अध्याय 77
अजय की गाड़ी एक घने जंगल में बनी पगडंडी पर चल रही थी,वो अकेला ही था और हांफ रहा था,गाड़ी में बैठे हुए भी ऐसा लग रहा था जैसे की वो कई किलोमीटर दौड़कर आया हो,पास ही एक धमाका होता है और अजय के गाड़ी के एक पहिये में जाकर गोली लगती है ,गाड़ी थोड़ी लड़खड़ाती है लेकिन रुकती नही ,वो अपने ही स्पीड में चली जा रही थी,टायर के चिथड़े उड़ गए लेकिन अजय ने गाड़ी नही रोकी आखिरकार एक छोटे मिसाइल सा बम आकर उसकी गाड़ी से टकराया जब तक अजय कुछ समझता उससे पहले ही बड़ा धमाका हो चुका था,…………..
इधर
फोन पर पुनिया सभी कुछ सुन रहा था और साथ ही उसके चहरे का रंग भी बदलने लगा
“एक अकेला आदमी और तुम सब फिर भी वो तुम्हारे अड्डे को तबाह करके चला गया,”
“क्या मतलब की मर गया होगा लाश मिली की नही “
“नही मिली पागल हो गए हो जब तुम कह रहे हो की उसे बम से उड़ा दिया तो लाश तो मिलनी ही चाहिए थी…”
“और ढूंढो ,,,वो कोई आम आदमी नही है ,इस स्टेट का राजा है और अब दो मंत्रियों का भाई ..जगह जगह पोलिस और आर्मी तुम लोगो की तलाश में निकल पड़ी होगी जाओ और ढूंढो उसे “
पुनिया ने फोन पटका,अगर अजय जिंदा होगा तो उसका क्या हाल करेगा ये सोच कर ही उसकी रूह कांप जा रही थी ,.और अगर वो मर गया तो उसके परिवार वाले एक एक को चुन चुन कर मरेंगे ….
“ओफ़ अब क्या करू”पुनिया के मुह से अनायास ही निकला
इधर
ठाकुरो की हवेली में मातम परसा हुआ था,अखबारों की मुख्य खबर अजय की मौत ही थी,निधि पागलो जैसे घुमसुम सी बैठी थी वही बाकी लोगो का भी हाल बुरा ही था,जैसे रोते रोते आंसू सुख चुके हो ,मातम और सांत्वना का दौर कई दिनों तक जारी रहा लेकिन फिर भी अभी तक कोई भी पूरी तरह से सही नही हो पाया था,गार्डन में बाली और डॉ बैठे हुए बात कर रहे थे
“अब सोचता हु की सोनल और विजय की भी शादी कर ही दु ,घर के थोड़ी रौनक तो वापस आएगी ,बच्चों के चहरे अब देखे नही जाते “
बोलते बोलते बाली की आंखे नम हो गई थी
“हूऊऊ लेकिन क्या तुम्हे पता है की उन्हें कोई पसंद है की नही “
डॉ की बात से बाली ने चहरा ऊपर किया और आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,डॉ एक गहरी सांस लेकर कहने लगा
“सोनल नितिन को पसंद करती है वही अजय खुसबू को पसन्द करता था,जो हाल इस घर का है वही हाल अभी उस घर का भी है,अगर तिवारी मान जाए तो मेरी मानो और सोनल और नितिन की शादी कर दो ,दोनो परिवारों में खुसी थोड़ी तो लौटेगी और शायद इस रिस्ते के लिए सोनल भी ना ना कहे ..”
बाली गहरे सोच में पड़ जाता है
“देखो जंहा तक मैं समझता हु इस स्थिति में यही उचित होगा ,…सोनल को मनाना ही पड़ेगा ,मुझे डर तो निधि का है अजय के जाने के बाद वो तो मुर्दो की तरह से हो गई है …अगर ऐसा ही चला तो ….उसे कही बाहर ले जाओ ,सुना है पास के ही गांव में एक बाबा जी ठहरे हुए है कुछ दिनों से उनके पास चलते है …”
“हम्म्म्म कुछ तो करना ही पड़ेगा वरना सभी फूल यू ही मुरझा जाएंगे “
बाली अपने मन ही मन कहता है….
सोनल और नितिन पूरे परिवार के सामने खड़े थे,
“लेकिन बाली ये दोनो तो भाई बहन है,”महेंद्र ने जोर देकर कहा
“जब इन्हें प्यार हुआ तो इन्हें भी कहा पता था की ये दोनो भाई बहन है “बाली ने अपनी बात रखी
सभी घर के सबसे बुजुर्ग रामचन्द्र तिवारी जो की सोनल के नाना और नितिन के दादा थे की ओर देखने लगे,
“बेटा प्यार ना जात देखता है ना ही धर्म ना ही रिस्ते ये तो बस हो जाता है,इनकी बात मान लो घर में थोड़ी खुसी तो आएगी”रामचंद्र ने नम आंखों से कहा,
वही खड़ी खुसबू जो की सुबक रही थी अपने दादा के नजदीक जाकर उनसे लिपट गई और अपने पिता की ओर देखते हुए बोली
“मैं भी अजय से प्यार करती थी पापा ,लेकिन अब वो नही रहे ,दादा जी सही कहते है अजय जी ने भी मुझे समझाया था लेकिन प्यार कुछ भी तो नही देखता ,इन दोनो की शादी अजय का भी सपना था…”
सभी की स्वीकृति तो मिल गई लेकिन सोनल शादी को तैयार नही हो पा रही थी ,डॉ की सलाह पर सभी पास के गाँव वाले बाबा जी के पास जाने को राजी हो गए ,बाबाजी जो की हिमालय से आये थे और देश का भ्रमण कर रहे थे,वो अभी पास ही के गांव में थे,वो इस इलाके में कुछ दिनों से घूम रहे थे कभी गायब हो जाते तो कभी फिर से आ जाते,लोगो में इनकी ख्याति फैल रही थी ,सभी परिवार उनके पास पहुचा जो की गांव के सरपंच के घर रुके हुए थे,लेकिन निधि वँहा जाने को राजी ही नही थी ,जब वो वापस आये तो सोनल शादी को राजी हो चुकी थी ,विजय अपनी बहन को भी दुख से उबरना चाहता था इसलिए जबरदस्ती निधि को बाबा जी के पास ले गया,उस समय बाबा जी अपने कमरे में बैठे हुए ध्यान में मग्न थे,उनकी लंबी चौड़ी काया देखकर वो किसी पहलवान से लगते थे,घनी दाढ़ी में उनका चहरा छिपा हुआ था लेकिन चहरे का तेज सभी तक पहुचता था,निधि और विजय के आने के बाद ही उन्होंने अपनी आंखे खोली निधि और उनकी आंखे मिली जैसे एक झटका निधि को लगा,वो वही पर बैठ गई और बाबाजी के चहरे को ध्यान से देखने लगी उसके ऐसे देखने पर बाबा मुस्कुराए और सभी को जाने का आदेश दिया,वँहा अभी बस निधि विजय और बाबा जी ही थे,
“ऐसे क्या देख रही हो …”
“आपकी आंखे किसी को याद दिलाती है”निधि का स्वर रुंधा हुआ था जबकि बाबा जी के चहरे में मुस्कान यथावत थी
“किसकी “
“मेरे भइया की ,”
“अच्छा “बाबाजी के चहरे की मुस्कान और भी चौड़ी हो गई निधि ने विजय को देखा तो वो भी मुस्कुरा रहा था निधि को समझते देर नही लगी वो उठी और भागी,बाबा से लिपट गई,वो अभी भी पद्मासन लगाए बैठे थे वो गिर गए थे और निधि उनके ऊपर थी ,निधि ने उनके गालो पर दो तमाचे जोर जोर के जड़ दिए ,निधि की आंखों से सैलाब बाहर आ रहा था वो कुछ भी बोलने और करने की स्तिथि में नही थी,बाबा ने उसके मुह को चूमा लेकिन वो हट गई
“अरे ऐसे गुस्सा क्यो हो रही हो …”
चटाक ,फिर से एक झापड़ अजय के गालो में था
“अरे बाबा माफ करो “
चटाक
“अब “
चटाक
अजय हार गया और निधि को अपनी बांहो में जकड़ लिया और निधि के गालो में प्यार भरी पप्पी ले ली,
इधर विजय भी ये सब देखकर इमोशनल हो गया था,बहुत देर तक वो ऐसे ही लेटे रहे निधि उठी और जाने लगी
“अरे रुको तो क्या हुआ “
चटाक ,निधि ने रोते हुए अजय को चुप रहने का इशारा किया ,और उसकी दाढ़ी को खिंचा
“आउच दर्द होता है रुको “लेकिन निधि कहा मानने वाली थी उसने इतने जोर से अजय की दाढ़ी को खिंचा की अजय के त्वचा से खून आने लगी और निधि के हाथो में उसकी दाढ़ी थी ,निधि उसके पास ही बैठी और उसके गालो को सहलाया अजय के होठो में एक मुस्कान और ‘चटाक चटाक चटाक ‘
निधि रोटी रही और तब तक अजय को मरती रही जब तक की वो थक ही नही गई और फिर रोते हुए ही फिर से अजय के सीने से लिपट गई ,
“ये सब क्या है भइया आप ने मेरी जान ही निकाल दी थी,आप खुद को समझते क्या है कुछ भी करोगे और कभी सोचा है की हमारा क्या होगा ,कभी मेरे बारे में या खुसबू के बारे में सोचा अपने वो बेचारी पत्थर जैसी हो गई है ,लेकिन इसकी आपको क्या परवाह होगी …”अजय बस निधि के बालो को सहलाता रहा उसके पास बोलने को था भी कुछ नही उसे पता था की उसकी प्यारी बहन किस दुख से गुजरी है,उसकी आंखों में भी आंसू थे लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी तो पड़ता है ,
अब अजय ने फिर से अपनी दाढ़ी लगा ली थी और निधि उसके सामने ही बैठी थी,वो हल्के हल्के मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी,
“अब बताओगे की ये सब क्या है…”
“ह्म्म्म असल में जिसने हमे किडनैप किया ,जिसने हमारे माता पिता की जान ली उस पुनिया का सुराग इकठ्ठा करने के लिए मैं इस रूप में यहां रह रहा हु,अभी तक ये बात बस डॉ को पता थी ,असल में ये उनका ही प्लान था,डॉ के दोस्त विकास जो की अब IAS बन चुके है,वो पहले पास के ही कस्बे में कुछ दिन फारेस्ट अधिकारी के रूप में काम करते थे,उस समय वो पुनिया और जग्गू से मिले थे,तब तक उनके साथ सबकुछ ठिक ही चल रहा था ,फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ की वो दोनो ही गायब हो गए,मुझे इतनी जानकारी विकास जी ने दी ,हमने पता लगाने की बहुत कोशिस की पर कोई भी सुराख नही मिल पा रहा था फिर मैं उस कस्बे में गया और वहां कुछ दिन बाबा बन कर रहा,बातो ही बातो में मैंने पता लगाया की आखिर क्या हुआ था,जो भी उनके साथ हुआ वो सचमे दुखदाई था,पुनिया और जग्गू बहुत ही अच्छे दोस्त थे,और खुशहाली से रहते थे,वो आम गांव के इंसानों की तरह ही थे,लेकिन आफत तब आयी जब वीरेंद्र तिवारी यानी हमारे मामा जी जो की अब नही रहे और बजरंगी चाचा,कलवा चाचा के भाई की नजर इनकी बीवियों पर पड़ी ,वो लोग ऐसे भी बहुत ही ऐयास किस्म के लोग थे,उन्होंने हर हाल में उनकी बीवियों को पाना चाहा नतीजा ये हुआ की वो उन्हें घर से उठा के ले गए और जग्गू और पुनिया कुछ भी नही कर पाए ,दोनो ने जब इसकी शिकायत बाली चाचा से की तो वो भी उन्हें समझा कर भेज दिए,बीवियां तो वापस आ गई लेकिन उसके बाद वो कभी भी उनकी नही रह गई,उनका उपयोग बजरंगी,विजेंद्र और यहां तक की बाली चाचा ने भी रंडियों की तरह करना शुरू कर दिया,ना ही पुनिया कुछ कर पाया ना ही जग्गू,आखिर पुनिया टूट ही गया और उसने जमकर विरोध किया जिसकी सजा सभी को मिली,दोनो के घर को जला दिया गया जग्गू के पैर काट दिये,पुनिया को एक बात पता चल गई थी की उसकी बीवी के साथ उन्होंने जबर्दति नही की थी बल्कि उसने ही अपने मर्जी से अपना जिस्म सौपा था वो पुनिया से खुस नही थी,उसने बदला लिया ,जब आग घर में फैली थी तो उसने अपनी पत्नी को मार दिया और अपने एक बेटे के साथ गायब हो गया,वही जग्गू भी कुछ दिनों के बाद वँहा से कही चला गया,सालो के बाद दोनो फिर से मिले अब पुनिया कोई साधारण आदमी नही रह गया है,वो नक्सलयो का सरदार है,और उनके जरिये ही हमारे ऊपर हमले करवाता आ रहा है,मैं पुनिया और जग्गू दोनो तक पहुचने में कामियाब रहा,लेकिन मैं उनको जड़ से खत्म करना चाहता था,क्योकि ना जाने इस साजिस में कौन कौन शामिल है,ये तो जाहिर है की हमारे परिवार वालो ने बहुतों के साथ ज्यादती की है अब ये मेरी जिम्मेदारी है की मैं इसे ठिक करू,ना सिर्फ पुनिया और जग्गू बल्कि ऐसे और भी कई परिवार हो सकते है,इनकी मदद कौन कर है मुझे ये पता लगाना था ,मुझे इनपर कोई भी गुस्सा नही रह गया है क्योकि इन्होंने अपने हक की लड़ाई लड़ी लेकिन एक स्टेज में जाकर हिंसा गलत हो जाती है,जिन्हें उन्हें सजा देनी थी वो दे चुके है,उन्होंने वीरेंद्र मामा को मारा,लेकिन हमारे माता पिता तो बेकसूर थे,अब वो दोनो ही हमारे पूरे परिवार के दुश्मन है….उनकी नफरत हमारे परिवार की सभी लड़कियों के ऊपर है ,जो हमारे परिवार के मर्दो ने उनकी बीबियों के साथ किया था अब वो हमारी औरतों के साथ करना चाहते है,इसलिए मुझे सभी का पता लगाना था,कोई हमारे परिवार के अंदर रहकर भी उनकी मदद कर रहा है,और वो अजय बनकर नही हो सकता था ,तो मैंने और डॉ ने ये खेल खेला,मैं अजय के रूप में उनके एक अड्डे में गया ,हमने सब कुछ प्लान किया हुआ था की जैसे ही वो बम्ब फोड़े मुझे खुद जाना है ,डॉ के आदमी वँहा मुझे बचने के लिए मौजूद थे और मैंने कपड़े भी ऐसे पहने थे की मुझे ज्यादा चोट नही आयी,मैं सुबह गायब हुआ और शाम को फिर से बाबा बन कर दूसरे गांव में चला गया,बाबा बनकर इनके बीच ही रहकर सब कुछ पता लगाना बहुत आसान है,…”
अजय की बातो को निधि बड़े ही ध्यान से सुन रही थी,
“आप क्या भूल गए की मैं एक मंत्री हु ,आप बस बोलो की ये पुनिया है कौन मैं स्टेट की पूरी पोलिस लगा दूंगी “निधि के आंखों में गुस्सा था,
“नही निधि अब और गलती नही कर सकते,हा मैं जानता हु की पुनिया और जग्गू कौन है और कहा है लेकिन इनको पकड़ना कर मार देने से कुछ नही हो जाएगा,हमे जड़ तक इन्हें साफ करना होगा”
निधि मन मसोज के रह गई
“और किन्हें पता है की आप जिंदा हो ,क्या खुसबू जानती है…”
“नही खुसबू को कुछ दिन और ना ही पता चले तो बेहतर है,पहले बस डॉ को ही पता था ,कल सोनल और विजय को भी पता चल गया,और आज तुम्हे,बस लेकिन देखो मेरी याद में रोना मत छोड़ना नही तो सभी को शक हो जाएगा “निधि जाकर अजय से लिपट गई …………..

