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निशा: पापा मैं लगा देती हूँ।
पापा: अरे नही, तुम कॉलेज से थकि आयी हो। जाओ कुछ खा लो।
निशा: नहीं मैं कैंटीन से खाके आयी हूँ।

जगदीश राय, आशा की वजह से गरम हुआ था। उसके दिमाग में वह दृश्य घूम रहा था।

तभी आशा उतरी और हॉल में आ गयी।
आशा: पापा दीदी मैं और सशा वैलेंटाइन कार्ड लेने जा रहे है।
निशा: अरे वो, तुम्हारा कौन सा बॉयफ्रेंड है।
आशा: कई है। सबको बताती फिरूंगी। और चिल्लाने लगी, सशा सशा जल्दी आ। मैं नहीं रूकुंगी तेरे लिये। उफ्फ,छोटी उम्र में इतना सवरना।

जगदीश राय निशा के तरफ देखने लगा, मानो की सवाल पूछ रहा हो। निशा समझ गयी। निशा ने नकारते हुये सर हिला दिया और जगदिश राय समझ गया की आशा सिर्फ मज़ाक़ कर रही है, उसका कोई बॉय फ्रेंड नहीं है।

तभी सशा हॉल में आ गयी। उसने एक छोटा स्कर्ट पहने हुआ था और बड़ी प्यारी लग रही थी। सीडियों से कुदते वक़्त उसके छोटे चुचे हिल रहे थे और स्कर्ट भी उछल रहा था। जगदीश राइ ने सोचा की सशा ठीक कह रही है, की उसके बूब्स छोटे नहीं है।

ये सोच आते ही, जगदीश राय अपने आप को कोसने लगा की उसे यह ख्याल आया कैसे।
सशा और आशा दोनों चले गये। निशा अपने पापा के पास आयी और कहा।

निशा: लाओ तेल की शीशी।

जगदीश राय नीचे बैठ गया और निशा सोफे पर बैठ गयी।

निशा: पापा, आप मेरे पैरो के बीच बैठ जाइये ताकि मैं आपके सर पर तेल लगा सकुं।
पापा: ठीक है बेटी
निशा: रुको, अपना शर्ट उतार लो।
पापा: क्यु
निशा: आपके शरीर पर तेल नहीं लगाना है क्या। और तेल से शर्ट ख़राब हो जाएगा। और मुझे फिर धोना पडेगा, आपका क्या।

निशा अब पूरा एक घर सँभालने वाली औरत की तरफ बोल रही थी। जगदीश राय भी मुस्कुरा दिया।
और उसने शर्ट उतार दिया। अब जगदीश राय सिर्फ एक ढीला पायजामा शॉर्ट्स पहने बेठा था।

 

पापा: शरीर पर मैं लगा दूंगा। तू बस सर पर लगा।
निशा कुछ नहीं बोली और तेल सर पर लगाना शुरू कर दिया। तभी उसने कहा।

निशा: ओह ओह। तेल स्कर्ट पर गिर रहा है। रुको।

और उसने अपना स्कर्ट बीच से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और उसे अपने थाइस के बीच में घुसा दिया। इससे स्कर्ट एक शॉर्ट्स जैसे हो गया था। मानो, बहुत ही छोटा शॉर्टस।

निशा: हाँ अब ठिक़। पीछे आओ पापा। मेरे पैरो के बीच ठीक से बैठो।

जगदीश राय पीछे मुड़कर देखा तो नज़ारा बहुत प्यारा था। सोफे पर उसकी बेटी पूरी जाँघ दिखा कर बैठी थी। गोरी मुलायम जांघ। जांघ इतना सॉफ्ट दिख रहा था की हाथ लगाओ तो फिसल जाए।निशा ने स्कर्ट इतना अंदर घुसा दिया था और पैर इतना खुला रखा था, की जाँघ के अंदर का भाग भी दिख रहा था जो थोड़ा सांवला था।

जगदीश राय का दिल धड़क रहा था , और वह इस परिस्थिती से बचना चाहता था।
पापा: अरे बेटी, मैं एक काम करता हु , चेयर पर बैठता ह, तुम पीछे से खड़ी होकर लगा देना, ठीक है।
निशा: नही, खड़े रहकर सर पर तेल लगाना मुश्किल होता है। मुझे पता है।

जगदीश राय वैसे ही बड़े भोले और चुप किसम के इंसान थे। तो वह जानता था की इन लड़कियों से जीतना मुश्किल है।
मचलते और धडकते दिल लेकर जगदीश राय मुड गया और अपना नंगा शरीर निशा की जांघ से टेक कर बैठ गया।

यहाँ जगदीश राय का गरम और खुरदरा जांघ जैसे ही निशा की जांघ से टकराया , जगदीश राय के शरीर में एक अजीब सी ग़र्मी मच गयी। मानो एक साथ 2 व्हिस्की के गिलास पेट में गया हो।
वो अपने जांघो द्वारा निशा के गरम जांघ की गर्मी चूस रहा था। और चूसा हुआ गर्मी सीधे उसके लंड पर जाकर रुक रहा था। उसका लंड अपने पुरे आकार में खड़ा था।

दूसरी तरफ निशा का हाल बुरा हो चला था। पहले तो अनजाने में उसने अपने पापा को बुलाकर बैठाया था पर अब अपने जांघ पापा के कंधे पर टीका होने से उसे अजीब सा महसूस हो रहा था। उसने सोचा की पापा को बोलू थोड़ा आगे होने के लिए पर वह पापा को कोई गलत सिग्नल नहीं देना चाहती थी। उसने सोचा की जल्दी से तेल लगा लूँगी और उठ जाऊंगी।

पर पापा का गरम हाथ और कंधा उसके जाँघ और जिस्म को गरम कर चला था। निशा की चूत अपने स्कर्ट और पेंटी में ढकी हुई थी पर पापा के गर्दन से कुछ 6 इंच की दूरी पर थी।

एक जवान कुवारी लड़की के लिए इतना मिलन उसको मदहोश करने के लिए काफी था। खास कर निशा जैसे लड़की के लिए।
उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं था, हालाकी वो हर वक़्त अपने बाकि सहेलीयों की तरह एक बार शादी से पहले चुदना चाहती थी। पर वह ऐसा साथी चाहती थी जो उसका ख्याल करे और वह केवल चुदना नहीं बल्कि प्यार करता हो। उसके मन में अभी वो सभी ब्लू फिल्म के पिक्चर दौड रहे थे जो उसने छुप छुप के इंटरनेट में देखी थी।

वही जगदीश राय ऑंखें बंद करके उस पल को पूरी तरह एन्जॉय कर रहा था और उसका हाथ अपने लंड के ऊपर से उसको दबा रहा था।

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