जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) – Incest Story | Update 2

जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) – Incest Story Written by ‘Chutiyadr’
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अध्याय 2

वक़्त को गुजरते देर नहीं लगी अजय अब *** का हो चला था ,उनका पालन पोषण उनकी माँ समान सीता मौसी ने किया बच्चो और पति से चंपा की दूरी बरकरार थी पर वो किसी से कुछ नही कहा करती ,उसने अजय से माफ़ी मांगने की कोसिस की पर हिम्मत ही नही जुटा पाई,बाली और अजय ने पूरा काम मिला लिया था ,पर अजय बाली को कुछ करने नहीं देता बस सलाह लेता था ,घर का कोई लड़का पढ़ नहीं पाया इसलिए अजय अपनी बहनों को ही पढ़ना चाहता था ,सोनल और रानी को उसने कॉलेज की पढाई के लिए बड़े शहर भेज दिया था ,वहा एक घर भी खरीद दिया था ताकि उन्हें कोई भी तकलीफे ना हो ,और एक काम करने वाली भी साथ में भेजी गयी थी ,वही निधि अभी स्कूल में थी ,निधि अजय के सबसे करीब थी ,अजय के साथ ही सोना ,खाना यहाँ तक की नहाना तक अजय के साथ ही करने की जिद करती थी,अजय की वो जान थी इसलिए सबसे जिद्दी और नकचड़ी भी थी ,शरीर तो जवान हो चूका था पर उसका बचपना अभी भी बाकि था ,और वही अजय को भी पसंद था ,सभी भाई बहन उसे बहुत जादा चाहते थे और पूरे घर की लाडली निधि ने अजय से शहर जाने से साफ इंकार कर दिया ,वो अजय को किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहती थी ,इसलिये अजय ने रूलिंग पार्टी को फंड देकर अपने गाव में ही कॉलेज खुलवाने का फैसला किया ,पर सरकार तिवारियो के भी दबाव में थी इसलिए फैसला हुआ की कॉलेज दोनों गांवो में ना खोलकर पास के कस्बे में खोला जाय….विजय और किशन दोनों बिलकुल देहाती और एयियाश हो चले थे पुरे के पुरे बाली पर गए थे ,पर किशन बाकि दोनों भाइयो की अपेक्षा थोडा कमजोर था,और अपने माँ के थोडा करीब भी था ,पर दोनों अजय के भक्त थे जो अजय कहे बिना सोचे करना ही उनका काम था ,चाहे किसी को मारना हो या मार ही देना हो ,

इधर तिवारियो का मुखिया रामचन्द्र अभी भी जिन्दा था पर कभी अपने नाती नातिन की सकल भी देखने नहीं गया ,गजेन्द्र उसका बड़ा बेटा था जिसने उसके पुरे कारोबार को सम्हाल लिया था ,गजेन्द्र के दो बच्चे थे और और उसके छोटे भाई महेंद्र के तीन इंट्रो बाद में होगा सबका ,गजेन्द्र अपने भाई अविनाश की मौत का बदला लेबा चाहता था और ठाकुरों को पुर्री तरह तबाह कर देना चाहता था ,जिसने उनकी छोटी बहन और भाई को छीन लिया ,पर रामचंद की सोच ऐसी नहीं थी इसलिए दोनों में जादा बनती नहीं थी ,

कहानी शुरू करते है आम के बगीचे से ,ये आम का बगीचा ठाकुरों का था और एक बड़े इलाके में फैला हुआ था ,और उनके खेतो से लगा हुआ था ,सुखी पत्तियों पर किसी के दौड़ाने की आवाजे और साथ में घुंघरू की आवाजे उस शांत माहोल में दूर तक फ़ैल रही थी ,वही किसी लड़की के जोर से हसने की आवाजे आई और ,

‘हाय से दयिया ,ठाकुर जी आज इतने बेताब काहे है ,’रेणुका ने एक पेड़ पर खुदको छुपाते हुए कहा ,

‘आजा मेरी रानी कल रात को भी तेरी माँ उठ गयी थी साला अब सबर नहीं होता ,’विजय ने दौड़ के उसे पकड़ने की कोसिस की पर ना कामियाब रहा ,

‘अब कोई दूसरी ढून्ढ लो ,आज मुझे देखने लड़के वाले आ रहे है ,मेरी शादी हो गयी फिर क्या करोगे ,और इतना खोल दिया है आपने अपने पति को क्या दूंगी ,’विजय ने उसे पीछे से दबोच ही लिया ,और उसके चोली को फेक कर उसके उजोरो को मसालने लगा ,रेणुका भी मतवाली हो गयी वो विजय के ही हम उम्र थी और उस सांड को अपने चौदहवे सावन से झेल रही थी,विजय के सम्बन्ध ऐसे तो कई लडकियों से थे पर रेणुका उसकी खास थी ,और घर में काम करने वाले नौकर की बेटी थी ,

‘अरे मेरी जान तू चली जाएगी तो मेरा क्या होगा ,तू ही तो है जो मुझे सही तरीके से झेल लेती है,’विजय अब अपने हाथ से घाघरे का नाडा खोल रहा था ,गाव की लडकिया कोई अन्तःवस्त्र नहीं पहनती थी,तो घाघरा खुलना यानि काम हो जाना ,

‘अरे छोडो छोटे ठाकुर मेरी शादी तो अजय भईया करा के रहेंगे ,ये मछली तो आप के हाथ से गयी ,आह कितना बड़ा है ,पता नहीं शादी के बाद मैं क्या करुँगी ,आःह आअह्ह्ह्ह ठाकुर ,विजय अपना लिंग उसकी बालो से भरी योनी में रगड़ रहा था पर अन्दर नहीं डाल रहा था,वो लडकियों को गरम करने के बाद ही अपना काम करता था,उसने अपने हाथो से उसके ऊपर का कपडा भी खोल दिया ,और उसके शारीर को पीछे से चुमते हुए निचे उस करधन तक आया जो उसने ही रेणुका हो दिया था ,

‘आआअह्ह्ह मार डाआआअ लोगे क्या ‘विजय अपनी जिब से उसके भारी निताम्भो को चाटने लगा,और मुह आगे बड़ा कर उसके योनी में जीभ घुसा दि ,

‘आआह्ह्ह आअह्ह्ह्ह अआह्ह्ह हूमम्म विजय ,’योनी को भरपूर गिला करने के बाद रेणुका को उठा के एक पेड़ के निचे बिछे चादर में ले जा लिटा दिया ,और उसके पैरो को अपने कंधे में रखता हुआ अपना पूरा लिंग एक बार में ही उसके अंदर कर दिया ,

‘ईईईईई माँआआअ ‘एक चीख पुरे वातावरण में फ़ैल गयी और धक्को की आवाजे सिस्कारियो और चपचप की आवाजे एक लयबद्ध रूप से आने लगी ,ये तूफान तब तक चला जब तक की रेणुका कई बार अपने चरम को पा चुकी थी और विजय अपनी सांड सी ताकत से उस मांसल और बलशाली लड़की के आँखों से आंसू नहीं निकल दिया ,विजय अपने चरम पर उसके उजोरो को अपने दांतों से काट लिया और उसके अन्दर एक लम्बी और गाढ़ी धार छोड़कर उसके ऊपर ही सो गया ,रेणुका के आँखों में आंसू तो थे पर चहरे पर अपरिमित सुख झलक रहा था ,उसने अपने बांहों में विजय को ऐसे पकड़ा था जैसे वो उसे कभी नहीं छोड़ेगी,

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