उसके बहुत सारी सहेली , अपने बॉय फ्रेंड के साथ चुदवा रही थी रात को और वह अपने उँगलियों से काम चला रही थी।
दो तीन लड़को ने उसे ऑफर भी दिया था इन डायरेक्टली पर उसने उन्हें मना कर दिया।
उसकी यह हालत देखकर, उसकी एक सहेली पारुल ने उससे समझाया भी।
परूल: देख निशा…सभी कॉलेज ट्रिप में मजा करने आते है…ताकि घर की निगरानी से दूर बेफिक्र होकर चुदवा सके…।और तू है की…
निशा: लेकिन मेरा तो कोई बॉय फ्रेंड नहीं है…तो मैं कैसे।।
परूल: अरे पगली…बॉय फ्रेंड किसको चाहिये…चूत को सिर्फ लंड चाहिये… वह किसीका भी हो…इतने सारे लंड है यहाँ…चुन ले किसी एक को…तेरे लिए तो हर कोई भी राजी होगा…
निशा: क्या…क्या बक्क रही है…
पारूल: अरे और नहीं तो क्या…वह सिमरन पिछले ४ रातो से 7 लंड ले चुकी है।। और उसकी तो तेरे जैसी अच्छि फिगर भी नहीं है…यहाँ सब बिन्दास है डियर…
निशा: मैं तो नहीं मानती…मैडम और सर जान जायेंगे… डायरेक्ट घर फ़ोन लगेगा…
परूल : है है है…अरे पगली…फ़ोन तो मैडम और सर के घर लगनी चाइये…वह दोनों तो जब से आए है, तब से एक भी रात एक दूसरे के बगैर नहीं सोये है…सर ने तो कल मेरे बॉय फ्रेंड विशाल से कंडोम भी लेके गए थे…तू सपनो की दुनिया मैं है।
निशा: क्या बोल रही है…सच।।?
पारूल: मूछ…और नहीं तो क्या…बोल कौन सा लंड चाहिये…।मैंने सुना है…त्रिलोक का लंड काफी बड़ा है।।चलेगा…और फिर सोनू चूत बहुत देर तक चाटता है।।और आकाश…गांड।।।
निशा: नहीं नहीं…मैं तो त्रिलोक और सोनु से तो बात भी नहीं करती…और उन सब की तो गर्ल फ्रेंड भी है।।
पारूल: लो तू फिर शुरू हो गयी…ठीक है…विशाल तो ठीक है…?
निशा: पर वह तो तेरा बॉय फ्रेंड है।
पारूल: वह मेरी प्रॉब्लम है… उससे तुझे क्या…तू बस उसका लंड ले ले एक बार…पर सिर्फ जस्ट वन टाइम ओके…बाद में नहीं मिलेगी।।हे हे
निशा: पर तुझे बुरा नहीं लगेगा…
पारूल: नहीं…क्युकी डियर…अपना वसूल है…जितना लंड बाटोगे उतना तुम्हे लंड मिलेगा…हे हे…और वह अगर तेरी चूत मारेगा।।तो मुझे भी दूसरे लंड खाने का मौका मिलेगा…क्यों है न प्लान सही हे हे।
निशा: अब समझी कमिनी… हे हा।
पारूल: तो फिर बोल दूँ विशाल को की आज उसके लिए एक नयी हॉट माल है…?
निशा: हम्म्म…नहीं…रुक जा…मैं तुझे बताउंगी तब बोलना।
पारूल:…तेरी मर्ज़ी…हम सिर्फ भटके हुए को रास्ता दिखा सकती हैं…हे हे।
और अगला 6 दिन निशा करवटे बदल बदल कर निकाली। वह जानती थी की उसके पापा का भी यहीं हाल हो रहा होगा। और वह उनको तडपा कर खुद एश नहीं कर सकती।
और आज वह दिन आ गया था। आज वह पापा से खूब चूदना चाहती थी।
निशा ने अपने गांड को पापा के लंड से दबाये रखा। वही आशा यह सब देखकर मुस्कुरा रही थी।
आशा: सशा चल हम ऊपर चलती है…।शायद दीदी को पापा के साथ कुछ टाइम स्पेंड करना होगा।
सशा: अच्छा?
निशा: हाँ…बहुत दिनों बाद मिली हूँ न पापा से…
सशा: चलो ठीक है फिर…वैसे भी मेरे होमवर्क का टाइम हो गया है…
आशा: होम वर्क का तो इस घर में सबका टाइम हो गया है , हे हे।
निशा आशा की यह बात समझ नहीं पायी, और उसे दाल में काला नज़र आने लगी।
आशा और सशा के जाते ही, निशा पापा के गोद में , टांगे इर्द-गिर्द फैला कर बैठ गयी। अब उसकी भट्टी जैसी गरम चूत सीधे लंड को छु रही थी।
जगदीश राय का लंड , कल रात की चुदाई के बावजूद , दर्द होते हुए खड़ा हो गया।
निशा: पापा…ओह…मुझसे अब रहा नहीं जा रहा…प्लीज चोद दो मुझे…।
जगदीश राय: यहाँ…अभी…
निशा: हाँ…देखो न चूत कितनी गरम है और पानी छोड रही है…बस अपना लंड बाहर निकालो …मैं बैठ जाती हु…।चलो धोती खोल दो…चलो।
जगदीश राय: अरे नहीं नहीं…।सशा देख लेगी तो क्या सोचेगी…
निशा ने नोट किया की जगदीश राय ने आशा का नाम नहीं लिया।
जगदीश राय: दोपहर को इत्मिनान से करते है…
निशा(रूठते हुए): आप बहोत गंदे हो…बेटी इतनी दिनों बाद आयी है…चूत के लिए लंड माँग रही…और आप भाव खा रहे हो…
जगदीश राय: अरे नहीं प्यारी…कहो तो आज दोपहर पूरा टाइम लंड इस चूत से बहार निकलेगा ही नहि। बस…वादा रहा।।
जगदीश राय ने जोश में कह तो दिया था, पर अभी भी उसके टट्टो में दर्द था। आशा ने उसे बुरी तरह जो निचोड दिया था, कल रात।
निशा: हम्म…ठीक है फिर तो…पर आप चाट तो सकते है न…।।
जगदीश राय: हम्म…हाँ…क्यो नहीं…चाटना सेफ होगा…मेरे ख्याल से…
यह सुनते हि, किसी चुदासी रांड की तरह, निशा ने तुरंत अपना स्कर्ट ऊपर उछाल लिया और बिना-पेंटी की चूत जगदीश राय को प्रस्तुत किया।
निशा: यह लीजिये…।थोड़ा चेयर पर निचे सरक जाइये पापा…।हाँ ऐसे…यह लो… गरम रसीली चूत आपके मुह में…ओह्ह्ह…।वाउ…।मा…।इतने दिनों बाद…ह…क्या मज़्ज़ा …।।हाँ पापा…ऐसे ही…।हाँ चूत खोलकर…डालिये जीभ अंदर…।।हाँ ऐसेही…।।और तेज़…और…और…और…और ।।और…और।।ओह्ह्ह म्मा…मैं झड रही हु पापा……ओह …।।यह आ ओह आ…ओह…।पापा…ओह……ओह…।।हाँ चाटिये…।सारा पानी…।यह माँ…।।यह…।।पापा
जब निशा को होश आया तो उसने देखा तो हँस पड़ी… उसके पापा नज़र नहीं आ रहे थे। जगदीश राय को पूरे उसके स्कर्ट ने ढक रखा था।
निशा (बेशर्मी से): ओह पापा…।बहुत अच्छा लगा…क्या चाटा आपने…आपको कैसे लगा …अब मैं दोपहर तक का इंतज़ार कर सकती हु…।
जगदीश राय: बेटी यह कोई पूछने की बात है…।तुम्हारी चूत का पानी तो दिन भर पीते ही जाऊं।
निशा: धत…।
खाना खाने के बाद, जगदीश राय ने आशा को बुलाया।
आशा: क्यों पापा…।दीदी की चूत का पानी कैसा था?
जगदीश राय: तो क्या तुमने सब सुन लिया…।?
आशा: सुना भी और देखा भी…इतना जो चिल्ला रही थी दीदी …।बहुत गरम है दीदी…।
जगदीश राय (घबराते हुए): सशा ने भी…?
आशा: नहीं…लकीली वह उस वक़्त बाथरूम में चलि गयी…हाँ यह पता नहीं की उससे बाथरूम में दीदी की चीख़ पुकार सुनि या नहीं…
जगदीश राय: नहीं सुनि होगी…वरना वह कहते वक़्त पूछती ज़रूर…अच्छा आशा बेटि, तुम एक काम करो अभी सशा को लेकर कहीं चलि जाओ।
आशा: कहाँ…मैं नहीं जाने वाली।
जगदीश राय: अरे समझा कर…।तेरी दीदी बहुत गरम है…।
आशा: अरे तो दीदी को लंड चाहिए तो हम क्यों घर से बाहर जाये…आप लोग क्यों नहीं जाते किसी होटल में…
जगदीश राय (थोडा गुस्से में): बकवास मत कर…तू अच्छि तरह जानती है की सशा को इन सब की खबर नहीं होना चाहिए…
आशा: अच्छा बाबा जाती हु…हम शॉपिंग और फिर मोवी, ठीक है…?
जगदीश राय: सिर्फ मूवी काफी नहीं है…
आशा: जी नहीं…।शोप्पिंग एंड मोवी।
जगदीश राय: ठीक है…
आशा: और एक शर्त…।आज रात को दीदी की चुदाई के बाद मेरा गांड चाटेंगे और मारेंगे भी।
जगदीश राय: अरे…क्या…।कैसे…मतलब…तेरी दीदी तो खुद मुझे देर रात तक …।और फिर तुम्हे कैसे…।
आशा: वह सब मैं नहीं जानती…।दीदी के जाते ही मैं आउंगी … मंज़ूर है…
जगदीश राय: ठीक है…देखते है…
आशा मुसकुराकर अपनी जीत का जलवा दीखाते हुए गांड हिलाकर चल दि। क़रीब १० मिनट बाद सशा और आशा दोनों शॉपिंग के लिए चल दिये।
यहाँ आशा-सशा घर से निकल ही गए थे, की जगदीश राय के बैडरूम पर दस्तक हुई।
दरवाज़ा खुला और निशा खड़ी थी। उसने कुछ भी नहीं पहन रखा था…पूरी नंगी थी।
नंगी निशा किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। जगदीश राय का लंड अपने दर्द को भूल कर, खड़ा हो गया।
निशा भाग कर अपने पापा के ऊपर कूद पडी।
निशा : अच्छा हुआ आप ने आशा और सशा को बाहर भेज दिया। क्या कहा उनसे?
जगदीश राय: कुछ नहीं…यहीं की जाके मूवी देख आओ…और शॉपिंग कर लेना।
निशा को यह बात कुछ हज़म नहीं हुई।
निशा: चलो जो भी है…आज मैं आपके लंड को निचोड दूँगी…।और आपका कोई बहाना नहीं चलेगा …। समझे पापा।
जगदीश राय , मुस्कुरा दिया पर मन की मन थोड़ा डर भी रहा था।
निशा ने तुरंत पापा की धोती साइड कर दी और खड़े लंड को हाथ में पकड़ लिया।
और बिना कुछ कहे, एक भूखी शेरनी की तरह , सीधे मुह में लेके चूसने लागी। चूसाई इतनी ज़ोर की थी की पता चल रहा था की लंड की कितनी प्यासी है निशा।
जगदीश राय ने कंडोम का पैकेट लेने के लिए हाथ बढाया, पर निशा ने उन्हें रोक दिया।
निशा: पापा …आज से कंडोम नहीं…मैंने पिल्स ले ली है…मैं आपका लंड का स्पर्श फील करना चाहती हु आज से…।और आप आज से अंदर भी छोड सकते है अपने माल को।
जगदीश राय यह सुनकर खुश हो गया और तुरंत निशा को बॉहो में ले लिया।
पर निशा ने जगदीश राय को निचे ढकेल दिया और खुद ऊपर चढ़ गयी। बिना कोई देर किये एक ही झटके में उसने जगदीश राय का लम्बा मोटा लंड चूत में घुसेड दिया।
निशा ने पूरा गांड ऊपर करके ज़ोर ज़ोर से लंड पे अपनी चूत मारने लागी। चूत इतनी टाइट और गरम थी की जगदीश राय चंद मिनिटो में झड़ने के कगार पर पहुच गया था।

