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निशा की भरी मोटी गांड डाइनिंग टेबल पर बैठकर फ़ैल् गयी थी। और मादक बड़ी गोरी जांघ पर थोड़ा सा पानी लगा हुआ था।

निशा किसी हुस्न की परी लग रही थी।

जगदीश राय मुह खोले निशा को देखता रहा।

निशा:पापा।।हैप्पी बर्थडे।।आपकी बर्थडे ब्रेकफास्ट रेडी है…जो चाहे खा सकते हैं…बोलिये कहाँ से शुरू करेंगे…मखन से या अँगूर से…।

जगदीश राय: बेटी…।मैं तुम्हारा दिवाना हो गया बेटी…।…मैं…मैं तो माखनचोर बनना चाहता हु…देखना चाहतु की मखन के अंदर क्या छुपा है।।।

निशा: जी।। ठीक है…देखिये।

और निशा ने पैर को पूरा फैला कर जाँघों को दाया-बाया तरफ कर दिया।

जगदीश राय आकर चेयर पर बैठा और अपना सर आगे ले जाकर निशा की चूत पर लगे मखन को देखता रहा।

निशा: एक बात…नाश्ता आप सिर्फ मुह से ही खाएंगे…हाथो का इस्तेमाल नहीं करेंगे…मतलब दोनों हाथ टेबल के निचे होने चाहीये…सम्झे।

जगदीश राय तुरंत हाथो को निचे सरका दिया। निशा को पापा के तेज़ सासो का एहसास अपने जांघ और चूत पर मह्सूस हुआ।

फिर जगदीश राय ने अपनी जीभ बाहर निकाल एक बड़ी सा प्रहार लगा दिया। जीभ ने पुरे चूत की लम्बाई नापी। और ढेर सारा मखन अपने मुह में उतार लिया।

निशा के मुह से एक बड़ी सिसकी निकल पडी।

जगदीश राय को पहले वार पर सिर्फ मखन मिला था। फिर उसने और गहरायी में घुसना चाहा। और अपने होठ और जीभ को मखन के अंदर घूसा दिया।

और मखन के साथ उसे निशा के मुलायम चूत का स्पर्श हुआ। उसने एक भुक्खे कुत्ते की तरह चूत और मखन को खाने लगा।

निशा अपने पापा का इस तरह चाटना सह नहीं सकी और वह टेबल पर ही उछल पडी।

पर उसके पापा ने उसके चूत को अपने मुह में दबोच रखा था। और उसे हिलने नहीं दे रहे थे।।

जगदीश राय कभी मखन चाटता तो कभी चूत चबाता। टेबल पर मखन के बूँद और जगदीश राय के लार टपक कर गिला हो चूका था।

निशा अब अपने पापा को पूरा चूत दावत पर पेश करना चाहती थी। उसने पीछे मुड़कर अपने दोनों पैर कंधो तक ले गयी और अपने चूत को पूरी तरह से खोलकर अपने पापा के सामने रख दिया।

इससे निशा की बड़ी सी क्लाइटोरिस मक्खन के अंदर से अपना झलक दिखा दिया। और उसकी गांड भी ऊपर होने के कारण , गांड के छेद ने भी अपनी मौजुदगी बतलायी।

चूत से मखन गलकर गांड के छेद तक पहुच रहा था। और निशा के सासों के साथ गांड का छेद भी अन्दर-बाहर हो रहा था। और मखन की कुछ बूंदे गांड के छेद के अंदर घूस रही थी।

जगदीश राय यह दृश्य देखकर पागल हो गया और उसने पूरी कठोरता से निशा की क्लाइटोरिस को मक्खन के साथ अपने होठो से दबोच लिया। और दाँतों से धीरे-धीरे चबाते हुए , एक जोरदार चुसकी लगा दिया।

निशा : आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह गुड़, पाआआपपपपपा।

तुरन्त ही जगदीश राय ने क्लाइटोरिस होठो से खीच दिया और निशा टेबल पर मचल उठी।

जगदीश राय , हाथों के बिना , निशा को सम्भालना मुस्किल हो चला था। पर फिर भी उसने हाथों का ईस्तेमाल नहीं किया।

जैसे ही निशा थोड़ी सम्भली, जगदीश राय ने अपना बुरा जीभ चूत के अंदर घुसा दिया। मक्खन के कारण जीभ अंदर आसानी से घूस गई, पर जगदीश राय पूरा घूसा नहीं पा रहा था।

निशा (तेज़ सासो से): क्या मेरे पाआपप।।को…।और…भूख…लगी…है…।

जगदीश राय (मक्खन से होठ चाटते हुए):हाँ बेटी…हाँ बहूत भूख लगी है…।

निशा : तो फिर …।आप को आपको खाना चूस कर बाहर निकालना होगा…।थोड़ी मेहनत…करनी …पड़ेगी…ऐसे नहीं मिलेगा…

जगदीश राय समझ नहीं पाया। पर उसने अपने पुरे मुह को खोलकर निशा की चूत को भर दिया और एक ज़ोरदार चुसकी ली।

निशा: और ज़ोर से पापा…और ज़ोर से।।

जगदीश राय चुसकी लगाता गया और निशा चिल्लाती गयी।

निशा अब अपने पापा के लगतार चुसकी से मचल रही थी, उछल रही, तड़प रही थी। और वह झडने के कगार पर थी।

और तभी जगदीस राय अपने होंठ पर केले का स्वाद पाया। उसने तुरंत अपना होठ हटाया और चूत के तरफ देखता रहा। चूत के होठ से छुपी , रस से लथपथ , केले (बनाना) ने स्वयं को प्रकट किया।

निशा : यह लिजीये पापा…।आप का …बर्थडे ब्रेकफास्ट… चूस लिजीये …खा लीजिये…

जगदीश राय यह नज़ारे देखते ही मानो झडने पर आ गया।

वह भेड़िये की तरह चूत को चूसने लगा, खाने लगा।

केला , निशा की मधूर चूत की रस से लथपथ, धीरे धीरे बाहर निकल रहा था, और जगदीश राय कभी उसे खा लेता तो कभी उसे होठ से निशा की चूत पर मसल देता। और फिर निशा की चूत को मक्खन, केला और चूत रस के वीर्य के साथ चबा लेता।

निशा: पापपपपा…। खाईएएएए पापा…।पुरा ख़ा लिजिये…।मेरी चूत का रोम रोम चबा लीजिये…।

और फिर निशा ने अचानक से अपना पूरी गांड ऊपर उछाल लिया। साथ ही जगदीश राय ने भी अपने चेहरे को गांड के साथ चिपकाते हुए , होठ को चूत से अलग नहीं होने दिया। निशा कुछ सेकंड ऐसे ही गांड को उछाले रखी और फिर एक ज़ोर से चीख़ दी।

निशा: आह आह……।ओह्ह गूड……आहः

और निशा तेज़ी से झडने लगी। निशा की चीख़ इतनी ज़ोर की थी की पड़ोस के लोगो को सुनाई दिया होगा।

चूत से रस उछल कर जगदीश राय के मुह, गले और छाती पर फ़ैल गया।

निशा पागलो की तरह उछल रही थी। बचा हुआ केला चूत की रस के साथ चूत से निकल कर टेबल पर गिर पडा।

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