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हर बार जब निशा गांड ऊपर करती, चूत बाहर की तरफ खीच जाती। आज पापा उसे नहीं चोद रहे थे बल्कि निशा आज पापा से चुदवा रही थी।

जगदीश राय: बेटी…धीरे करो……नही तो मैं झड जाउँगा…

निशा: धीरे नहीं होगा पापा…झड़ना है तो झड जाओ…पर चूत अब नहीं रुकने वाली…

निशा जोर जोर से लंड पर चूत मारने लगी, समझ नहीं आ रहा था की कौन किसे चोद रहा है। पुरे कमरे में फच फच की आवाज़ गूँज रही थी साथ में निशा की सिसकियाँ…

जगदीश राय , एक ज़ोर का आवाज़ निकाला और निशा की चूत में झडने लगा। पर निशा की चूत की रफ़्तार थोड़ी भी धीमी नहीं हुई।

झडते लंड पर वीर्य के फवारे के साथ निशा की चूत उसे और निचोड रही थी।

जगदीश राय: रुक जा बेटी…मैं झड गया हु…थोड़ा धीरे…

निशा: नहीं पापा…मैं रुक नहीं सकती…प्लीज आप लेटे रहिये…लंड खुद कड़क हो जाएगा।।।

जगदीश राय का लंड , झडने के बाद सुकड़ना चाह रहा था, पर निशा की गरम गिली चूत की मार से खड़ा ही रह गया। जगदीश राय के टट्टो में दर्द होने लगा पर निशा आज कुछ परवाह नहीं कर रही थी।

जगदीश राय के झडने के २० मिनट तक निशा ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से अपने पापा को चोदती रही, बिना रुके, बिना टोके। जगदीश राय की हर बिनती को उसने नज़रअंदाज़ कर दिया।

२० मिनट बाद जगदीश राय का लंड फिर से खड़ा हो गया था। पर वह झड़ना नहीं चाहता था क्युकी झडते वक़्त उसके टट्टो में दर्द हो रहा था।

और फिर निशा ज़ोर ज़ोर से हाँफते हुए तूफ़ानी अंदाज़ में चूत मारने लगी। और एक साथ जगदीश राय और निशा दोनों झड़ने लगे।

जगदीश राय: आर्गग्घहहह…निशा…बेटी…रऊउउउक…हाआआ…मैं झड़डडडडहह रआआह्ह्हआआ हूऊऊऊ

निशा: आआअह्हह्ह्ह्ह…पाआआआप्पप्पपप्पपाआआ……।

निशा कमसे कम 4 मिनट तक झडती रही। उसका सारा बदन थर थर कांप रहा था।

निशा इतनी जोर की झडी की उसे उसके मूठ पर कण्ट्रोल न रहा और उसने झड़ने के साथ साथ अपने पापा के कमर पर मूत भी दिया।

निशा बेहोशी की हालत में अपने पापा के ऊपर सोयी पड़ी थी। लंड अभी भी चूत में फसा हुआ था और निशा के पानी में नहा रहा था।

जगदीश राय का लंड दर्द कर रहा था। लंड अभी भी वीर्य उगल रहा था।

जगदीश राय, समझ गया की निशा को जी-स्पॉट ओर्गास्म आ चूका है। उसने काँपती निशा को बाहो में भर लिया। निशा झड़ती जा रही थी।

कोई १० मिनट बाद निशा जाग गयी।

निशा: सॉरी पापा…।शायद मैं ने आपके ऊपर थोड़ी सु-सु (यूरिन) कर दी।

जगदीश राय (निशा के गालो में हाथ फेरते हुए): बस थोड़ी सी? क्या पूरी नहीं की…नहीं किया तो और कर दो…

निशा: क्या…? नहीं…मैं आपके ऊपर थोड़ी ही कर सकती हूँ।

जगदीश राय: क्यों नहीं…मैं कह रहा हु न मुझे भी सु सु लगी है आओ…साथ में कर दो…
यह कहकर जगदीश राय ने अपना लंड फिर से निशा की चूत में घुसा दिया और बोला।चलो साथ में सु सु करते है।बहुत मज़ा आएगा।
दोनों एक साथ सु सु करने लगते है।निशा की आखे आनंद से बंद हो जाती है।पेशाब धीरे धीरे निचे आने लगता है।दोनों को इतना मज़ा आ रहा है की दोनों एक दूसरे के होठों को चूसने लगते है।

जगदीश राय को अपने लंड पर गरम पानी का एहसास हुआ था निशा को भी अपने चूत में तेज खलबली महसूस हुई।निशा की मुह से सु-सु निकलते हुए सिसकी निकली थी। जगदीश राय निशा को कसके बाहो में भर लिया और उसके गालो को चुमा।

निशा सु-सु करके वही पापा के ऊपर सो गयी। लंड अभी भी चूत के अंदर था।

निशा को चूत में कुछ महसूस हुआ। जब उसने आँख खोला तो अपने आप को पापा के ऊपर पाया। उसके दोनों मम्मे पापा की छाती से दबे हुए थे। और चूत में लंड खड़ा और कठोर हो चूका था।

निशा को अपने पापा का वादा याद आया की आज दोपहर तक लंड चूत से बाहर नहीं निकलने वाला है। सुसु की कामुक गंध सब जगह फ़ैल गयी थी, पर निशा को यह गंध और भी उत्तेजित कर रही थी।

जगदीश राय , अभी भी सो रहा था। निशा ने धीरे धीरे गांड हिलाकर लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया।

थोड़ी देर बाद जगदीश राय की आँख खुली। और पाया की निशा फिर से चुदवा रही है। और कमरे में सुसु की गंध उसे भी पसंद आने लगी।

एक गजब सा वातावरण हो गया था, पिशाब और वीर्य के बदबू से। पर आज बाप-बेटी ख़ुद को गंदे साबित करने में हिचकिचा नहीं रहे थे।

जगदीश राय ने निशा की आँखों में देखा और निशा मुस्करायी। और फिर आंखें बंद कर ऊपर-नीचे होने लगी।

जगदीश राय ने तुरंत निशा को निचे पटक दिया और जोर-जोर से निशा को पेलने लगा। निशा खुद भी यही चाहती थी।

कोई 2 घन्टे तक , कभी निशा ऊपर तो कभी जगदीश राय, कभी डोगी स्टाइल तो कभी खड़े-खड़े निशा और जगदीश राय एक दूसरे को चोदते रहे।

 

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