जगदीश राय के लंड से एक थूक की लकीर निशा के मूह तक जुड़ी हुई थी. ऐसा लग रहा था कि उसके लंड से कोई धागा निशा के मूह तक बाँध दिया हो. वो घूर कर एक नज़र अपने पापा को देखती हैं.
निशा- ये क्या पापा भला कोई ऐसे भी सेक्स करता हैं क्या. आज तो लग रहा था कि आप मुझे मार ही डालोगे. मुझे कितनी तकलीफ़ हो रही थी आपको क्या मालूम. देखो ना अभी तक मेरा मूह भी दर्द कर रहा हैं.
जगदीश राय- तू जानती नहीं हैं निशा बेटी मेरा एक सपना था कि मैं किसी भी लड़की के मूह में अपना पूरा लंड पेलने का. मगर आज तूने मेरा सपना पूरा कर दिया. ना जाने मैं कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया हूँ मगर उनमें से किसी ने भी मेरे लंड अपने मूह में पूरा नहीं लिया. आख़िर अपना खून अपना ही होता हैं.
निशा:अब तो आप खुश हो ना।
जगदीश राय: हां बेटी।अच्छा तुम मुझे गिफ्ट देनेवाली थी ना।क्या है वो तेरी स्पेशल गिफ्ट।
निशा:मुस्कुराकर।आप गेस करके बताइए।आपकी इस समय सबसे बड़ी इच्छा क्या है मैं वो पूरी करुँगी।वही आपका स्पेशल गिफ्ट होगा।
जगदीश राय- मेरा तो इस समय सबसे ज़्यादा मन तेरी गाण्ड मारने को कर रहा हैं. अगर तू मुझे इसकी इजाज़त दे तो……………..
निशा:चलो पापा आज रात आपको अपनी गांड आपको गिफ्ट में दिया।आप जैसे चाहो मेरी गांड मार लो।
जगदीश राय झट से निशा को अपनी बाहों में ले लेता हैं और उसका लब चूम लेता हैं.
जगदीश राय- तू सच में बहुत बिंदास है बेटी। मैने आज तक तेरे जैसे लड़की नहीं देखी. सच में तेरा पति बहुत किस्मत वाला होगा.
निशा- और आप नहीं हो क्या .निशा धीरे से मुस्कुरा देती हैं.
जगदीश राय- सच में तेरी जैसे बेटी पाकर तो मेरा भी नसीब खुल गया. और इतना कहकर वो निशा की गान्ड को कसकर अपने दोनो हाथों से भीच लेता हैं.
जगदीश राय- बेटी मेरा लंड को पूरा खड़ा कर ना. फिर मैं तेरी गांड मारूँगा.करीब 5 मिनिट तक निशा जगदीश राय के लंड को पूरा थूक लगाकर चूसती और चाटती है तब जगदीश राय का का लंड निशा की कुँवारी गांड को फाड़ने के लिए तैयार हो जाता हैं।
जगदीश राय:बेटी पहले तेरी गदराई गांड से तो जी भर के प्यार कर लूँ।
जगदीश राय बस देखने लगता है अपनी बेटी के गान्ड की खूबसूरती …उफफफफ्फ़..क्या नज़ारा था.. भारी भारी गोल गोल उभरे हुए गोरे गोरे चूतड ..जिन्हें अपनी हथेलियों से बड़े ही हल्के से दबाता हुआ अलग करता है …दरार चौड़ी हो जाती है ..दरार के बीच थोड़ी सी डार्कनेस लिए गान्ड के होल की चारों ओर का गोश्त … गाँड की सूराख पूरी बंद हुई … पर चारों ओर का गोश्त एक दम टाइट ..बन्द सूराख इस बात की गवाही दे रहा था कि गान्ड में कोई लंड अंदर नहीं गया है… और पूरी दरार चीकनी और चमकती हुई … उस ने अपने अंगूठे से गान्ड की दरार को हल्के से दबाया ….अंगूठा उसकी चीकनी गान्ड में फिसलता हुआ उपर की ओर बढ़ता गया।उफ़फ्फ़ इतनी चीकनी और भारी गान्ड जगदीश राय ने आज तक नही देखी….
निशा अपने पापा की हरकतों से मस्त थी..मुस्कुरा रही थी..और अंगूठे के दबाव से सीहर उठी …उस ने अपनी गान्ड थोड़ी सी उपर उठाते हुए कहा ..
” हां ..हां पापा अच्छे से छू लो , दबा लो देख लो … तुम्हारे लौडे के लिए सही है ना..? ”
” बेटी… बहोत शानदार , जानदार और मालदार है तेरी गान्ड ..उफफफफ्फ़..सही में तुम ने काफ़ी मेहनत की है ….ज़रा चाट लूँ बेटी ? ”
यह बात सुन कर निशा और भी मस्ती में आ जाती है ..और अपनी गान्ड और भी उपर उठाते हुए पापा के मुँह पर रखती है …
” पापा ..पूछते क्यूँ हो….आप की बेटी है ..आप की प्यारी बेटी का गान्ड है..जो जी चाहे करो ना ..चाटो..चूसो खा जाओ ना ….पर लॉडा अंदर ज़रूर पेलना …”
और अपने पापा के मुँह से गान्ड और भी लगा देती है ..
जगदीश राय उसकी गान्ड नीचे पलंग पर कर देता है , दरार को फिर से अलग करता हुआ अपनी जीभ उसके सूराख पर लगाता है और पूरी दरार की लंबाई चाट जाता है..जीभ को अच्छे से दबाता हुआ …. उफफफफ्फ़ उसकी गान्ड की मदमस्त महक और एक अजीब ही सोंधा सोंधा सा टेस्ट था …
दो चार बार दरार में जीभ फिराता है ..जीभ के छूने से और जीभ की लार के ठंडे ठंडे टच से निशा सीहर उठ ती है …और फिर जगदीश राय उसकी गान्ड के गोश्त को अपने होंठों से जाकड़ लेता है और बूरी तरह चूसता है…मानो गान्ड के अंदर का पूरा माल अपने मुँह में लेने को तड़प रहा हो….
निशा मज़े में चीख उठती है ” आआआआः….पापा ….उईईई..देखो ना मेरी गान्ड कितनी मस्त है .? अब देर ना करो ..बस पेल दो ना अंदर ..प्लीज्जज्जज्जज्जज्ज …।
जगदीश राय किचन में जाकर तेल की शीशी लेकर आता हैं.निशा जब अपने पापा के हाथ में तेल की शीशी देखती हैं तो उसकी हालत बिगड़ जाती हैं. उसने तो बोल दिया था कि वो अपने पापा से अपनी गान्ड मरवायेगि मगर इतना मोटा और लंबा लंड को वो अपनी गान्ड में कैसे बर्दास्त कर पाएगी ये उसकी समझ में नहीं आ रहा था. जगदीश राय फिर तेल की शीशी खोलता हैं और थोड़ा सा तेल लेकर निशा की गान्ड के छेद पर गिरा देता हैं और अपनी दोनो उंगली में अच्छे से तेल लगाकर वो उसकी गान्ड में धीरे धीरे ऊँगली पेलना शुरू कर देता हैं. कुछ देर के बाद वो अपनी दोनो उंगली को निशा की गान्ड में डालकर अच्छे से आगे पीछे करने लगता हैं. निशा फिर से गरम होने लगती हैं.
निशा को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो गया है. भला वो बार बार कैसे गरम हो रही हैं. जगदीश राय फिर तेल की शीशी को अपने लंड पर लगाता हैं और कुछ निशा की गान्ड में भी डाल देता है. फिर अपना लंड को निशा की गान्ड पर रखकर धीरे धीरे उसे निशा की गान्ड में पेलने लगता हैं. निशा के मूह से चीख निकलने लगती हैं मगर वो अपने पापा को रोकने का बिल्कुल प्रयास नहीं करती. जैसे ही जगदीश राय का सूपाड़ा अंदर जाता हैं निशा की आँखों से आँसू निकल जाते हैं. उसे इतना दर्द होता है लगता हैं किसी ने उसकी गान्ड में जलता हुआ सरिया डाल दिया हो. वो फिर भी अपने पापा के लिए वो दर्द को बर्दास्त करती हैं।
निशा :उफफफफ्फ़.पापा आप कितने बेरहम हो……पूरा घुसा दिया……..इतना मोटा लॉडा पूरा मेरी गान्ड में डाल दिया”
जगदीश राय:हां बेटी…..पूरा ले लिया है तूने……..ऐसे ही बेकार में डर रही थी”
निशा:बेकार में……उूउउफफफफ्फ़………मेरी जगह आप होते तो मालूम चलता…..अभी भी कितना दुख रहा है….,धीरे करो पापा”
जगदीश राय: बेटी अब तो चला गया है ना पूरा अंदर…….बस कुछ पलों की देर है देखना तू खुद अपनी गान्ड मेरे लौडे पर मारेगी” बेटी की पीठ चूमता बोला.
“धीरे पेलो पापा…….हाए बहुत दुख रही है मेरी गान्ड…….”निशा सिसिया रही थी. जगदीश राय तेल वाला सुझाव वाकई मे बड़ा समझदारी वाला था. तेल से लंड आराम से अंदर बाहर फिसलने लगा था. जहाँ पहले इतना ज़ोर लगाना पड़ रहा था लंड को थोड़ी सी भी गति देने के लिए अब वो उतनी ही आसानी से अंदर बाहर होने लगा था. हालाँकि निशा ने अपने पापा धीरे धीरे धक्के लगाने के लिए कहा था मगर पिछले आधे घंटे से किए सबर का बाँध टूट गया और जगदीश राय ना चाहता हुआ भी अपनी बेटी की गान्ड को कस कस कर चोदने लगा.
निशा: हाए उउउफफफफफफफ्फ़………आआआहज्ज्ज्ज मार…डााअल्ल्लीीगगगघाा क्यआआअ……हीईीईईईई…..ओह माआआअ…….,,हे भगवान……मेरी गान्ड….,उफफफफफफफ़फ्ग फट गईईईईई।
निशा चीख रही थी, चिल्ला रही थी मगर अपने पापा को रुकने के लिए नही कह रही थी. सॉफ था उसे इस बेदर्दी में भी मज़ा आ रहा था.वैसे भी वो रोकती तो भी जगदीश राय रुकने वाला नही था. दाँत भींचे वह निशा की गान्ड को पेलता जा रहा था और वो पेलवाती जा रही थी.

