जादुई लकड़ी – Update 16 | Incest Story

जादुई लकड़ी Writer Chutiyadr
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अध्याय 16

दो आंखे हमे घूर रही थी ,मेरी नजर उसपर जम चुकी थी लेकिन मैंने कुछ भी नही कहा,वो नेहा दीदी थी ,नेहा दीदी से मेरी नजर मिली और वो वहां से चुपचाप ही निकल गई , यंहा निशा बिल्कुल ही निढल होकर गिर चुकी थी और ना जाने कब वो नींद के आगोश में चली गई ,

मैं उठाकर सिर्फ एक टॉवेल लपेट कर नेहा दीदी के कमरे के सामने पहुच गया ,दो बार खटखटाने पर उन्होंने दरवाजा खोला,उनकी आंखे लाल थी और बाल भी बिखरे हुए थे,गोरा चहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था …

“तूम यंहा क्यो आये हो..???”

मुझे देखते ही वो बोल पड़ी ,उनकी आंखों में आश्चर्य था…

“आपको क्या लगता है की मैं यंहा क्यो आया हु “

मैं कमरे के अंदर बिना बुलाये ही चला गया और कमरे का दरवाजा अंदर से लगा दिया ,वो मुझे ऐसा करते देख कर थोड़ी डर गई थी …

“तुम ये क्या कर रहे हो ??”

वो लगभग चिल्लाई लेकिन मैं उनकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया ..

“किसी के कमरे में बिना इजाजत के नही घुसना चाहिए दीदी ,लेकिन आपने तो ये गलती पहले ही कर दी “

मेरी बात सुनकर वो बहुत ही झुंझला सी गई थी ..

“तुम…तुम अपने आप को समझने क्या लगे हो ,अपनी ही बहन के साथ …उसके बाद तुम मुझे यंहा धमकाने आये हो या फिर याचना करने की मैं किसी को कुछ ना बताऊ,जानते हो ना की अगर तुम दोनो की करतूत के बारे में घर में किसी को पता चला तो क्या होगा,तुम्हे धक्के मारकर घर से निकाल देंगे..”

उनकी बात सुनकर मैं जोरो से हंस पड़ा ..

“ये सब आपके बॉयफ्रेंड ने आपको सिखाया है क्या??लेकिन उस चूतिये ने आपको ये बात तो बताई ही नही होगी की अब मैं अगर चाहू तो किसी को भी इस घर से निकाल सकता हु ,क्योकि ये घर मेरा है ,”

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा मुस्कुराई …

“नही राज सिर्फ तुम्हारा तो नही है ,इसमे चन्दू का भी उतना ही हिस्सा है जितना की तुम्हारा “

“ओह तो कहा है चन्दू ,कितना बेशर्म है साला,उसकी माँ की नंगी तस्वीरे उसे भेज दी लेकिन चूहे की तरह बिल में छिपा बैठा है “

मैं बेशर्मी से हंसा

“वो आएगा राज ,वो आएगा और जब वो आएगा तो तुम्हे बिल में छिपना पड़ेगा ,तुम क्या सोचते हो की वो कायर है?? नही …वो कायर नही है ,वो तुमसे बदला लेने जरूर आएगा “

उनकी बातो से ही लग गया था की वो चन्दू से कितना इम्प्रेस है ,तभी मेरी नजर उनके बिस्तर में गई जंहा उनका मोबाइल पड़ा था ,स्क्रीन की लाइट जल रही थी ,मैंने थोड़ा ही कंसन्ट्रेशन से उसे देखा और जैसे मेरी आंखे किसी फोकस वाली लेंस की तरह ज़ूम करते हुए वंहा तक पहुच गई,अभी वो किसी से बात कर रही थी और मोबाइल ऐसे ही था ,स्क्रीन में एक नंबर था जिसे मैं क्लियर तो नही देख पाया लेकिन इतना जरूर समझ आ गया था की हमारी बात कोई और भी सुन रहा था ,और वो कोई एक ही हो सकता था चन्दू…मैं बिस्तर की ओर बढा और उस मोबाइल को उठा लिया ..स्क्रीन में नाम था ‘मई लव ‘ जिसे देखकर मेरे होठो में मुस्कान आ गई

“क्यो बे चूतिये कहा छिपा बैठा है तू..”

मोबाइल को अपने कानो से लगते हुए मैंने कहा वही मुझे देखकर नेहा दीदी की संट हो गई थी …..

“बहुत उड़ रहा है ना तू ,देखना साले तेरे सारे पर काट दूंगा,तुझे पता नही है की मेरे साथ कौन है ..??”

सामने से चन्दू की आवाज आयी ,वो बौखलाया हुआ था ,

“तेरे साथ कौन है इससे तेरी माँ की चुद में जाते हुए मेरे लौड़े को तू भूल जाएगा क्या “

मैं बुरी तरह से हंसा वही चन्दू चिल्लाया ..

“मादरचोद मैं तुझे जिंदा नही छोडूंगा एक बार मेरा काम हो जाए तुझे गली के कुत्तो सी मौत दूंगा …”

“पहले बिल से बाहर आ कायर ,फिर मुझे मारने की बात करना,तब तक मैं तेरी माँ को रोज चोदूंगा,फिक्र मत कर तुझे रोज उसके फोटो और वीडियो मिल जाएंगे तू उसे देखकर हिला लिया करना ”

मैं जोरो से हंसा ,

“मादरचोद …”

चन्दू जैसे रोने को हो गया था ,तभी उधर से एक आवाज आयी वो आवाज एक लड़की की थी ..

“तूम पागल हो गए हो क्या, कहा था ना की अपना मोबाइल बंद रखना “

और फिर उधर से काल कट गया लेकिन …….

लेकिन उस आवाज को सुनकर मेरे पैरो तले जैसे जमीन ही खिसक गई थी ,उस आवाज को मैं पहचानता था अच्छे से पहचानता था ,वही तो थी जिसने मुझे इस काबिल बनने में मदद की थी की मैं दम से कुछ बोल पाता ………

वो काजल मेडम की आवाज थी ,मेरे हाथो से फोन ही गिर गया ,मुझे लगा जैसे मैंने कोई बुरा सपना देख लिया हो ,मुझे लगा जैसे मुझसे कोई धोखा हुआ है लेकिन …लेकिन नही मुझसे ऐसा धोखा नही हो सकता,मैं नींद में भी उस आवाज को पहचानता था ,मैं बेहोशी में भी उस आवाज को पहचान सकता था …

मेरे चहरे की हवाइयां उड़ गई जिसे नेहा साफ साफ देख पा रही थी …..

मेरी उससे नजर मिली..

“चन्दू के साथ कौन लोग है …??”

मेरा पहला सवाल यही था ,लेकिन मेरे सवाल से उसके होठो में मुस्कान आ गई…..

“क्यो फट रही है क्या तुम्हारी …”नेहा दीदी के चहरे में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई …

“दीदी ये माजक का वक्त नही है जो भी पता हो प्लीज् मुझे बताओ “

वो मुझे घूरने लगी..

“दीदी ????वाह जब खुद की फटने लगी तो दीदी पर आ गए ,”

उसके चहरे की मुस्कान और भी फैल गई …असल में उसे भी नही पता था की हमारी क्या बात हुई है वो बस मेरे तरफ की बातचीत को सुन पा रही थी उसे लगा होगा की चन्दू ने मुझे कुछ ऐसा बोल दिया है जिससे मेरी ये हालत हो गई है लेकिन ऐसा नही था …..

मैंने उनके बांहो को पकड़कर झकझोर दिया

“मेरी बात सुनो हमे कोई बड़े साजिश में फंसा रहा है ,कोई हमारे साथ बड़ा गेम खेल रहा है,चन्दू की जान भी खतरें में है,वो हमे लड़ाना चाहते है पता नही उन्हें हमसे क्या चाहिए “

लेकिन नेहा दीदी के चहरे में अभी भी वही भाव थे …

“तुम मुझे आखिर समझते क्या हो की मैं तुम्हारे बात में आ जाऊंगी ,नही राज तुम गलत हो मैं चन्दू से सच में प्यार करती हु ,और हमे क्या चाहिए तो सुन हमे दादा जी की पूरी संपत्ति चाहिए ..”

उसने गुस्से से कहा ..

“अगर तुम दोनो को संपत्ति चाहिए तो दिया ,जितना हक चन्दू का है वो ले लो ,मुझे पैसे से ऐसे भी कोई प्यार नही है ,ना ही कभी था ,लेकिन मैं अपना हक नही छोड़ सकता,दादा जी की आधी सम्पति पर चन्दू का हक बनता है आधी पर मेरा हक है ,चलो ये लड़ाई खत्म करते है ,अभी फोन लगाओ चन्दू को दादा जी की पूरी जायजाद के दो हिस्से होंगे ,एक चन्दू का दूसरा मेरा …”

मेरी बात सुनकर नेहा दीदी आश्चर्य से मुझे ही देखने लगी …

“उसके आते ही तुम उसे मार दोगो और पूरी जयजाद हथिया लोगे,तुमने वकील साहब को भी मार दिया मैं जानती हु की तुम कितने कमीने हो चुके हो …”

“अच्छा मैं कमीना हो गया हु,मुझे मारने के लिए ही चन्दू ने उन लोगो से हाथ मिलाया है,और मैं कमीना हु,मुझे जयजाद से बाहर करने के लिए मेरे जन्म से पहले से ही साजिश की जा रही है और मैं कमीना …वाह दीदी वाह,कभी मुझे अपने प्यार से भाई भी नही कहा ,निशा के प्यार का गलत फायदा उठाने वाले आप दोनो हो और मुझे आप कमीना कह रहे हो ..”

मेरा दिमाग भी उनकी बात सुनकर बुरी तरह से खराब हो चुका था ..

“हमने तुझे कभी मारने का प्लान नही बनाया था,हम तो बस ये चाहते थे की चन्दू और सना को उनका हक मिले ,हमारे बाप की गलती की सजा आखिर उन्हें क्यो मिलेगी…मैं बस चन्दू को उसका हक दिलवाना चाहती थी,लेकिन पापा और माँ ये होने नही देते इसलिए तुझे फंसा कर हम घर से बाहर निकलवाना चाहते थे ,लेकिन फिर भी तेरे पास नाना जी की प्रापर्टी होती साथ ही निशा भी तो तेरी ही थी ,और उसे भी तो प्रापर्टी मिलती ,मैं भले ही चन्दू से प्यार करती हु लेकिन मैं तेरी बहन हु,तुझे समझना फिजूल था इसलिए मैंने चन्दू का साथ दिया था ,ऐसे भी दादा जी की प्रापर्टी जब हमारे पास होती तो मैं अपने हिस्से की जयजाद भी तुझे देने वाली थी ताकि तू और निशा एक अच्छी जिंदगी जी सको ,मैं तेरी बहन हु ,तुझे तकलीफ दे सकती हु क्योकि तू था ही वैसा लेकिन तुझे लगता है की मैं तुझे कभी मार सकती हु ,मैं तो बदला अपने बाप से लेना चाहती हु जिस कमीने के कारण ये सब हो रहा है ,जिसने मेरी माँ की ये हालत कर दी है …”

नेहा दीदी रोने लगी थी ,मुझे समझ नही आ रहा था की आखिर मैं क्या करू ,आखिर वो कौन है जो सही है और कौन गलत है …

तभी दरवाजे पर एक दस्तक हुई ,नेहा ने अपने आंसू पोछे और दरवाजा खोला सामने माँ खड़ी थी जो मुझे देखकर चौक गई थी …

“तू इतनी रात क्यो यंहा ,और ये क्या नंगा ही घूम रहा है”

उन्होंने अजीब निगाहों से मुझे देखा मैं नंगा नही था लेकिन बस एक तोलिये में ही था …

“वो माँ मैं दीदी से थोड़ी बात करने आया था ,और मैंने तौलिया तो पहन रखा है ना “

मेरी बात सुनकर माँ हंस पड़ी …

“हा वो तो है,अब तूने ऐसी बॉडी जो बनाई है तो दिखायेगा ही क्यो??”

मैं हल्के से हंसा ,लेकिन उस हंसी में कोई खुशी नही थी ,बस एक अजीब सी उलझन थी …..

“ऐसे आप यंहा क्या कर रही हो ??”

मैंने भी प्रश्न दाग दिया ..

“मैं भी नेहा से बात करने आयी हु और क्या ,अब अंदर आने दोगे या यू ही बाहर ही खड़े रहू ..”

माँ की बात सुनकर नेहा दी जल्दी से सामने से हट गई ,अंदर आते आते दोनो की आंखे मिली ….

“राज क्या नेहा सच कह रही है की तूने विवेक(वकील ) को मरवाया है ..”

माँ आते ही बिस्तर में बैठते हुए बोली ..

“माँ ये आप क्या कह रही हो आप सोच भी कैसे सकती हो की मैंने उन्हें मरवाया होगा,”

मैं उनकी बात को सुनकर और भी आश्चर्य में पड़ गया था ..

उन्होंने एक गहरी सांस छोड़ी ……

“बेटा आजकल जो हो रहा है वो बिल्कुल भी समझ से बाहर है ,तेरा अचानक से अपने बाप के ऊपर कंट्रोल करना,पूरी सम्प्पति में अधिकार की मांग ,और फिर चन्दू और तेरी जानी दुश्मनी ….पहले तो मुझे लगता था की मेरा पति ही कमीना और चालाक है लेकिन अब तो मेरे बच्चे ही एक दूसरे के खिलाफ षड्यन्त्र कर रहे है,मैंने चन्दू को भी अपना बेटा ही माना है और फिर जब मुझे पता चला की नेहा उससे प्यार करती है तो ….तो मैंने भी उसे स्वीकार कर लिया ..”

ये मेरे लिए किसी बम से कम नही था ..

“क्या.???”

“हा बेटा नेहा ने मुझे बहुत पहले ही बता दिया था ,अब तेरे पापा से तो मेरी बात ना के बराबर ही होती है ,मेरी बेटियां ही मेरा सहारा रही है ,तुझे किसी से कोई मतलब ही नही था ,तो मुझे लगा की शायद चन्दू की वजह से हमारा परिवार सम्हल जाएगा और मेरे बच्चों को मेरा हक मिल जाएगा,वरना तेरे पिता जी तो पूरी ही दौलत किसी भी तरीके से अपने नाम करने के फिराक में थे,तुझे तो वो कुछ भी नही समझते थे और ना ही मुझे कभी उन्होंने कुछ समझा ,निशा तो बच्ची है जो प्यार से बोल दे उसके साथ हो जाती है और उसपर तो तेरे बाप का प्यार हमेशा से बरसता रहता है,और निकिता तो अपनी पढ़ाई से फुरसत नही है …तेरी हालत के पीछे मेरी ही गलती है बेटा,जब तू मेरे गर्भ मे था तो तेरे पिता जी मुझे कई चीजो के लिए धमकाया करते थे ,शायद इसी का असर था की तू भी मेरी ही तरह दब्बू बन गया मुझे माफ कर दे बेटा, लेकिन मैं बहुत खुश हु जो तूने पाया है ,वो आत्मविस्वास लेकिन …लेकिन तेरा आत्मविस्वास कई लोगो के राह में रोड़ा बन गया,चन्दू को लगने लगा की तू उससे वैसे ही पेश आएगा जैसे तुम्हारे पिता आते थे ,वो हमेशा से उनसे नफरत करता है ,कोई भी बेटा करेगा जब वो अपनी माँ को गुलाम की तरह देखेगा …तेरे जंगल से वापस आने के बाद से चीजे बदल गई ,लेकिन यकीन मान की नेहा और चन्दू कभी तुझे मारने की नही सोच सकते ……तुम लोग ना लड़ो बेटा ,जो भी जीते लेकिन मैं हार जाऊंगी “

वो रोने लगी थी ,मैं माँ के बाजू में बैठ कर उन्हें अपने बांहो में भर लिया ,इस जंग में उनका बेटा उनकी बेटी के सामने खड़ा था ,सच में कोई भी जीते वो हार ही जाती ……

मैं शांत था …नेहा भी चुप थी …

“मैं चन्दू को फोन लगाती हु ,हम सुलह कर लेते है ,वो मेरी बात नही टालेगा,लेकिन तुमने जो कान्ता काकी के साथ किया उसके लिए तुम्हे उससे माफी मांगनी होगी ..”

आखिरकार नेहा ने कहा

“कान्ता के साथ तुमने क्या किया “माँ आश्चर्य में बोली ,नेहा और मेरी आंखें मिल गई ,अब इन्हें कैसे बताए की मैंने उनके साथ क्या किया था ,नेहा को शायद चन्दू ने ही बताया था लेकिन अब माँ को नही …

“वो थोड़ी बत्तमीजी कर दी थी उनके साथ “

मैंने नेहा को देखते हुए कहा ..

“अच्छा तो उसे कल माफी मांग लेना और बेटा चन्दू को फोन लगा “

माँ ने मासूमियत से कहा ,लेकिन मेरे दिमाग में कुछ बात आ गई ..

“नही …नही नेहा अभी नही “

“आखिर क्यो बेटा …..”

माँ और नेहा मुझे आश्चर्य से देखने लगे …

“अभी अगर उसे फोन किया तो कुछ गड़बड़ जरूर हो सकती है ,पहले हालात को समझने दो की आखिर उसके साथ कौन लोग है ,क्योकि उन्होंने ही वकील को मारा है और शायद मेरे और चन्दू के जान के दुश्मन भी वही है ……”

“लेकिन अगर उन्हें मारना होता तो कब का मार चुके होते…”

नेहा बोल पड़ी

“हा वही तो समझ नही आ रहा है की आखिर माजरा क्या है …..”

“तो क्या करू ..”

“कुछ नही जैसा चल रहा है बस वैसे ही चलने दो ,उसे कुछ मत बताना की हमारे बीच क्या बात हुई है ,अगर उसका फोन आये तो उसे बस इतना ही कहना की हमारी लड़ाई हुई और वो धमकी दे कर चला गया ……”

नेहा ने सहमति में सर हिलाया ..

“बेटा तू करने क्या वाला है ..”

माँ इन सब में चिंतित थी ,वो बेचारी भोली भाली सी औरत इन सब लफड़ों में फंस गई थी …..

“कुछ नही माँ सोच रहा हु की कल जल्दी दौड़ाने जाया जाय……”

मैं इतना बोलकर वंहा से निकल गया …….

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