सशा ने अपनी आँखो को बड़ी मुस्किल से खोल कर जगदीश राय की तरफ देखा, और फिर काँपती आवाज़ में बोली…
सशा: पापा धीरे-धीरे ही अंदर करना, मैं ये सब पहली बार कर रही हूँ, इसलिए मुझे दर्द होगा, पर आप चिंता मत करना , चाहे मुझे कितना भी दर्द हो, आप अपना लंड मेरी कुँवारी चूत में पूरा घुसाना।
अब जगदीश राय ने धीरे धीरे अपने लंड के सुपाडे को सशा की चूत के छेद पर दोबारा दबाना शुरू किया, जैसे ही उसके लंड का सुपाडा सशा की गीली चूत के छेद में थोड़ा सा घुसा, सशा एक दम सिसक उठी, जगदीश राय के लंड का सुपाडा सशा की चूत की सील पर जाकर अटक गया, जगदीश राय भी इस रुकावट को साफ महसूस कर पा रहा था….
सशा की चूत की झिल्ली,जगदीश राय के लंड के सुपाड़े से बुरी तरह अंदर को खिच गई, जिसके कारण सशा के बदन में दर्द की एक तेज लहर दौड़ गई, उसके चेहरे पर उसके दर्द का साफ पता चल रहा था।
जगदीश राय: क्या हुआ बेटी ? ज्यादा दर्द हो रहा है क्या ?
सशा: आहह हां पापा…दर्द हो रहा है…..
जगदीश राय: बाहर निकाल लूँ…..
सशा: नही पापा बाहर मत निकालना….ये दर्द तो हर लड़की को जिंदगी में एक ना एक बार तो सहन करना ही पड़ता है….पापा आप बस ज़ोर से धक्का मारो….और एक ही बार मे मेरी चूत फाड़ दो।

