जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) – Incest Story | Update 35

जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) – Incest Story Written by ‘Chutiyadr’
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अध्याय 35

घर मे ख़ुशियाँ छाई थी,लेकिन सबसे खुश थे किशन और सुमन,वो प्रेम के पंछी अपनी ही दुनिया मे खोये थे,जहा एक ओर सुमन को उसका पूरा परिवार मिल गया था वही किशन अपने पहले प्यार के खुमार में डूबा हुआ था,मगर चम्पा की खुशियो को मानो ग्रहण लग गया हो ,उसे क्या हुआ था ये तो कोई भी नही जानता था पर उसके चहरे की उदासी बाली की भी समझ आ गयी……

बाली अपने कमरे में जाता है ,चम्पा किसी बहुत गहरे खयालो में डूबी थी ,बाली आज सालो के बाद चम्पा और अपने पुराने कमरे में गया जहा कभी उसने ऐयासिया की थी वही कमरा जो कभी उसका हुआ करता था ,पर वीर की मौत के बाद से वो कमरा बस चम्पा का रह गया था,बाली के मन में चम्पा को लेकर फिर से एक सम्मान का भाव जागने लगा था,कलवा की कोशिशो से बाली फिर से एक नई शुरुवात करना चाहता था,वो अब चम्पा से प्यार करना चाहता था जो उसने कभी भी उससे नही किया था,चम्पा तो बस इस घर में समान की तरह बन कर रह गयी थी,उसे बाली वो स्थान देना चाहता था जो चम्पा का ही था पर उसकी गलतियों की वजह से उसे नही मिल पाया था,

बाली अपने कमरे में अपना समान पहले से रखवा लिया था ,जिससे चम्पा को ये आभास हो चुका था की बाली अब इसी कमरे में रहने वाला है ,उससे उसका सामना कैसे होगा ये तो उसे भी नही पता था,पर वो खुस थी शायद बहुत ही खुस क्योकि यही तो उसके जिंदगी की एक मात्र इच्छा रह गयी थी………..

बाली की आहट से चम्पा थोड़ी हड़बड़ा कर खड़ी हो जाती है ,
“आप ……”

“हा मैं ,”बाली उसके पास जाकर बैठ जाता है और उसका हाथ पकड़ कर उसे भी अपने पास बिठा लेता है ,इतने सालो बाद दोनो साथ थे ,पूरी जवानी उन्होंने अलग होके बिता दी…

बाली को भी ये समझ नही आ रहा था की आखिर वो कहे तो क्या कहे ……शब्द तो कुछ थे नही ,दीवार जो उनके बीच थी वो इतनी बड़ी हो चुकी थी की कोई शब्द शायद अब उसे नही तोड़ पाती…फिर भी बाली ने कुछ कहना चाहा पर उससे पहले ही चम्पा बोल पड़ी

“मुझे माफ कर दीजिये,मैं जानती हु की मेरी गलती माफ् करने के लायक नही है पर फिर भी………..मैं आपकी बहुत इज्जत करती हु.मुझे माफ् कर दीजिये …..”

चम्पा की आंखों से पानी की एक धार बह निकली शायद सालो से वो ये बाली से कहना चाहती थी पर बाली कभी उसे ये सुनने को तैयार ही नही था….

बाली भी उसके इस जस्बात को समझता था ,उसने उसके हाथो को अपने हाथो में ले लिया,

“तुमने जो भी किया उसकी सजा तो तुम्हे मिल ही गयी ,अब उन सबको छोड़कर हमे अपनी आगे की जिंदगी जीनी है ,चम्पा के आंखों में खुसी के आंसू छलक उठे बाली ने आगे बढ़कर उसे अपने गले से लगा लिया ,चम्पा के शरीर में एक झुनझुनाहट दौड़ पड़ी जो उसके इतने दिनों से दबाये गए अरमानो की वजह से आ रहा था ,बाली उससे थोड़ा अलग हुआ ,वह भी इतने सालो की दूरी से संकोच में था पर शरीर की छुवन तो अपना काम कर गई थी ,उसने चम्पा को ध्यान से देखा ,आज भी वो उतनी ही सुंदर लग रही थी ,असल में चम्पा को सूंदर कहना थोड़ा गलत होगा उसे कामुक कहना ज्यादा सही होगा,उसने अपनी जवानी में अपनी मादकता से ना जाने कितने मर्दो को अपना दीवाना बना दिया था ,उसके विशाल स्तनों की शोभा उसके कसे हुए ब्लाउज़ में चमकीले से लगते और उसके चमड़ी की लालिमा से दमकते थे ,आज वो सौंदर्य कई सालो से अनछुई थी ,इसलिए थोड़ी सी ढीली पड़ गयी थी ,पर वो मादकता का झरना अभी भी उतना ही ताजा और मिठास से भरा हुआ था ,…….
बाली की नजर जैसे ही उस पर्वत शिखर पर गयी उसकी सांसे तेज होने लगी ,जिसका आभास चम्पा को भी हो चला था,उसे इस बात से एक झुनझुनाहट सी महसूस हुई की शायद फिर से बाली उसके यौवन का रस वैसे ही पियेगा जैसा की वो पहले पिया करता था,उसके यौवन को वो निचोड़ कर रख देगा,बाली की ताकत का अंदाज उसे था वो जब भी वासना के आग में जलता था तो सामने वाली चाहे कितनी भी मजबूत हो उसे निचोड़ कर ही दम लेता ,पुरानी यादो और नई आशंकाओ से चम्पा के बदन में एक करेंट सी दौड़ गयी उसे अपनी सालो सी सूखी पड़ी हुई योनि में एक हलचल सी महसूस हुई ,मानो आज उसने अपने प्रियतम के लिए अपना द्वार खोलने की ठान ली हो…दोनो की कुलबुलाहट साफ थी और दोनो ही एक अजीब सी मर्यादा के बंधन में बंधे थे ,मर्यादा थी उम्र की और बंधन था उस संकोच का जिसे वो सालो से जीते आ रहे थे…..
दोनो ही आगे बढ़ाना चाहते थे पर क्या करे दीवार कैसे गिरे ,बाली ने कोशिस करने की सोची पर दीवार इतना बड़ा था की एक ही झटके में गिरना उसने भी ठीक नही समझ ,आज उस उमंग की शुरुवात तो हो चुकी थी ,अब वो आग उन्हें आज नही तो कल मिला ही देगा………………..

कई आग इस घर के लोगो में एक साथ लगी थी ,अजय और निधि के बीच ,किशन और सुमन के बीच ,विजय और सोनल के बीच ,,,सोनल और नितिन के बीच ,अजय और खुसबू के बीच ,,बाली और चम्पा के बीच ,,,और एक आग और थी जिसका जिक्र अभी तक नही हुआ है ,वो आग थी रेणुका और बनवारी (रेणुका का पति ) के बीच ………

पता नही कौन सी आग किसे कब जलाने वाली थी पर जो भी होना था वो तो बस होना था ………..

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