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अध्याय 8

प्रेक्टिस के बाद मैं स्टेडियम से बाहर मैदान में एक कोने पर बैठा था…निशा ने जो कहा था उसने मेरे दिमाग में एक हलचल सा मचा कर रख दिया था ,कुछ समझ नही आ रहा था की आखिर मैं उसे क्या समझू,

मुझे सबसे बड़ा डर था की कही वो मेरे प्रति शाररिक रूप से आकर्षित तो नही हो गई थी,मुझे इन सबका कोई भी एक्सपेरिएंस नही था,और उससे भी ज्यादा डर ये था की कहि मैं उसके प्रति जिस्मानी आकर्षण से ना भर जाऊ,मेरी बहनो से जीवन में पहली बार अच्छे रिश्ते बने थे जिस्म की वासना उन्हें पूरी तरह से खराब कर सकती थी,

मुझे इस चीज की कोई समझ नही थी की आखिर ये आकर्षण जिस्मानी ,रूहानी है की बस रिश्तो के बीच रहने वाला एक सहज प्रेम …

निशा ने कुछ भी हिंट नही दिया था ,लेकिन वो स्वाभाविक जरूर थी ..

सबसे ज्यादा डर मुझे खुद से लग रहा था क्योकि बाबा जी ने कहा था की मैं किसी को भी आकर्षित कर सकता हु,लेकिन मैंने उन्हें ये नही पूछा था की ये आकर्षण असल में होता क्या है,उसके मायने क्या है,क्या ये केवल जिस्मानी आकर्षण होगा,या फिर किसी अन्य तरह का आकर्षण …

तो क्या निशा मेरे ताबीज के कारण मुझसे आकर्षित हो रही थी ,अगर ऐसा था तो वो आकर्षण आखिर किस तरह का था…..

“क्या हुआ राज आज मुड़ ऑफ दिख रहा है तुम्हारा .”

काजल मेडम मेरे बाजू में बैठते हुए बोली

“कुछ नही मेम..”

“तुम चाहो तो मुझे बता सकते हो .”एक बार उन्हें देखा उनके होठो में मुस्कान साफ साफ झलक रही थी

“मेडम ये आकर्षण क्या होता है क्यों होता है .”

इस बार मेडम मुझे भेद देने वाली निगाहों से घूरने लगी .

“रश्मि से झगड़ा हुआ क्या ??”

“नही तो क्यो..”

“क्योकि ऐसे प्रश्न इंसान के दिमाग में तभी आते है जब वो कोई दुख में होता है या फिर इतना सुख पा चुका होता है की उससे ऊबने लगता है ..”

“मेरे साथ दोनो ही नही है “

“तो फिर ये व्यर्थ के सवाल क्यो??”

“क्योकि मेरे लिये ये सवाल जीवन से जुड़े हुए है ..”

“हम्म्म्म आज पहली बार तुम्हे इतना सीरियस देख रही हु ,जरूर ये बेहद ही इम्पोर्टेन्ट सवाल होंगे तुम्हारे लिए ….”

वो कुछ देर तक चुप रही ..

“जीवन की महिमा और गरिमा दोनो ही अजीब है राज,जो चीजे आपको आगे बढ़ाती है वही आपको पीछे भी धकेल देती है,और वो है इंसान की चाहते,इच्छाए हसरते…..यही हमे आगे बढ़ाती है जीवन में एक मकसद देती है ,लेकिन जब ये अपने काबू से बाहर होने लगे तो ये ही हमारे पैरो की सबसे बड़ी जंजीर बन जाती है…….

तुम जानना चाहते हो की आकर्षण क्या है ,मेरे खयाल से ये बस एक अहसासो की अभिव्यक्ति है जो हसरतो से पैदा होती है,किसी चीज को पाने की हसरते हमे उनकी ओर आकर्षित करती है ..”

काजल मेडम की बातो को मैं ध्यान से सुन रहा था लेकिन मुझे समझ नही आया की निशा की बातो से मैं इसे कैसे लिंक करू..

“क्या जिस्म की हसरते और प्यार की हसरतो में कोई समानता हो सकती है “

मैंने फिर से प्रश्न किया ,इस बार काजल मेडम ने फिर से भेद देने वाली निगाहों से मुझे देखा लेकिन मेरे चहरे पर सब कुछ शून्य ही था……

“प्रेम और शरीर का संबंध बेहद ही गहरा है,जब इंसान प्रेम को अभिव्यक्त करता है तो जिस्म का सहारा लेता है,लेकिन लोग जिस्म की वासना को पूरा करने के लिए प्रेम शब्द का सहारा भी लेते है,तो जब ऐसा सिचुएशन आ जाए की तुम्हे समझ ना आये की ये प्रेम है या महज वासना के आंधी से उठा हुआ जलजला तो खुद की सुनना ,क्या पता तुम्हे क्या चाहिए,प्रेम और वासना कभी कभी एक दूसरे के अंदर इस हद तक छिपे होते है की उन्हें अलग कर पाना बेहद ही मुश्किल हो जाता है,तो तुम्हे फैसला करना है की तुम्हे प्रेम चाहिए की अपने जिस्म की वासना शांत करनी है .”

“लेकिन ये तो गलत होगा ना ,जिस्म की वासना ..”

मेडम ने मुझे मुस्कुराते हुए देखा

“गलत चीजे नही इंसान होते है राज,वासना का उदभव शरीर में हमारे विकास के लिए होता है लेकिन लोग इसे अपने मजे के लिए इस्तमाल करते है,जिस्म की वासना ही तो है जो संसार को आगे बढाती है,और प्रेम के हिलोरों में प्रेमी जवा दिलो को भटकाती है .प्रेम तो पूज्यनीय है लेकिन वासना के बिना प्रेम भी नही हो सकता,कभी सुना है की किसी नपुंसक को प्रेम हो गया,नही, नही होता…

प्रेम होता ही उन्हें है जो जिसके अंदर ताकत हो, जिस्म की ताकत ,वासना की ताकत……”

मैं काजल मेडम के चहरे को देख रहा था वो दीप्त था प्रकाशमय बिल्कुल शांत और निडर ,मुस्कुराता हुआ उनका चहरा मेरे दिल को सुकून देने के लिए काफी था….

“मेडम मुझे डर लग रहा है ….”

आखिर मैंने वो कह दिया जो मैं कहना चाहता था ,वो भी चौकी ..

“किससे ……किसी ने धमकी दी है “

उनकी बात से मैं मुस्कुरा उठा..

“इंसानो और परिस्थितियों से डरना तो मैंने कब का छोड़ दिया है मेडम ….लेकिन मुझे डर अपने आप से लग रहा है ,अपनी वासना से लग रहा है,शायद मैं उसका सामना नही कर पाऊंगा,शायद मैं उसके बहकावे में आ जाऊंगा,शायद वो मुझसे गलत काम करवा देगा…”

मेरे चहरे में सच में चिंता के भाव आ गए थे,मेडम ने मेरे सर पर अपना हाथ फेरा …

“मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ पता लगा की कैसे तुम पहले हुआ करते थे फिर जंगल में भटकने के बाद जब तुम वापस आये तो तुमने अपने डर को भी छोड़ दिया,जरूर वंहा तुमने उन डर का सामना किया था जिससे तुम जीवन भर भागते आ रहे थे,ये डर भी वैसा है राज ,तुम्हारी उम्र ही ऐसी है जब शाररिक वासना बेहद ही ताकतवर होती है,अगर तुम इसका सामना नही करोगे डर जाओगे तो वो तुम्हारे ऊपर हावी हो जाएगी,इसे दबाने की कोशिस करोगे तो ये और भी बढ़ने लगेगी,जिस्म की आग जिस्म को जालाये तब तक ठीक है लेकिन ये अगर मन की गहराइयों में पहुच जाए तो ये मन को भी जलाने लगती है,तुम्हारे विचारो को अश्लील कर देती है ,ये समय है राज जब तुम्हे सबसे ज्यादा हिम्मत दिखानी होगी,इनसे लड़ कर तुम इसे नही जीत सकते तुम इसे समझ कर ही इसे जीत सकते हो,तो डरना बंद करो और सामना करो ….”

मैं चुप था वो भी चुप थी ,थोड़ी देर हम यू ही चुप ही बैठे रहे ..

“एक पर्सनल सवाल है ,जवाब देना चाहो तो देना वरना किसी तरह की जबरदस्ती नही है,क्या तुमने कभी मास्टरबेशन (हस्तमैथून) किया है ..?”

मैं उनकी तरफ देख कर मुस्कुराया ,और ना में सर हिलाया

“झूठ मत बोलो सभी करते है “

मेडम भी मुस्कुरा रही थी

“पता नही क्यो करते है ,मुझे तो आज तक समझ नही आया ,जो चीज कही और जाने के लिए बनी है उसे खुद ही..”

मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ी ..

“अच्छा तो तुम ये सोचते हो …तो कभी सेक्स किया है,ऐसे तुम्हारे पास एक हॉट गर्लफ्रैंड भी है..”

मैंने फिर ना में सर हिलाया

“क्यो..??”

“कभी माहौल ही नही बना ,और आप करती है मास्टरबेशन “

उन्होंने मुझे झूठे गुस्से से देखा

“नही जरूरत नही पड़ती “

“ओह तो आपका बॉयफ्रेंड है…मुझे लगा ही था आप इतनी हॉट जो हो “

वो फिर से हँसी

“नही मेरा कोई बॉयफ्रेंड नही है “

मैंने उन्हें आश्चर्य से देखा

“यानी आप शादीशुदा हो ??”

“नही वो भी नही “वो अब भी मुस्कुरा रही थी

“तो आपको क्यो जरूरत नही पड़ती,आप एलियन हो ..”

वो हँस पड़ी थी ..

“मेरे लिए मेरा आर्ट ही सब कुछ है ,ये कला और मेरा काम मैं इसमे ही इतनी व्यस्त रहती हु की मेरा ध्यान उधर जाता ही नही ..”

उन्होंने स्वाभाविक सा उत्तर दिया

“लेकिन अपने ही तो कहा की जिस्म की जरूरते और वासना की शक्ति के बारे में फिर आपको भी तो ये सताती होंगी ..”

“हा लेकिन जिस्म से ज्यादा ताकतवर तो मन है ना,अगर तुम्हे ख्याल ही ना आये तो क्या होगा ,तो जिस्म भी चुप हो जाता है ,मेरा मन अपने काम में समर्पित है तो मेरे मन में वासना का ख्याल भी नही आता “

“ओह…यानी मुझे देखकर भी नही “

वो थोड़ी देर तक मुझे आश्चर्य से देखने लगी फिर मुस्कराते हुए मेरे गालो में एक हल्की सी चपत लगा दी

“बदमाश कही के ,खुद को देखो और मुझे देखो मैं तुम्हे देखकर एक्साइट होऊँगी ..”

“क्यो क्या कमी है मुझमे जवान हु ,हेंडसम हु “

“हा तुम हो लेकिन अभी मेरे सामने बच्चे हो “

वो खिलखिलाने लगी ,क्या मुस्कान थी उनकी मेरा सारा भय ,तकलीफ ,चिंता सब जाती रही ,मन में चल रहा कौतूहल मानो शांत हो गया था ……

“अगर कभी आपके मन में जिस्म की भूख जागे और किसी की मदद की जरूरत पड़े तो मुझे याद कर लीजियेगा,मुझे खुशी होगी आपकी मदद करने में “

वो इस बार सीरियस तरीके से मुझे देखने लगी

“ये तुम्हारा मजाक है ??”

“नही प्रपोजल है “मैंने मुस्कुराते हुए कहा

वो भी मस्कुराते हुए उठी और वंहा से जाने लगी ,मैं उनके जिस्म को गौर से देख रहा था ,पूरा जिस्म गठीला था,हर हिस्सा कसा हुआ,और हॉट पेंट में वो और भी कयामत लग रही थी ,एक्सरसाइज करने के कारण वो पूरी तरह से शेप में थी …

और साथ ही उनकी अदाएं और सुंदर चहेरा …वाह भगवान की इस कलाकारी पर मेरा दिल आ गया था …

“मेडम सुनिए बस एक सवाल “

मैंने थोड़े जोर से कहा वो रुकी और पीछे मुड़कर मुझे देखने लगी ..और मेरी ओर बढ़ी

“अगर मैं ऐसी सिचुएशन में फंस जाऊ की मुझे कुछ समझ ना आये,दिल और दिमाग अलग अलग बाते करने लगे तो मैं क्या करू…”

वो थोड़ी देर सोचती रही ..

“अपने दिल की सुनना ..”

“लेकिन विचार करना तो दिमाग का काम है ना ,सही गलत की समझ दिमाग को ही होती है ,कही दिल कुछ गलत ना करवा दे “

वो फिर से मुस्कराते हुए मुझे देखने लगी ..

“दिल की सुनो और दिल की करो …लेकिन दिल की सच्ची आवाज को सुनना जरूरी है जो शांति में ही आती है विचारो की भीड़ में नही …अब मिल गया तुम्हे जवाब “

मैंने हा में सर हिलाया ,वो फिर मुस्कराते हुए जाने लगी

“मेडम सुनिए ना “मैं फिर से चिल्लाया,वो पलटी तो मैं भी खड़ा हो कर उनके पास जाने लगा..

“मेरा दिल मुझसे कुछ बोल रहा है ..”

मैं उनके पास पहुच गया था ,उन्होंने आंखों से ही पूछा क्या

“की आप बहुत अच्छी है ,और शायद मैं आपके मोहोब्बत में गिरिफ्तार हो गया हु “

वो खिलखिला कर हंस पड़ी

“ओह ये बात है तुम नही सुधरोगे ..”

वो हसंते हुए जाने लगी

“आप सच में मुझे बच्चा समझती है कभी सीरियस ही नही लेती “

उन्होंने मेरे गालो को पकड़कर उसे खींच दिया “

“तुम तो हो ही बच्चे ..”

मैंने बुरा सा मुह बनाया तो उन्होंने मेरे गालो में एक किस ले दिया ,

“अब खुश “

सच कहु तो मैं खुशी से झूम गया था,ये कोई वासना नही थी ना ही किसी प्रकार का जमाने की नजर में होने वाला प्रेम नही ये बस एक अपनत्व था जो उन्होंने मुझपर दिखाया था ,,मैं नाच रहा था वही वो मेरी हरकतों को देखकर खिलखिलाने लगी थी …और उनकी ये खिलखिलाहट ही मेरे लिए मेरा असली इनाम था ……

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