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अध्याय 54

नेहा दीदी से मिलने पर उन्होंने साफ साफ शब्दो में कहा था की जो बीत गया उन चीजो पर अपना दिमाग मत लगाओ ,बल्कि आने वाले वक्त की सोचो …

मैं भी फिर भी थोड़ा कंफ्यूशन में था ,

“दीदी लेकिन क्या ये सही होगा की मैं उनसे ये सब छिपाऊँ ..”

मेरी बात सुनकर दीदी हँस पड़ी लेकिन जल्द ही संजीदा हो गई ..

“भाई झूल बोलकर रिश्ते की शुरुवात करना गलत है लेकिन तुमने झूठ नही बोला है बस सच को छुपाया है और जिस सच को तुमने छुपाया है वो अभी तुम्हारा सच है ,वो सच बदल सकता है ,तुम चीजो को और कॉम्प्लिकेटेड मत करो ,सच को ही बदल दो ,तुम रश्मि से प्यार करते हो या नही “

“जी दीदी करता हु “

“तो उसे बताओ की तुम उसे कितना प्यार करते हो ,पॉजिटिव तरीके से आगे बढ़ो ,उससे प्यार करो उसे अपने अहसासों का बयान करो ,और हा इन हवस के चक्रव्यूव से निकलो ये तुम्हे बर्बाद कर देगा ..”

उनकी बात सुनकर मैं थोड़ी देर के लिए चुप रहा ..

“दीदी लेकिन निशा और निकिता दीदी को माना करे करू ?“

“आज नही तो कल करना ही होगा भाई ,उन्हें भी अपने लाइफ में एक नई दिशा ढूंढनी होगी ,अभी तो ये सब चल जाएगा लेकिन जब रश्मि घर आएगी तब कैसे करोगे …”

“तो क्या करना चाहिए.??”

“मुझे पता है की निशा और निकिता दीदी दोनो ही तुझसे सच में प्यार करते है और वो बातो को समझेंगे ,तेरे और रश्मि के बीच कभी भी कोई भी दीवार नही बनेंगे ..इसलिए तुम उनकी तरफ से बेफिक्र रहो लेकिन भाई बाहर किसी से ही कोई भी संबंध मत बनाना,ऐसे किसी के भी साथ जो तुम्हे बाद में फंसा दे या फिर जिसका पता रश्मि को किसी भी तरीके से चल जाए ,खैर मैं आशा करती हु की तुम्हे इतनी तो समझ होगी ही “

मेरे मन में सामीरा का नाम कौंधा लेकिन फिर भी मैं चुप ही रहा

“जी दीदी “

“ओके भाई अब अपने काम पर ध्यान दे आखिर तू इतने बड़े साम्राज्य का मालिक बन गया है और अब तेरी शादी भी हो रही है तो तुझपर जिम्मेदारी भी बढ़ाने वाली है …”

उन्होंने मेरे गालो को खींचा ,

**************

घर में फिर से खुसिया जन्म लेने लगी थी ,मेरी और निकिता दीदी की शादी की खबरों से कोई भी अछूता नही रह गया था ,सब कुछ ठीक चल रहा था,मैं अपने नियमित दिनचर्या को अपना रहा था ताकि मैं ज्यादा शांत रह सकू और वासना की लहरे मुझे ना छुए ,तब भी मेरा जिस्मानी संबंध निशा और निकिता दीदी के साथ बना ही हुआ था ,मैं निकिता दीदी से उनकी शादी के बाद ये संबंध खत्म कर देना चाहता था ,लेकिन अभी भी रोहित पूरी तरह से तैयार नही था,उसे मैं पूरी ट्रेनिंग दे रहा था ,कोशिस यही थी की वो दीदी के साथ आगे की जिंदगी अच्छे से बसर कर सके ..

सामीरा मेरी भावनाओ को समझती थी फिर भी कभी कभी हमारे बीच संबंध बन जाया करते थे,मैं इतना सक्षम तो था की एक साथ कई लड़कियों के साथ संभोग कर सकू लेकिन मैं चाहता था की ये जितना कम हो सके उतना ही मेरे और रश्मि के रिश्ते के लिए अच्छा है,मैं ये सच छिपा कर ही रखना चाहता था ..

सामीरा वाली बात ऐसे भी किसी को नही पता था ,वही निशा और निकिता दीदी वाली बात सिर्फ 3नो बहनो को बस पता थी,इन तीनो के अलावा किसी से भी संबंध बनाने से मैंने परहेज कर लिया था ,क्योकि मैं अपने पिता की गलती नही दोहराना चाहता था ..

अब मेरी शादी होने वाली थी और मुझे मेरी जिम्मेदारी का भी अहसास होने लगा था ,तो मैं बीजनेस में ही ज्यादा समय देने लगा था ,मैं सामीरा के साथ बैठे हुए अपने अकाउंट्स देख रहा था तभी एक नाम में आकर मैं अचानक से रुक गया …

“डागा इंटरप्राइजेज..?”

मेरे मुह से निकला

“हा राज ये डागा साहब की कंपनी थी …”

“डागा साहब ???”

“हा डेनिस चरण डागा उर्फ DCD उर्फ डागा साहब ,अलग अलग कामो के लिए अलग अलग नाम “

“मतलब ..” सामीरा की बात सुनकर मेरे कान खड़े हो गए थे

“डेनिस चरण डागा ये नाम था उनके ड्राइविंग लाइसेंस और मतदाता पत्र का नाम ,अंडरवर्ड में वो DCD के नाम से जाने जाते थे और बिजनेस की दुनिया उन्हें डागा साहब बुलाती थी ..”

“ओह…मगर इनका हमारी कंपनी से क्या कनेक्शन था “

“कभी तुम्हारे पिता और भैरव सिंह दोस्त हुआ करते थे,भैरव सिंह को ऊपर उठाना था तो उसने कुछ गलत धंधे भी शुरू कर दिए तब तुम्हारे पिता जी ने भी उनका साथ दिया था,उस समय ऐसे किसी भी काम को करना डागा साहब की परमिशन के बिना अधूरा होता था ,वो उस समय अंडरवर्ड के किंग हुआ करते थे ,अभी से उनका संबंध तुम्हारे पिता से हुआ था ,लेकिन बात में उन्होंने अपने बुरे कामो को बंद करना शुरू किया और सिंपल बिजनेस करने लगे,सुना है वो दिल के बहुत ही बड़े इंसान थे जितना कमाते थे उतना ही गरीबो और जरूरतमंदो में बांट देते थे,पुराने क्रिमनल होने के बावजूद उनका लोगो में बहुत सम्मान था ,तुम्हारे पिता जी की उन्होंने बिजनेस को बढ़ाने में बहुत मदद की थी दोनो में एक खास कनेक्शन भी था ..”

“कैसा कनेक्शन “ मैं हर एक शब्द को ध्यान से सुन रहा था

“कुछ अजीब सा कनेक्शन था ,बाद में मुझे पता चला था की वो दोनो किसी बाबा के सानिध्य में है और वंहा को साधना कर रहे है ,तुम्हारे पिता ने तो ये सब जल्दी ही छोड़ दिया लेकिन डागा साहब ने साधना जारी रखी और इससे उनके बिजनेस में बहुत ही नुकसान भी होने लगा,लेकिन फिर भी जैसे वो इस चीज को ही अपना जीवन बना लिए थे ,सारी संपत्ति बेच कर दान दे दिया और कही गायब हो गए …तब तक तुम्हारे पिता से उनका और उनकी कंपनी का कनेक्शन खत्म हो चुका था ,सालो पहले की बात है ..फिर भी जिन लोगो को उन्होंने कंपनी बेची थी उनके साथ हमारे व्यपारिक संबंध थे ,ये उन्ही के अकाउंट्स है बाद में उन्हें जब लगा की डागा नाम का असर जब मार्किट में नही रहा तो उन्होंने कंपनी का नाम बदल लिया ..”

“ओह …”

मैं कुछ सोच में पड़ा था ,मुझे जो समझ आया वो ये ही की पिता जी और बाबा दोनो एक साथ साधना करना शुरू किये थे ,लेकिन बाबा जी ने कभी भी मुझे इस बारे में नही बताया …अजीब बात थी ,शायद वो अपनी पुरानी जिंदगी से बहुत ही आगे निकल चुके थे …

“क्या हुआ राज किस सोच में पड़ गए “

“नही नही कुछ नही बस ..”

“तुम बिजनेस की ज्यादा टेंशन मत लो ,अभी तुम अपनी शादी पर फोकस करो ,तैयारिया भी तो करनी होगी ..”

“हा वो भी है लेकिन अब शादी हो रही है तो जिम्मेदारियां भी तो बढ़ जाएगी “

मेरी बात सुनकर सामीरा हँस पड़ी

“तुम भैरव सिंह के दामाद बन रहे हो ,तुम्हे किस बात की फिक्र है ..”

उसने मुझे ये चिढ़ाते हुए कहा था

“हमारा बिजनेस उनसे ज्यादा है “

“हा तो क्या हुआ,पावरफुल तो वो ज्यादा है ना ..”

मैंने मुस्कुराते हुए सामीरा को देखा ,इसी पावर,पैसे और सेक्स के चक्कर ने मेरे पिता को डुबो दिया था ..मैंने मन ही मन कसम ली की मैं कभी इस गेम में नही फसुंग बल्कि अपनी जिंदगी में सादगी लेकर आऊंगा ,लोगो की मदद करूँगा जैसे बाबा जी किया करते थे,शक्तियां पाकर मेरे पिता ने जन्हा लोगो की जिंदगी बिगड़ दी और अपने परिवार से भी दूर हो गए वही बाबा जी ने उन्ही शक्तियों से बस दुसरो का भला ही किया,मेरे जैसे इंसान को इतना मजबूत और काबिल बना दिया …

और ये सब सोचते हुए मेरे चहरे में एक मुस्कान आ गई थी क्योकि आज मुझे जैसे अपने जीवन का असली मकसद मिल गया था ..

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