अध्याय 65
“तो बताओ ना भाभी जी की क्या क्या हुआ “रानी और निधि ने सुबह से ही सुमन को पकड़ लिया था,
“कुछ भी नही “
“ऐसा कैसे हो सकता है ,की किशन भाई कुछ भी ना करे “
सोनल कमरे में आते हुए बोली
“सच्ची दीदी कुछ नही हुआ बस किस “
“अरे वाह मेरे भाई को एक ही रात में सुधार दिया तुमने “सोनल हँस पड़ी साथ में बाकी सभी …
इधर
अजय और नितिन बैठे बाते कर रहे थे,साथ ही विजय धनुष और अभिषेक भी थे
“भइया हमे बहुत ही सोच समझकर काम करना पड़ेगा “
“हम्म अभिषेक तूम कालेज के अध्यक्ष हो कितने लड़के है हमारे साथ “
जब से इन भाइयो ने अभिषेक को उल्टा लटकाया था वो बेचारा भीगी बिल्ली की तरह रहता था और साथ ही उनकी हर बात माना करता था,अजय को पता था की इसे बस में रखना बहुत जरूरी है क्योकि उसके अंदर प्रतिभा थी जिसका उपयोग जिसका उपयोग अजय को अपनी पार्टी के लिए करना था ,
“भइया लगभग सभी “
“लगभग का क्या मतलब होता है “विजय की दमदार आवाज से अभी थोड़ा घबराया ,अजय ने उसे शांत रहने को कहा ,
“भइया कुछ लोग पहले से पुरानी पार्टी के मेम्बर है ,और वो कुछ ना कुछ पदों में भी है उन्हें तोडना मुश्किल है “
“हम्म कोई बात नही दूसरी पार्टीयो में भी तो कोई होना ही चाहिए ,अभी अगर हम उन्हें अपने साथ लाने की कोशिस करेंगे तो वो नाजायज मांगे करेंगे उससे अच्छा है की उन्हें हम ऐसे हराये की वो हारकर हमारे साथ आने पर मजबूर हो जाय ,इस साल पहला इलेक्शन विधानसभा का होगा,फिर लोकसभा अगले साल से शुरू होने वाला है ,उसके बाद पंचायत चुनाव और निगमो के चुनाव होंगे ,हमे अपना बेस इतना मजबूत रखना है की पहले 2 इलेक्शन में भले ही हमे कम सीटे मिले लेकिन स्थानीय चुनाव तक हमारा परचम लहराए,एक एक गांव के एक एक बूथ तक हमारी पहुच होनी चाहिए ,हर जगह से जितने भी लोग है सभी को इकट्ठे करो ,सभी कार्यकर्ता को से जो भी वोट ला सकता है अपनी शक्ति दिखाने को कहो हम सबसे पर्सनली मिलेंगे,जो भी योग्य होगा उसे सीट दी जाएगी ,और पद भी ,निर्वाचन आयोग में पार्टी की मान्यता के लिए दरखास्त दे दी आई है ,कुछ ही दिनों में हमे हमारा नाम और चुनाव चिन्ह भी मिल जाएगा ,हमे तुरंत शक्ति प्रदर्शन के लिए रेलिया निकालनी शुरू करनी होगी ,बहुत काम है दोस्तो भीड़ जाओ पूरे प्रदेश में फैल जाओ और चुन चुन कर उम्मीदवार लाओ जो अपने इलाको का नेतृत्व करे ,,,,
उसी शाम फिर से एक मीटिंग होती है जिसमे करीब 100 लोग शामिल थे अधिकतर लोग युवा ही थे ,ठाकुर-तिवारी परिवार के सभी बच्चे वहां मौजूद थे और अजय के नेतृत्व में सभी को उनकी जिम्मेदारी बांटी जा रही थी ,सबसे ज्यादा काम अजय , निधि धनुष के पास था ,बाकियों को बस अपने ही क्षेत्रो में जाने का काम दिया गया था ,जिसका जैसा समर्थ था वैसा काम उन्हें मिल गया था ,निधि को पार्टी का प्रेजिडेंट बनाया गया,वही धनुष को मुख्यमंत्रि का उमीदवार घोषित कर दिया गया ,अभिषेक पार्टी का महासचिव था ,साथ ही हर इलाके में गांव और ब्लाक लेवल तक और शहरों में जिला से वार्डो तक के प्रतिनिधियो की लिस्ट भी जारी कर दी ,ये काम कई दिनों का था लेकिन अजय ने होशियारी दिखाई थी और पहले से ही लिस्ट तैयार रखी थी ,जैसे सालो से वो उसी काम में भिड़ा हुआ हो ,एक एक प्रतिनिधि हैरत में था की अजय उन्हें पर्सनली जानता है,उनके इलाको की समस्याओं को जानता है ,
असल में अजय ने इसकी प्लानिंग सालो में ही की थी ,वो पूरे इलाके में घूमता रहता था और कई लोगो से मिलता जो की सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक्टिव थे ,वो अलग अलग पार्टी के या स्वतंत्र काम करने वाले थे ,अजय सभी को लिस्टेड करता रहता था और उनके काम पर नजर भी रखता था ,उसने अपनी पार्टी का इतना बड़ा खांचा बना दिया था की विरोधी पार्टीयो के पसीने आने वाले थे ,जो उन्हें बच्चा समझ कर मजाक में ले रहे थे ………
ये बात दूसरे दिन के अखबारों की हेडलाइन होने वाली थी ,अखबार से बहुत से लोग भी वँहा शामिल थे और उन्हें खूब पिलाया गया ,और खूब खातिरदारी की गई ,ये सभी काम विजय और नितिन के सुपुर्द था ,अजय विजय और नितिन पर्दे के पीछे से काम करने वालो में थे,धनुष और निधि के चहरा सामने होना था,और किशन राकेश और बाकियों को इससे दूर ही रखा गया था ,ज्यादा से ज्यादा अपने क्षेत्र में कुछ प्रचार के लिए उनका उपयोग होता ….
अब बस देर थी पार्टी के नाम के आने की और चुनाव चिन्ह के मिलने की …….
वही हवेली पहुचने के बाद सबको इंतजार था सुमन के गुड न्यूज़ की जो शायद आज रात होने वाला था ,……

