अध्याय 49
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सभी लोग घर पहच चुके थे,किशन को कलवा ने खुशखबरी दी जिसे सुनकर वो झूम गया…सभी एक दूजे से मिलने में व्यस्त थे,कल वो समय तय किया गया था जब तिवारियो का पूरा परिवार ठाकुरो के घर आने वाला था ,सभी बहुत ही जोश से भरे हुए थे ,यहां तक की वहां काम करने वाले भी जोश से भरे थे,डॉ को भी बुलाया गया था,वो अपनी सेकेट्री मेरी के साथ आने वाले थे,इंस्पेक्टर ठाकुर ,कुछ नेता गण,सभी पार्टी के मंत्री,यहां तक की मुख्यमंत्री जी भी, धनुष और निधि की पार्टी के लोग,जिनमे अभिषेक प्रमुख था,कॉलेज की प्रिंसिपल मेडम काव्या सेठ सभी को बुलाया गया था,कुल मिलाकर एक जश्न का आयोजन किया गया था,उस क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली दो परिवारों के मिलान का समारोह था,तैयारिया जोरो पर थी और सभी बहुत ही खुस थे,वहां के लोग भी सालो की दुश्मनी के समाप्त होने से खुश थे……..
किशन अब बस सुमन से मिलना चाहता था,वो उसके कमरे के पास ही फटक रहा था लेकिन सुमन की मा और उसका भाई अंदर थे,वो बाहर कभी आता एक नजर डालता और फिर चला जाता,वही उसकी इस हरकत को रानी ने पकड़ लिया…
“क्यो मेरे प्यारे भइया जी ,भाभी से बात किये बिना चैन नही मिल रहा है क्या “
किशन उसे देखकर चौक गया
“नही यार मैं तो बस यहां यू ही घूम रहा था,”
‘“अच्छा अब बनो मत सब जानती हु मैं,चलो मेरे साथ “
वो उसका हाथ पकड़ कर उसे सीधे सुमन के कमरे में ले जाती है वहां सुशीला ,वरुण (सुमन का छोटा भाई ),और निधि बैठे हुए थे,साथ ही सुमन भी थी सभी अपनी बातो में खोये थे वही वरुण कोई किताब निकाल कर पड़ रहा था…
“चाचीजी देखो आपका दमांद सुमन से मिलने के लिए कितना बेचैन हो रहा है,”
रानी के ऐसा बोलने से ही किशन की सांसे रुक गयी ,वही सभी हँसने लगे,घर में सभी को ये पता चल चुका था,और सभी इस रिस्ते से काफी खुश भी थे…सुशीला उठी और भरे हुए नयन से किशन को अपने गले से लगा लिया,
“भगवान इतनी खुसी एक साथ दे रहा है कही नजर ना लग जाय,”वो रोते ही अपने आंखों से काजल निकल कर किशन के माथे के पास लगाती है,किशन तो इस बात से फुला नही समा रहा था पर सुमन के चहरे पर वो खुसी नही दिख रही थी…
“चल अपनी जीजा जी को प्रणाम कर “सुशीला ने वरुण से कहा पर वो अभी भी अपनी पुस्तक में खोया था,
“ये तो ना पुस्तक मिल जाय तो इसे कुछ भी नही सूझता “
“लगता है किताबी कीड़ा है “निधि ने कहते हुए वरुण के सर पर एक हल्की सी चपत मार दी,वरुण उसे गुस्से से देखता है ,पर अगले ही पल वो फिर से किताब में घुस जाता है….
“बेटा अब बात तो तुम्हे जिंदगी भर करना है तो अब थोड़ा सबर रखो …”सुशीला ने हँसते हुए कहा जिससे किशन शर्मा गया,
“जी चाची “
“चाची नही बेटा अब मुझे मा कहकर पुकारा कर “
“जी माजी “किशन वहां से चला जाता है .
वही निधि और रानी सुमन को छेडने लगे पर वो बेचारी क्या करती चाह कर भी उसके चहरे पर वो ख़ुर्शी नही आ पा रही थी जो होनी चहिये थी….
रात हो चली सभी अपने कमरे में थे,सोनल विजय के पास चली गयी थी और रानी किशन के पास ….निधि तो अजय के साथ ही सोती थी..
आजय के कमरे में
“भइया कितना अच्छा है ना ,अब किशन भइया की शादी हो जाएगी …”निधि ने अजय के सीने में हाथ फेरते हुए कहा …
“हा बहन सचमे बहुत खुशी हुई ये जानकर “
“लेकिन भैया आप कब करोगे शादी ,नियम से तो आपकी पहले होनी चहिये ना आप तो सबसे बड़े हो “
अजय निधि को देखता है जो हल्के हल्के से मुस्कुरा रही थी,
“बहुत बड़ी हो गयी है तू बड़ी बड़ी बातें करने लगी है…”अजय उसे अपने ऊपर ले लेता है,हमेशा की ही तरह निधि ने बस एक स्कर्ट पहना था वही अजय पूरा नंगा ही था,उसके ऊपर आने से उसकी कमर अजय के लिंग को छू जाती है ,अपनी प्यारी बहन के नाज़ुकता का अहसास अजय को रोमांचित कर देता है,वो उसे अपने ऊपर भीच लेता है,कितनी प्यारी और नाजुक थी निधि जो इस तरह अजय के मर्दाने और मजबूत बांहो में सोई थी,अजय के सीने के घने बाल निधि के छातियों से रगड़ खाकर निधि और अजय दोनो को ही एक सुखद अहसास दे रहे थे…
निधि अपना सर ऊपर उठाती है और अजय की आंखों में देखती है,हमेशा की तरहः ही उसके आंखों में बस प्यार ही दिखता है ,वो चंचल की कोमल सी प्यारी सी गुड़िया अजय के होठो को अपने नरम गुलाबी पतले से होठो से मिलती है…
अजय अब उसके होठो का रस पी रहा था ,दोनो ही एक दूसरे के प्यार के अहसास में गम थे,निधि अपने स्कर्ट को निकलने के लिए अजय से अलग हुई पर अजय ने उसे फिर से अपने ऊपर खिंच लिया और उसके मजबूत लोहे जैसे शरीर में निधि के कोमल यौवन से भरे जिस्म को छुपा लिया,
अजय का लिंग अब अपने बहन की योनि की गर्मी में भीगना चाहता था,वो अपनी अकड़ दिखा रहा था,उसने अपने लिंग को निधि के कोमल योनि के पास लाया ,उसकी योनि के घने बालो से रगड़ खा कर वो और भी अकड़ गया वही निधि भी अपने भाई का प्यार पाकर गीली हो गयी थी ,वो जोरो से अपने होठो को उसके होठों के अंदर करती है और अजय नीचे से अपने लिंग को निधि की गहराइयों में उतार देता है,ये इतना सहज और प्यार भरा अहसास था जिसमे ना तो कोई छल था ना ही कोई वासना….बड़ी आसानी एक अजय का पूरा लिंग उसके अंदर समा गया ,इतने दिन में दोनो लगभग रोज ही एक दूसरे को प्यार देते थे ,और इसी प्यार के कारण निधि की अनछुई योनि आज इतनी जवान हो गयी थी की अजय जैसे मजबूत लिंग को भी आसानी से अपने अंदर ले ले ,,,,अब दर्द का नाम तक उसे नही आता था ,आता था तो बस उस गर्म अहसास का मजा जो वो जिंदगी भर लेना चाहती थी……
निधि ने हल्की मदहोश आंखों से अजय को देखा ,उस आंखों में अब ना तो कोई शर्म थी ना ही कोई भी ग्लानि ,ना कोई वासना था तो बस अपने भाई के लिए वो असीमित प्यार जिसका बयान शायद वो लफ्जो में नही कर सकती थी और ये ही एक माध्यम था जिसके द्वारा वो अपने भाई से उस प्यार का जिक्र कर पाती थी ,ये उनके एक दूजे से प्यार को बयान करने का एक साधन ही था,वो बस अपने भाई के मजबूत बदन से लिपटी हुई उसके शरीर के मजबूती से गदगद हो रही थी ,
“खुसबू दीदी आपसे बहुत प्यार करती है भइया ,मेरे खातिर आप उनसे बात कर लेना “
वो सोए हुए ही अजय से कहती है ,
“कौन “
“सोनल दीदी की सहेली ,सोनल आप उससे मिले भी हो वो पब वाली लड़की याद है,सोनल दीदी आप से ये बात कहने से डर रही थी इसलिए सबने मुझे ये बात करने को कहा …….”
अजय के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है,
“जिसे मेरी बहने पसन्द कर ले उसे मुझे पसंद करने में कोई भी दिक्कत नही है ,पर जान मेरे ऊपर सबकी जिम्मेदारियां है,पहले अपनी प्यारी बहनों के हाथ तो पीले कर लू फिर अपने बारे में सोचूंगा “
वो निधि के चहरे पर एक प्यार भरा चुम्मन देता है,उसका लिंग जरूर निधि की योनि में समाया था पर उन्हें वासना के हिलोरों में नही बहना था उन्हें तो बस अपना प्यार देना था वो बस ऐसे ही रहते थे ,कभी धक्के देने की कोई भी जल्दबाजी कोई नही करता ,वो बस उस अहसास के साथ रहना चाहते थे…..
“लेकिन आप मिलोगे उनसे जल्द ही ,प्रोमिश करो “
निधि ने अपना सर उठाया और अजय को देखते हुए प्यार से कहा
अजय को उसकी मासूमियत देखकर उसपर बड़ा प्यार आया और उसकी आंखों में देखने लगा
“प्रोमिश मेरी जान “
और अजय उसके होठो पर ऐसे खाने लगा जैसे वो कोई बर्फी हो ….
इधर विजय के कमरे में
विजय काम निपटाकर आता है वो आज बहुत ही थक गया था सुबह से वो काम ही कर रहा था ,लेकिन कमरे में दाखिल होते ही उसकी आंखों में चमक आ जाती है ,सोनल के जिस्म को वो ऐसे देख रहा था जैसे की कोई अजूबा देख लिया हो वो लग भी तो कमाल रही थी ….
उसकी नाइटी से उसके शरीर का हर हिस्सा बड़ा ही मादक लग रहा है वो भी उसे देखकर खड़ी हो गयी और उसे ऐसे देखता पाकर थोड़ी शर्मा गयी पर फिर उसने अपनी बांहे फैला कर उसे अपने पास बुलाया ,विजय दौड़ता हुआ जाकर उससे लिपट गया,दोनो जैसे सदियों के बिछड़े हो एक दूजे से चिपक गए ,
“आज तो मेरी रानी बहुत ही सेक्सी लग रही है,इतने पतले कपड़े पहन के रहेगी तो मेरी भी नियत डोल जाएगी “
विजय ने उसे शरारती निगाहों से देखा
“मैं तो अपने भाई की ही हु,नियत डोले या कुछ भी हो जाय “
इसबार सोनल इमोशनल हो गयी थी ,उसकी आंखों में आंसू थे और वो फिर से विजय से लिपट गयी,विजय ने उसे अपने बिस्तर में लिटाया,उसके नाजुक जिस्म से आती हुई वो महक विजय के होश उड़ाने को काफी थे वो उसके बालो को सहलाता हुआ उसके यौवन को निहारता है और उसे ऐसे देखता पाकर सोनल भी शर्मा जाती है,और उसके गाल पर एक प्यारी सी चपत मार देती है,
वो सोनल के नितंबो को अपने हाथ में भर कर उसे अपने ऊपर ला देता है और उसके नितंबो को सहलाने लगता है ,सोनल थोड़ी गदराई थी ,उसके गोल नाजुक और भारी नितम्भ विजय को एक अलग ही अहसास दे रहे थे पर वो अहसास दूसरी लड़कियों से मिलने वाले हर अहसास से बहुत ही जुदा था,ना जाने आजतक उसने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया था कितनो के जिस्मो से खेला था पर सोनल के साथ बात अलग थी उसके बदन को छूना उसके अंदर वासना को नही बल्कि एक अजीब से अहसास को जगती थी जिसे शायद लोग प्यार कहते थे,वो उसके लिए कुछ भी कर सकता था और सोनल भी उसके लिए कुछ भी कर सकती थी ,वो महज एक जिस्म नही थे वो भी बहन थे और उनका प्यार कोई वासना से भर हुआ खेल नही था बल्कि वो उस प्यार की अभिव्यक्ति थी जो वो एक दूसरे से करते थे,
सोनल की गोलियो को छुता हुआ विजय उसकी आंखों में खो गया,उसे अपनी बहन की आंखों में आया वो पानी पसंद नही आया वो उसे अपने होठो से पी गया ,
“हमे कितने दिनों तक अलग रहना पड़ता है भाई ,साले तेरे साथ सोने को तरस जाती हु “
“मैं भी जान “
“चल ना झूठे कही के ,तुझे दूसरी लड़कियों के साथ सोने में फुरसत मील तब ना तू मुझे याद करेगा “
“अरे इतनी सारी तो तेरी छमिया है यहां पर ,साले अय्याशी तू करता है और मुझे बोल रहा है की कोन सी लडकिया “
“नही जान अब कोई भी है,आख़िरीबार जो हुआ था वो रेणुका से हुआ था,शादी वाले दिन फिर तो कोई भी नही है,”
“अच्छा और सेठ मेडम ‘
“अरे उनके लिए तो समय ही नही मिल पा रहा है,अब सब ठीक हो गया तो अब शायद कुछ हो जाय “
“ओह तो मेरा शेर भाई कई दिनों का भूखा है “
:हा जान “
विजय ने मुह बनाते हुए कहा ,सोनल खिलखिलाकर हँस पड़ी ,और उसके गालो में एक प्यार भरी पप्पी दे दी ,
“ह्म्म्म तो मेरे भाई के भूख को मुझे ही मिटाना पड़ेगा,”उसने बड़ी ही शरारत भरे लहजे में कहा पर विजय उसे बड़े ही गंभीर भाव से देख रहा था ,
“क्या हुआ साले ऐसे क्यो देख रहा है,”
सोनल हल्के से फुसफुसाई ,और विजय उसे खीचकर अपने सीने से लगा लिया ,सोनल को भी उसके हालात का पता चल गया था वो भी बहुत ही सेंटी हो चुका था ,सोनल ने मजाक छोड़कर अपने भाई को प्यार देने की सोची और उसके होठो पर अपने होठो को सटा दिया,
विजय सोनल के होठो को भरपूर ताकत से खाने लगा जैसे की उसे और कभी ये नही मिलेगा,सोनल भी अपने प्यारे भाई पर अपना सबकुछ लुटाने को आमादा थी ,वो अपने शरीर को विजय से सटा ही दी और अपने जिस्म को उसके जिस्म में रगड़ने लगी,दोनो ही एक दूसरे में खो जाना चाहते थे और उन्हें भी वही एक तरीका पाता था…..
लेकिन एक रिस्तो की दीवार अब भी उनके बीच थी ,शायद मन के किसी कोने में….
विजय सोनल के नितंबो को सहलाने की बजाय अब उसे मसलने लगा था,वही सोनल के मुह से भी सिसकिया निकल रही थी ,उसे समझ भी नही आ रहा था की जो वो कर रही है ये सही है या गलत पर जो भी हो रहा है वो उसे सही गलत के दायरे से बाहर ही रखना चाहती थी ,इतने दिनों के बाद वो अपने भाई के साथ थी वो अपने को सही गलत के दायरे में बांधकर अपने भाई को प्यार से वंचित नही करना चाहती थी…
विजय के हाथ अब उसके नाइटी के अंदर थे ,सोनल की झीनी सी पेंटी से उसके कोमल शरीर का अहसास विजय को हो रहा था ,पहले की तरह आज वो वासना से भरा हुआ नही था ना ही उसमे कोई भी उत्तेजना आयी थी,वो तो बस सोनल को भरपूर प्यार देना चाहता था,जितना उसमे भरा है वो सब उसमे उढेल देना चाहता था…
उसका हाथ कब उसके पेंटी के अंदर चला गया उस पता भी नही चला,पुरानी आदते अपना असर जरूर दिखती है वही विजय के साथ भी हो रहा था,वो उसकी पेंटी को स्वाभाविक तौर पर ही उतारने लगा,वो तो बस सोनल के होठो के रस पीने में मगन था पर कब उसने उसके पेंटी की इलास्टिक को पकड़ कर सरकना शुरू किया उसे भी पता नही चला,हा ये सोनल को जरूर पता चला पर उसके होठो में और मन में बस एक मुस्कान आयी वो अपने भाई के आदत से वाकिफ थी,उसे पता था की उसे ये भी होश नही था की वो उसकी पेंटी उतार रहा है ,पर सोनल ने उसे नही रोका वो अब उसे रोकना ही नही चाहती थी ,ना जाने कब वो भी शादी के बंधन में बांधकर चले जाय और विजय से ऐसे मुलाकात कब हो ,वो अपना सब कुछ उसे देख देना चाहती थी पर उसे भी पता था की मर्यादाओ की दीवारे विजय को ही रोक देंगी उसे अपने भाई के प्यार पर पूरा विश्वास था,वो जानती थी की विजय का प्यार किसी वासना से प्रेरित नही है और वो अपनी सीमाओं को नही लांघेगा और अगर लांघेगा तो भी सोनल को वो सहर्ष स्वीकार था…
विजय उसे पागलो की तरह चुम रहा था,दोनो की ही आंखे बंद थी और कब विजय ने अपने नीचे के कपड़े निकल फेके उसे पता नही चला,अब दोनो जने नीचे से नंगे थे और उनके गुप्त कहे जाने वाले अंग अब गुप्त नही रह गए थे ,उनका मिलान हो रहा था वो एक दूजे में रगड़ खा रहे थे .पर इन बावरे प्यार के पंछियों को क्या फर्क पड़ने वाला था ,वो बस अपने प्यार की लहरों में सवार ना जाने कहा जाने को निकल पड़े थे ,ऐसे सफर पर जिसकी कोई मंजिल ही नही थी ,और जो उसकी मंजिल थी वो एक भाई-बहन के रिस्ते में जायज नही माना जाता था…….
सोनल की योनि और विजय के लिंग का टकराव जारी रहा पर प्यार का खुमार ऐसे छाया था की ना तो विजय के लिंग में कोई भी तनाव था ना ही सोनल के योनि में कोई गीलापन,दोनो बस एक दूजे को पकड़े हुए चुम रहे थे,लेकिन थे तो वो भी शरीर ही ना …कब तक वो शरीर के बंधनो से बच सकते थे लगातार हो ने वाले टकराव ने आखिर धीरे धीरे विजय के लिंग में तनाव भरना शुरू कर दिया,जब हल्का ताना हुआ लिंग सोनल के योनि से टकराया तो उसे जैसे होश आया की वो क्या कर रही थी और ये सोचकर ही उसके योनि में अचानक ही एक दरिया सी बहने लगी वो विजय को जोरो से चूमने लगी,और जैसे ही वो विजय के बालो को अपने उंगलियों में फसाकर उसके चहरे की तरफ ऊपर बढ़ी उसके कमर ने ऊपर की तरफ गति की और विजय का तन चुका लिंग जो की सोनल के योनि के द्वार पर ही खड़ा था वो हल्के से योनि के अंदर चला गया ,
“आह ,मेरी जान “
सोनल के मुह से अनायास ही निकल गया ,लिंग अभी थोड़ा ही अंदर गया था पर सोनल की योनि अभी बहुत ही टाइट थी ,उसे अभी भी खुलने का मौका ही नही मिला था ,अचानक हुए इस झटके से विजय ने अपनी पुरानी आदत के अनुसार ही एक जोर का झटका दिए और इसबार उसका हाथ भी सोनल के नितंबो को थामे था,और ये झटका विजय के पूरे मूसल से लिंग को सोनल के अंदर पहुचा दिया ,वो लिंग जिसने खेली खाई भरीपूरी औरतों की सांसे रोक दी थी ,और चीख निकल दी थी आज उसकी सबसे प्यारी बहन की लगभग अनछुई योनि की दीवारों को चीरता हुआ अंदर चला गया,सोनल के मुह से चीख निकलना तो स्वाभाविक था,
“आह भाई “वो जोर से चीखी ,भला हो उस हवेली का जो इतनी बड़ी थी,और विजय के होठो का जो सोनल के होठो को भरे हुए थे, वरना सारा घर ही उठ जाता ,
विजय को भी अब अहसास होने लगा था की वो क्या कर रहा है,सालो से उसने इतनी टाइट चुद में अपना लिंग नही घुसाया था,उसे अचानक ही याद आया की मैं किसके अंदर चला गया ,भाई ….है भगवान फिर से ,उसने ऊपर देखा सोनल ही थी …
जो उसके चहरे पर आये एक्सप्रेशन को देखकर समझ गयी की विजय को अभी अपनी गलती का अहसास हो रहा है ,उसे हँसी आ गई ,उसे हँसता देखकर विजय के होठो पर भी एक मुस्कान आ गयी,
“कामिनी रोक नही सकती थी “
सोनल ने शरारती मुस्कान से उसे देखा
“मैं क्यो रोकू तुझे इतनी समझ नही है क्या की किसके अंदर डालना है किसके अंदर नही,कोई अपनी बहन के अंदर डालता है क्या भला,और वो भी इतने जोर से हाय ,”
विजय सोनल को झूठे गुस्से से देखा पर अपनी बहन की इन्ही बातो पर तो मरता था,सोनल के एक मुस्कान की खातिर तो वो जान भी दे सकता था,आज उसे कोई भी ग्लानि के भाव नही आये क्योकि वो जानता था की उनका प्यार समाज के हर बंधनो से बढ़कर है ,वो सोनल को और कस लेता है,अब उसे अपने लिंग में सोनल के प्यार की गर्मी का अहसास हो रहा था ,सोनल को भी अपने भी के लिंग का अहसास अपने अंदर हो रहा था ,वो अपने को भरा हुआ महसूस कर रही थी ,उसे ऐसा लगा जैसे बस ऐसे ही जिंदगी गुजर जाय और उसे कुछ नही चाहिये…….

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