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दोनों बहनें पूरी रंडी बनकर अपने पापा के लंड को खा जाने में जुटी थी,दोनों बहनों ने अपनी जीभ का वो कमाल दिखाया की जगदीश राय का लण्ड फटने को तैयार हो गया।दोनों बहनो ने दोनों तरफ से मुँह खोलकर लंड को चूसना और चाटना शुरू किया तो जगदीश राय को लगा की सारा पानी दोनों के मुँह पर ही छोड़ देगा।

कुछ ही देर में उनकी मेहनत रंग लाने लगी, जगदीश राय के लण्ड में ने फुफकारना शुरू कर चुका था और कुछ ही मिनट में अब वो रॉड की तरह खड़ा था।

अब जगदीश राय ने निशा को ऊपर मुँह करके सीधा लेटाया और उसके ऊपर आशा को उल्टा लिटा दिया।अब दोनों की चूचियाँ एक दूसरे से दब गई।और दोनों एक दूसरे को चूसने लगी।

ऊपर से जगदीश राय ने आशा की गांड पर थूक दिया और एक ही झटके में अपने पूरे लंड को उसकी गाण्ड में उतार दिया।आशा की गांड फटती चली गई और लंड पूरा घुसता चला गया।अब जगदीश राय आशा की टाइट गांड में अपना मूसल लंड पेलने लगा।फिर उसने अपने लंड को आशा की गाँड से निकालकर निशा की चूत में पेल दिया।निशा की चूत पूरा पानी छोड़ रही थी।जिसमे लंड फच फच कर रहा था।

कुछ देर निशा की चूत में पेलने के बाद फिर जगदीश राय ने अपने लण्ड को निशा की चूत से निकालकर आशा की मस्तानी गांड में पेल दिया।अब तो लण्ड आशा की गांड में पूरा जड़ तक घुसा के पेल रहा था।
एक मिनट आशा की गांड में पेलता फिर एक मिनट निशा की चूत में पेलने लगता।

लेकिन इस बार निशा की चूत में पेलने के बाद जगदीश राय ने लंड को फिर से निशा की कसी हुई टाइट गांड में ही पेल दिया।निशा दर्द से सिसियाने लगी।जब थोड़ी देर हुई तो आशा बोली।

आशा:पापा क्या कर रहे हो।कितनी देर से निशा दीदी को ही चोद रहे हो।इधर मेरी गाण्ड में खुजली हो रही है।जल्दी पेलो पापा।फाड़ डालो मेरी गांड को।

जगदीश राय: क्या करू बेटी।तेरी दीदी के पास दो दो छेद है।तो दोनों में पेल रहा हूँ।तू तो एक ही छेद दे रही है।इसलिए तेरी दीदी में ज्यादा टाइम लग रहा है।

आशा :कोई बात नहीं पापा।इसका बदला मैं भी लेकर रहूंगी।

निशा:अरे आशा तुझे जितना मन करे।चुदा ले।

आशा की गाण्ड लंड के इस घर्सण से उत्तपन्न गर्मी से पिघली जा रही थी, इधर निशा ने भी आशा के होठो और मुंम्मो पर लगातार हमला जारी रखा हुआ था।

इस दो तरफा हमले को सह पाना आशा के लिए बड़ा मुश्किल हुआ जा रहा था, जगदीश राय पोजीशन बदल बदल कर आशा की गांड की धज्जियां उडाए जा रहा था, बीच बीच मे अब वो अपना लंड निकालकर निशा की चुत में भी घुसेड़ देता ।

फिर जगदीश राय ने दोनों बेटियों को एक दूसरे के ऊपर कुतिया बनाके चोदना शुरू किया।पहले आशा की गांड मारता।फिर निशा की चूत और गांड मारने लगता।फिर अपना लंड आशा की गांड में पेल देता।दोनों की गांड पर कभी कभी थप्पड़ भी मारने लगता।
तीनों छेदों को 1 मिनट का भी आराम नहीं था।

चौथा छेद आशा की चूत में कभी कभी ऊँगली पेल देता।दोनों बहने कुतिया बने बने कितनी बार झड़ चुकी थी।

तकरीबन 45 मिनट की घमासान धमाकेदार चुदाई के बाद जगदीश राय ने अपना लंड बाहर निकाला और दोनों बेटीयों को निचे बैठ दिया और अपना पानी दोनों बहनों के मुँह और मुंम्मो पर छोड़ दिया जिसे दोनों बहनों ने अमृत समझ चाट लिया, इस बीच वो दोनों भी न जाने कितनी बार अपना पानी छोड़ चुकी थी।

कुछ देर आराम करने के बाद फिर दोनों ने जगदीश राय के लंड को सहलाना शुरू कर दिया।जगदीश राय ने दोनों बहनों को अपना लंड चाटने का इशारा किया।
अब जब दोनों बहनों में जगदीश राय के लंड को चूसना शुरू किया तो दो दो गरम मुँह की गर्मी से जगदीश राय के लंड का बुरा हाल हो गया।इस बार जगदीश राय ने फर्श पर गद्दा डलवाया और पहले निशा को उल्टा लिटा दिया।और आशा को उसकी गांड और चूत को गिला करने को कहा।आशा ने जल्दी ही निशा की चूत और गांड को अपनी जीभ से चाट कर और थूक लगाकर गिला कर दिया फिर उसने अपने पापा के लंड को भी गिला कर दिया और बोली और फाड़ डालो पापा दीदी की चूत और गांड।

जगदीश राय ने अपने लंड को निशा की चूत पर रखा और एक ही धक्के में अपना 9 इंच का लंड अपनी बेटी निशा की चूत में जड़ तक पेल दिया।निशा चिल्लाने लगी।

लेकिन जगदीश राय को कोई फर्क नहीं पड़ा।वह तो धक्के पे धक्के मार के पेल रहा था।जब लंड पूरा गिला हो गया तो उसने लंड निकालकर आशा को चूसने को बोला।आशा जल्दी जल्दी चूसने लगी।इस बार जगदीश राय ने अपने लंड को निशा की गांड के भूरे छेद पर लगाया तो निशा कांप उठी।लेकिन जगदीश राय ने जोर का धक्का मारा और उसका पूरा लंड निशा की गाण्ड को फैलाता हुवा घुस गया।।

निशा:आह मरर गईईईईई पपाआआआ।धीरे धीरे पेलो ना।
लेकिन जगदीश राय को कोई फर्क नहीं पड़ा वह निशा की गांड से लंड निकाल के आशा के मुँह को चोदने लगता।फिर मुँह से निकालकर निशा की चूत और गांड फाड़ने लगता।इस बार पूरी बेरहमी से उसने निशा की चूत और गांड मारी।आखिरी समय में तो निशा मज़े से चिल्लाने लगी और बुरी तरह से झड़ गई।जगदीश राय ने भी अपना पूरा वीर्य अपनी बेटी निशा की गाँड में भर दिया।

जगदीश राय ने अपना लंड निशा की गांड से निकल कर आशा के मुँह में पेल दिया।जिसे आशा ने चाट चाट कर चमका दिया।निशा पूरी तरह थक गई थी।उसने अपने पापा को किस किया और सोने चली गई।

जगदीश राय और आशा ने कुछ देर रेस्ट किया फिर आशा बोली:पापा आपने तो आज दीदी की बैंड बजा दिया।

जगदीश राय:आ अब तेरी बारी है।इस बार तुझे भी ऐसा चोदुँगा की 2-3 दिनों तक तेरी गाँड में खुजली नहीं होगी।थोडा मेरा लंड तो चूस दे ।फिर देख तेरा क्या हाल करता हूँ।

आशा घुटनों पर बैठके अपने पापा का लंड चूसने लगती है।जगदीश राय दोनों हाथों से उसके सर को पकड़कर अपना लंड आशा की मुँह में पेलने लगता है।
पांच मिनट तक आशा की मुँह चोदने के बाद जगदीश राय आशा को कुतिया बना देता है।फिर अपना गिला लण्ड आशा की टाइट गांड में जबरदस्ती पेल देता है।

जगदीश राय:देख साली रंडी।अब तुझे कैसे कुतिया की तरह दौड़ा दौड़ा के पेलता हूँ।दौड़ते हुए थोडा भी रुकी तो साली तेरी गांड पर कितने थप्पड़ पड़ेंगे तुझे पता भी नहीं होगा।बोल साली रंडी तू मेरी क्या है।

आशा:मैं आपकी रांड हूँ।आपकी पर्सनल रांड।
मुझे जैसे चाहो मुझे चोदो मेरे मालिक।

फिर जगदीश राय आशा के दोनों पैरों को ऊपर उठा देता है।और आशा की गांड में लंड पेलते हुए उसे आगे चलने को कहता है।आशा दोनों हाथो के बल आगे चलने लगती है।फिर तो जगदीश राय आशा को किसी गली की कुतिया की तरह घर के कोने कोने में दौड़ाकर उसकी गांड मारता है।आधे घंटे तक जगदीश राय आशा की गांड मारता है।तब तक आशा दो बार झड़ चुकी है।

फिर जगदीश राय आशा की गांड से लंड निकालकर उसके मुँह को चोदने लगता है।फिर आशा भी अपने ही गाण्ड से निकले लंड को चूस चूसकर उसका पूरा वीर्य पि जाती है।फिर दोनों साफ सफाई करके सोने चले जाते है।

ऐसे ही मस्ती में दिन बीत रहे थे की एक दिन सुबह सशा के कमरे के बाहर से गुजर रहा था की उसे फोन पर बात करने की आवाज सुनाई दी।

सशा : नहीं….नहीं सर प्लीज्जज्जज्जज्ज सर।
फिर उधर से कुछ कहा गया।

सशा:प्लीज सर……ओके मैं आ रही हूँ।

इतना सुनकर जगदीश राय को शक हो गया की जरूर दाल में कुछ काला है।वह निशा को ऑफिस जाने को कहकर जल्दी ही घर से निकल गया।बाहर आकर मेन रोड पर एक दुकान में बैठकर चाय पिने लगा।

कुछ ही देर बाद सशा घर से स्कूल ड्रेस में जाती दिखाई दी।जबकि अभी स्कुल जाने में बहुत देर था।इतना पहले वह क्यों जा रही है।जगदीश राय उसका पीछा करने लगा।स्कूल ज्यादा दूर नहीं था।यही कोई 1 किलोमीटर।सशा स्कूल में घुस गई अभी स्कूल में कोई नहीं आया था।

सशा सीधे ऊपर चली गई।ऊपर लिखा था ओनली फॉर स्टाफ।जगदीश राय भी छुपकर ऊपर चला गया।वह धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था।तभी उसे शशा की आवाज एक कमरे से सुनाई दी।जगदीश राय ने जल्दी से अपने मोबाइल को साइलेंट किया और उसकी कैमरे की लाइट बंद करके कैमरा चालू कर दिया।फिर वह उस रूम की खिड़की तक पहुँचा और खिड़की की झिरी से देखा की एक 50 की उम्र का आदमी खड़ा था।वह सशा का टीचर था और शशा उसके आगे बैठकर उसका लंड सहला रही थी।

खिड़की पुरानी थी जो लकड़ी की बनी हुई थी इसलिए उसमे झिरी बन गई थी।जगदीश राय ने खिड़की को थोडा सा दबाया तो मालूम पड़ा की वह खुली हुई थी।उसने मोबाइल का वीडियो कैमरा चालू करके उनलोगो के तरफ करके मोबाईल अंदर रख दिया।

फिर दरार से देखने लगा।अब टीचर ने सशा को अपने लंड को चूसने को बोला।लेकिन सशा बार बार मना कर रही थी।लेकिन जब टीचर ने गुस्से में धमकी दिया तो सशा मज़बूरी में उसका लंड चूसने लगी।अब वह टीचर साशा के बालों को पकड़कर उसके मुँह में अपना लंड पेलने लगा।

साथ ही साथ उसने सशा की स्कर्ट के बटन को खोलकर उसकी छोटी छोटी चूचियों को भी मसलने लगा।अब सशा भी धीरे धीरे गरम होने लगी थी क्योंकि अब वह भी उसके मोटे लंड को मज़े से चूस रही थी।टीचर तो इतना गरम हो गया था की सशा के मुँह में ही झर गया।जिसे साशा ने फर्श पर थूक दिया।और अपने कपडे ठीक करके बाहर निकल गई।

जगदीश राय ने भी अपना मोबाइल निकाला और छुपते छुपाते स्कूल से बाहर निकल गया।आज उसका ड्यूटी जाने का मन नहीं था।इसलिए वह घर आ गया।घर पर कोई नहीं था।निशा और आशा कालेज चली गई थी।और सशा के पास से आ ही रहा था।

अपने रूम में आकर उसने वीडियो देखा तो वीडियो पूरा क्लिअर था।लेकिन वह समझ नहीं पाया की यह टीचर उसकी बेटी को कैसे ब्लैकमेल कर रहा है।वह आराम करने लगा।तभी लांच टाइम पर दरवाजे खुलने की आवाज़ आई तो जाकर देखा तो सशा आ गई थी।

जगदीश राय:अरे बेटी तुम इतना जल्दी कैसे आ गई।
तबियत तो ठीक है ना।
सशा: पापा मेरा सर थोडा भारी था।इसलिए आ गई।
लेकिन आप आफिस नहीं गए।
जगदीश राय:सुबह गया था बेटी।आज जल्दी काम खत्म हो गया तो चला आया।तुम फ्रेश हो के आओ।मुझे तुमसे कुछ काम है।

साशा:ओके पापा।अभी आती हूँ।

सशा 10 मिनट बाद फ्रेस होकर आ जाती है।जब जगदीश राय पहले पढाई के बारे में बात करता है।फिर धीरे धीरे सशा से असली बात पर आता है।

जगदीश राय:देखो बेटी।तुमको कोई भी प्रॉब्लम है मुझे बताओ।मैं तुमको कुछ नहीं बोलूंगा।लेकिन जब बार बार पूछने पर सशा कुछ नहीं बताती तो जगदीश राय
अपनी मोबाइल में का वीडियो दिखाता है।जिसे देखकर साशा अपना सर निचे झुका लेती है और फुट फुट कर रोने लगती है।

जगदीश राय सशा को बाँहो में भर लेता है और उसे चूमते हुए चुप कराने लगता है।धीरे धीरे सशा चुप हो जाती है।तब जगदीश राय उससे पूछता है की किस मज़बूरी में वह ऐसा कर रही थी।तब सशा बताने लगती है।

एक हफ्ते पहले की बात है।एक लड़का बहुत दिनों से मेरे पीछे पड़ा हुवा था।रोज मेरा पीछा करता।मुझसे बात करने की कोशिश करता।हर समय मुझे देखकर मुस्कुरा देता।लेकिन मुझे कोई असर नहीं हुवा लेकिन 3-4 दिन पहले रात को मेरी नींद खुल गई।मुझे जोरो से पेशाब लगी हुई थी।जब मैं पेशाब करके आ रही थी तो निशा दीदी की आवाज आपके कमरे से सुनाई दी तो मैंने की होल से देखा की आप और दीदी सेक्स कर रहे थे।

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