अध्याय 46
इधर डॉ बाली से बात करके तिवारियो की सच्चाई से परिचित करता है,पर बाली वो बात मानने को तैयार ही नही था,
“मैं ये मान ही नही सकता की मेरे भैया भाभी को तिवारियो ने नही मारा है मैं जानता हु की तुम बस मुझे बहलाने को ये सब कह रहे हो ,तिवारियो से मैं बदला ना लू ये तो हो ही नही सकता……..”
“तुम्हे क्यो लगता है की तिवारियो ने वीर को मारा था,”
“मुझे लगता नही मुझे ये यकीन है….”
“क्यो ऐसे क्यो तुम्हे यकीन है”
“मैं उनकी फितरत हमेशा से जानता हु…..”
डॉ कुछ देर तक शांत ही रहा….दोनो ओर से एक सन्नाटा था…
“चलो छोड़ो वो सब और बताओ की क्या चल रहा है …”
बाली थोड़ा गुस्से में था..
“क्या चलेगा,बस साले सभी पागल हो गए है इन्हें लगता है की मुझे कुछ भी पता नही है ,पर मैं सब कुछ जानता हु की यहां क्या हो रहा है……उस महेन्द के बेटे के साथ मिलकर सुमन और निधि घूम रही है और अजय को कोई भी परवाह ही नही है…….पता नही इस बात पर अजय को कैसे यकीन हो गया की उसके पिता को तिवारियो ने नही मारा है,,,मैं बता देता हूं की मैं कुछ कर जाऊंगा,भूल जाऊंगा की वो मेरे ही भाई का खून है……..”
डॉ को कुछ भी समझ नही आ रहा था की बाली को कैसे समझाए और वो भी इतने गुस्से में है,सब सोच रहे थे की बाली को कुछ भी पता नही है पर उसे सब कुछ पता था…पर वो अजय की इज्जत के कारण कुछ कह नही रहा था उसे लग रहा था की वो इस घर में बिल्कुल ही अकेला हो गया है,अजय विजय ,कलवा सुमन निधि सभी अपने ही धुन में रहते थे किसी को भी इस बात की फिकर नही थी की उसे कैसे लग रहा है….
इधर तिवारियो के बड़े भाई गजेंद्र भी कुछ दिनों के लिए गाँव आ चुका था ,महेंद्र ने उसे बहुत समझने की कोशिस की पर वो भी बेकार ही रहा,उसे अब भी यही लगता था की ठाकुरो के कारण ही उनके बहन की जान गयी है….
गजेंद्र ने महेंद्र और धनुष को भी ये धमकी दे दी की अगर ठाकुरो के परिवार से किसी से भी कोई दोस्ती रखी तो वो उन्हें ही जान से मार देगा…
कुछ दिन और ही ऐसे ही बीत गए,दोनो परिवारों के बुजुर्गों के कारण पूरे ही माहौल में एक तनाव सा पैदा हो गया था,…
एक दिन डॉ गांव आये हुए थे और बाली के साथ बैठे चाय पी रहे थे,साथ ही अजय , विजय और किशन भी बैठे थे ,की एक लड़का जो की निधि के खुफिया बॉडीगार्ड के तौर रखा गया था दौड़ते हुए वहां आया सर से खून की धार निकल रही थी,गाड़ी को पटक कर वो इतने तेजी से घर के अंदर घुसा की उसकी सांसे फूल गयी थी वो हफ़ता हुआ जाकर सबके सामने खड़ा हो गया…
“ठाकुर साहब “उसने जोर जोर से कहा
“क्या हुआ ,ये क्या हाल बना रखा है क्या हुआ तुझे तपन “अजय और विजय उसे देखकर खड़े हो गए थे,दोनो के चहरे पर चिंता और अनहोनी के डर के भाव साफ दिख रहे थे,
“ठाकुर साहब वो निधि ….निधि …”
“क्या हुआ निधि को “इसबार बाली और डॉ भी खड़े हो चुके थे बाली के इस सवाल से पूरा घर गूंज गया …
“निधि को वो धनुष उठाकर ले गया “वो टूटती हुई सांसो से कह पाया ,
“उठाकर ले गया “अजय ने धीरे से कहा ..
“वो दोनो आज सुबह कॉलेज के लिए निकले पर वो और सुमन कॉलेज ना जाकर सीधे मंदिर गये ,मैं उनके साथ ही था ,वहां धनुष और निधि ने शादी कर ली और उनके गुंडों ने हमारे आदमीयो को बहुत मारा ,सबको बंदी बना लिया है मैं जैसे तैसे वहां से भाग पाया हु,वो निधि और सुमन को लेकर तिवारियो के बंगले से गए है…”उसने सभी कुछ एक ही सांस में कह दिया ………
बाली जैसे जमीन पर गिरने वाला था ,उसे डॉ ने सम्हाला लेकिन अजय का चहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था,विजय और किशन को समझते देर नही लगी की अब आगे क्या करना है,तुरंत ही वहां गाड़ियों का काफिला सा लग गया ,सभी हथियार जो भी घर में कही भी छुपे थे वो निकल के लाए गए,बाली अब थोड़ा सम्हाल चुका था…
“देखा देखलिया ना ,क्यो बे चूतिए क्या कहा था तूने मुझसे की वो सुधार गए है ,सब कुछ भूल जाऊ देख लिया ना कमीनगी तो उनके खून में है …मेरी भोली भाली दी बेटी को गुमराह करके ले गए साले ….”
“ले तो गए चाचा पर अब खून की नदिया बहेंगी ,उसके परिवार में मैं किसी को भी नही छोडूंगा”
एक गरजती आवज ने सबके दिलो को चिर कर रख दिया ये आवाज अजय की थी ,
“लेकिन हो सकता की वो एक दूसरे को प्यार करते हो ,और निधि अपने मर्जी से उनके साथ गयी हो “
डॉ ने थोड़ा डरते हुए कहा …
“मैंने अपनी बहन से बहुत प्यार किया है डॉ और उसने मुझे इतना बड़ा धोखा दिया….अब वो क्या उसकी लाश भी इस घर में नही आएगी ,जिसे वो अपना ससुराल समझ कर निकली है उसे उसी जगह पर दफना कर आऊंगा….”
इतना कह कर ही अजय एक गाड़ी में बैठता है और वहां से निकल जाता है,लेकिन उसके बात से बाली के प्राण तक कांप जाते है,बूढा सा हो चला बाली अपने को ऐसा असहाय कभी भी महसूस नही किया था,आज उसका ही बेटे के समान भतीजा अपनी सबसे प्यारी बहन को मारने की कसम खाकर निकला था वो भी अपने दुश्मनों के कारण ,वो उठ खड़ा हुआ ,…
“नही नही डॉ उसे रोको उसे रोको ,वो उन कमीनो की गलती की सजा मेरी फूल सी बेटी को नही दे सकता “बाली के इतने कहने तक सभी गाड़िया वहां से जा चुकी थी ,बाली और डॉ दौड़ाते हुए बाहर जाते है और डॉ की गाड़ी से उनके गाड़ी के पीछे चलने लगते है ….
तिवारियो का बंगाल किसी किले से कम ना था ,इस एक कदम से खून की नदिया बहना तो तय था ,,……….

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