जादुई लकड़ी – Update 21 | Incest Story

जादुई लकड़ी Writer Chutiyadr
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अध्याय 21

डॉ की बात सुनकर मेरा दिमाग घूम गया था …

“लेकिन डॉ वो ऐसा क्यो करेंगे ??”

डॉ मुस्कुराये ..

“पावर दोस्त पावर ,तुमने ही तो कहा था की उनके पिता और ससुर ने उनके जगह तुम्हारे और तुम्हारी बहनो के नाम सारी प्रॉपर्टी कर दी है ,और अगर ऐसा हो जाए तो उनकी कौन सुनेगा,तुम ही सोचो की जो आदमी जिंदगी भर दुसरो को आपने नीचे दबाने का आदि हो वो ये सब कैसे बर्दास्त कर सकता है की जिंदगी भर वो पैसे पैसे के लिये किसी दूसरे का मोहताज रहे ,भले ही वो उसका बेटा ही क्यो ना हो …और ये भी सोचो की एक बाप भले ही कितना भी कमीना हो उसके लिए अपने बेटे को ,और इस केस में बेटो को मरना कितना मुश्किल है ,तो वो तुम्हे मारने की बजाय तुम्हे बहकाने की कोशिस कर रहा है,ऐसे काजल ने तुम्हारे साथ और क्या किया …”

मैं डॉ को उन ड्रग्स और उससे उत्पपन होने वाले इफ़ेक्ट्स के बारे में बताने की सोची लेकिन मैं रश्मि की मौजूदगी में ये कैसे बोल सकता था …

शायद मेरी चुप्पी को डॉ समझ गए ……

“रश्मि ,मैरी प्लीज तुम दोनो थोड़े देर के लिए बाहर जाओगी ,मुझे राज से अकेले में कुछ बात करनी है ..”

दोनो बाहर चले गए और मैंने उन ड्रग्स और फिर मेरी सेक्स की उत्तेजना के बारे में बता दिया साथ ही साथ ये भी जो मैंने कान्ता ,शबीना और निशा के साथ किया ……..

“ओह तो वो तुम्हे अपनी ही नजर में गिरना चाहता है,ताकि उसे लगे की तुम भी उसी की तरह हो ….लेकिन फिर भी इससे उसे कुछ खास हो हासिल नही हो सकता और अभी तो चन्दू भी गायब ही है …कुछ तो गड़बड़ है मेरे दोस्त ..अगर इसकी तह तक पहुचाना है तो चन्दू और काजल को ढूंढना होगा,तुम इसी काम में लग जाओ और मैं काजल के पति और बच्चे को ढूंढता हु ,और हा जो तुम कर रहे हो वो करते रहो…”

“मतलब ??”

“मतलब की जो तुम कान्ता और शबीना के साथ कर रहे हो वो करते रहो,अगर वो तुमसे यही करवाना चाहते थे तो फिर जरूर उन्हें इन बातो की खबर पता चल रही होगी ,उन्हें भी लगने दो की तुम उनके ही जाल में फंस रहे हो ,और इतनी पावर को करोगे भी क्या इसे सम्हालना तुम्हारे लिए मुश्किल ही होगा,इससे तुम हल्के भी बने रहोगे “

डॉ के चहरे में एक मुस्कान थी वही मेरा चहरा शर्म से झुक गया ..कुछ देर चूप रह कर मैं बोल पड़ा ..

“लेकिन डॉ मैं चन्दू और काजल को कैसे ढूंढूंगा,और मुझे तो लगता है की वो मेरे ऊपर भी नजर रखे हुए होंगे…”

“बिल्कुल वो तुम्हारे ऊपर नजर जरूर रखे होंगे,और इसी का तुम्हे फायदा उठाना है ,आखरी बाबा जी का आशीर्वाद तुम्हारे पास है,वो ताबीज जिससे तुम अपने दिमाग ताकत को कई गुना बड़ा सकते हो तो तुम्हे डर किस बात का है ,तुम पूरे आत्मविस्वास से मैदान में उतर जाओ ,अपना दिमाग चलाओ फिर चाहे कितना बड़ा जाल क्यो ना हो एक बार अगर वो थोड़ा सा भी टूटा तो समझो पूरा जाल बेकार हो जाता है …तो उनके जाल में ऐसा गेप कर दो की तुम तो वंहा से निकल जाओ और वो लोग ही फंस जाए तो तुम्हे फसाना चाहते थे..अब से समझ लो की गेम शुरू होई चुका है ,और तुम्हे उसे जितना ही है ,भले ही सामने कितना भी शातिर खिलाड़ी क्यो ना हो उसे हराया जा सकता है,ये शतरंज का खेल है यंहा प्यादा भी खतरनाक होता है …समझ गए ..”

मैने हा में सर हिलाया

“तो अब तुम अपने सभी मोहरों का इस्तमाल करो ,और यकीन रखो की तुम उनसे ज्यादा शातिर खिलाड़ी हो ,कभी कभी उनके मोहरों की गलती भी तुम्हे गेम जीता सकती है ,तो खेल शुरू होता है दोस्त,बेस्ट ऑफ लक ..”

मैं डॉ की बात सुनकर जोश से भर गया था ,मैं उठा और फिर गर्मजोशी से उनसे हाथ मिलाया ……

सच में ये एक खेल था लेकिन मेरे पास सबसे बड़ी ताकत मौजूद थी जिसका मैंने अभी तक सही उपयोग नही किया था ,वो थी मेरी जादुई लकड़ी …….

***********

मैं अपने कमरे में ध्यान में बैठा हुआ सभी संभावनाओं के बारे में विचार कर रहा था ,सभी मोहरे मेरे सामने थे ,लेकिन इस खेल को आखिर खेल कौन रहा है ……?????

मैं उठा और सीधे छत की ओर चला गया ,मैंरे पास एक दूरबीन थी मैं उसे भी अपने साथ ले गया,और ध्यान से छिपकर आसपास को देखने लगा,घर के बाहर खड़ी गाड़ियों को और दूसरे घरों को आते जाते लोगो को ,अभी रात का समय था लेकिन स्ट्रीट लाइट की वजह से माहौल समझ में आ रहा था ……

घर से दूर मोड़ पर एक गाड़ी खड़ी देखी,उसके बाहर दो लोग बैठे हुए थे ,मैंने जूम किया तो समझ आया की उनके पास गन भी थी ,दोनो का चहरा मेरे दिमाग में बस गया ,मैं वही आंखे बंदकर अपने ताबीज को हल्का सा चाट कर उन चहरो के ऊपर फोकस किया ,यस वो लोग हमारा पीछा कर रहे थे ,मैंने इसी गाड़ी को आज हमारी गाड़ी के पीछे देखा था,मैंने इन लोग को सुबह मैदान में देखा था कभी कभी स्टेडियम के बाहर ..यानी ये मेरा पीछा बहुत दिनों से कर रहे है…

उन्हें देखकर मेरे चहरे में एक स्माइल सी आ गई ,

मैं नीचे उतारा तो मेरे कमरे में निशा भी मौजूद थी …

“कहा थे आप “

“कही नही बस छत में हवा खाने गया था …”

निशा मुझसे लिपट गई ..

“जब से रश्मि को प्रपोज कीया है आप तो मुझे देखते ही नही “

“तुझे क्या देखु,तू तो वैसी है जैसे पहले थी “

वो मेरी बात से गुस्सा होकर सीधे मेरे बिस्तर में जाकर लेट गई

“जाओ मैं आपसे बात नही करती “

मुझे भी उसे मनाने का कोई मूड नही था…

मैं भी उसके बाजू में जाकर सो गया

“आप ऐसे विहेब क्यो कर रहे हो ..”

“निशा यार प्लीज …मुड़ थोड़ा ठीक नही है ,एग्जाम आने वाले है तू पढ़ाई चालू की या नही ..”

मेरी बात से निशा का मुह फूल गया

“जाओ सो जाओ मैं तो पढ़ ही रही हु ,तुम ही नही दिखते आजकल ..”

निशा सच में गुस्से में थी वो आप से तुम में उतर आई थी …

मैं भी चुप चाप सो गया ,पता नही कितने देर हो चुके थे मुझे नींद की आगोश में गए हुए …

अचानक सी मेरी आंखे खुली …….

मैं एक कमरे में एक कुर्सी में बंधा हुआ था ..मैंने कुछ बोलना चाहा लेकिन ……लेकिन मेरे मुह में पट्टी बंधी थी ,मैं छटपटाया ..

तभी मेरे कानो में एक आवाज गूंजी ..

“लूजर ..तुम पहले भी लूजर थे और आज भी लूजर ही हो ..हा हा हा ..”

ये निशा की आवाज थी ,मैं बुरी तरह से खुद को छुड़ाने की कोशिस कर रहा था ,निशा मेरे सामने खड़ी थी …

“तुमने क्या सोचा था की तुम बहुत ही बड़े तुर्रम खा बन गए हो,मेरे पापा को जलील करोगे,उन्हें अपनी प्रोपर्टी का रौब दिखाओगे …”

निशा की आंखों में गुस्सा था …

“रहने दो बेटी इस साले को तो यही बंधे रहने दो,तुम्हारी माँ कहा है “

उसने सामने कुर्सी पर बंधे एक औरत के चहरे पर से पर्दा उठाया ..

वो मेरी माँ थी ,मेरे पापा ने अपने हाथो में रखा चाकू माँ के गले में टिका दिया ..

निशा ने मेरे सामने प्रोपर्टी का एक पेपर्स रख दिया ..

“साइन करो इसे ताकि सारी प्रोपर्टी हमारी हो जाए ..”

मैं कुछ बोलना चाहता था लेकिन मेरे मुझे में पट्टी बंधी थी ..

निशा ने पट्टी खोल दी ..

“निशा ये तुम क्या कर रही हो ,तुम तो मुझसे प्यार करती थी “

निशा जोरो से हंसी

“मैं अपने पिता की लाडली हु,तुमने कैसे सोच लिया की मैं उनको छोड़कर तुम्हारा साथ दूंगी ..साइन करो वरना “

मैंने जोर दिया और मेरे हाथो में बंधी हुई रस्सी को तोड़ दिया ,मेरा हाथ सीधे निशा के गले में था ..

“मैं तुम्हे मार डालूंगा तुमने मुझे धोखा दिया है …”

“क्या बोल रहे हो किसने धोखा दिया “

“तुमने मुझे धोखा दिया है निशा तुमने “

मैं उसके गले को और भी जोरो से दबाया ..

“भाई ये क्या कर रहे हो भाई “

एक जोरदार थप्पड़ मेरे गालो में लगा जैसे मुझे होश आया हो ..

मैं निशा के गले को दबाए हुए था,उसका चहरा पूरा लाल हो हुक था ,वही मैं अभी आपने बिस्तर में ही था ..मैंने तुरत ही उसे छोड़ दिया …

“पागल हो गए हो क्या ???क्या हो गया है आपको …आज तो मुझे मार ही दिया था ,और ये क्या कह रहे थे की मैंने आपको धोखा दिया है ??”

मुझे होश आया की मैं एक सपना देख रहा था शायद दिन भर की मानसिक उथलपुथल का ही नतीजा था ……

“ओह सॉरी मैं ..मैं एक बुरा सपना देख रहा था ..”

“अरे सपना ही देखना है तो रोमांटिक वाला देखो ,ये क्या मारा मारी के सपने देखते हो,और मैं आपको कैसे धोखा दे रही थी ,कही किसी दूसरे लड़के के साथ तो नही देख लिया मुझे…”

उसके होठो में वही चिरपरिचित सी मुस्कान थी ..

“कुछ भी बोलती है कुछ नही सपना था ,चल सो जा “

“ऐसे नही मुझे बिना प्यार किये सोते हो इसलिए आप ऐसे सपने देखते हो ,मुझसे अच्छे से कसकर लीपट के सो जाओ तो आपको भी अच्छे सपने आएंगे “

उसकी बात सुनकर मेरे होठो में भी एक मुस्कान सी आ गई ,

मैं उससे लिपट कर सो गया ……

लेकिन मेरे आंखों में अब भी नींद नही थी …

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