निशा ने काँपते स्वर से कहा,
निशा: पापा आप।। अपना सर थोड़ा पीछे करो, तेल लगाना चालु करती हूँ।
पापा के सर पीछे करते ही निशा ने हाथो में तेल लिया और पापा के सर पर मल दिया।
और वह धीरे धीरे पापा के सर को मलने लगी। वह अनजाने में अपना उंगलिया और हाथ बहुत धीरे और गोल गोल घुमा रही थी। कभी वह पापा के बालों को पकड़ कर मरोड़ देती।
जगदीश राय ने ऐसी तेल मालिश कभी नहीं कारवाई थी और पूरी तरह एन्जॉय कर रहा था। वह अपने आप में नहीं था और नहीं कुछ सोचना चाहता था । वह बस इस पल को पूरी तरह एन्जॉय करना चाहता था।
मालिश करते करते निशा जगदिश राय के कानो तक पहुच गयी। उसने देखा कान बहुत लाल हो चुके है। उसने कानो को अपने हाथो में पकड़ा और धीरे सहलाना शुरू किया।
दोनो बाप बेटी कुछ नहीं बोल रहे थे। पुरी रूम में बस उनकी तेज़ साँसे और तेल मलने की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
जगदीश राय का दिमाग बहुत सारे खयालो से गुज़र रहा था। उसने सोचा की मालिश अभी बंद होने वाली है क्युकी उसने कहाँ की शरीर पर तेल वह लगा लेगा। और वह धीरे धीरे अपने शॉर्ट्स को सेट कर रहा था ताकि निशा उसका खड़ा लंड न देख सके।
पर निशा उनके कान को सहलाती जा रही थी। फिर निशा ने धीरे से अपना दोनों हाथ पापा के कंधो में ले गई और वहां मसाज करना शुरू कर दिया। कंधो का मसाज करने के लिए उसे अपने पैरो को खोलना पडा, और उसने पैरो को खोला। और ऐसा करते ही वह पापा के सर के क़रीब आ गई।
निशा मन में बोल रही थी: ये मेरे प्यारे पापा है, जो अब बहुत दुखी है। इनका ख्याल मुझे रखना है। मैं अब पीछे हट नहीं सकती।
और वह अपने पापा को दिखाना चाहती थी की वह उनकी प्यारी बेटी है।
निशा पुरे ताकत से अपने आप को झुका कर , पापा के कंधो से हाथ फेरते हुआ पूरा उनकी कलाई तक ले जा रही थी। और ऐसा करते वक़्त निशा के बूब्स पापा के सर पर टकरा रहे थे।
जगदीश राय, निशा की इन हरक़तों से पागल हो चला था। 6 महीने से उसने मुठ तक नहीं मारी थी और आज उसे लग रहा था की उसका कम वही निकल जाएगा। निशा ज़ोर ज़ोर से पापा के हाथो का मालिश करते जा रही थी और फिर जल्द उसने थोड़ा और तेल लिया और पापा के पीछे से झूक कर उनके छाती पर मलना शुरू किया।
पापा की छाती उसने आज पहली बार इतनी मदहोशी में छुआ था। और उसने पाया की उनकी छाती भट्टी की तरह गरम है। और वह उस पर तेल मलने लगी, ज़ोर ज़ोर से।
जगदीश राय से यह रहा नहीं गया, और उसने अपना सर पीछे मोड़ दिया। और तभी निशा झुकी और उसने अपना बूब्स पापा के मुह से सटा पाया। पापा के मुह की गरम साँस उसे चूचो पर लग रहा था। वह कसमसायी, पर अपने कर्त्तव्य से पीछे नहीं हटी।
जगदीश राय निशा की बूब्स अपने मुह के ऊपर पाकर ऐसा महसूस कर रहा था की मानो जन्नत प्राप्त हुआ हो। उसे पता था की निशा की बूब्स बड़ी है पर आज उसने जाना की कितनी भरी हुई है। उसके दोनों चूचो के बीच उसका पूरा मुह अंदर समां गया। और निशा अब तक 20 की भी नहीं थी।
उसने दो बार निशा के बूब्स से अपना मुह सहलाना के बाद , अपना सर आगे की तरफ सीधा कर दिया।
निशा अभी भी अपने आप को झुका कर , पापा के छाती पर तेल मली जा रही थी। वह अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी। पैर खुले होने के वजह से, उसका चूत पूरा खुला हुआ था। और चूत पूरी गिली हो गई थी। उसका मन लग रहा था की उसके पेंटी को फाडकर, अपना तेल से लथपथ हाथ लेकर चूत को मसले। पर वह पापा के सामने नहीं करना चाहती थी।
मालिश करने के जोश में उसने अपने स्कर्ट पर ध्यान नहीं रखा और स्कर्ट अब तक कमर तक पहुच चुकी थी। अब उसकी चूत पर सिर्फ एक पतली सी पेंटी थी जो उसकी पूरी चूत को छुपा तो रही थी, पर वह पूरी गिली हो चुकी थी। निशा की चूत ने लगतार पानी छोडा था।
न जगदीश राय जानता था की निशा का यह हाल और न निशा जानती थी अपने पापा का हाल। निशा अब पूरी लगन से , झुक झुक कर, चूचो को अपने पापा पे मसल कर तेल लगायी जा रही थी। वह पूरी गरम और मदहोश हो चुकी थी। उसे लगा उसका पानी अब कभी भी छूट सकता है, पर अपने आप को कण्ट्रोल कर रही थी।
तब जगदीश राय ने अपनी खुद की मदहोशी में अपना गर्दन पीछ को सरकाया। निशा उसी वक़्त आगे सरकी और निशा की गोरी मुलायम पेंटी में छिपी गीली चूत अपने पापा के नंगे गरम जाँघ से जा मिली। एक ४०० वाट करंट निशा की पूरी शरीर पर एक लहर की तरह फ़ैल उठी और वह ज़ोर से चिल्लायी और चिल्लाती गयी।
निशा : अहहहहहहह…। अह्हह्ह्ह्ह…।डहह्हह्हह…अह्ह्ह्।। आह।

