जगदीश राय: हाए अब बोल बेटी……मज़ा आ रहा है ना गान्ड मरवाने में…..”
निशा: आ रहा है….हाए बहुत मज़ा आ रहा है….ऐसे ही ज़ोर लगा कर चोदते रहिए पापा…….हाए मारो अपनी बेटी की कुँवारी गान्ड”
जगदीश राय: “ले बिटिया…..ले….यह ले………मेरा लॉडा अपनी गान्ड में” जगदीश राय पूरी रफ़्तार पकड़ते हुए निशा के चुतड़ों पर तड़ तड़ चान्टे मारने सुरू कर दिए.
निशा:हाय….उूुुउउफफफ्फ़…,मारो ..पापा….मारो अपनी बेटी की गान्ड….फाड़ो अपनी बेटी की गान्ड…….,हाए मारो फाड़ डालो। इसे…,उफफ़गगगगगग…हे भगवान……….ले लो मेरी गान्ड…….ले लो मेरे पापा…” ।
और फिर जगदीश राय पूरी रफ़्तार से अपना लंड अंदर और अंदर पेलना शुरू करता हैं और तब तक नहीं रुकता जब तक उसका लंड निशा की गान्ड की गहराई में पूरा नहीं उतर जाता. निशा की हालत बहुत खराब थी. वो दर्द से उबर नहीं पा रही थी. करीब 5 मिनिट तक वो ऐसे ही अपना लंड को निशा के गान्ड में रहने देता हैं.
फिर धीरे धीरे वो उसकी गान्ड को चोदना शुरू करता है. निशा के मूह से दर्द और सिसकारी का मिश्रण निकलने लगता हैं और जगदीश राय तब तक नहीं रुकता जब तक वो निशा की गान्ड से खून नहीं निकाल देता। करीब 30 मिनिट तक ज़बरदस्त गान्ड मारने के बाद आख़िरकार निशा का बदन भी जवाब दे देता हैं और वो भी चिल्लाते हुए ज़ोर ज़ोर से झरने लगती हैं।साथ में जगदीश राय भी निशा के गांड में अपनी मलाई छोड़ देता है।
वही दोनो बाप बेटी वही बिस्तर पर एक दूसरे की बाहों में समा जाते हैं. और निशा अपने पापा को अपने सीने से चिपका लेती हैं. जगदीश राय भी उसके सीने पर अपना सिर रखकर लेट जाता हैं।
निशा:एक बात पूँछू पापा।प्लीज आप सही सही बताना।चूँकि मैं आशा से डायरेक्ट नहीं पूछ सकती।आप मेरे दोस्त हो तो आप बताओ।आशा से आप……कैसे…..
जगदीश राय:देखो बेटी।जब तुम टूर पर चली गई तो 2-3 दिन बाद मेरा मन नहीं लग रहा था ऑफिस में तो मैं घर चला आया।यहाँ देखा की आशा अपने कमरे में एक लड़के के साथ है।दोनों नंगे थे।लड़का मुझे देख के भाग गया।लेकिन आशा वैसी ही खड़ी रही।फिर जब मैंने उसे डाँटा तो उसने ये राज खोला की पापा आप भी तो निशा दीदी के साथ मज़े लेते हो।
मुझे तो विस्वास ही नहीं हुवा लेकिन आशा ने कभी रात में हमें देखा था।इसलिए मुझे झुकना पड़ा।फिर मैंने देखा की आशा की गाँड में एक पूँछ घुसी हुई है।मैंने पूछा तो उसने बताया की उसे इसमें मज़ा आता है।वो रैबिट की पूँछ है।और उसकी सहेली विदेश से लाई है दोनों के लिए।
फिर दो तीन दिन बाद मैं एक दिन मुठ मार रहा था तो आशा आ गई और मेरी हेल्प करने के बहाने अपनी गांड में लंड डालने पर मजबूर किया।
निशा:लेकिन चूत में क्यों नहीं।
जगदीश राय:क्योंकि आशा बोल रही थी की वो कुंवारी चूत अपने पति को देगी।दूसरे को सिर्फ गाँड देगी।मैं भी ये सोचकर उसके साथ किया की कम से कम बाहर
इज्जत ख़राब ना करे।आजकल के लड़कों का क्या भरोसा। कोई वीडियो बना लेगा तो हमारी इज़्ज़त का क्या होगा।घर में हम आपस में खुश रहेंगे।हमारी जरूरतें भी पूरी होती रहेगी।
निशा:अजीब पागल है ये लड़की भी।थैंक्स पापा आपने अच्छा किया।कम से कम हमारी इज़्ज़त तो बची रहेगी।
फिर जगदीश राय सोने लगा।
कुछ देर बाद जगदीश राय को अपने लंड पर गीली गरम जीभ का अहसास हुवा तो उसने आँखे खोल दी।उसने देखा उसकी बेटी किसी कुतिया की तरह उसके लंड को ऊपर से निचे तक चाट रही थी।जगदीश राय का लंड फिर से अकड़ने लगा था।निशा लंड को तेजी में चूस रही थी।अब जगदीश राय का लंड निशा के थूक से पूरा गिला हो गया था।
जब लंड पूरा खड़ा हो गया तो जगदीश राय ने निशा को सुला दिया और अपना लन्ड एक ही झटके में पूरा 9 इंच का लंड अपनी बेटी निशा की चूत में पेल दिया।
निशा:आआऐईईइ…..इसस्स्स्सस्स….ऊऊऊ इइइइइ मआआ….. मर गयी. आअहह…इससस्स…आ.” पापा के मोटे लंड ने निशा की चूत के छेद को इतना ज़्यादा चौड़ा कर दिया था, ऐसा लगता था कि चूत फॅट ही जाएगी.
“क्या हुआ बेटी?” जगदीश राय ने लंड थोड़ा सा और अंदर बाहर करते हुए पूछा.
निशा:“पापा, इसस्स….बहुत….. बहुत मोटा लंड है आआपका. आप तो हमारी चूत फाड़ डालेंगे.”
जगदीश राय:हम अपनी प्यारी बिटिया की चूत कैसे फाड़ सकते हैं?” पापा ने निशा के होंठों का रसपान करते हुए बोले.
जगदीश राय ने निशा की दोनो टाँगें मोड़ के उसके घुटने उसकी चुचियों से चिपका दिए थे. अब तो वह बिल्कुल लाचार थी और उसकी चूत पापा के मोटे तगड़े लंड की दया पे थी. हलाकी अब तक तो पापा अपने लंबे तगड़े लंड से कितनी बार निशा को चोद चुके थे, लेकिन आज पापा का लंड झेलना भारी पड़ रहा था. इतने में जगदीश राय ने अपना लंड थोड़ा सा निशा की चूत के बाहर खींचा और फिर एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. आधे से ज़्यादा लंड फिर से चूत में समा गया.
निशा:“आाआऐययईईईईईई….ऊऊऊीीईईईई माआआआ……..आहह धीरे….अया…धीरे..ईीीइससस्स….”
इससे पहले कि निशा कुछ संभलती जगदीश राय ने फिर से अपना लंड सुपाडे तक बाहर खींचा और इस बार एक और भी भयंकर धक्का मार के पूरा लंड निशा की चूत में उतार दिया.
निशा:“आआअहह…आाययइ…..मार डाला.. फाड़ डालिए. …… आपको क्या? इससस्स.. बेटी की चाहे फॅट जाए.” पापा का मोटा लंड आख़िर जड़ तक निशा की चूत में घुस गया था और उनके मोटे मोटे बॉल्स उसकी गांड के छेद पे दस्तक दे रहे थे. निशा का बदन पसीने में नहा गया था. पापा थोडी देर बिना हिले निशा के ऊपर पड़े रहे और निशा की चूचियों और होंठों का रसपान करते रहे. निशा की चूत का दर्द भी अब कम होने लगा था.अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
“बेटी थोड़ा दर्द कम हुआ?” जगदीश राय निशा की चूचियों को दबाते हुए बोले.
“हाँ पापा, अब जी भर के चोद लीजिए अपनी प्यारी बिटिया को.” निशा उनके कान में फुसफुसाते हुए बोली. अब जगदीश राय ने पूरा लंड बाहर निकाल के निशा की चूत में पेलना शुरू कर दिया. सच! ज़िंदगी में चुदवाने में इतना मज़ा आएगा निशा ने कभी सोचा नहीं था. अब निशा को एहसास हुआ कि क्यूँ उसकी सहेलियां रोज़ चुदवाने के लिए उतावली रहती है. अब निशा की चूत बहुत गीली हो गयी थी उसमें से फ़च…फ़च…फ़च का मादक संगीत निकल रहा था. कुच्छ देर तक चोदने के बाद उन्होने अपना लंड निशा की चूत से बाहर खींचा और उसके मुँह में डाल दिया. पापा का पूरा लंड और बॉल्स निशा की चूत के रस में सने हुए थे.निशा ने पापा का लंड और बॉल्स चाट चाट कर साफ कर दिए. अब पापा बोले,
जगदीश राय: “निशा मेरी जान, अब थोड़ा कुतिया बन जाओ. अपने इन जान लेवा नितम्बों के दर्शन भी तो करा दो.”
“आपको मेरे नितम्ब बहुत अच्छे लगते हैं ना?” निशा पापा के बॉल्स सहलाते हुए बोली.
जगदीश राय“हां बेटी बहुत ही सेक्सी नितम्ब हैं तुम्हारी.”
निशा“ और मेरी? मेरी गाँड अच्छी लगी आपको?”
जगदीश राय: “तुम्हारी गाँड तो बिल्कुल जान लेवा हैं बेटी. जब नहा के टाइट कपड़ो में घूमती हो तो ऐसा लगता है जैसे कपडे फाड़ के बाहर निकल आएँगे. तुम्हारे मटकते हुए चूतडों को देख के तो हमारा लंड ना जाने कितनी बार खड़ा हो जाता है.”
निशा:“हाय पापा इतना तंग करते हैं हमारे नितम्ब आपको? ठीक है मैं कुतिया बन जाती हूँ. अब ये नितम्ब आपके हवाले. आप जो चाहे कर लीजिए.”

