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अपनी मॉम से डाँट खाकर और उनके एमोशन्स को महसूस करके अनु जब अपने रूम में आई तो उसके सामने अभी तक की रंगीन जिंदगी आँखो के सामने घूम गयी…

उसने महसूस किया की उन सभी पलों में कई बार वो कमजोर पड़ गयी थी

अगर परिस्थितिया साथ देती तो शायद वो अपना कुँवारापन खो चुकी होती…

पर जो अभी तक मज़े उसने लिए थे वो भी कम नही थे…

उसने अपनी माँ से वादा किया था की वो ऐसा कोई काम नही करेगी जिस से उनकी बदनामी हो…

पर बदनामी तो तभी होगी ना जब वो बिन ब्याही माँ बन जाएगी और ऐसा वो होने नही देगी…

उपर-2 वाले मज़े तो वो ले ही सकती है ना…

हर तरह के उल्टे सीधे विचार उसके दिमाग़ मे आ रहे थे.

खाना खाते वक़्त भी उनके बीच ज़्यादा बात नही हुई…

बाद में गौरव का कॉल भी आया पर उसका मन नही हुआ की बात करे उसके साथ…और फिर वही सब सोचते-2 वो सो गयी.

अगले दिन जल्दी आँख भी खुल गयी, रात कोई कोई बकचोदी जो नही की थी उसने फोन पे, इसलिए टाइम से स्कूल भी पहुँच गयी.

पर वहां जाते ही उसकी फट्ट के हाथ में आ गयी

निशा ने जाते ही सुधीर सर के असाइनमेंट के बारे में पूछा

उसने सुधीर सर का असाइनमेंट तो किया ही नही था.

कल की भसड़ में वो उसे भूल ही गयी थी

और जब तक वो कुछ सोचती, सुधीर सर क्लास में आ चुके थे

आते ही उन्होने सबसे असाइनमेंट देने को कहा…

अनु की तरह 3 और स्टूडेंट्स थे जिन्होंने वो नही किया था

अनु ने भी असाइनमेंट नही किया, ये देखते ही सुधीर सर की आँखो में एक अलग सी चमक आ गयी और झुकी हुई अनु की, बिन कच्छी वाली चूत भी तैर गयी

खैर, आशा के विपरीत, आज सुधीर सर ने असाइनमेंट ना करने वालो को कुछ नही कहा…

ना तो डांटा और ना ही क्लास से बाहर खड़ा किया..

पर अभी के लिए उन्होने स्टूडेंट्स को समझाकर छोड़ दिया और कल तक काम पूरा करके लाने को कहा..

और साथ ही स्कूल के बाद उनसे मिलकर जाने की हिदायत भी दे दी.

शायद अनु को वो सज़ा नही देना चाहते थे

या फिर अपने तरीके से देना चाहते थे

अनु समझ गयी की उनके दिमाग़ में ज़रूर कुछ चल रहा है…

और कल वाली बात सोचके उसकी फांके एक बार फिर से गीली हो गयी

निशा अपनी आँखे गोल करके , मंद-2 मुस्कुराके अनु को देख रही थी…जैसे पूछ रही हो ‘कल क्या जादू कर आई तू सुधीर सर के उपर कमिनी’

अनु ने अपने होंठ दांतो तले दबाते हुए अपनी खुशी को दबाने का प्रयत्न किया और सुधीर सर द्वारा पढाये जा रहे चेपटर पर ध्यान देने लगी.

क्लास ख़त्म होते ही गौरव लपककर उसके पास आ पहुँचा, वो सुबह से अनु से बात करने की कोशिश कर रहा था पर वो उसे इग्नोर कर रही थी

गौरव : ‘’यार अनु, क्या है ये, तुम बात क्यू नही कर रही…कल रात भी कॉल नही उठाया मेरा…मैने कितने मैसेज छोड़े और कॉल्स किए..’’

अनु : “मैं थकी हुई थी गौरव…तबीयत ठीक नही थी…’’

अनु का सपाट सा चेहरा और उत्तर सुनके गौरव समझ गया की उसे और कुरेदना सही नही है, वो चुपचाप अपनी सीट पर जाकर बैठ गया

उसके जाते ही निशा बोल पड़ी : “अब बोल साली…कल क्या हुआ था सर के रूम में …देख रही हूँ हू उनकी नज़रे इनायत कुछ ज़्यादा ही हो रही है तुझपे आज सुबह से…वरना तेरी तो जान का दुश्मन बना बैठा था ये..’’

अनु मुस्कुराइ और बोली : “अब हर बात बताई नही जाती मेरी जान….पर एक बात तो पक्की है, आज के बाद सर मुझे कभी डांटेंगे नही…’’

और ये कहते-2 वो सिर के साथ क्या करेगी, इसके बारे में सोचके रोमांचित हो रही थी.

सोच तो उसने लिया ही था कल ही की इन लड़को या मर्दो को अपने हुस्न के जाल में फँसा कर कैसे मज़े लेने है,

जिसमें उसे मज़े भी मिल जाए और उसकी बदनामी भी ना हो, जैसा की उसकी मॉम ने उसे समझाया था..

और वो कैसे करना है , ये उसके शरारती दिमाग़ ने ऑलरेडी प्लान कर लिया था.

स्कूल ख़त्म होते ही रोजाना की तरह दोनो सहेलियां गेट तक साथ आई, दूसरे स्टूडेंट्स सुधीर सर से मिलने स्टाफ रूम में जा चुके थे, वो बाद में जाना चाहती थी इसलिए अभी के  बाहर तक आ गयी, बाहर जाते-2 उसने कल का सुधीर सर वाला पूरा किस्सा उसे सुना डाला..

और तभी अनु को कल वाले लड़के की बात याद आ गयी,

निशा भी बाहर आकर इधर-उधर नज़रे घुमाके शायद उसी को ढूँढ रही थी, पर वो कहीं नही दिखा.

अनु : “उसी को ढूँढ रही है ना…”

जवाब में निशा मुस्कुरा दी

अनु : “अब तू बोल, क्या सीन है उसके साथ तेरा…और मिला कहाँ से ये तुझे..देखने में तो झुग्गी में रहने वाला लगता है..’’

निशा : “हाँ , वहीं रहता है….और ये मेरे पापा के ड्राइवर  का लड़का है, संजू “

अनु हैरानी से उसे देखने लगी…

अपने पापा के ड्राइवर के लड़के के साथ क्यूँ घूम रही है भला..’

निशा : “तू तो मेरे पापा को जानती ही है, उनके सर पर समाज सेवा का भूत सवार रहता है, ड्राइवर के बच्चे की मदद के लिए उसका एडमिशन सरकारी स्कूल में करवाया और उसे ये बाइक भी लेकर दी ताकि खाली समय पर ओला / उबर चला कर कुछ कमा सके ’’

अनु : “वो तो ठीक है, पर तू क्यों घूम रही है इसके साथ…ऐसा क्या मज़ा मिल रहा है तुझे ? “

निशा (मुस्कुराते हुए) : “मज़ा मिला नही है अभी, पर मिलने वाला है…मैने इसे स्कूल ड्रॉप एंड पिकअप के लिए पटा लिया है और बदले में मैं इसकी पढ़ने में हैल्प करती हूँ …इसके घर जाकर….आई मीन, इसके झोपडे में जाकर”

ये कहते हुए उसने एक आँख मार दी…अनु का तो मुँह खुला का खुला रह गया…

पर अभी भी उसे ये आश्चर्य हो रहा था की वो उस लड़के के साथ भला ये सब क्यों कर रही है,

उसके स्कूल में काफ़ी गुड लुकिंग लड़के थे जो निशा के पीछे हाथ धोके पड़े थे,

यहाँ तक की गौरव भी पहले निशा के चक्कर में था, उसने घांस नही डाली तो वो अनु के पीछे पड़ गया…

अनु को तो हमेशा से ही एक बाय्फ्रेंड की चाह थी, इसलिए एक-2 बार में ही वो उससे ‘पट’ गयी

वो निशा से ये पूछने ही वाली थी की तभी संजू आ गया, अपनी नयी बाइक लेकर , और कल की तरह निशा फिर से उछल कर उसके पीछे बैठ गयी, पर जाने से पहले बोली : “वो मज़ा आज लूँगी…अब तू भी जा …सुधीर सर को भी थोड़ा मज़ा दे दे…’’

ओह्ह …

निशा के चक्कर में वो उनके बारे में तो भूल ही गयी थी….

वो भागती हुई सी वापिस अंदर गयी…

पर सुधीर सर के पास जाने से पहले वो वॉशरूम में गयी और अपनी कच्छी उतारकर अपने बेग में रख ली…

चूत उसकी काफ़ी गीली हो चुकी थी…

कल की तरह वो आज फिर से अपनी बन्नो के दर्शन करवाकर उन्हे अपने सम्मोहन के जाल में पूरी तरह से फँसा लेना चाहती थी, ताकि उसका बचा हुआ साल अच्छे से निकल जाए…

वो जाने लगी पर फिर कुछ सोचके वो फिर से अंदर गयी और इस बार अपनी शर्ट खोलकर अपनी ब्रा भी उतारकर बेग में रख ली…

अब वो उपर से नीचे तक सिर्फ़ 2 कपड़ो में थी, नीचे से ठंडी हवा उसकी गर्म चूत को सहला रही थी और सामने से देखने पर उसके पिंक निप्पल और सिक्के जितना बड़ा एरोला वाला हिस्सा सॉफ दिखाई दे रहा था…

अभी के लिए उन्हे छुपाने के लिए उसने बेग से वही असाइनमेंट वाला पेपर निकाल कर अपनी छाती से लगा लिया और सर की तरफ चल पड़ी

वहां पहुँची तो सुधीर सर को बेसब्री से अपना ही इंतजार करते हुए पाया..

वो कुछ बोल पाते इस से पहले ही उसने छाती से पकड़ा वो पेपर उनके सामने रख दिया…

उन्होने उसे देखा और जैसे ही सर उठाकर अनु को कुछ बोलना चाहा वो ठिठक कर रुक गये..

वाइट शर्ट के अंदर से झाँकते मोटे निप्पल्स उन्हे दिखाई दिए…

बेचारे सुधीर सर की तो हालत ही खराब हो गयी…

जीभ सूख कर पत्थर हो गयी…

उन्होने सोचा भी नही था की कल उसकी चूत देखने के बाद आज उसके निप्पल के भी इस तरह से दर्शन हो जाएगे…

भले ही शर्ट के महीन कपड़े की दीवार थी बीच में पर उसके आकार, रंग रूप और चारों तरफ फैला अेरोला सॉफ दिखाई दे रहा था….

और यही नही, ब्रा ना होने की वजह से उसके नन्हे बूब्स का आकार भी सॉफ दिखाई दे रहा था…

जैसे दो नन्हे-2 संतरे उसके सीने से चिपका दिए हो…एकदम गोल और कठोर थे वो.

अनु : “सॉरी सर ….ये असाइनमेंट मैं नही कर पाई कल…एक तो मेरी तबीयत भी ठीक नही थी और जब मैने इसे देखा तो इसमे मुझे काफ़ी कुछ समझ भी नहीं आया…सो मैने सोचा की आपसे समझकर ही इसे पूरा कर लूँगी…आप मुझे समझाएँगे ना सर ’’

उसने जान बूझकर आख़िरी लाइन अपना सीना थोड़ा और बाहर निकाल कर कहा…

वो थोड़ा और ज़ोर लगाती तो शायद शर्ट में दो छेद हो जाते.

पर अंदर ही अंदर वो भी उस शर्ट से बाहर निकलने के लिए छटपटा रही थी…

मन तो उसका कर रहा था की वो बचे खुचे कपड़े भी फाड़ डाले…

उन्हे नोच कर अपने जिस्म से निकाल फेंके और कूद कर उनकी टेबल पर चढ़ जाए और कूद पड़े सुधीर सर के उपर…

पर अभी के लिए जो वो कर रही थी वही सुधीर सर से संभालना मुश्किल हो रहा था.

अनु की बात सुनकर उन्होने हकलाते हुए कहा : “उम्म हाँ हन…हां क्यों नही….तुम…तुम एक काम करो…मेरे साथ मेरे घर चलो..आई मीन…मेरे ट्यूशन सेंटर में आकर ये पूरा कर लो…वहां मैं समझा दूँगा’’

अनु थोड़ा और झुकी उनकी टेबल पर और बोली : “चले फिर…सर …आपके घर…आई मीन, आपके ट्यूशन सेंटर पर…’’

सुधीर सर ने जल्दी-2 अपने पेपर्स बेग में रखे और उस बेग को अपने लॅंड के सामने वाले हिस्से पर लगाकर वो जल्दी से बाहर निकल गये…

अनु भी मुस्कुराती हुई उस पेपर को एक बार फिर से अपने सीने से लगाकर , अपने निप्पल्स को दुनिया से छुपाती हुई बाहर आकर सुधीर सर की कार में बैठ गयी और वो दोनो उनके घर की तरफ चल दिए..

सुधीर सर ने अपने घर के ग्राउंड फ्लोर में ही ट्यूशन सेंटर खोल रखा था,

वैसे तो वहां बच्चे शाम 5-8 ही आते थे, अभी तो 2 ही बजे थे.

इसलिए वहां इस वक़्त कोई नही होगा…

रास्ते में ,बातों ही बातों में उसे पता चला की उन्होने आज तक शादी ही नही की है, वो घर पर अकेले रहते थे. उनके माँ पिताजी गाँव में रहते थे.

अनु सर को गोर से देख रही थी….

थोड़े साँवले थे पर बॉडी एकदम टाइट थी उनकी,

सर ने बताया की मॉर्निंग में वो 10 किलोमीटर वॉक भी करते है और उसके बाद जिम भी जाते है,

वहीं से स्कूल आ जाते है, कार की पिछली सीट पर जिम वाला बेग भी पड़ा था…

सर के शरीर से अजीब सी नशीली गंध आ रही थी अनु को…

एक असली मर्द वाली..

वो अपनी जाँघो को आपस में रगड़ रही थी…

पर वो उन्हे ज़्यादा रगड़ती तो एक गीला पेच बन जाना था उसके पीछे, इसलिए बड़ी मुश्किल से उसने अपने आप को रोका.

10 मिनट में ही सर का घर आ गया और वो दोनो अंदर आ गये, सर ने ट्यूशन सेंटर का लॉक खोला और अनु को अंदर बैठने को कहा..

और वो उपर अपना बेग रखने चले गये.

अनु अंदर गयी और उसने अपना बेग रख दिया…

एक बड़ा सा कमरा था वो, जहाँ स्टूडेंट्स के लिए करीब 15-20 चेयर्स रखी थी,

सामने वाइट बोर्ड था, साथ में शायद वॉशरूम था, वो उसके अंदर चली गयी जहाँ एक बड़ा सा मिरर लगा था..

उसने अपने आप को उपर से नीचे तक उस शीशे में देखा,

उन कपड़ो में, ख़ासकर बिना ब्रा की शर्ट से झाँकते बूब्स की वजह से, वो एकदम कमाल की लग रही थी,

बहुत ही सैक्सी…

उसने एक-2 बटन खोले तो बूब्स की क्लीवेज़ बाहर दिखने लगी…

वो होंठ टेढ़े करके मुस्कुरा दी और तभी बाहर से सुधीर सर की आवाज़ आई

“अनु ….अनु…कहाँ हो तुम….”

उनकी आवाज़ से ही उनकी व्याकुलता झलक रही थी…

अनु ऐसे ही, बिना अपने बटन बंद किए बाहर की तरफ चल दी…

आज जो सोचा हुआ था उसने उसे करने का समय आ चूका था.

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