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अध्याय 63

सभी शादी की रश्मो में बिजी हो गए थे,अजय अकेले में छत में जाकर बैठा था,पंडित जी के मंत्रोच्चार की ध्वनियाँ वातावरण में गूंज रही थी,तभी उसे किसी के पायल की आवाज आयी,वो चौका क्योकि वो खुद सबसे छिपकर छत में जाकर बैठा था,और ऊपर से नीचे गार्डन में हो रहे फंक्शन को देख रहा था,वो पलटा

“अरे तुम यहां ??”

“आप भी तो यहां है “खुसबू मुस्कुराई साथ में अजय भी

“मेरा पीछा कर रही हो “

“वही समझ लीजिये “

अजय ने फिर से उसे ऊपर से नीचे तक देखा ,जिससे खुसबू के दिल की धड़कन बढ़ गई वो शर्म से नजर नीचे किये अजय के पास आकर खड़ी हो गई ,अजय ने उसका हाथ पकड़ा और पास ही बिठा लिया ,दोनो ही अब छत की बाउंड्री से पीठ सटाए बैठे थे,अजय के हाथ के स्पर्श ने खुसबू के शरीर में एक झुनझुनी सी दौड़ा दी ,

“ह्म्म्म अब बोलो क्यो पीछा कर रही हो मेरा “

“आप यहां अकेले क्यो बैठे है “

“पहला प्रश्न तो मैंने पूछा था ना “

“तो पहला उत्तर भी आप ही दे दो “खुसबू हल्के से हँसी,उसकी ये हँसी अजय के दिल के गहराइयों तक पहुच गई ,वो दिल से खुसबू को पसंद करता था,बस कुछ दीवारे थी जो सोनल से मिलने के बाद बहुत ही कमजोर हो चुकी थी ,

अजय ने खुसबू के हाथो को हल्के से सहलाया ,और फिर उसे अपनी ओर जोर से खिंचा ,खुसबू को इसकी अपेक्षा ही नही थी,वो सीधे अजय के ऊपर जाकर गिर गई,

“आउच क्या कर रहे है आप “

अजय ने उसे अपने बांहो के घेरे में भर लिया

“कुछ नही बस तुम पर हक जताने की कोसिस “

खुसबू के तो आनंद की सिमा ही नही थी ,जिसे वो इतने दिनों से चाहती थी ,और जो उसे मिलना लगभग नामुमकिन लग रहा था आज वो हो रहा है,अजय उसपर हक जताना चाहता है,

खुसबू की खुसी का बयान उसकी आंखों ने किया,वो बहने लगे,वो अपने सर को अजय की छाती में गड़ा कर सुबकने लगी ,अजय का हाथ उसके सर पर गया और वो उसे सहलाने लगा ,खुसबू ने अपनी बांहो फैलाई और अजय को जकड़ लिया,

अजय उसके गालो में अपनी उंगलिया फिराने लगा

“ए देखो मुझे “

खुसबू ने अपना सर ना में हिलाया

“अरे देखो तो सही “

फिर से ना में सर हिलाया

“क्यो ,क्या हुआ ?”

“ऊऊऊ न हु “

“बताओगी क्या हुआ “अजय अपने होठो को उसके कानो के पास ले जाकर हल्के से फूक मारी,खुसबू मचल गई वो सुबकते हुए भी हल्के से हँस पड़ी ,

“मत कीजिये ना “खुसबू मचलते हुए बोली

“अच्छा तो मैं जाता हु “

अजय उसे अपने से हटाने लगा ,

खुसबू ने सर उठाकर उसे देखा ,उसकी आंखे अब भी गीली थी

“रुक जाइये मत जाइये ……”वो उसे छोड़ने को तैयार नही थी

“अच्छा कर लीजिये जो करना है “इतना बोलकर वो फिर से अजय को जकड़ ली

“अच्छा क्या करू “

“जो अपना दिल चाहे …”खुसबू की आवाज थोड़ी धीरे थी ,वो तो बस अपने को अजय के सामने सौपना चाहती थी,वो अपना सर तक उसके सीने से हटाने को राजी नही थी ,होती भी कैसे जिसे इतने शिद्दत से चाहा था वो आज मिला था,

“अच्छा कुछ भी कर लू “अजय उसके कानो के पास जाकर कहता है

“ह्म्म्म मैं तो आपकी ही हु,बहुत पहले से मैंने खुद को आपको सौप चुकी हु ,आप ही मुझे अपनाने से इनकार कर रहे थे …”वो अजय के सीने में खुद को और भी जोरो से दबाती है,

“मैं आपकी हु और जीवन भर आपकी ही बनकर रहना चाहती हु ,मुझे अपना लीजिये “

खुसबू अब लगभग रोने लगी थी ,अजय उसका चहरा ऊपर उठता है जो वो उठाने नही दे रही थी वो अपना सर उसके सीने से अलग नही होने दे रही थी,जब उसका चहरा अजय के चहरे के पास आता है वो अजय उसके होठो में प्यार से एक किस कर लेता है

“मुझे माफ कर दो खुसबू ,मुझे समझ ही नही आ रहा था की आखिर मैं क्या करू,आई लव यु खुसबू ….”

खुसबू अपने आँखों में पानी लिए अजय को प्यार से देखती है वो उसे बहुत कुछ कहना चाहती थी ,अपना दिल उसके सामने चिर कर रख देना चाहती थी लेकिन कैसे ,मजबूरी में बस उसके होठ कांप रहे थे,और आंखों से आंसू बह रहे थे

……………………

“कुछ बोलो ना”अजय अब भी उसके बालो को सहला रहा था,

“उ हु ,मैं कुछ भी नही बोलूंगी बस ऐसे ही रहो ,सारी जिंदगी बस अब ऐसे ही बीत जाय,और मुझे कुछ भी नही चाहिए “

अजय ने उसे प्यार से देखा लेकिन उसका चहरा अजय के सीने में गड़ा हुआ था,वो उसके सर पर ही एक किस करता है,

“अच्छा चलो अब देर हो रही है सभी हमे ही ढूंढ रहे होंगे “

खुसबू फिर से ना में सर हिला देती है ,वो बिना कुछ बोले यू ही एक दूजे के चिपके हुए ना जाने कितने देर तक बैठे रहे,समय थम चुका था,बस धड़कने थी कोई जिस्म कही नही था,फ़क़त कुछ सांसे थी,और था वो अहसास एक दूजे के होने का,एक दूजे में खो जाने का …….

तभी किसी के पायलों की आवाज आने लगी दोनो अपनी दुनिया से बाहर निकले ,ही थे की सोनल ने दूर से उन्हें देख लिया,वो जल्दी से अलग हुए …

“ओहो ओहो अब चिपके ही रहो मुझे देख के अलग क्यो हो रहे हो “

खुसबू बुरी तरह से शर्मा गई थी वही अजय भी थोड़ा नर्वस हो रहा था,दोनो ही खड़े हो गए

“हम इन्हें कहा कहा ढूंढ रहे है और ये है की यहां प्रेम की पींगे हांक रहे है,ओहो क्यो मेरी खुसबू रानी “

सोनल जाकर खुसबू को छेड़ने लगी खुसबू घबराकर वहां से भागी,लेकिन खुसबू ने उसे पकड़ लिया और उसके चहरे पर एक किस कर दिया ,अजय ये सब देखकर सोनल के लिए प्यार से भर गया वो अपनी बांहे फैलाकर सोनल को उसमे आने का निमंत्रण देता है और सोनल दौड़ते हुए उसके सीने से लग गई ,खुसबू तो दौड़ कर बाहर चली गई ,और सोनल अजय के बांहो में थी,

“क्यो भइया आखिर हमे भाभी मिल ही गई “

“हम्म मेरी जान ,”

“तो लव यु वगेरह बोला की नही “

“जब दिल में ही प्यार हो तो क्या बोलना “

“अरे भइया बोलना भी जरूरी होता है बस प्यार करना ही नही बल्कि उसे जताना भी जरूरी होता है “

“ठीक है मेरी मा वो भी कर देंगे लेकिन अब नीचे चल सब ढूंढ रहे होंगे “

“हा भइया जल्दी चलिए “

नए नए प्यार का नशा ,वो खुमार वो खुसबू ,कुछ अलग ही फिलिंग होती थी ,अजय खुसबू के प्यार की खुसबू में खोया हुआ था ,और ये बात हवा में बह रही खुसबू जैसे चारो ओर फैलाने लगी थी,लगभग सभी बच्चों तक ये बात पहुच गयी और सभी इससे बहुत खुस थे ,दोनो ही एक दुसरो को रह रह कर देखते और खुसबू इससे शर्मा जाती और सोनल उसे छेड़ने का कोई भी मौका नही छोड़ रही थी,सुमन की बिदाई का समय आ गया था ,रोने वाला कोई था ही नही ,क्योकि सभी इस रिश्ते से बेहद खुस थे ,लेकिन उसकी मां की आंखों में आंसू आ ही गया ,

ठाकुरो की हवेली में किशन का कमरा फूलो से सजाया गया था,ऐसे तो किशन ने अब तक ना जाने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया था लेकिन आज उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,ये बात भी स्वाभाविक थी क्योकि सुमन उसका प्यार था,और ये पहली बार था …..

तो धक धक करते जिया के साथ वो छत में टहल रहा था,उसकी इतनी हिम्मत नही हो रही ही की वो अपने कमरे में जाय

तभी उसे किसी के आने की आहट हुई अजय उसके पास आया था ,

उसे देखते ही वो उसके पास चला गया ,अजय ने अपने चहरे में एक मुस्कुराहट लाते हुए उससे आंखों से ही पूछ लिया की क्या हुआ ,

“पता नही भैया बहुत घबराहट हो रही है”

अजय की मुस्कान चौड़ी हो गई

“ये तेरे साथ पहली बार तो नही है “

“नही भइया वो बात नही है पर ना जाने क्यो बहुत ही घबराहट हो रही है,ऐसा लग रहा है जैसे की ये पहली बात हो ,पहले कभी ऐसे दिल नही धड़का था,सांसो ने तो जैसे आंदोलन कर रखा है,समझ नही आ रहा की ये क्या हो रहा है “

अजय उसके कंधे पर प्यार से अपना हाथ रखकर कहता है,

“अरे पगले तेरा ये हाल है ओ जरा सोच की उसका क्या हाल होगा,ये स्वाभाविक है होता है ,और अगर तू ऐसे डरेगा तो उसे कैसे समझयेगा ,अब तेरी शादी हो चुकी है मतलब की वो अब तेरी जिम्मेदारी है ,उसका सुख दुख अब सब तुझसे ही होगा ,अब चल गहरी सांसे ले और नीचे चल ,सब ठीक होगा “

अजय के पास होने के अहसास से ही किशन के दिल में हिम्मत आ गई वो 2-4 गहरी सांसे लेकर

“चलो भइया किला फतह करते है “

अजय की हँसी छूट गई

“किला मुझे नही तुझे फतह करनी है ,चल अब नीचे “

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