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यह कहकर निशा अपने पापा के सीने पर सर रख दिया। उसके बड़े मम्मे मैक्सी के ऊपर से जगदीश राय के पेट और जांघ से दब्ब गये।
जगदीश राय का लंड जो निशा के सवाल जवाब से सो गया था, फिर अचानक से खड़ा हो गया।

निशा सीने पर सर रख कर अपने पापा के लंड को देख रही थी। उसने देखा की पायजामा धीरे धीरे ऊपर उठ रहा है।

जगदीश राय को हाथ से अपना लंड ठीक करना था, पर निशा के सामने करना मुश्किल हो रहा था। वह जान गया था की निशा को उठता लंड साफ़ दिख रहा है।

वही निशा की हालत भी ख़राब होने लगी थी। उसके निप्पल्स मैक्सी के ऊपर से पापा के पेट और जांघ से दब्ब कर रगड खा रही थी। दोनों निप्पल्स खडे हो गए थे।

निशा: पता है पापा। जब लड़की बड़ी हो जाती है, तब उसके पापा पापा नहीं रहते। उसकी दोस्त बन जाते है। मैं भी आप में वह दोस्त देखना चाहती हूँ।

जगदीश राय चुप रहा। निशा जो कहना चाह रही थी वह वह समझ गया था।

फिर निशा उठि और कहा:

निशा: पापा कल मेरे एग्जाम की फीस भरना है, यूनिवर्सिटी जाना है। क्या आप मेरे साथ चलेंगे। बहुत दूर है।

जगदीश राय जो अभी भी निशा की फेकी हुई गूगली पर सोच रहा था, जवाब नहीं दे पाया।

निशा: पापा, बोलो न। चलेंगे।

जगदीश राय: हाँ हाँ ठीक है। चलेंगे।

निशा: मेरे प्यारे पापा।

यह कहकर निशा ने पापा के माथे पर एक चुम्मी दे दी।

माथे पर चुम्मी देते वक़्त, उसके दोनों मम्मे जगदीश राय के मुह से टकरा गए।जगदीश राय हड़बड़ा सा गया। इतने बड़े मुलायम चूचे उसने कभी नहीं छुये थे।
सब कुछ चंद सेकण्डस में हो गया।

निशा : कल ठीक सुबह 10 बजे निकलना है ठीक। चलो गुड नाईट, स्वीट ड्रीम्स। सो जाओ अब।

जगदीश राय: हाँ हाँ गुड नाईट।

जगदीश राय बावला हो गया था। वह पूरा गरम हो गया था। निशा के जाते ही उसने अपना पायजामा नीचे कर दिया और मुठ मारने लगा। लंड पर लग रहे हर ज़ोर पर निशा का नाम लिखा हुआ था।

बाजू के कमरे में निशा कमरे में घुसते ही अपनी मैक्सी उतार फेकी। ऑंखे बंद करके उसे अपने पापा के लम्बे और मोटे लंड का आकार दिखाई दिया।

निशा की उँगलियाँ उसके चूत को मसलने लगी।

और कुछ ही वक़्त में ढेर सारा पानी बेड को गिला कर दिया। उसी वक़्त जगदीश राय को भी ओर्गास्म आ गया।

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