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जगदीश राय थोड़ी देर वहां खड़ा रहने के बाद , बाथरूम में घूस गया।

उसका पूरा बदन कांप रहा था। कान और गाल गरम हो चूका था।

उसने अपनी लुंगी साइड की और लंड बाहर निकाला।

लंड लोहे की रॉड की तरह खड़ा हुआ था। लंड पर उभरे नस (वेन्स) किसी रबर वायर की तरह फूल कर साफ़ दिखाई दे रहे थे।

वह अपनी इस अवस्था को सुधारने के लिए मुठ मारना शुरू किया पर दिमाग पर हज़ारो ख्याल बम की तरह फट रहे थे।

लंड खड़ा होने के बावजूद मुठ मारा नहीं जा रहा था।

कुछ देर प्रयास करने के बाद वह खड़े लंड के साथ बाहर आ गया।

अंदर निशा का हाल भी कुछ समान था। पापा के सामने नंगी रहने में उसे बहोत मजा आया था और यह उसकी गिली चूत बता रही थी।पूरी बदन पर लहर फ़ैली हुई थी।

निशा (मन में): मुझे देखकर पापा का लंड तो साफ़ लुंगी के बाहर निकला हुआ था। पर पता नहीं पापा ने अपने आप को कैसे रोक लिया…।और कोई होता तो अब तक मुझ पर टूट पड़ता…।पापा को अपने आप पर कितना कण्ट्रोल है…मानना पड़ेगा…।

निशा ने जल्द अपनी एक रेड कलर की सिल्क शर्ट पहन ली। और अपने आप को मिरर में देखा।

शर्ट कमर से थोड़ा निचे तक आ रही थी। सिर्फ गांड और चूत को कवर कर रही थी।निशा अपने इस पोशाक से खुश हो गई और दरवाज़ा खोले निचे हॉल/किचन के तरफ चल दी।

वही जगदीश राय सोफे पर बेठा हुआ था। और निशा के बाहर आने का इंतज़ार कर रहा था।निशा को फिर से शर्ट में देखकर वह मन ही मन खुश हो गया। पर उसमे अभी भी निशा को सीधे देखने की हिम्मत नहीं जूटा पा रहा था। निशा रेड सिल्क शर्ट में क़यामत ढा रही थी, जो उसकी गोरे जाँघ को और भी खूबसूरत बना रहा था।

निशा ने सीडियों से उतरकर अपने पापा से कुछ नहीं पूछा और न कहाँ और सीधे किचन में चलि गयी। मानो जैसा कुछ हुआ ही न हो।

खाली 2 घंटे तक जगदीश राय की आंखें सिर्फ निशा का ही पीछा कर रही थी।

निशा कभी उनको अपनी जांघ, कभी अपनी आधि चूची या अपनी गांड दिखाकर बहला रही थी।

निशा ने ठान लिया था की आज वह अपने पापा को अपनी चूत नहीं दिखाएगी।

इसलिये झाड़ू लगाते वक़्त भी वह नहीं झुकी। और अपने पापा का फरस्ट्रेशन देखकर उसे मजा आ रहा था।

निशा: पापा… चलो खाना लग गया।

जगदीश राय ,बड़ी मुश्किल से अपने बेटी के साथ बैठकर खाना खाया और अपने रूम में चला गया।

उसने सोचा रूम में जाकर मुठ मार लूँगा और अपने आप को ठंड़ा कर दूंगा।

जगदीश राय रूम में जाकर बैठकर अपने लंड को बहार निकालकर मुठ मारने लगा।

सूबह से खड़ा लंड हाथ के स्पर्श से शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।

तभी उसे सीडियों पर से निशा के कदमों की आहट सुनाई दी। उसने तुरंत अपनी लुंगी ऊपर चढा ली। निशा ने इस बार दरवाज़ा नॉक किया।

जगदीश राय (लुंगी ठीक करते हुए): हाँ…। आ जा बेटी…।

निशा (एक हाथ पीछे छुपाते हुए): देखना चाहती थी… की आप फ्री तो है न…।।

जगदीश राय निशा के सामने खड़ा लंड छुपाते हुए : हाँ बिलकुल…थोड़ा लेटने जा रहा था बेटी।

निशा: ज़रूर लेटिए…पर मसाज के बाद…। दो दिन से आप को मसाज नहीं किया…।

और निशा ने अपना हाथ बाहर निकाला और उसमे तेल की डिब्बी थी।

जगदीश राय : अरे …नहीं आज नहीं… कल करते है…।

निशा: नहीं…2 दिन से मसाज नहीं हुआ…आज तो करना ही है…।मसाज।

निशा: चलिये पहले कंधे और हाथ का करते है…फिर पैरो का… चलिये अपना शर्ट उतारिये…

निशा सिर्फ एक छोटी सी शर्ट पहनी आर्डर दिए जा रही थी एंड जगदीश राय बिना कुछ कहे निशा के जिस्म का दिवाना हुए पालन कर रहा था।

जगदीश राय बेड पर अब सिर्फ एक लुंगी पहन के बैठा था, जिसमें से उसके मोटे लम्बे लंड का उभार निशा को दिखाई दे रहा था। और निशा चोरी छुपे उसे देखे जा रही थी।

निशा पहले जगदीश राय के कंधे और हाथो का मसाज करने लगी।

हर एक दौरे पर वह अपने चूचो को पापा के नंगे पीठ पर रगडने से नहीं चूकती थी।जगदीश राय को निशा के खड़े निप्पल्स महसूस होने लगा।

निशा (उन्हें रगड़ते हुए): कैसा…लग रहा …है।।पापा…

जगदीश राय: अच्छा।।।। लग रहा है…।

कुछ देर बाद निशा के हाथ अब जगदीश राय के छाती पर दौडना शुरू हुआ ।

निशा जगदीश राय के छाती के बालो और निप्पल्स पर अपनी उँगलियाँ गोल गोल घुमा रही थी।

और जगदीश राय के पीछे से उनका लंड को फड़ फडाटे हुए देख रही थी।

कोई 10 मिनट बाद।।

निशा (पूरा गरम ): पापा…।अब आप…हम्म…लेट जाइये…।मैं…पैरों का करती हु…।

जगदीश राय निशा को सिल्क शर्ट में हाँफते हुए देखकर इतना गरम हो रहा था की वह बिना कुछ कहे लेट गया।

निशा: पापा… आप अपना आंखें बंद करके , हाथो को ऐसे सर के पिछे ले जाकर लेटे रहिए। हाथो को आगे ले आने की ज़रुरत नहीं…। अब सिर्फ आप मेरे मसाज को फील करिये…

निशा ने पैरो हाथ फेरना शुरू किया। निशा ने अपनी गरम नंगी जाँघ जगदीश राय के कमर/पेट से लगाकर रखी। निशा अपना हाथ लुंगी के अंदर ले जाकर जगदीश राय की जाँघ तक ले जाती।

आंखेँ बंद किया जगदीश राय ऐसे मदहोश मसाज से पूरा पागल हो चला था। उसका लंड फटने के कगार पर था।

ओर तभी जगदीश राय की लूँगी निशा के हाथो के वजह से सरक गयी और जगदीश राय का काला लम्बा मोटा लंड निशा के ऑंखों के सामने अकड़ते हुए आ गया। ऐसा लग रहा था जैसे एक मोटे साँप को आज़ादी मिली हो।

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