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जवानी के अंगारे

Update 8

शेफाली ने जिस अंदाज से अपनी सैक्स लाइफ को फिर से शुरू किया था, उससे सॉफ पता चल रहा था की अब वो रुकने वाली नही है
चूत को एक बार लॅंड का चस्का लग जाए तो वो वैसे भी नही मानती
अपनी उम्र के इस पड़ाव पर आकर एक बार फिर से उसने लॅंड को चखा था और अब वो पीछे हटने वाली नही थी
डेटिंग ऐप के रूप में उसे ऐसा जादुई चिराग मिल गया था जिसे जब चाहे घिस कर वो लॅंड की डिमांड कर सकती थी.

वहीं दूसरी तरफ अनु का भी बुरा हाल था
एग्ज़ॅाम्स आने वाले थे, पर उसका ध्यान सैक्स से हट ही नही रहा था
वो सोचती रहती थी की क़ाश उसकी ये पड़ाई-वड़ाई ख़त्म हो चुकी होती तो शायद अपनी लाइफ को ज़्यादा एंजाय कर पाती
अपनी जवानी के इन क़ीमती दिनों को सिसक कर काटने की पीड़ा सिर्फ़ वही समझ सकती थी

उसने 1-2 बार तो सोचा की गौरव के साथ कुछ मस्ती कर ले,
पर रह-रहकर उसे सुधीर सर के वो मजबूत हाथो की पकड़ अपने बूब्स पर और उनके होंठो का स्पर्श अपनी गर्दन और होंठो पर महसूस हो रहा था
इसलिए चाह कर भी वो सुधीर सर को अपने दिमाग़ से नही निकाल पा रही थी

अगले दिन स्कूल में जब सुधीर सर और उसकी नज़रें मिली तो एक बार फिर से वही सब आँखो के सामने तैर गया…
सुधीर सर ने बहुत कोशिश की उस से अकेले में बात करने की पर मौका ही नही मिला,

अनु भी उनके करीब जाना चाहती थी पर पूरे स्कूल के सामने अपना जुलूस नही निकलवाना था उसे, इसलिए सर से एक उचित दूरी बना कर रख रही थी वो.

पर सुधीर सर की हालत देखकर उसे मज़ा बहुत आ रहा था,
अपने योवन रूपी हथियार का इस्तेमाल करके वो सभी मर्दों को अपने पीछे इसी तरह लगा कर रखना चाहती थी उम्र भर,
अभी तो ये शुरुवात थी इसलिए हर कदम फूँक-2 कर रख रही थी वो.

सर की क्लास ख़त्म होने के करीब आधे घंटे बाद जब वो इंग्लीश की क्लास अटेंड कर रही थी तो स्कूल का पीउन क्लास में आया और मेम को एक पेपर दिया, मेम ने उसे देखा और बोली : “अनुप्रिया, आपको इसी वक़्त प्रिन्सिपल मेम ने बुलाया है”

ये सुनते ही मेरी गाँड फट्ट कर हाथ में आ गयी….
कहीं उन्हे कुछ पता तो नही चल गया उसके और सुधीर सर के बारे में …
किसी ने देख तो नही लिया उन्हे…
या किसी ने शिकायत ना लगाई हो उनकी .

बेचारी धड़कते दिल से प्रिन्सिपल के रूम में पहुँची, जहां पहले से सुधीर सर मोजूद थे,
मेम उनसे काफ़ी हंस-2 कर बाते कर रही थी,

उनकी पर्सनॅलिटी ही ऐसी थी की हर कोई उनसे प्रभावित हो जाता था, शायद उनका जादू प्रिन्सिपल पर भी चला हुआ है

अनु को देखते ही माँ बोली : “आओ अनुप्रिया, अभी तुम्हारी बात ही हो रही थी”

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मेम को नॉर्मल तरीके से बात करते देख मैं इतना तो समझ ही गयी थी की कोई परेशानी वाली बात नही है
मेम : “अगले महीने इंटर स्कूल मैथ्स ओलम्पियाड है, जिसमें हमारे स्कूल के बच्चे भी पार्टिसिपेट कर रहे है, इसलिए सुधीर सर की हेल्प के लिए तुम स्कूल को-ओर्डीनेटर रहोगी, सर ने बताया है की आजकल तुम काफ़ी मन लगा कर पढ़ रही हो और इन्हे उसके रिज़ल्ट्स भी दिख रहे है”

अब वो बेचारी क्या बोलती की सर का मन आजकल कहा लगा हुआ है जिसकी वजह से उन्होने उसके साथ रहने का ये बहाना ढूँढा है
पर अंदर ही अंदर वो समझ चुकी थी मज़ा बहुत आने वाला है आगे चलकर.

वो उनकी बात अच्छे से समझकर वहां से निकल आयी
प्रिन्सिपल मेडम के रूम से निकलते हुए सुधीर सिर ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा : “तो कॉर्डीनेटर मेडम, कल से आप रोज स्कूल के बाद 1 घंटा मेरे स्टाफ रूम में रुकेंगी “
मैं : “क्यों सर, ट्यूशन सेंटर भी तो है, फिर ये सब किसलिए”

सुधीर सर थोड़ा गंभीर होते हुए : “वो दरअसल , कल तुमने देखा ना, मेरे माँ पिताजी आए हुए हैं, फर्स्ट फ्लोर पर बार-2 चड़ने में दिक्कत होती है उन्हे, इसलिए जब तक वो रहेंगे, उनका बिस्तरा नीचे वाले फ्लोर पर लगा दिया है, और जब तक वो यहाँ है तब तक होम ट्यूशन बंद करनी पड़ेगी मुझे”

मैं मन मसोस कर रह गयी

इसलिए सर ने बड़ी चालाकी से आने वाले इवेंट में उसे अपना को-ओर्डीनेटर बना लिया ताकि जो काम घर में नही हो पाए वो शायद इसी बहाने से साथ रहकर हो जाए

वैसे भी उसे चुदाई तो करवानी नही थी सर से,
पर स्कूल में या ट्यूशन सेंटर में रहते हुए जो मज़े वो ले सकती है, वो लेकर रहेगी.
ये सोचकर ही उसके बदन मे रोमांच की एक लहर तेर गयी

उसने वापिस आकर जब ये बात निशा को बताई तो वो भी सर की चालाकी से प्रभावित हुए बिना ना रह सकी,
वो बोली : “काश, ऐसा चाहने वाला मास्टर हमारी क़िस्मत में भी होता”

दोनो उस बात पर काफ़ी देर तक खिलखिलाकर हँसती रही

स्कूल के बाद जब वो और निशा बाहर निकले तो हमेशा की तरह निशा अपने बाय्फ्रेंड संजू का इंतजार करने लगी, पर वो नही आया, निशा ने अपने बेग में रखे मोबाइल फोन को ओन किया और उसे कॉल किया, तब उसे पता चला की उसकी बाइक खराब हो गयी है.

निशा : “यार अनु, संजू की बाइक खराब हो गयी है, तू एक काम कर, मेरे साथ ऑटो में चल, मैं उसके पास नेहरू चौक पर उतर जाउंगी और तू अपने घर निकल जाना वहीं से..”

मैने उसकी बात मान ली क्योंकि नेहरू चोक से मेरा घर मात्र 10 मिनट की दूरी पर था
हम एक ऑटो लेकर उसी तरफ चल दिए

रास्ते में निशा बोली : “यार…उस दिन से मेरे अंदर खुजली मची हुई है जब संजू की कॉलोनी में म्युनिसिपल वाले आए थे, वहां तो उन्होने सबके घर तोड़ दिए है, अब दोबारा बनाने में लगे है सब, पर तब तक पता नही कैसे कटेंगे ये दिन, सिर्फ़ मिल लेने से तो काम नही बनता न”

वो शायद ये बात मुझे सुनाने के लिए बोल रही थी, क्योंकि सर से अब मैं भी सिर्फ़ मिल ही सकती थी, कुछ करना शायद पासिबल नही था

पर उसे नही पता था की लॅंड हो या छूट, जब अपने पर आए तो चुदाई का ज़रिया ढूँढ ही लेते है, और शायद यही जुगाड़ इस वक़्त निशा के दिमाग़ में भी चल रहा था

अचानक वो लगभग उछलते हुए बोली : “यार, एक प्लान आया है मेरे दिमाग़ में, वो जो नेहरू चौक से पहले जंगल वाला एरिया है ना, वहां कुछ हो सकता है शायद, वो जगह तो ऐसे कामों के लिए ही फेमस है”

सुना तो मैने भी था की उन घने जंगलो में ऐसे कांड होते रहते है,
पर वहां जाने की हिम्मत कभी नही हुई…
जाती भी कैसे, कोई था ही नही ले जाने वाला

पर आज जब निशा ने वहां जाने की बात की तो मेरे अंदर भी एक रोमांच उत्पन्न हो गया…
मेरी मुनिया भी पसीज उठी और वहां जाने की जिद् करने लगी

मैं : “ओके …अच्छा ….क्या…मैं ….मैं भी वहां चलूँ तेरे साथ…..”

निशा आँखे नचा कर बोली : “ओफफो, लगता है किसी को ट्रैनिंग की ज़रूरत है, देखना चाहती हो शायद की सब कैसे होता है…है ना..”

मैं चुप रही पर मेरे होंठ वहां जो होने वाला है उसे सोचकर ही थरथरा से रहे थे
निशा : “चल ठीक है, चल पड़ साथ में …वैसे भी तू चलेगी तो मेरा भी एक काम हो जाएगा”
मैं : “कौनसा काम ?”
निशा : “वो तो वहीं चलकर बताउंगी ”

ऐसे ही बाते करते-2 कुछ ही देर में हम वहां पहुँच गये,
निशा ने ऑटो थोड़ा पहले ही रुकवा लिया और संजू को कॉल करके वहीं आने को बोल दिया,
उसकी बाइक का भी 5 मिनट का ही काम रह गया था और वो भी अपने खड़े लॅंड को पूचकारता हुआ अपने घोड़े पर सवार होकर वहां पहुँच गया

मुझे देखकर वो चौंका तो ज़रूर और जब निशा से पूछना चाहा की ये यहां क्या कर रही है तो उसने आँखो ही आँखो में उसे समझा दिया,
जब एक ठरकी की गर्लफ्रेंड के साथ जब उसकी कमसिन सहेली भी हो तो कौन चूतिया मना करेगा,
इसलिए वो बिना कुछ बोले हम दोनो को लेकर अंदर की तरफ चल दिया,
सड़क से थोड़ा अंदर जाने के बाद ही जवान जोड़े दिखाई देने शुरू हो गये,
जो एक दूसरे को बुरी तरह चूम चाट रहे थे,
एक ने तो अपनी जी एफ का टॉप उपर करके उसे लगभग टॉपलेस किया हुआ था और खुद बड़े इत्मीनान से उसका दूध पी रहा था..

पर उन सभी को दूसरे लोगो के आने जाने से कोई फ़र्क नही पड़ रहा था
थोड़ा और अंदर जाने के बाद संजू को एक पर्फेक्ट जगह मिल ही गयी,
वहां कोई नही था, एक बड़ा सा पेड़ था जिसके पीछे घनी झाड़ियां थी,

संजू निशा को लेकर पेड़ के पीछे पहुँच गया और अगले ही पल दोनो एक दूसरे पर टूट पड़े,
शायद पिछली बार जहाँ उन्होने अपना कार्यकर्म छोड़ा था, वहीं से शुरू करना चाहते थे.

उसने निशा की टाई निकाल फेंकी उसने और उसके उपर के 2 बटन खोल दिए, जिससे उसकी क्लिवेज दिखाई देने लगी, उसे देखकर संजू और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गया

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उन्हे मेरे वहाँ होने से भी कोई फ़र्क नही पड़ रहा था, दोनो एक दूसरे के होंठो को बुरी तरह से चूस रहे थे.

तभी निशा ने अपना फोन निकाला और मुझे देते हुए बोली : “अच्छा सुन ना, ये फोन पकड़ और हमारी एक वीडियो बना दे, इसे देखकर बाद में टाइम पास कर लिया करूँगी “

ओह्ह, तो ये काम था उसे मुझसे

मेरे साथ -2 संजू भी हैरान रह गया, ये काम तो अक्सर लड़के किया करते है,
भला निशा की चूत में ऐसी कौन सी खुजली है जो वो इन पलों को अपने मोबाइल में सॅंजो कर रखना चाहती है,
खैर मुझे क्या प्राब्लम हो सकती थी,
मैने फोन लिया और एच डी क़्वालिटी में उनकी वीडियो बनाने लगी

वीडियो ओन होते ही निशा में जैसे किसी पोर्नस्टार की आत्मा घुस गयी,
वो खुद ही संजू के सिर को पकड़ कर अपनी छाती पर घिसने लगी,
और उसने अपनी दरियादिली का परिचय देते हुए अपने बूब्स बाहर निकाले और चूसने के लिए संजू को दे दिए

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एक दम गोरे , भरे हुए बूब्स थे उसके और उनपर लगा हुआ चैरी के दाने जैसा उसका पिंक निप्पल

संजू पूरा मुँह खोलकर उसे चूस रहा था, मुँह के अंदर की लार निकल-2 कर उसके कपड़ो पर गिर रही थी, इसलिए निशा ने अपनी शर्ट और ब्रा भी निकाल फेंकी और ऐसा करते हुए उसे बिल्कुल भी शर्म नही आई

ना तो मेरी वजह से और ना ही उस खुले माहौल की वजह से
मैं होती तो शायद इस जंगल में टॉपलेस होने के बारे में सोचती भी नही
पर निशा ने जिस तरह से अपनी शर्ट निकाल फेंकी थी उससे सॉफ पता चल रहा था की उसका क्या हाल हो रहा होगा अंदर से
शायद जिसपर बीतती है वही जान सकता है की क्या फील होता है ऐसे मौके पर

अभी भले ही मुझे ये सही नही लग रहा था पर हो सकता है की कोई मेरे बूब्स भी इस तरह से यहाँ चूसे तो मैं भी टॉपलेस हो जाऊँ

अगर संजू मुझे पकड़ कर मेरे बूब्स इस वक़्त चूसे तो क्या मैं मना कर पाऊँगी ?

ये सोचते ही मेरे निप्पल्स ब्रा और शर्ट का परदा फाड़कर बेशर्मी से चमकने लगे

संजू देख लेता तो पक्का घसीट लेता मुझे अपने साथ

पर इस वक़्त तो वो निशा के नशीले बूब्स को चूसने खोया हुआ था

क्या कमाल के बूब्स थे उसके
मैने भी पहली बार ही देखे थे उसके बूब्स
ब्रा में उनका साइज़ सही से पता नही चलता पर 32 से तो उपर ही थे
एकदम सख़्त और तने हुए
पिंक कलर के निप्पल्स
उन्हे देखकर मेरे मुँह में भी पानी आ गया
काश मैं भी चूस पाती उन बेहतरीन बूब्स को

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संजू ने उसकी स्कर्ट को उपर करना चाहा पर निशा ने रोक दिया
और बोली : “डार्लिंग, अभी के लिए सिर्फ़ उपर से ही, इस काम के लिए पर्फेक्ट जगह मिलेगी, तब करेंगे”
संजू थोड़ा मायूस सा हो गया
निशा बोली : “तुम्हे ऐल्लॉव नही है नीचे जाना, पर मैं तो जा सकती हूँ ना…”

इतना कहते हुए उसने जीन्स के उपर से ही संजू का फड़फडाता हुआ लॅंड पकड़ लिया
संजू के साथ -2 मैं भी चिहुंक उठी

और अगले ही पल निशा अपने पंजो पर नीचे बैठ गयी और उसकी जीन्स और अंडरवीयर एक झटके में नीचे खींच दिया
निशा का तो पता नही पर मेरी साँसे रुक गयी, अपनी लाइफ का पहला तगड़ा लॅंड देखकर
वो किसी नागमणि की तरह चमक रहा था निशा के हाथो में
और झटके मारकर अपनी जवानी का प्रदर्शन कर रहा था

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निशा भी उसे 1 मिनट तक एकटक देखती रही , फिर मेरी और देखकर कन्फर्म किया की वीडियो बन रहा है ना
मेरे सिर हिलाते ही उसने अपना मुँह खोला और गर्म लार में लिसडी लपलपाति जीभ निकाल कर उसके लॅंड के अगले हिस्से पर रख दी
सैंकड़ो चिड़ियों के साथ-2 संजू भी चिहचिहा उठा जंगल में

निशा उसके लॅंड से खेल रही थी
उसकी लंबाई पर मुट्ठी रखकर उसे आगे पीछे कर रही थी
दोनो हाथो से उसकी मोटाई नाप कर मज़ा ले रही थी
और जब उसने सब पैंतरे आजमा लिए तो अपना मुँह पूरा खोला और धीरे-2 उस अजगर को निगलने लगी

उफफफफ्फ़ क्या सीन था
मेरे तो हाथ काँप रहे थे

मेरा एक हाथ अपने आप चूत की तरफ गया और उस बहती हुई चूत को मैने स्कर्ट के उपर से ही ज़ोर से दबा दिया
ऐसा लगा जैसे कॉटन के कपड़े में लिपटा ताज़ा दही निचोड़ दिया हो
कच्छी से छनकर ढेर सारा रस बाहर निकल आया
डार्क कलर था स्कर्ट का वरना उसपर लगा धब्बा सॉफ नज़र आ जाता
अब मेरा एक हाथ अपनी चूत पर था और दूसरा मोबाइल पर
निशा पूरे शबाब पर आ चुकी थी

बीच जंगल में अपने पंजो पर टॉपलेस होकर वो संजू के लॅंड को बावली कुतिया बने चूसे जा रही थी
उसके चूसने की गति इतनी तेज थी जैसे गन्ने को मशीन में लंड डाल दिया हो

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संजू पंजो पर खड़ा सिसक रहा था
उसने एक नज़र भरकर मुझे भी देखा
मेरे चेहरे पर वासना के बादल छाए हुए थे
वो चाहता तो मुझे भी बुला लेता और शायद मैं मना ना करती पर पहली बार थी और शायद निशा का भी डर था उसे
कही ऐसा ना हो की दूसरी के चक्कर में पहली भी हाथ से जाए
एक तो पहले से संजू उसकी जवानी को देखकर पागल हुआ जा रहा था उपर से मेरे दूसरे हाथ को अपनी चूत रगड़ता देखकर वो और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गया

अब उससे सब्र करना मुश्किल था
उसके लॅंड ने सफेद शहद उगलना शुरू कर दिया

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निशा के चहरे पर जब उसके लॅंड की पिचकारी पड़ी तो वो भी सिसक उठी
तब मुझे पता चला की उसका भी एक हाथ अपनी कच्छी में था
संजू का लॅंड चूसते हुए वो अपना अंगूरी दाना भी सहला रही थी
और जब उसके चेहरे और मुँह में ढेर सारा रस गिरा तो बचा हुआ रस संजू ने उसकी नंगी छातियो पर गिरा दिया
पता नही इन लड़को को लड़कियों की छाती पर माल गिराने में क्या मज़ा मिलता है
शायद मुझपर गिरेगा तब मैं जान पाऊं

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पर अभी के लिए तो मैं भी अपनी मुनिया को बुरी तरह से रगड़ रही थी और निशा के साथ-2 मैं भी संजू के लॅंड का कमाल देखकर झड़ने लगी
कुछ पलों के लिए सब शांत हो गया
जंगल में एक गहरी खामोशी छा गयी
मैने वो वीडियो भी ऑफ कर दिया
20 मिनट का एमएमएस बन चुका था
जिसे देखकर निशा बाद में रातो को जागकर मज़ा लेने वाली थी

पर अभी के लिए घर जाना ज़रूरी था
निशा और संजू ने फटाफट अपने-2 कपड़े पहने,
दोनो ने जाने से पहले एक बार फिर से चूसम चुसाई की
और फिर हम तीनो जिस रास्ते से आए, वहीं से होते हुए बाहर आ गये
वहां से निशा संजू के साथ और मैं ऑटो लेकर अपने घर आ गयी
आज के लिए मेरे पास काफ़ी मसाला था अपनी मुनिया को मज़ा देने के लिए.

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