टोना टोटका – Update 20 | Incest Story

टोना टोटका - Erotic Incest Story
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टोना टोटका – Update 20

रोहन का पुरा चेहरा रुपा के चुतरश से एकदम तर बत्तर हो रखा था। उसके नाक मुँह व आँखो तक लार के जैसे चिकना व चिपचिपा रश सा लगा हुवा था तो चुत व चुत के पास के छोटे छोटे नुकिले बालो की रगङ से उसका नाक व पुरा मुँह लाल हो रखा था और ये सब रुपा के उसके मुँह पर जोरो से अपनी चुत को रगङने के कारण हुवा था जिससे रुपा को अब खुद पर ही जोरो की शरम सी आई इसलिये…

“बेशर्म…! अपना मुँह तो साफ कर ले..! क्या मिला तुझे ये सब करके..? अपने साथ साथ मुझे भी वैसी ही बना दिया..!” रुपा ने उसके चेहरे की ओर देखकर अब शरम हया से मुस्कुराते हुवे कहा और मुँह पौछने के लिये राजु के हाथ मे अपना दुपट्टा थमा दिया जिससे..

राजु: बहुत मझा आया जिज्जी..!” 

रुपा:  तुझे क्या मझा आया इसमे बेशर्म..?

राजु: व्.वो्.ओ्. जब आपके नीचे से पानी निकल रहा था तो बहुत मजा आ रहा था..!

रुपा: हट्.. बेशर्म..! क्या बोल रहा है..? 

राजु: नही जीज्जी… सच मे बहुत मझा आया, बहुत अच्छा था… 

रुपा: हट्.. गन्दे..! चल अब कुवे पर चल, बेशर्म..! बहुत बिगङ गया है तु आजकल उस गप्पु के साथ रह के..!

रुपा अब अपने पैर मे फँशी शलवार को सही से करके पहनने लगी, मगर राजु अभी भी नीचे अपने घुटनो के बल बैठा हुवा था। उसने फिर से उसकी शलवार को पकङ लिया जिससे…

“यहाँ नही… कपङे गन्दे हो जायेँगे..चल अब कुवे पर चल वहाँ कर लेना.. देख मेरी सारी शलवार गन्दी कर दी‌ तुने..!” रुपा ने अपनी शलवार को राजु से छुङवाने की कोशिश सी करते हुवे कहा।

राजु: नही..!

रुपा: अब क्या है तो..? जो करना था वो तुने कर तो लिया,बेशर्म..!, चल अब कुवे पर चल वहाँ दे दुँगी..!

तब तक राजु ने नीचे घुटनो के बल खङे खङे ही अपनी पेन्ट के हुक व चेन को खोल लिया था। वो कभी‌ कच्छा तो पहनता नही था इसलिये खङे होकर वो तुरन्त ही अपने पैरो मे फँसी पेन्ट को उतारकर नीचे नँगा हो गया और रुपा को बाँहो मे भरकर उससे चिपट सा गया जिससे…

रुपा: अरे.. अरे.. ये क्या कर रहा है.. बेशर्म.. यहाँ कैसे करेगा कपङे गन्दे नही हो जायेँगे..?चल कुवे पर चल वहाँ लेटकर आराम से कर लेना ना..?

रुपा ने राजु से अपने आपको छुङाने की कोशिश सी करते हुवे कहा, मगर राजु तो जैसे हठ पर आ गया था। वो उससे ऐसे ही चिपटे रहा जिससे अब राजु का लण्ड रुपा की नँगी जाँघ पर छुवा होगा की रुपा ने अपना एक हाथ नीचे लाकर उसके लण्ड को पकङ लिया। उत्तेजना के मारे उसका लण्ड एकदम तना खङा था तो गर्म होकर एकदम सुलग सा रहा था मानो जैसे लाल सा हो रखा था। उसके एकदम तने खङद लण्ड को छुकर रुपा के मन भी कही ना कही उसे अब देखने की लालसा सी हुई होगी की….

“अच्छा अच्छा चल ठीक है एक बार रुक तो सही..!” ये कहते हुवे रुपा अब उसके लण्ड को पकङे पकङे ही नीचे बैठ गयी।

रात के अन्धेरे मे वो राजु के लण्ड को ठीक से नही देख पाई थी इसलिये दिन के उजाले मे उसके एकदम कङक कुवाँरे व जवान लण्ड को देख रुपा की साँसे मानो जैसे थम सा गयी, क्योंकि उसने अभी तक बस पति का ही लण्ड देखा था जो की एकदम काला था और वो पुरा  उत्तेजित होकर भी स्थिल सा ही रहता था, मगर रोहन का लण्ड एकदम गोरा चिकना था तो वो इतना कङक व कठोर था की रुपा के उसे हाथ से भीँचने पर भी वो दब नही रहा था।

रुपा के पति का लण्ड बिल्कुल भी वैसा नही था। उम्र के हिसाब से उसका लण्ड एकदम काला पङ गया था, तो उसमे इतना अधिक तनाव भी नही आ पाता था, मगर राजु का लण्ड उसके गोरे रँग के जैसे ही एकदम गोरा चिकना था तो उत्तेजना के मारे वो अकङकर इतना कठोर व कङक हो रखा था की रुपा को उसे हाथ से पकङने पर ऐसा महसूस हो रहा था मानो जैसे उसने कोई लोहे की राॅड को पकङ रखा हो….

रुपा के उसे हाथ से पकङने की वजह से उसके लण्ड का सुपाङा की चमङी पीछे खिसक गयी थी जिससे उसका एकदम किसी‌ टमाटर के जैसे लाल लाल गोल‌ मटोल व फुला हुवा सुपाङा बाहर निकल आया था जो की किसी साँप के जैसे फुँफकार सा रहा था मानो जैसे वो गुस्से से एकदम लाल हो रखा हो। राजु के लण्ड को देखकर रुपा का चेहरा इतना खिल सा गया की मानो जैसे वो राजु के जैसे एकदम कङक कुँवारे व जवान लण्ड को पाकर अपने भाग्य पर नाज कर रही हो…

उत्तेजना के मारे राजु के लण्ड से सफेद सफेद पानी के जैसी लार सी निकल रही थी जिससे उसके लण्ड का सुपाङा आगे से पुरा भीगा हुवा था, मगर फिर भी मन ही मन रुपा उसके लण्ड को देखकर इतना खुश सी हो गयी थी की अपने आप ही उसके होठो ने राजु के लण्ड के सुपाङे से छुकर उसे चुम सा लिया जिससे राजु के दोनो हाथ अपने आप ही रुपा के सिर पर आ गये.. अपने लण्ड के सुपाङे पर रुपा के नर्म नाजुक होठो की छुवन को महसूस होते ही राजु ने दोनो हाथो से रुपा के सिर को पकङकर अब अपने लण्ड पर दबा लिया जिससे उसके लण्ड का पुरा ही सुपाङा रुपा के मुँह मे समा गया और उसके मुँह की नर्मी व थुक व लार के गीलेपन से भरी गर्मी को महसूस कर राजु अब सुबक सा उठा, तो वही उसके लण्ड से छुट रही वीर्य के जैसी सफेद लार से रुपा के होठ व मुँह का स्वाद नमकीन व चिकना हो गया…

रुपा ने उसके लण्ड को बाहर निकालकर अब राजु की ओर देखा तो पाया की उसने अपने प्यारे से चेहरे को इतना मासुम बना रखा था मानो जैसे वो उसे अपने लण्ड को मुँह मे लेने के लिये कह रहा हो। उसके प्यारे से व भोले भाले चेहरे को देखकर रुपा को उस पर तरस सा आया जिससे उसके मन मे अब एक बार फिर से उसके व राजु मे रिश्ते के ख्याल उभर आया, क्योंकि वो अच्छे से जानती थी की वो अभी अभी जवान हुवा है इसलिये उसे इन सब बातो की समझ नही, मगर रुपा ये अच्छे से समझ रही थी की वो ये क्या कर रही है…

भले ही उसके एकदम कङक व कठोर लण्ड को देखकर रुपा के मन मे उसे खाने की भुख थी, मगर ऐसे उसके लण्ड देखकर रुपा को हल्की शरम सी भी महसूस हो रही थी। वैसे तो उसने राजु के साथ इतना सब कुछ कर लिया था मगर जो कुछ भी किया था वो अभी तक उसने बस रात के अन्धेरे मे ही किया था इसलिये दिन के उजाले मे राजु के लण्ड को देखकर रुपा को शरम सी आ रही थी, क्योंकि राजु के बारे मे उसने कभी भी कुछ गलत नही सोचा था। वो तो उसकी माँ ने कुछ हालात ऐसे बनवा दिये थे और कुछ उसकी मजबूरी ने उससे ये सब करवा दिया था, नही तो राजु जिस तरह उससे डरता था, किसी भी चीज के लिये जीद्द कर लेता था और उसे देखकर “जीज्जी..! जीज्जी..!” करता रहता है उससे रुपा ने कभी सपने मे भी नही सोचा था की वो कभी राजु के लण्ड को भी इस तरह देखेगी इसलिये उसने अब एक बार तो राजु के चेहरे की ओर देखा फिर अपनी गर्दन नीचे झुका ली, मगर तभी…

“व्.व्.वो्.. करो ना जीज्जी..!” राजु ने उसके सिर को अब फिर से अपने लण्ड पर दबाते हुवे कहा।

रुपा ने अपनी गर्दन को ढीला ही रखा हुवा था इसलिये राजु के उसके सिर को अपने लण्ड पर दबाते ही एक बार फिर से उसके लण्ड का सुपङा रुपा के मुँह मे घुस गया, मगर रुपा ने उसे फिर से अपने मुँह से बाहर निकाल दिया और राजु के चेहरे की ओर देखते हुवे…

“बेशर्म ये सब उल्टे सीधे काम करवा रहा है मुझसे, और फिर जीज्जी जीज्जी भी कर रहा है..!” रुपा ने उसे डाटते हुवे कहा जिससे..

राजु: तो फिर क्या कहु जीज्जी..!

“फिर से से जीज्जी..?” रुपा ने अब उसकी नँगी जाँघो पर चपत सी लगाते हुवे कहा जिससे..

राजु: तो फिर तुम ही बाताओ ना अब क्या कहु..

रुपा: कुछ भी बोल पर मेरे साथ ये सब करना है तो मुझे जीज्जी नही कहेगा..!

राजु: ठीक है..ठीक है… पर अभी तो इसे मुँह मर लो ना..!

रुपा: बेशर्म..! कौन सिखाता है तुझे ये सब, उस गप्पु के साथ रह रह कर बहुत बिगङ गया है तु…!”

रुपा ने अब एक बार फिर से राजु की नँगी जाँघ पर चपत सी लगाकर पहले तो शरम हया की मुस्कान सी लाकर राजु की ओर देखते हुवे कहा, फिर धीरे सी उसके लण्ड जे सुपाङे को अपने मुँह मे भरकर चुश सा लिया जिससे राजु अब फिर से…

“ईईईश्श्श्.. ज्.जि्.जि्ज्जी्ई्ई्ह्ह्…!” कहकर सुबक सा उठा।

उसके जीज्जी कहते ही रुपा ने अब फिर से उसके लण्ड को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया और अपनी आँखो को बङा सा करके रोहन की ओर देखने लगी मगर उसके चेहरे पर अभी भी शरम हया की मुस्कान सी ही तैर रही थी जिससे…

“ठीक है..ठीक है..ठीक है… अभी नही कहुँगा जीज्जी..!” राजु ने अब मासुम सी सुरत बनाते हुवे कहा तो रुपा को भी उस पर हँशी सी आ गयी और…

“बेशर्म..! तु चुप नही होगा ना..?” रुपा ने फिर से उसकी जाँघ पर चपत सी लगाते हुवे कहा और वापस उसके लण्ड को अपने मुँह मे भर लिया..

राजु भी अब खामोश ही रहा मगर तब तक रुपा अपनी जुबान व होठो से उसके लण्ड को चुभलाने सा लगी जिससे राजु अब फिर से सिसकने लगा तो अपने आप ही उसकी कमर रुपा के मुँह व जुबान के साथ आगे पीछे हो होकर हरकत सी करने लगी, वो अब मुँह से अब….

ईश्श्..अ्आ्ह्….ज् इईश…!

ईईश्श्श्.. अ्आ्ह्ह्….ज् जि्.ईईश्श्…!

ईईश्श्श्.. अ्आ्ह्….ज् जि्.जी्ईईश्श्श्…!” तो कह रहा था, मगर उसके मुँह से पुरा जीज्जी नही निकल रहा था। हालांकि बीच बीच मे उत्तेजना व आनन्द के वश कभी कभी उसके मुँह से जीज्जी निकल भी जा रहा था तो रुपा उस पर अब ध्यान नही दे रही थी, क्योंकि उसके एकदम कङे कुवाँरे लण्ड को चुशकर रुपा को भी जैसे मजा सा आ रहा था जिससे नीचे से उसकी चुत मे भी‌ पानी सा भर आया था।

उसके लण्ड से निकल रही रश की लार से रुपा के मुँह का स्वाद नमकिन व एकदम चिकना हो गया था, मगर रुपा को राजु के लण्ड से निकलता खारा रश भी शहद से मीठा तो घी से भी चिकना लग रह था जिससे उसके मुँह से लेकर अन्दर उसका हलक तक चिकनाई व खारेपन से एकदम तर हो गया था। रुपा ने कितनी ही बार अपने पति के लण्ड को चुशकर खङा करती थी जिससे काफी बार तो उसका पति उसके मुँह से ही रशखलित भी हो जाता था इसलिये लण्ड से निकलने वाले रश के स्वाद से वो भलीभाँति परिचित थी, मगर राजु के कुँवारे लण्ड से निकल रहे रश का कच्चा कच्चा सा नमकिन व चिकना स्वाद रुपा को बेहद ही भा सा रहा था इसलिये उपर से वो जितना राजु के लण्ड को चुश चुशकर उसका नमकिन व चिकना रश पी रही थी नीचे से उसकी चुत भी उतना ही चुतरश छोङ रही थी…

अपनी जीज्जी के गर्म गर्म व थुक लार से गीले मुँह व जुबान की हरकत से एकदम बावरा सा हो गया था, क्योंकि रुपा उसके लण्ड को चुभलाकर अपने मुँह व जुबान से जिस तरह का मजा दे रही थी इस तरह का मजा तो उसे उसकी चुत से भी नही मिला था, इसलिये वो भी उत्तेजना व आनन्द के वश दोनो हाथो से रुपा के सिर को पकङकर जोरो से सिसकते हुवे अपनी कमर को आगे पीछे हिला हिलाकर उसके मुँह पर ही धक्के से मार रहा था जिससे उसका लण्ड भी कुछ ज्यादा ही पानी छोङ रह था…

अब ऐसे ही रुपा उसके लण्ड को अपने होठो व जुबान से चुभला चुभलाकर चुशती चाटती रही जिससे वो कुछ ही देर मे अपने चर्म शिखर के करीब पहुँच गया। चर्म पर पहुँचने की उत्तेजना अव आनन्द के वश वो अब जल्दी जल्दी अपनी कमर को हिलाकर अपने लण्ड को रुपा के मुँह व होठो से घीसने लगा। राजु के तेज तेज धक्को से उसका आधे से ज्यादा लण्ड रुपा के मुँह मे अन्दर बाहर होने लगा था जिससे रुपा भी समझ गयी थी की वो अपने चर्म के करीब ही है, और अगर वो ऐसे उसके लण्ड को चुशती रही तो कुछ ही देर मे वो ढेर हो जायेगा…

रुपा को उसके लण्ड को चुशकर मजा तो आ रहा था, मगर वो ऐसे ही राजु के लण्ड से माल निकालकर उसे बर्बाद नही करना चाहती थी इसलिये कुछ देर ऐसे उसके लण्ड को चुभलाकर उसने राजु के लण्ड को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया और उसके चेहरे की ओर देखने लगी…

राजु अपने शिखर पर पहुँचने ही वाला था  जिससे उत्तेजना के मारे उसका चेहरा एकदम लाल हो रखा था, तो उसकी उखङती सी साँसो के साथ साथ उसका बदन भी कँपकँपा सा रहा था। रुपा के उसके लण्ड को बीच मे ही मुँह की बाहर निकाल देने की वजह से वो शिखर पर पहुँचते पहुँचते रह गया था इस बात की तङप व खीज सी उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी, मगर फिर भी…

“व्.व्.वो् ज्.जि्.जीज्जी…ब्.ब्.बस कुछ देर और क्.कर् दो ना मेरा हो जायेगा..!” राजु ने मासुमियत से ही कहा जिससे…

“अभी यहाँ नही चल कुवे पर चलकर मेरे अन्दर ही‌ कर लेना..!” राजु के लण्ड से निकले रश व खुद के मुँह से निकले थुक और लार से रुपा का मुँह तर बत्तर हो रखा जिसे उसने अब अपने दुपट्टे से पौछते हुवे कहा।

“न्.न्.नही् ज्.जि्.जीज्जी्ई्ई्.. बस्..बस्..थोङी देर और कर दो मेरा हो जायेगा..!” राजु तङपते हुवे विनती सी करके कहा जिससे…

रुपा: अरे.. तो कुवे पर चल ना वहाँ दे ही ना दुँगी तुझे..!

रुपा ने खङी होगे हुवे कहा जिससे…

“पर जीज्जी मेरा ऐसे ही कर दो ना, मै अब  जीज्जी भी नही‌ कहुँगा, बस थोङी देर और ऐसे कर दो..!” ये कहते हुवे राजु अब रुपा से चिपट सा गया और अपने लण्ड को रुपा की नँगी जाँघ के बीच घुसाकर उनसे घीसने‌ सा लगा..

राजु अपने शिखर पर पहुँचते पहुँचते रहा था इस बात की तङप उसकी बातो व हरकत से साफ झलक रही थी जिससे रुपा को अब उस पर हँशी सी आ गयी और..

रुपा: पर यहाँ खेतो मे कैसे करेगा तो तु..?

राजु:  ऐसे ही मुँह से कर दो ना..!

रुपा: क्यो मेरा नही करेगा..?

राजु: कर दुँगा ना जीज्जी, पर अब एक बार मेरा मुँह से कर दो ना पहले.., जैसे मैने आपका किया..!

राजु जिस तरह तङप सा रहा था इससे रुपा को भी अब उस लर तरस सा आया, मगर खेतो मे वो कर भी क्या सकती थी जहाँ मिट्टी मे ना तो लेटने की जगह थी और ना ही बैठने की इसलिये…

“ले कर ले, तु अब कैसे करेगा.?” ये कहते हुवे, राजु का लण्ड रुपा की जाँघो के बीच तो‌ लगा ही था जिसे पकङकर रुपा ने अब अपनी एक टाँग को थोङा सा उपर उठाकर उसजे लण्ड को अपनी चुत के मुँह पर लगा लिया..

राजु के लण्ड के साथ साथ रुपा की चुत भी पानी छोङ छोङकर एकदम गीली हो रखी थी तो वो अन्दर से भी एकदम‌ किसी भट्टी की‌ तरह तप सी रही थी इसलिये अपनी जीज्जी की गीली चुत की तपिस अपने लण्ड पर महसूस करके राजु और तङप सा उठा। इस तरह खङे खङे रुपा की चुत मे लण्ड को घुसाना मुश्किल तो था, मगर राजु उत्तेजना के मारे तङप सा रहा था इसलिये उसने अब एक हाथ से तो रुपा की कमर को पकङ लिया और दुसरे हाथ से रुपा के पैर को अपनी कमर पर चढाकर अपनी कमर को आगे की और धकेल सा दिया जिससे ज्यादा तो नही मगर फिर भी उसके लण्ड का सुपाङा रुपा की चुत के मुँह को खोलकर उसमे अटक सा गया जिससे…

“ईईईश्श्श्.. ओ्ओ्ह्ह्.य्.य्…!” कहकर रुपा सुबक सा उठी तो अपनी दोनो बाँहे भी राजु के गले मे डालकर उससे चिपट गयी…

इस तरह खङे खङे राजु के लण्ड का बस सुपाङा ही रुपा की चुत मे घुसा था। उसे पुरा ही रुपा की चुत मे घुसाने के लिये अब जैसे ही रुपा ने अपनी बाँहे राजु के गले डाली, राजु जिस हाथ से रुपा की कमर को पकङे हुवे था उसे नीचे ले जाकर जाँघ पर से उसके पैर को पकङ लिया और उसे भी उपर उठाने की कोशिश करने लगा जिससे…

“ओ्.ओ्ओ्य्.य्.ये् क्या कर रहा है..? बेशर्म मुझे गिरायेगा क्या..?” करते हुवे रुपा ने राजु को कस कर पकङ लिया…

भले ही रुपा को गीरने का डर लग रहा था, मगर अन्दर ही अन्दर वो भी राजु के लण्ड को अपनी चुत से खाना चाह रही थी इसलिये गिरने के डर से वो मुँह से तो  मना सा कर रही थी, मगर राजु के गले मे बाँहे डालकर उससे चिपट सा गयी थी। राजु को वो जितना अनाङी समझती थी वो उतना अनाङी भी नही था, उसे चुदाई का इतना कोई अनुभव तो नही था, मगर वो कहतॆ है ना आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है, वैसा ही कुछ अब राजु के साथ भी हुवा..!

वो बस कैसे भी अपने लण्ड की आग को शाँत करना चाह रहा था जिसे रुपा ने अपने मुँह मे लेकर उसे अधुरे मे ही जलते हुवे छोङ दिया था इसलिये रुपा अब  गिरने के डर से उससे चिपटे रही और…

“ईईईश्श्श्. ओ्.ओ्ओ्य्.य्.ये् क्या कर रहा है..? बेशर्म गिरायेगा क्या मुझे..?

“ओ्.ओ्ओ्य्.य्.ये् क्या कर रहा है..? बेशर्म गिरायेगा क्या मुझे..?” करती रही, तो राजु ने जैसे तैसे करके उसके दुसरे पैर को भी उपर हवा मे उठा लिया। 

भले ही रुपा बदन और वजन मे राजु से भारी थी, मगर फिर भी उसने रुपा को पुरा उपर हवा मे उठाकर अपने लण्ड पर बिठा सा लिया जिससे…

“ईईईश्श्श्. ओ्.ओ्ओ्य्.य्.ये् क्या कर रहा है..? बेशर्म गिरायेगा क्या मुझे..?” रुपा के मुँह से अब एक बार तो ये निकला, मगर तब तक रुपा के खुद के भार से ही राजु का लण्ड उसकी चुत मे जङ तक उतर गया और रुपा…

ईईईश्श्श्.. ओ्ओह्ह्.य्.य्…!” कहकर अपनी बाँहे राजु के गले मे डाले डाले अपना पुरा वजन राजु के गर्दन पर डालकर उसके लण्ड पर हवा मे झुल सी गयी…

राजु की ताकत की रुपा जैसे अब कायल सी ही हो गयी थी क्योंकि रुपा बदन और वजन मे राजु से काफी भारी थी, मगर फिर भी उसने रुपा को अपनी बाजुओ के बल पर अपने लण्ड पर उपर हवा मे उठा लिया था इसलिये उसके गले मे बाँहे डालकर वो उससे एकदम चिपट सा गयी और उसके चेहरे पर चुम्बनो की झङी सी लगा दी, मगर राजु से अब सब्र नही हो रहा था इसलिये रुपा को उपर नीचे हिला हिलाकर उसने तुरन्त ही धीरे धीरे उसकी चुत की नर्म नाजुक दिवारो से अपने लण्ड को घीसना शुरु कर दिया जिससे रुपा भी…

ईईश्श्श्.ओय्ह्.राजुह्ह..!

ईईईश्श्श्… अ्आ्आ्ह्ह्…!

ईईईश्श्श्शद… अ्आ्आ्आ्ह्ह्…!” की सिसकारियाँ सी भरने लगी…

इस तरह रुपा को गोद मे उठाकर धक्के लगाने से राजु का पुरा जङ तक का लण्ड रुपा की चुत मे अन्दर तक जाकर उसकी चुत की दिवारो की तो मालिस कर ही रहा था, उपर से राजु के उसे उपर नीचे हिलाने से उसकी पुरी की पूरी चुत भी एकदम कस कसकर राजु के लण्ड के आस पास की चमङी से घीसने लगी थी जिसने रुपा को दोगुना मजा आ रहा था इसलिये…

“कौन सिखता है बेशर्म तुझे ये सब..?” रुपा ने अब एक बार तो राजु से अपनी गर्दन को उठाकर उसकी आँखो मे देखते हुवे कहा, फिर वापस राजु से एकदम चिपट सा गयी क्योंकि…

उसने अपनी सँगी सहेलियो से इस तरह से चुदाई करवाने के बारे मे सुना तो जरुर था, की इस तरह चुदाई करने मे उन्हे बहुत मजा आता है, मगर खुद अपने पति के साथ रुपा ने ऐसा कभी किया नही था। राजु को भी ये सब मालुम‌ नही था, वो बस अपनी उत्तेजना को शाँत करने के लिये अज्ञानता मे ही ये कर रहा था, मगर राजु की ये चुदाई का तरीका रुपा को इतना मजा दे रहा था की उत्तेजना व आनन्द के वश उसने तुरन्त अब राजु के होठो को अपने मुँह मे भर लिया…

राजु की ताकत की तो वो कायल हो ही गयी थी उपर से वो जिस तरह से उसे अपनी गोद मे उठाकर उसकी चुत की मालिस करके उसे उत्तेजना व आनन्द का ये एक अलग ही अनुभव करवा रहा था उससे वो राजु पर मानो‌ जैसे अब फिदा सी ही हो गयी थी इसलिये  राजु के गले मे बाँहे डाले डाले उसके होठो को अपने मुँह मे भरकर उन्हे चुशते चुशते रुपा खुद भी उकस उकस अपनी चुत की दिवारो को राजु के लण्ड से घीसने लगी…

राजु भी अब जोर जोर से व जल्दी जल्दी रुपा को अपनी गोद गोद मे उछाल उछालकर उसकी चुत से अपने लण्ड घीस रहा था तो रुपा भी उसके गले मे बाँहे डालकर उकस उकसकर…

ईईश्श्श्.ओय्ह्.राजुह्ह..!

ईईईश्श्श्..अ्आ्ह्ह्…!

ईईईश्श्श्शद… अ्आ्आ्आ्ह्ह्…!” की सिसकारियाँ सी भरते हुवे उसके लण्ड पर फुदक सा रही थी। भले ही राजु चर्म के शिखर पर पहुँचते पहुँचते रह गया था, मगर इस तरह राजु की‌ गोद मे उसके लण्ड पर बैठकर रुपा को बेहद ही ज्यादा मजा आ रहा था जिससे अब कुछ ही देर मे राजु के साथ रुपा भी अपने चर्म शिखर पर पहुँच गयी..

राजु ने जहाँ….

ईईश्श् ओ्ओ्ह्ह्..!

ज्.जि्.जि्ज्जी्ईह्ह्..!

ईईईश्श्श्.. अ्आ्ह्ह्ह्…!

ईईईश्श्श्.. अ्आ्आ्ह्ह्ह्…!” कहते दो चार बार रुपा को अपनी गोद मे लिये लिये उसकी चुत की नर्म नाजुक दिवारो से अपने लण्ड को घीसा और रह रहकर उसकी चुत मे वीर्य की पिचकारीयाँ सी छोङनी शुरु कर दी, तो वही अपनी चुत मे निकलते राजु के गर्म गर्म वीर्य को महसूस कर रुपा ने भी अब….

ईईईश्श्श्… र्.र्.रा्जूह्ह्ह्..अ्आ्ह्ह्…

ईईईश्श्श्.. अ्आ्ह्ह्ह्…!

ईईईश्श्श्.. अ्आ्आ्ह्ह्ह्…!” कहते हुवे राजु के गले मे बाँहे डालकर पाँच सात बार तो उकस उकसकर अपनी चुत की दिवारो को उसके कठोर लण्ड से घीसा फिर उसने भी अपनी चुत की मांसपेशियों से राजु के लण्ड को जकङ सा लिया और रह रहकर उसके लण्ड से वीर्य को निचौङने सा लग गयी…

कुछ देर दोनो अब ऐसे ही एक दुसरे मे समाये रहे, फिर धीरे धीरे राजु पर रुपा की पकङ कुछ हल्की हुई तो राजु ने उसे अपनी गोद से नीचे उतार दिया, रुपा के अब राजु की गोद से उतरते ही उसका लण्ड भी उसकी चुत से बाहर निकल आया था जिससे रुपा की चुत मे भरा राजु का वीर्य तुरन्त उसकी चुत के मुँह से निकलकर नीचे उसकी एक जाँघ पर बह निकला इसलिये…

“ये ले ले…अभी करना है..! यही करना है…, क्या फायदा निकला नालायक..?” रुपा ने नीचे झुककर अपनी जाँघ पर बहते वीर्य को देखते हुवे कहा जिससे…

“क्या हुवा..?” राजु ने अब उत्सुकता वश रुपा की ओर देखते हुवे पुछा..

“कुछ नही.., तु नही समझेगा.. नालायक..! चल अब ये पेन्ट पहन ले, बाकी सब कुवे पर चलकर करना..!” रुपा ने अब घुमकर दुसरी ओर‌ मुँह कर लिया और अपनी जाँघ पर बहते राजु के वीर्य को उँगलियों से लगाकर वापस अपनी चुत के मुँह पर मलकर अपनी शलवार को पहन लिया जिससे राजु ने भी अब चुपचाप अपनी पेन्ट को पहन लिया…

शलवार को पहनकर रुपा की नजर अब राजु के चेहरे की ओर गयी होगी जो पसिने से एकदम‌ भीगा हुवा था। वैसे तो इस जोरदार चुदाई से दोनो ही हाँफ से गये थे मगर इसके लिये जो मेहन थी वो सारी मेहनत राजु ने ही की थी जिससे वो अभी भी हाँफ सा रहा था तो उसका पुरा चेहरा पसिने से भीग गया था जिसे देख…

“देख तो क्या हालत बना ली अपनी तुने, और किसने सिखाया तुझे ये सब बेशर्म..?” रुपा ने अब शर्म हया से मुस्कुराकर राजु की ओर देखते हुवे पुछा जिससे…

“कोई नही जीज्जी..!” राजु ने अपने पसिने से भीगे चेहरे को अब खुद ही अपने हाथ से पौछते हुवे कहा।

अनजाने मे ही सही‌ मगर राजु ने उसे इस खेल का जो नया अनुभव दिया था उसकी वो कायल सी हो गयी थी इसलिये राजु के पसिने से भीगे हुवे चेहरे व उसे खुद ही अपने हाथो से पसिने को पौछते देख रुपा को उसकी मासुमियत पर तरस सा आया इसलिये रुपा ने आगे बढकर पहले तो प्यार उसके गाल को चुम सा लिया फिर अपने दुपट्टे से उसका चेहरे को पौछते हुवे…

“चल अब कुवे पर चल, बाकी तुझे जो करना है वही चलकर करना..!” ये कहते हुवे वो अब राजु के चेहरे को‌ पौछकर उसे अब कुवे के पास ही बने उस छोटे से कमरे मे लेकर आ गयी।

रुपा का दो बार तो राजु का एक बार रशखलित हो गया था मगर राजु का लण्ड अब फिर से खङा हो गया था इसलिये कमरे मे आकर जैसे ही रुपा ने अन्दर से दरवाजा बन्द किया राजु सीधे उससे लिपट गया जिससे…

“एक बार रुक तो सही.. ऐसे कैसे करेगा..?, पहले नीचे कुछ बिछा तो लेने दे बेशर्म..!” रुपा ने उसे हटाते हुवे कहा और कोने मे पङी अनाज की खाली बोरियो मे से तीन चार बोरियो को उठाकर नीचे बिछा लिया, राजु तो पहले ही उतावला हो रहा था इसलिये रुपा के बैठते ही वो उस पर टुट सा पङा और जब तक दो बार रुपा की चुत की अच्छे से कुटाई नही कर ली तब तक उस पर नीचे नही उतरा…

अब ऐसे ही रुपा रात मे तो अपने पति के साथ ही सोती और दिन मे रोजाना फसल की रखवाली के बहाने राजु को अपने साथ खेत मे ले आती और दो तीन बार राजु से अपनी चुत को अच्छे से कुटवाने के बाद ही वापस घर जाती जिसका परिणाम अब ये निकला की उसी महिने रुपा पेट से हो गयी‌ और उसका महिना आना रुक गया‌ जिससे रुपा की सास व पति बहुत खुश हो गये तो वही रुपा को भी बधाईयाँ मिलना शुरु हो गयी…

रुपा शादी के इतने दिनो बाद पेट से नही हुई थी इसलिये बधाईयो के साथ साथ रुपा से अब गाँव से ये पुछने के लिये आने वाली औरतो की भी कमी नही थी की उसने ऐसी कौन सी दवा, झाङ फुक या फिर कोई इलाज करवाया है जिससे वो पेट से हो गयी, मगर रुपा किसी को‌ कुछ बताती नही थी। ऐसे ही अब एक रोज घर के सारे काम निपटाने के बाद रुपा जब खेत मे जाने से पहले उसकी सास को बताने गयी तो…

“वैसे बहु अबकी बार तुने ऐसा क्या किया, या फिर तेरी माँ ने ही तुझे कोई दवा दिलवाई है जो तु इस घर को इतनी बङी खुशी देने जा रही है..! गाँव मे सब पुछती रहती, मुझे भी तो बता..?” रुपा की सास ने भी उससे पुछ लिया जिससे…

“टोना टोटका…!”  तुरन्त ही अब रुपा के मुँह से निकल गया।

राजु उस समय वही खङा हुवा था अनायास ही रुपा की नजर अब राजु की ओर चली गयी.. वो भी रुप की ओर ही देख रहा था जिससे दोनो के की नजरे आपस मे टकराई तो दोनो के चेहरे पर ही शरम हया की एक मुस्कान सी तैर गयी तो वही…

“क्या..?” रुपा की सास को कुछ समझ नही आया इसलिये उसने अब रुपा की ओर देखते हुवे कहा जिससे…

      “अरे..! कुछ नही माँ जी.. बस कुछ टोने टोटके है जो मेरी माँ ने बताये थे, उन्हे मैने व राजु ने मिलकर किये है..!” रुपा ने अब राजु की ओर देखते हुवे ही कहा जिससे अब एक बार तो दोनो की नजरे आपस मे टकराई मगर फिर शरम हया के मारे रुपा ने मुस्कुराकर गर्दन घुमा ली और..

“चल राजु हम खेते मे चलते है..!” ये कहते हुवे रुपा उसे अपने साथ खेत मे ले आई और रुपा की सास बस उन्हे देखती रह गयी…

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