और फीर जगदीश राय तेज़ी से झड़ना शुरू किया।
निशा ने तुरंत ही अपना मुह हटा लिया और सारा वीर्य उसने हाथों से तेज़ी से हिलाकर निकल दिया।
जगदीश राय (तेज़ सासो से) : मजा आ गया बेटी…।बहुत…।
निशा:ह्म्म्मम।
जगदीश राय: पर…।तुमने…।
निशा: क्या पापा…
जगदीश राय: तुमने मुह क्यों हटा लिया…।क्या तुम्हे वो लेना पसंद नहीं…
निशा: क्या पापा…
जगदीश राय: वीर्य बेटी…।जो तुम आज कल के लोग कम बोलते है…
निशा: नहीं पापा…मुझे…मुँह में लेना पसंद नहीं…पर आपको पसंद है तो मैं ज़रूर ट्राई करूंगी…एक दिन…।
जगदीश राय: कोई बात नहीं बेटी…। मैं तो तुम्हारे हुस्न से ही खुश हूँ।
और यह कहते हुए जगदीश राय ने एक ज़ोरदार चुमबन निशा की चूत पर लगा दिया।
निशा : आअह्ह्ह…पापा।
पहिर निशा उठ कर नंगी अपने रूम की ओर चल दी…।
रेज़र ठीक से चल नहीं रहा था। नया होने के बावजुद।
निशा (मन में): उफ़… कहाँ मैं फस गयी इस रेजर के साथ…।अब चूत साफ़ कैसे करूंगी…।पापा को वादा किया था उनके बर्थडे प्रेजेंट का …।मखमल की चूत पेश करने वाली हु…और यहाँ यह कम्बख्त रेजर की धार निकल गयी है।।
निशा अपनी चूत पर रेजर तेज़ी से चलाने लगी और अचानक रेजर की ब्लेड चूत के होठ के चमड़े से हिल गया।
निशा अचानक चिख पडी। खून के धार चूत के चमड़ी से निकल पडी। निशा ने तुरंत डेटोल लगा लिया। और आराम पाया।
निशा (मन में): लगता है आज पापा को रस के साथ मेरे चूत का खून भी चूसने का मौका मिल चूका है…हे हे
आज जगदीश राय का बर्थडे था। और निशा ने पापा से वादा किया था की उन्हें वह एक जबरदस्त यादगार तोहफा देगी।
निशा अपने साफ़ सुथरी चूत को मिरर में देखकर खुश हो गयी।
निशा (मन में): हम्म्म…चूत रानी-जी…आज तो तुम्हारी खैर नहीं…आज चाहो तुम कितने आँसू बहाओ पापा तुम्हे नहीं छोड़ेंगे…और आज मैं भी उन्हें नहीं रोकूंगी…आज खुलकर उनको अपना रस पीलाना।
निशा अपनी पहली चुदाई के आज 2 महिने गुज़र गए थे। जगदीश राय और निशा बिना रुके लगभग हर दिन चुदाई का पूरा आनन्द ले रहे थे।
और अब निशा भी जगदीश राय की तरह घण्टो चुदाई के लिए पूरा सहयोग देती।
निशा की जवान टाइट चूत अब जगदीश राय के बड़े लंड के 2 महीनो से चले लगातार झटको से खुल चुकी थी।
कैसे कौनसा भी पोज़ नहीं था जो जगदीश राय ने निशा पे नहीं अपनाया हो। कामसूत्र के कई पोज़ जगदीश राय निशा पर अपना चूका था।
हर दिन सुबह नाशते से पहले किचन में खड़ी रहकर चाय से पहले निशा अपने पापा से चूत चटवाती।
कभी कभी मौका मिलते ही जगदीश राय निशा को खड़े खड़े चोद भी देता। दोनों कई बार आशा से बाल-बाल बचे थे।
पहली दिन की कठोर चुदाई के बाद जब निशा कुछ दिनों तक पैर फ़ैला के चलती तो आशा ने उससे पूछा था।
आशा: दीदी…क्या हुआ तुम्हे…चोट लगी है क्या…ऐसे चल रही हो…
निशा: अरे नही।।बस…पीरियड चल रहे है।।फ्लॉव ज़रा ज्यादा है…पैड गिली हो चुकी है…
निशा अब भी जानती थी की आशा को उसका जवाब हज़म नहीं हुआ था। और निशा यह सब सोचकर हँस पडी।
आशा ही क्यु, बल्कि उसके कॉलेज फ्रेंड्स भी उसकी बढ-गए चूचे और गांड देखकर पूछते।
केतकी: कयू।।निशा।।बता ही दो।।कोंन सा भवरा है जो इस फूल को तँग किये जा रहा है…
निशा: क्या बक रही है…ऐसा कुछ भी नहीं…
केतकी:अरे छोड़…तेरी चेहरे की ग्लो बता रही है…तेरा भी बॉयफ्रेंड है।।तु मुझसे नहीं छुपा सकती…समझी…तेरे हर पार्ट्स बता रहे है की कितनी सर्विसिंग हुई है इनमे।।
निशा (मन में): अब क्या बताऊ केतकी…चाहते हुए भी मैं अपने इस रहस्यमय बॉयफ्रेंड के बारे में बता नहीं सकती।
ओर निशा सिर्फ मुस्कराती।
निशा जगदीश राय के 2 महीनो से चल रहे चुदाई के बारे में सोचकर शर्मा गयी।
निशा (मन में): जब शुरू हुआ था तो पापा बहुत ही धीरे धीरे चोदते थे और ज्यादा से जयदा आधा घंटे तक वह टिक पाती। पर अब २ घण्टो तक लगे रहते है। लंड भी चूत के अंदर पूरी जड़ तक पेलते है … और उसी तेज़ी से पूरा बाहर निकालकर फिर से जड़ तक पेल देते है…लगता है पापा ने चुदाई में मास्टरी कर ली है…हे हे
और आज भी यही होने वाला था, यह उसे पता था।
इसलिए निशा ने पिछले 1 वीक से जगदीश राय को हाथ भी लगाने नहीं दिया था। जगदीश राय रोज़ सुबह उसकी चूत की रस के लिए भीख माँगते थे। निशा ने तंग आकर कहा।
निशा: पापा…मैं आपके बर्थडे के लिए ख़ुदको बचाके रखी हूँ।।और आप कण्ट्रोल नहीं कर सकते।।।
जगदीश राय: बेटी …।अब रहा नहीं जाता…सिर्फ थोड़ा चूत चूसने दो।। बस 2 मिनट…
निशा: नहीं …चूसना तो नॉट एट आल…।हाँ अगर रस ही चाहिये तो मैं निकालकर दूँगी…।बस सिर्फ आज।।…बादमें पूछ्ना भी नहीं…प्रॉमिस…
जगदीश राय (उतावले होकर): हाँ हाँ बेटी।।प्रोमिस…प्रोमिस।।
निशा ने तब मैक्सी ऊपर करके अपनी 2 उंगलिया चूत में पूरा जड़ तक घुसा दी, और कुछ एक मिनट बाद उंगलिया टेढ़ी करते हुये बाहर खीच लिया। उँगलियों पर ढेर सारा रस देखकर , तब जगदीश राय ही नहीं निशा भी चौक गयी थी।
जगदीश राय ने जिस तेज़ी से निशा के हाथ के ऊपर टूट पड़ा , वह देखकर निशा को पापा पर हसी भी आयी और तरस भी।
तो वह जानती थी, की आज उसके पापा उसकी चूत का हाल बुरा करने वाले है। और वह भी मन-ही-मन यही चाहती थी।
वही जगदीश राय के पिछले 2 महीनो में एक नया उमंग आ गया था।
पहले जो अपने वास्ते, बाल और बॉडी का ध्यान भी नहीं रखता हो आज घण्टो मिरर के सामने गुजारता।
अपने हेयर डाई करता, परर्फुमस, टी शर्ट एंड जीन्स की शॉपिंग लगतार शुरू की थी। हर रोज़ सुबह , निशा की चूत रस और चाय पिकर, वाक पर भी जाता।
पास के गुप्ताजी भी खिल्ली उडाने लगे।
गुप्ताजी: अरे राय साहब…लगता है दूसरी वाली जल्द ही लानी वाले हो…खुद को देखो…सलमान खान से कम नहीं लग रहे हो अब…
जगदीश राय सिर्फ मुस्कुरा देता।
पापा के आज बर्थडे के लिए निशा ने विस्तार से प्लान्स बनाये थे।
उसने ठान लिया था की आज वह कॉलेज नहीं जायेगी और आज सारा दिन अपने पापा के बॉहो मैं गुजारेगी।
जगदीश राय , सुबह तेज़ी से उठा। आज का दिन का महत्व वह जानता था।
आज पहली बार उसे अपने जनम होने पर नई ख़ुशी मिली थी।
वह जल्द से मुह हाथ धोकर किचन में पहुच गया। निगाहे निशा को ढून्ढ रही थी।
पर निशा नहीं थी वहां। आशा खड़ी थी, एक छोटी सी शॉर्ट्स पहने।
जगदीश राय: अरे आशा…।क्या बात है…तुम यहाँ…
आशा: हाँ पापा…निशा दीदी की तबियत ठीक नहीं है…सो उसने मुझे कहाँ चाय बनाने को। यह लीजिये
जगदीश राय पर जैसे बिजली गिर पडी।

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