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अनु बाहर आई तो सुधीर सर को बेसब्री से अपना इंतजार करते हुए पाया

उन्होने अंदर आने से पहले बाहर का दरवाजा बंद कर दिया था

आज कुछ बड़ा होने वाला था इस ट्यूशन सेंटर में.

सुधीर ने भी जब उसे बाथरूम से बाहर निकलते देखा तो उनकी नज़रें अनु की क्लिवेज पर जम के रह गयी,

वो सोचने लगे, अभी तक वो बटन बंद थे, अब खुल कैसे गए

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यानी वो खुद अपना यौवन उन्हे सोंपने आई थी.

पर एक अध्यापक और स्टूडेंट के रिश्ते में पहल करके वो फँसना नही चाहते थे.

सुधीर सर ने बड़ी मुश्किल से अपने गले को सॉफ करके, थूक निगलते हुए पूछा : “वो…उम्म्म्मम…तुम…असाइनमेंट के लिए बोल रही थी ना….चलो समझा देता हूँ ….’’

“जी सर ….” कहते हुए वो फर्स्ट चेयर पर जाकर बैठ गयी.

सुधीर सर भारी पैरों से चलते हुए वाइट बोर्ड तक गये

क्या लिखे, क्या समझाए

उन्हे खुद समझ नही आ रहा था.

पीछे बैठी अनु को उनकी इस हालत पर हँसी आ रही थी…

एक लड़की के पास अपने जिस्म के रूम में जो हथियार होता है, उसका इस्तेमाल करके वो इन मर्दों को कैसे धाराशायी कर सकती है, इसका एहसास आज उसे हो रहा था.

कल तक यही सुधीर सर उसे डाँटते रहते थे

क्लास से बाहर निकाल देते थे

पर आज उसके हुस्न की एक झलक पाने के बाद वो उसके सामने पालतू कुत्ते की तरह खड़े थे,

उसे खुद अपनी कार में बिता कर घर तक लाए थे

वो समझाने जिसे समझने में उसे कोई इंटरेस्ट नही था.

समझना था तो बस एक औरत और मर्द के बीच के रिश्ते को

समझना भी क्या, मज़े लेने थे उन रिश्तो के

अपनी जिस्म के.

सुधीर सर ने एक लंबी साँस भरके उसे समझाना शुरू कर दिया…

अनु का ध्यान तो उस तरफ था ही नही, वो तो आने वाले पलों के बारे में सोच रही थी.

पेन को मुँह में लेकर खुली आँखो से सपने देख रही थी.

तभी सर की आवाज से उसकी तन्द्रा भंग हुई

सर : “समझ गयी ना….’’

सर ने जब 2-3 बार ये बात बोली तब उसे एहसास हुआ की उन्होने वो असाइनमेंट समझा डाला है

वो हड़बड़ाती हुई उठी और बोली : “सर ….वो बस लास्ट में जो है , वो फ़ॉर्मूला एक बार फिर बता देते तो…..’’

सुधीर समझ गया की उसका ध्यान जरा भी नहीं था उसकी तरफ , तो उन्होंने कुछ सोच के उससे कहा

“एक काम करो, यहाँ आओ, और खुद करके देखो, कैलकुलेशन में, मैं हेल्प कर दूँगा…’’

सर ने बोर्ड क्लीन करके दे दिया उसे

बेचारी फँस चुकी थी,

वो उठी और मार्कर लेकर फिर से उसे करने लगी…

अब करती क्या, उसे तो कुछ आता ही नही था..

पेपर पर लिखे नंबर्स को उसने लिखा और उन्हे किस फार्मूले से कैलकुलेट करना है ये उसे पता नही था…

वो बेचारी आँखे नीचे करके खड़ी हो गयी और तभी उसे सुधीर सर का एहसास हुआ,

वो ठीक उसके पीछे आकर खड़े हो गये थे.

ये पहल उन्होने बड़ी हिम्मत करके की थी.

सर ने अपना हाथ उपर लाकर उसके हाथ पर रख दिया और मार्कर पकड़कर उससे फ़ॉर्मूला लिखवाने लगे.

जैसे किसी छोटे बच्चे को लिखना सीखा रहे हो, ठीक वैसे.

पर वो जिस पोज़ में खड़े थे,

उसमें दोनो की हालत पतली हो रही थी.

सुधीर सर के लॅंड वाला हिस्सा उसके कुल्हो से थोड़ा उपर आकर टच हो रहा था.

अनु की हाईट थोड़ी कम थी उनके सामने,

इसलिए उनका चौड़ा सीना उसकी कमर से थोड़ा ऊपर सट गया था,

यहां दोनो जगह तो खैर बीच में कपड़े थे पर उन दोनो की बाहें, जो एक दूसरे के उपर थी, वो पूरी नंगी थी.

अनु की स्कूल शर्ट और सर की शर्ट हाफ स्लीवस की थी,

जिसकी वजह से सुधीर सर, अनु के नर्म और मुलायम शरीर का एहसास ले पा रहे थे

दोनो की साँसे तेज होने लगी

सुधीर सर ने थोड़ी नज़रें नीचे की तो उनकी रही सही साँसे भी उखड़ने पर आ गयी…

वो जिस एंगल पर खड़े थे, वहाँ से उन्हे अनु के सीने का अंदर तक का नज़ारा सॉफ दिखाई दे रहा था…

दो बटन क्या खुले उसकी शर्ट के

जवानी के अंगारे सुलग उठे जिस्म में

यही हाल हो रहा था अनु का

पीछे से सुधीर सर की गहरी साँसे अपने कानो पर महसूस करके उसे पता चल चुका था की उनकी नज़रें इस वक़्त उसकी शर्ट के अंदर है…

सर उसके बूब्स को देख पा रहे है ये सोचते ही उसके निप्पल्स तन कर बंदूक की गोली जैसे खड़े हो गये,

जैसे किसी को भेद ही डालेंगे आज…

सुधीर सर को उसके बूब्स की उँचाई के साथ-2 उसके बड़े -2 एरोला तक दिखाई दे रहे थे…

पर जहाँ से निप्पल की शुरुवत होती है , वहां आकर शर्ट ने उन्हे ढक लिया था…

पर उसके पिंक निप्पल्स की एक झलक उन्हे ज़रूर दिखाई दे गयी….

और ये काफ़ी था उनके सोए हुए शेर को जगाने के लिए…

वैसे जाग तो वो कब का चुका था,

पर अपने विकराल रूप में आने में उसे झिझक हो रही थी,

पर इस झिझक को अनु के बूब्स ने दूर कर दिया था..

अनु को अपनी पीठ पर किसी साँप के रेंगने का एहसास हुआ….

पहले भी वो गौरव के लॅंड को उपर-2 से महसूस कर चुकी थी, पर इस अजगर के सामने तो वो छिपकली था,

इसे अपनी चूत में कैसे ले पाएगी ,

ये सोचके ही उसके बदन में सिहरन सी दौड़ गयी

सुधीर सिर ने उसके पेट को जकड़ते हुए उसे अपने बदन से चिपका लिया और उसके कान में फुसफुसाए : “क्या हुआ अनु….ठंड लग रही है क्या..’’

जवाब में अनु ने अपना सिर पीछे करते हुए उनके कंधे पर रख दिया,

और अपनी छाती को और बाहर निकाल दिया ताकि वो उसे अच्छे से देख सके.

“नहीं सर, मजा आ रहा है ”

उसकी बात सुनके सुधीर सर के लॅंड ने 1-2 झटके मारे और उन्होने नीचे से उसकी शर्ट स्कर्ट से बाहर निकाल दी और अपना हाथ अंदर खिसकाकर उसके नंगे पेट पर रख कर उसे ज़ोर से भींच दिया

उम्म्म्ममममममममम सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआह्ह्हह्ह्ह

बेचारी एक नागिन की तरह सिसक कर रह गयी, उसका नशीला जिस्म सर की बाहों में जल बिन मछली की तरह मचलने लगा

सर ने उसे दबोचा तो उसका बदन बोर्ड से टच हो गया

वो उपर नीचे हिचकोले खा रही थी

उसके निप्पल्स जो इस वक़्त तन कर उसकी कमीज़ में खड़े हुए थे, वो मार्कर बनके वाइट बोर्ड पर अलग ही फ़ॉर्मूला लिखने लगे

सुधीर सर ने उसके पेट को पकड़े -2 उसके शरीर को इस अंदाज से उपर नीचे किया की बोर्ड पर लिखे फार्मूले पर उसके निप्पल्स किसी पेन की तरह चलने लगे,

उनके फार्मूला समझाने के इस अंदाज की कायल हो गयी अनु.

सुधीर सर की एक उंगली उसकी नाभि में घुस गयी और वो उसे सहलाने लगे

उंगली इतनी मोटी थी की वहां घुस भी नहीं पा रही थी,

अनु ने सोचा की ये उंगली जब उसकी चूत में घुसेगी तो कितना मज़ा मिलेगा…

ये सोचते ही उसने सर के हाथ के उपर अपना हाथ रखके उसे ज़ोर से दबा दिया

सुधीर सर ने उसे अनु की स्वीकृति समझा और नीचे झुकते हुए उसके कानो को अपने मुँह में लेकर चुभला डाला

और फिर उसे पूरा मुंह में भरकर चूसने लगे

अनु को इसकी उम्मीद भी नही थी

कोई कान भी भला चूसता है क्या

पर वो क्या जाने की मर्दों को ये कितना पसंद है

उन्हे तो ऐसी कच्ची कलियों के हर अंग को चूसना पसंद है जो उनके जिस्म की आग को सुलगाने का काम करती है

उसके कच्चे कचरी जैसे कानो को मुँह में लेकर वो ऐसे चूस रहा था जैसे वो उसके होंठ हो….

सर उन्हे ऐसे चूस रहे है तो उसके होंठो का क्या हाल करेंगे, ये सोचते ही उसकी चूत का पानी छलक उठा

चाह तो वो रही थी की सर अभी पलटें , उसके सारे कपड़े निकाल फेंके और उसकी जवानी के भरपूर मज़े ले डाले.

पर जो वो अपनी तरफ से अभी कर रहे थे

उसमें उसे ज़्यादा मज़ा मिल रहा था…

धीरे-2 ही सही,

उसके जिस्म की आग को वो जिस अंदाज में भड़का रहे थे वो क़ाबिले तारीफ था

भले ही सुधीर सर की शादी नही हुई थी पर उनके हुनर को देखकर वो समझ चुकी थी की वो कितना खेले खाए है

पर अभी के लिए तो उसके मज़े में चार चाँद लगने वाले थे

क्योंकि सर का हाथ जो उसकी नाभि के इर्द गिर्द घूम रहा था ,वो खिसक कर अब उपर आने लगा था और जल्द ही उनकी उंगलिया उसके बूब्स के निचले हिस्से से आ टकराई

अनु की साँसे रुक सी गयी,

सुधीर सिर की गहरी साँसे भी उसे अब अपने कानो पर महसूस नही हो रही थी

और अगले ही पल उनका मर्दाना पँजा उसके ऊन के गोले जैसे मुलायम बूब्स पर आ टीका और उन्होने उसे ज़ोर से दबा दिया

आआआआआआआआआअहह उम्म्म्ममममममममममममममममममममममम

ये पहला स्पर्श….

पहला दर्द….

पहला नशा…..

वो हमेशा के लिए अपने सीने में सॅंजो कर रख लेना चाहती थी

पर अभी के लिए तो सर की जादुई उंगलियों को अपने नंगे बूब्स पर महसूस करके वो हवा में उड़ रही थी

मर्दो को पता नही क्या मज़ा मिलता होगा उन्हे पकड़के,

पर आज अपने बुलबुल के बच्चे एक मर्द के हाथो में सौंपके उसे ज़रूर परमानंद की प्राप्ति हो रही थी.

और सुधीर सर को तो जैसे कोई छुपा हुआ खजाना मिल गया था

वो बूब्स नही मलाई कोफ्ते थे,

जिन्हे छूकर…

दबाकर…

एक अलग ही सुख़ कीअनुभूति हो रही थी

उन्होने अपना दूसरा हाथ भी उसकी शर्ट के अंदर डाल दिया और दोनो बूब्स को एक-2 हाथ में पकड़कर उन्हें दबाने लगे

अनु भी पीछे खिसककर अब सर के पैरों पर चढ़ चुकी थी और अपना पूरा शरीर पीछे करते हुए उनसे चिपक कर खड़ी हो गयी थी….

आगे वाइट बोर्ड था और पीछे सुधीर सिर, जिनके बीच वो पिस कर रह गयी थी

उसकी लोंग स्कर्ट कब की शॉर्ट स्कर्ट बन चुकी थी ये उसे भी पता नही चला..

उसके कुल्हों के बीचो बीच सिर का लॅंड ऐसे फँसा हुआ था जैसे उसे किसी चीज़ से चिपका दिया हो

वो पीछे से उसकी दरार में धक्का मारते तो उसकी स्कर्ट का कपडा तो ऊपर खिसक जाता पर लंड वहीं फंसा रह जाता

अनु ने अपना सिर पूरा पीछे किया और नशीली आँखे खोलके सर को देखा, दोनो की नज़रें मिली और अगले ही पल सुधीर सर नेअपना मुँह आगे करते हुए उसके नर्म होंठो को अपने मुँह में दबोच कर जोरों से स्मूच करना शुरू कर दिया

ऐसे रसीले होंठ आज तक नही चूसे थे शायद सुधीर सर ने,

वो जितना भी उन्हे चूसते, उन्हे और चूसने की चाह बढ़ती जाती

अपनी गांड को सर के लॅंड पर घिसते-2 कब उसकी स्कर्ट उपर तक आ गयी, उसे पता ही ना चला

सर का मोटा लॅंड, जो उनकी पेंट में टेंट बना कर खड़ा था अब उसके नंगे चूतड़ों के बीच रगड़ खा रहा था जिसकी वजह से लंड के नीचे वाले हिस्से पर चूत से बह रहे रस की बूंदे चिपक गयी

कुँवारी चूत की गंध पाकर सर का लॅंड और भी ज़्यादा ख़ूँख़ार हो चुका था

इस वक़्त अनु और सुधीर सर को कोई होश नही रह गया था,

अनु ने कल जो भी सोचा था, आने वाले दिनों के लिए जो भी प्लान किया था, वो धरा का धरा रह गया

वासना का जो तूफान इस वक़्त इस कमरे में चल रहा था वो सब कुछ उड़ा लेने वाला था.

पर ऐसा हुआ नही

क्योंकि जैसे ही सुधीर सर ने उसे पलटकर अपनी तरफ करना चाहा , बाहर के दरवाजे पर जोरों से किसी के खड़काने की आवाज़ आई

“सुधीरवा…..ओ सुधीरवा….अंदर है क्या…..’’

वो आवाज़ सुनते ही सुधीर सर के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी

“पिताजी…..ये कैसे आ गये आज….इन्हे तो अगले हफ्ते आना था..’’

इतना कहते ही सुधीर सर ने उसके बूब्स से अपने हाथ बाहर खींचे, उसके कपड़े ठीक किए, अपना हुलिया भी दरुस्त किया और अनु को बाथरूम में जाकर छिपने को कहा, ताकि पिताजी को वो उपर लेजाकर बिठा सके

अनु बेचारी भोचक्की सी, इस अप्रत्याशित परिस्थिति से उभरने की कोशिश कर रही थी

वो रोबोट की तरह चलती हुई बाथरूम में जाकर छिप गयी और सर उपर चले गये

कुछ देर बाद जब अनु उस सदमे से बाहर आई तो उसे एहसास हुआ की वो क्या करने जा रही थी

मज़ा तो बहुत आ रहा था उसे

सर के पापा ना आते तो शायद वो इस वक़्त चुद रही होती उनसे

पर ऐसा तो उसने प्लान नही किया था अपनी लाइफ के बारे में

और शायद उपर वाला भी यही चाहता था की वो ऐसा ना करे,

तभी एंड मौके पर सुधीर सर के पिताजी को वहां भेज दिया

खैर, उसने जल्दी से अपना हुलिया ठीक किया,

बेग से अपनी ब्रा निकाल कर पहनी, बाल बनाए और अपना बेग लेकर वहां से निकल आई

पूरे रास्ते उसके जहन में वही सब चल रहा था जो ट्यूशन सेंटर में हुआ था.

पर अब उसने निश्चय कर लिया था की अपने आप पर कंट्रोल रखेगी

जहां तक उसने पहले सोचा था, वही तक मज़े लेगी

और मज़े कैसे होते है, ये तो वो जान ही चुकी थी

पर उन्हे कैसे और कितनी मात्रा में लेना है, ये जानना उसे सीखना था

जिसका निश्चय वो अब कर चुकी थी

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