जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) – Incest Story | Update 3

जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) – Incest Story Written by ‘Chutiyadr’
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अध्याय 3

विजय जब घर पहुचता है तो वह रेणुका की माँ और लड़के वाले बैठे होते है ,बड़े से कमरे में,बीचो बीच एक बड़े से सोफे पर अजय बैठा होता है,बाकि सब हाथ मोडे छोटी छोटी खुर्सियो में बैठे होते है ,तभी विजय वह पहुचता है,..

विजय लड़के को देखता है ,’साला चुतिया,ये मेरी रेणुका को क्या संतुस्ट करेगा,’विजय मन ही मन उस पतले दुबले से लड़के को देख कर बोलता है,

‘तो आप बताइए लड़की आपको पसंद है ना,’अजय लड़के के पिता को देखते हुए कहते है,

‘ठाकुर साहब ये आप क्या कह रहे है,आप तो हमारे लिए भगवान है,आपका हाथ जिस लड़की पर है उसे हम कैसे मना कर सकते है,’लड़के के पिता ने थोडा डरते हुए कहा ,

‘हम्म्म ठीक है ,तो शादी की तारीख तय कर लो क्यों मौसी क्या कहती हो ,’अजय ने सीता मौसी की तरफ मुह कर पुचा जो उस समय पास के सोफे में बैठी सुपारी काट रही थी ,

‘हा कर दो लेकिन एक शर्त है,रेणुका कही नहीं जाएगी ,इस लड़के को यही नौकरी पर रख लो ,अगर ये भी चली गयी तो इसकी माँ का क्या होगा ,बेचारी का पति भी नहीं है,अकेले हो जाएगी क्यों रे,और तेरे तो 3 बेटे है ,ये निकम्मा यहाँ काम भी कर लेगा ,’मौसी ने लड़के के बाप को देखते हुए कहा,

‘और ऐसे भी (विजय को देखते हुए ) रेणुका जो काम करती ही वो कोई नहीं कर सकती ना ..’ विजय के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी जिसे अजय ने भी देख लिया उसे और मौसी को उसके सभी करतूतों का पता होता था ,पर इसे वो जाहिर नहीं होने देते थे,

‘जैसा आप कहे मौसी जी ,ये बनवारी आज से आपका हुआ ,आप जब कहे शादी कर देंगे ,’अजय ने पंडित से तारीख निकलने को कहा और वह से उठ कर चल दिया ,सभी हाथ जोड़े खड़े हो गए ,मौसी को छोड़ …

‘मौसी बहुत बहुत धन्यवाद आपका आपने मेरी बेटी का जीवन सवार दिया,’रेणुका के माँ के आँखों में पानी आ गए थे ,

‘अरे तू भी ना रे विमला ,रेणुका मेरी भी तो बेटी है ना,और विजय सारी जिम्मेदारी तुझे ही उठानी है शादी की ,पूरी तयारी अच्छे से होनी चाहिए ‘सभी चले जाते है बस विजय और मौसी वह रह जाते है,

विजय मौसी के गोद में जा कर लेट जाता है ,

‘मौसी जी थैंक् आपने तो रेणुका को यही रख लिया ,’

‘अरे मेरे छोटे ठाकुर ,क्या मुझे पता नहीं की वो तुम्हारी जरुरत है ,और मेरा तो काम ही है तुम्हारी जरूरतों को पूरा करना ,बस अपने भाई के इज्जत में कालिक मत पोतना,नहीं तो अजय सब सहन करेगा पर इज्जत से खिलवाड़ नहीं,जो करना देख के ही करना ,”

विजय उठकर मौसी के गालो को चूम लेता है ,और वहा से भागता हुआ चला जाता है ,मौसी हस्ती हुई सुपारी कटते रहती है ,

“पागल लड़का “मौसी के मुह से अनायास ही निकल पड़ता है,

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