अध्याय 17
विजय जब निचे आया तो उसे मेरी और डॉ दिखाई दिए ,मेरी को देखकर उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी,मेरी से उसकी नजरे मिली तो दोनों के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,
“आज तो ये माल ही लग रही है इसे तो मैं घोड़ी बनाकर चोदुंगा,”विजय ने मन में कहा ,वही किशन भी मेरी को देखता ही रहा ,और विजय से उसके बारे में पूछा ,विजय ने उसे सिर्फ फॉर्मल इनफार्मेशन दे डी ,दोनों जाकर डॉ और मेरी से मिले ,और फिर अपने कामो में बिजी हो गए ,
बारात आ चुकी थी ,कार्यक्रम अपने सबाब पर था,दुल्हे की तरफ से भी जादा लोग नहीं थे ,अजय को शादी जल्द से जल्द निपटाने की जल्दी थी इस शादी के कारन वो कई दिनों से अपने काम में धयान नहीं दे पा रहा था,उसे शहर के माल की डील भी पूरी करनी थी ,वो डॉ और बाली के साथ बैठा हुआ था वही मेरी निधि और सुमन के साथ बाते कर रही थी ,सोनल और रानी दुल्हन को तैयार करने में बिजी थे और विजय और किशन बरातियो को खिलाने पिलाने में ,डॉ और बाली बात कर रहे होते है ,
“अरे बाली इस लड़के के घर में कौन कौन है ,”
“बस डॉ साहब बाप, सौतेली माँ और 3 भाई और है इसके वो दूसरी माँ से ही है ,”
“और इसकी माँ ”
“उसका देहांत हो गया है ,काफी पहले इसकी माँ के देहांत के बाद इसके बाप ने दूसरी शादी की और फिर पास के ही गाव में आकर रहने लगे ,पहले इसका बाप शहर में रहता था,वही काम करता था ,वो रहा उसका बाप किशोरीलाल “डॉ उसे ध्यान से देखता है ,एक दुबला पतला सा आदमी लेकिन चहरे पर एक तेज झलक रहा था,और व्यक्तित्व में एक तेज दिखाई पड़ रहा था,
“दिखने में तो ये अच्छे घर का लगता है ,और इसका बेटा तो इसके जैसे बिलकुल नहीं दिखता देखो ना ,”डॉ की बात सुनकर बाली हसने लगा ,डॉ भी हसने लगा ,
“अरे डॉ साहब आप भी ना ,हमेशा चीजो को शक की निगाह से देखते है ,मैं इसके बाप को कई सालो से जानता हु ,जब से वो शहर छोड़ कर इधर बसा ,अच्चा आदमी है सीधा साधा सा मेहनती है ,बेचारा ”
“सीधा साधा ,ह्म्म्म चहरे से तो लगता नहीं “डॉ ने हलके से कहा ,
“मिलवाओगे नहीं “डॉ ने बाली से कहा ,
“हा हा क्यों नहीं ,अरे अजय जरा किशोरीलाल को बुला तो .”अजय जाकर उसे बुलाता है वो आकर हाथ जोड़े खड़ा हो जाता है ,
“ये डॉ साहब है ,हमारे खास दोस्त है शहर से आये है ,”किशोरीलाल हाथ जोड़कर नमस्कार करता है,
डॉ पास पड़े एक कुर्सी को दिखाते हुए कहते है “अरे बैठो बैठो ”
किशोरीलाल हाथ जोड़ता हुआ “अरे साहब आप लोगो के साथ बैठे ये हमारी औकात कहा ,”डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ,
“अरे आज तो तुम दुल्हे के बाप हो बैठो ना यार “डॉ जिद करके कहता है ,वो बाली की ओर देखता है ,बाली भी उसे बैठने का इशारा करता है,वो डरते हुए वहा बैठ जाता है,
“तो तुम शहर में काम करते थे ,”डॉ ने सवाल किया ,
“जी साहब ”
“कहा ”
“जी वो …..वो शारदा काटन मिल में ,मिल बंद हुआ तो काम की तलाश में इधर आ गया ,”
“ह्म्म्म कहा के रहने वाले हो ,”
“जी बिहार का ”
“लहजे से तो बिहारी नहीं लगते ,”
“वो ……वो बचपन से ही मिल में काम कर रहा हु ना ,बचपन में घर से भाग गया था और यहाँ आकर काम करने लगा फिर कभी वापस ही नहीं गया ,”
“हम्मम्मम्म पहली पत्नी कहा की थी तुम्हारी “थोड़ी देर एक सन्नाटा सा हो जाता है,किशोरीलाल के आँखों में आंसू आ जाता है ,बाली को लगता है की डॉ कुछ जादा ही सवाल जवाब कर रहे है ,वो इशारे में डॉ को रुकने को कहते है वही डॉ बाली को बस चुप रहने को कहता है ,
“पता नहीं कहा की थी मिल में मजदूरी करती थी ,उसका भी कोई नहीं था और मेरा भी कोई नहीं था तो मैंने उससे शादी कर ली ,पर मिल में लगी आग से वो ,”वो फफक कर रो पड़ा ,डॉ को याद आया सालो पहले मिल में आग लगी थी ,आग छोटी थी और एक औरत के जलने की खबर आई थी जिससे बहुत बवाल भी मचा था ,
“लगता है बहुत ही जादा प्यार करते थे अपनी बीवी से ,”
“जी हा ,मुझे माफ़ कर दीजिये की मैं इस तरह ,”
“नहीं नहीं मुझे माफ़ करो की मैंने तुम्हारे जख्मो को कुरेद दिया ,”डॉ उसके कंधे पर अपना हाथ रखते है और उसे शांत करने लगते है ,

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