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और जब उसने अपना लॅंड बाहर निकाल कर उसकी पीठ पर अपने वीर्य की पिचकारी मारी तो उसके मुँह से सिर्फ़ एक ही शब्द निकला….

“आआआआआआअहह………………..साली रंडी………”

और फिर अपने लॅंड की आख़िरी बूँद भी उसकी गांड से पोंछकर वो वहीं बेड पर लुढ़क गया

दोनो गहरी साँसे ले रहे थे

पर बाहर बैठी निशा की हालत पतली हो रही थी

उन्हे देखकर वो अभी तक 2 बार झड़ चुकी थी पर एक लॅंड वाली चुदाई का मज़ा अलग ही होता है

और शायद उसकी मन की आवाज़ उपर वाले ने सुन ली थी

क्योंकि अगले ही पल दरवाजा खोलकर मंसूर उसके सामने खड़ा था

वो अपनी फिंगरिंग मे इतनी खोई हुई थी की उसे उसके आने का एहसास भी नही हुआ

पर जब हुआ तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी, उसकी खुली टांगो के बीच का नंगा नगीना उसने देख लिया था

जिसे देखकर वो अपनी पेंट मे खड़े लॅंड को अपने हाथ से मसल रहा था

हालाँकि वो अभी कुछ देर पहले तक एक लॅंड की तमन्ना कर रही थी पर इतना तगड़ा लॅंड वो ले भी पाएगी या नही और वो भी इस सांड जैसे, पान खाने वाले मंसूर का…उसे तो डर ही लगने लगा

पर अब कुछ नही हो सकता था

जो होना था वो मंसूर ने ही करना था

**********

अब आगे

**********

निशा तो खुली किताब की तरह मंसूर के सामने पड़ी थी

उसके लंड की कलम से अपने शरीर पर चुदाई की एक कहानी लिखवाने के लिए

मंसूर की तो हालत हमें शिकारी कुत्ते की तरह थी जिसके सामने नर्म मांस पड़ा था

और जिसे देखकर उसके मुंह से लार टपक कर नीचे गिर रही थी

उसकी पेंट में खड़े लंड को अब और भी जगह चाहिए थी अपने पंख फैलाने के लिए

इसलिए उसने धीरे से अपने पेंट की जिप खोल दी और ऊपर के बटन खोलकर उसे नीचे खिसका दिया

जैस-2 उसके लंड का विकराल रूप निशा के सामने आ रहा था उसके चेहरे के भाव बदल रहे हैं,

उसने अंदाज तो लगा ही लिया था कि इस 6 फुटे हब्शी का लंड कितना बड़ा होगा

पर वो उतना ही मोटा भी होगा ये उसे अब पता चल रहा था

एकदम काला भुसंड लंड था उसका

बिनोद से भी ज्यादा काला

पर उसके लंड से डेड गुना ज्यादा खतरानाक

उसके ऊपर वाले सिरे पर चमक रही प्रीकम की बूंद भी एक चम्मच वीर्य से कम नहीं थी

अभी तक अंदर चुदाई के बाद गहरी सांसें लेते हुए बिनोद औरा अनु इस बात से अंजान थे की कमरे में मंसूर भी आ चुका है

आता भी क्यों नहीं

जब से बिनोद उसके घर की चाबी लेकर गया था उसका तो दिमाग ही खराब हो गया था

ये सोचकर कि उसके घर में वो साला बिनोद इन लड़कियों की चूत बाजे की तरह बज रहा होगा

और वो चूतियों की तरह यहां रखवाली कर रहा है

इसली जैसे ही स्कूल का पूरा हुआ, उसने जल्दी से गेट का ताला लगाया और ऑटो पकड़ कर अपने घर की तरफ आ गया

हालाँकि इस आधे घंटे में बिनोद ने अनु की चूत का बैंड तो बजा ही दिया था

पर अंदर पहुंचकर जब उसने निशा को अपनी चूत रगड़ते देखा तो उसके अंदर का जानवर बाहर निकल आया

और उसका सोता हुआ शेर भी अपने पंजे को तोड़कर बाहर आने को छटपटाने लगा

और अब यही वो मौका था जब उसने अपनी पेंट को नीचे करके उस शेर को आजाद करवा दिया था

वो भी जानता था कि उसके लंड को लेना इस स्कूल में पढ़ने वाली बच्ची के बस की बात नहीं है

पर ठरक ही ऐसी थी उसपर की अब तो वो उसकी चूत में अपना लंड पेलकर ही मानने वाला था वो

पेंट नीचे आते ही मंसूर के काले लंड को देखकर उस हिरनी के होश ही उड़ गए

बेचारी को आज पता चला की लंड ऐसा भी होता है

अभी तक तो उसने निब्बा-निब्बी वाली चुदाई ही की थी

आज उसके साथ पोर्न मूवी स्टाइल की चुदाई होने वाली थी

रोमांच के साथ उसके शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई

बेचारी अपनी चूत पर हाथ रखकर उसकी धड़कन को शांत करने की कोशिश कर रही थी

जैसा समझ रही हो कि अब जो होगा देखा जाएगा मुनिया, आने दे इसे भी

और तभी अंदर लेटे बिनोद की नजर बाहर खड़े मंसूर पर पड़ी

एक पल के लिए तो वो भी डर सा गया कि अचानक ये यहां क्यों आ गया

पर फिर उसने सोचा कि अब जो होगा देखा जाएगा, क्योंकि उसका काम तो हो ही चूका था

अनु की नरम चूत में अपना लंड पेलकर उसने अपना काम तो निपटा ही लिया था,

अब चाहे वो इस मंसूर से चुदे या किसी और से, उसे क्या

बिनोद को बाहर देखता देख कर अनु ने भी जब उसकी तरफ नजर घुमाई तो मंसूर से पहले उसकी नजर उसे खड़े लंड पर पड़ी

सच में ये तो बिनोद से भी काफी बड़ा था

पर ये अचानक यहां कैसे आ गया,

उसने बिनोद की तरफ सवालिया नजरों से देखा जैसे पूछ रही हो कि ये यहां क्या करने आ गया अचानक

पर उसने कंधे उचका कर सर हिला दिया कि मुझे क्या पता

दोनों इस वक्त नंगे थे

अनु ने पास पड़ी चादर को अपने ऊपर खींच कर अपने नंगे शरीर को ढक लिया

उस चादर में से भी मंसूर की महक आ रही थी

अनू मुस्कुरा दी कि जिस से बचने के लिए अपना बदन छुपा रही है उसकी चादर तो उसका बदन चूम ही रही है

इस वक्त सवाल उसका नहीं था

निशा का था

जिसके सामने मंसूर ने अपना लंड खोल रखा था

दोनों टकटकी लगाकर उनका खेल देखने लगे कि अब आगे क्या होगा

भले ही निशा के चेहरे पर उसके मोटे लंड को देखकर थोड़ा भय था

पर चुदासी की एक टीस उसके अंदर जो कब से उठे रही थी वो अब एक कसमसाहट का विकराल रूप ले चुकी थी

जो अब सिर्फ और सिर्फ उस लंड की चुदाई से बुझ सकती थी

अब चाहे वो लंड उसकी चूत को फाड़ ही दे

इसली उसने लपक कर मंसूर के लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और अपने मुंह में लेकर बुरी तरह से चूसने लगी

एक ठंडी सी सिस्कारी उसके मुंह से निकली जैसे अनु और बिनोद तो क्या पूरे मोहल्ले ने सुन ली होगी

पर उन्हें किसी बात का फर्क नहीं पड़ रहा था

उसे तो बस अपने इतने दिनों से अंदर छुपी उत्तेजना को बाहर निकालना था

और यहां उसका भरपूर प्रबंध था

उसने अपने ऊपर के कपड़े भी निकल दिए,

उसके चौड़े सीने पर घने बाल देखकर ऐसा लग रहा था जैसा कोई भालू अपना लंड किसी बकरी से चुसवा रहा है

निशा ने भी अपने बचे खुचे कपड़े निकाल फेंके जो इस बात का प्रमाण था कि वो भी चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार है

ऐसे मामलो में ‘सहमति’ भी जरूर चाहिए होती है

वो उसने नंगे होकर दे ही दी थी

अब तो वो अपनी चुदाई करवाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी

मंसूर ने नीचे हाथ करके उसकी बगलो में फंसाये और उसे खींचकर अपनी गोद में उठा लिया

उसकी ताकत देखकर निशा के साथ-2 अनु भी हैरान थी

वो किसी गुड़िया की तरह उसके नंगे बदन से रगड़ खा रही थी

मंसूर ने उसकी गांड पर हाथ रखकर और उसकी कमर के पीछे हाथ घुमाकर अपनी बालिश्त भुजाओं में जकड़ रखा था

और उसे बेतहाशा चूमे जा रहा था

जैसे किसी भिखारी को बड़े दिनों बाद कुछ अच्छा खाने को मिलता है

ठीक वैसे ही वो उसके जिस्म को खा रहा था

चूम रहा था

चाट रहा था

उसके मोटे मम्मे को जब उसने मुंह में दबा कर उसका दूध पीना शुरू किया तो वो सच में किसी बकरी की तरह मिमिया उठी

जिसके थनों को मुंह में डालकर कोई जबरदस्ती पी रहा हो

यहाँ जबरदस्ती से नहीं पर इससे मिल रहे सेंसेशन से वो मिमिया रही थी

वो उसके नंगे जिस्म को माउथ ऑर्गन की तरह अपने होठों से बजा रहा था

कभी उसके होठों को चुनता तो कभी उसके स्तनों को फिर थोड़ा ऊपर उठा कर अपना चेहरा

उसकी चूत तक अपने होंठ लाता और उसे हवा में ही चूसने लगता

ऐसा तब तक चला जब तक वो झड़ नहीं गई

झड़ती भी क्यों नहीं

ऐसा माहोल बन चूका था उसके शरीर में ये 5 मिनट वाला ऑर्गेज्म तो बनता ही था

हालाँकि अभी कुछ देर पहले भी वो अनु और बिनोद की चुदाई देखकर अपनी चूत में उंगली करते हुए झड़ी थी

पर ये जो उसके शरीर के साथ अभी हुआ था

मंसूर ने उसके शरीर को जिस तरह से खिलोने की तरह हवा में कालाबजियां खिलाते हुए उसे प्यार किया था

वो भी उसके ऑर्गेज्म को उभारने में काफी मददगार साबित हुआ था

झड़ने के बाद उसका अकड़ा हुआ जिस्म हवा में लटक सा गया

जो पहले अकड़ थी उसके बदन में वो झड़ने के बाद निकल चुकी थी

मंसूर ने उसके निढाल शरीर को नीचे रख दिया और फिर वो उसकी टांगो के बीच आकर लेट गया

क्योंकी वो उसकी कच्ची चूत को पूरी तरह से पीना चाहता था

और जब उसने अपने मोटे होंठ उसके गीली चूत के होंठो पर लगाए तो उसका शरीर एक झटके में कमान की तरह तन गया

अब तो अंदर बैठी अनु भी बड़े मजे से उनका खेल देखने में मशगूल हो चुकी थी

उसने जो अपना शरीर चादर से ढका हुआ था वो कब हट गई उसे भी पता नहीं चला

उसके नन्हें स्तन अपनी पूरी सुंदरता बिखेरते हुए पूरी तरह से एक बार फिर से तन चुके थे

मंसूर की जीभ अब किसी लंड की तरह अकड़ कर निशा की चूत को आने वाली चुदाई के लिए रंवा कर रही थी

और जब उसे लगा कि वो उसका मोटा लंड लेने के लिए चिकनी हो गई है तो वो उठ कर उसकी टांगो के बीच बैठ गया

अब उसका झूल रहा लंड उसके हाथ में था

जिसे उसने बड़े प्यार से निशा की चूत पर लगा दिया

निशा के साथ-2 अनु की भी सांसे रुक सी गई

वो बड़े ध्यान से उन्हें ऐसा करते देख रही थी

और यही वो पल था जब मंसूर ने अपनी नजरें अनु की तरफ घुमा दी

वो उसके नंगे जिस्म को देखकर पलकें झपकाना भी भूल गया,

इस वक्त बिनोद से जलन हो रही थी कि उसने कैसी इस चिकनी लड़की की चूत पहले मार ली

उसका तो लंड भी उससे छोटा था,

मोटे और लम्बे लंड वाले का पहला हक बनता था

खैर, उसकी वजह ही तो निशा की भी मारने को मिल रही थी उसे

और वो भी जानता था कि अनु भी उसके लंड के लिए मचल उठेगी,

इसलिए उसे अपने लंड का कमाल दिखाना जरूरी था

उसके सामने मंसूर ने अपने लंड का टोपा जब उसकी चूत की फांको के बीच रख कर रगड़ा तो अंदर से निकल रहा रस उसके सिरे पर लगकर हीरे की तरह चमक उठा

और उसकी चूभन से निशा का पूरा शरीर झंझना उठा

आज वो अपने आप को फिर से एक बार कुंवारी महसूस कर रही थी

जो अपनी रसीली चूत में पहली बार लंड लेने वाली थी

वैसे सच भी था,

आज से पहले जितनी भी लंड उसने लिए थे वो इसके आगे कुछ भी नहीं थे

आज पता नहीं ये उसके अंदर कहाँ तक खुदाई करने वाला था

वो ये बात सोच ही रही थी कि मंसूर ने बिना किसी चेतावानी के अपना लंड एक ही झटके में उसकी चूत में पेल दिया

उसने अपनी दोनों टाँगे हवा में फैला रखी थी

जिसे मंसूर ने दोनों हाथो से पकड़ रखा था

बेचारी छटपटा कर रह गई

उसके इस प्रहार से एक जोरदार आह निकल गई उसके मुंह से

“आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ आआआआआआआआआआआआआ आआआआआजाजाजाउउउउउ ”

[/url]

मंसूर का आधे से ज्यादा लंड उसके अंदर था

ऐसा लग रहा था जैसे कोई बेसबॉल का बेट अंदर डाल दिया हो

वो दोनों थोड़ी देर के लिए रुक गए

सिर्फ हल्का -2 सेंसेशन महसूस हो रहा था अभी

फिर हिम्मत करके उसने खुद ही मंसूर की जांघ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा ताकी जो दर्द होना है एक ही बार में हो जाए

क्योंकि उसे भी पता था कि उसके बाद सिर्फ मजे ही मज़े हैं

पर जैसे ही उसने मंसूर को अपनी तरफ खींचा उसका बेलेंस बिगड गया और वो फिसलकर उसके ऊपर गिरता चला गया

और साथ ही उसका लंड भी किसी खूंटे की तरह उसकी नरम चूत में धंसता चला गया

बेचारी का मुंह खुला का खुला रह गया

क्योंकी उसका लंड अब उसे अपने पेट में महसूस हो रहा था

किसी का लंड इतना लंबा कैसे हो सकता है भला

पर अब तो उसने वो ले ही लिया था अंदर गनीमत थी कि ये उसकी पहली चुदाई नहीं थी

वरना यहां तो खून की नदियां बह जानी थी

अब मंसूर ने खेल को अपने हाथ में ले लिया

उसने निशा का इंतजार किया बिना अपने लंड को बड़ी स्पीड से बाहर निकाला और फिर उसी तरह वापस अंदर पेल दिया

ऐसा उसने करीब 9-10 बार कियाऔर जब तक वो सब करता रहा वो चीखती रही सिसियाती रही

पर उस जालिम पर उसका कोई असर नहीं हो रहा था

उसे तो बस अपना मोटा लंड उसकी नन्ही सी चूत में डाल कर उसे पेलने में मजा आ रहा था

और ऐसा करते-2 उसकी कराहें कब मस्ती भरी सिसकारियों मैं बदल गई निशा को भी पता नहीं चला

अब तो उसका लंड किसी पिस्टन की तरह उसके अंदर तक जाकर उसे चोद रहा था

और उसके हर घिस्से से उसे जो आनंद मिल रहा था उसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं था

और अचानक निशा का मुंह दब कर रह गया

क्योंकि अनु आकर उसके खुले मुंह पर बैठ गई थी

इतनी देर से उनकी चुदाई देखने के बाद वो एक बार फिर से गर्म हो गई थी

बिनोद के लंड का तो मजा वो ले ही चुकी थी

अब मंसूर से भी अपनी चूत की प्यास बुझाना चाहती थी

हालाँकि निशा को इस बात का बुरा भी लगा कि वो क्यों उसकी चुदायी के बीच में कूद रही है

पर वो जानती थी कि आज ये चुदायी भी उसी की बदौलत उसे नसीब हो रही है

इसलिए बेचारी कुछ ना बोल पाई

बोलती भी कैसे उसके होठों पर निशा की चूत ने अपना कब्ज़ा को कर रखा था

पर सबसे ज्यादा अचंभा तो मंसूर को हुआ, क्योंकि वो तो बड़ी मस्ती में अपने लंड से निशा की चूत मारने में व्यस्त था

पता नहीं कैसे अनु उछलकर एकदम से उसके सामने आकर बैठ गया गई

उसे पहली बार इतने करीब से देख रहा था उसका नंगा बदन

अमरूद जितने स्तन और उसके गुलाबी कलार के निपल्स

और उसके रसीले होंठ

वो तो पागल सा हो गया उन्हें देखकर

और अगले ही पल निशा की चूत में अपना लंड हिलाते-2 उसने अनु को अपनी बाहों में भर लिया मैं भरा और उसके ऊपर टूट पड़ा,

सबसे पहले उसने अनु के होठों पर हमला किया

अनु भी इसी मौके की तलाश में थी, दोनों एक दूसरे के होठों पर टूट से पड़े

मंसूर के दोनों हाथ उसके नन्हें स्तनों को रगड़-2 कर मसल रहे थे

दूर बैठा बिनोद भी ये सब देखकर गरम होने लगा और उसके प्यार ने भी सर उठाना शुरू कर दिया

मंसूर की तो जैसे लाटरी निकल आयी थी

उसका लंड निशा की चूत में था और उसके होंठ अनु के मुंह में

हाथो से वो अनु के नन्हे बूब्स मसल रहा था और बदले में अनु उसके गले में बाहे डाले अपना नशीला जिस्म उसके साथ रगड़ रही थी और साथ ही अपनी चूत भी वो निशा के मुंह पर रगड़ कर अपना रस उसे पीला रही थी

अचानक अनु बिना किसी चेतावनी के खड़ी हो गयी

निशा को ऐसा लगा जैसे शहद से भरी हांडी उसके मुंह से खींच कर हवा में उड़ गयी हो

उसे भी इतना मजा आ रहा था उसे चूसने में

लंड से मिल रहे मजे के साथ इस मिठास से भरी चूत का स्वाद उसे बहुत ज्यादा मजा दे रहा था

पर अनु के उठ जाने से वो स्वाद उसके होंठो से दूर हो गया था

उसकी चूत से टपक रहा शहद उसके स्तनों को गीला कर रहा था अब

अनु थोड़ा आगे आयी और मंसूर के चेहरे के सामने उसने अपनी चूत को रख दिया

पहले उसके नशीले होंठ और अब निचले होंठो को देखकर मंसूर की तो हालत ही पतली हो गयी

उसकी चूत से टपक रहा रस उसे और भी नशीला बना रहा था

उसे कहने की जरुरत नहीं पड़ी अनु को की उसकी चूत के साथ क्या करना है

मंसूर ने उसकी कठोर गांड पर अपने पंजे जमा कर उसे अपनी तरफ खींचा और एक ही झटके में अपना चेहरा उसकी चूत पर दे मारा

बेचारी आनंद से चीत्कार उठी

उसकी दाढ़ी और मूंछो से भरा चेहरा उसकी चिकनी छूट पर जब लगा तो उसके जिस्म में सुरसुराहट हुई मानो वो वहीँ झड़ जाएगी

पर ऐसा नहीं हुआ

झड़ने में अभी और टाइम लगने वाला था उसे

इसी बीच मंसूर के होंठो ने उसकी चूत पर पूरा कब्ज़ा कर लिया और वो उसके निचले होंठो को बुरी तरह से चूसने लगा

“आआआ आआआआ हह हहह हहहहह उम्मम्मम मरररररर गयीईइ सससससस उम्मम्मम्मम “

अनु ने अपनी एक टांग उठा कर उसके कंधे पर रख दी

अब वो आसानी से उसकी रसीली चूत को चूस पा रहा था

नीचे उसका लंड काम पर लगा हुआ था और ऊपर उसकी जीभ

जल्द ही दोनों लड़कियों में से सिसकारियों की आवाजें आने लगी

क्योंकि दोनों ही झड़ने के करीब पहुँच रही थी

निशा तो पहले से ही काफी करीब थी

अनु भी काफी देर से अपनी चूत को मसल रही थी खुद ही

और फिर निशा के होंठो के बाद मंसूर के होंठो पर रगड़ लगवाकर उसके झड़ने की घडी एकदम से करीब आ गयी

और जल्द ही दोनों की सिसकारियों ने पूरे कमरे को भर दिया

“आआआआ अअअअअअअ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह हहहहहह हहहह उम्मम्मम मई तो गयी स्स्सस्स्स्स आअह्ह्ह “

इतना कहते -२ अनु का शरीर हवा निकले गुब्बारे की तरह लहराकर नीचे गिर गयी

और नीचे मछली की तरह मचलती निशा भी आँखे बाहर निकाले गहरी साँसे ले रही थी

दोनों के नंगे जिस्म एक दूसरे के करीब पड़े थे

और जब दोनों की नजरें मिली तो एक दूसरे को देख दोनों ही मुस्कुरा दी

मानो आज का मिशन पूरा हो गया हो

पर मिशन तो अभी बिनोद का बाकी था

क्योंकि इतनी देर से चुदाई देखकर वो अपना लंड रगड़ रहा था

और अब वो पूरे शबाब पर आ चूका था

एक और चुदाई तो बनती ही थी

दूसरी तरफ मंसूर भी अभी तक नहीं झड़ा था

वैसे भी उसे झड़ने में करीब आधा घंटा लगता था

अभी तो सिर्फ 15 मिनट ही हुए थे

इसलिए वो एक बार फिर से अपना लंड चूत में डालने के लिए तैयार था

और इस बार मंसूर का निशाना अनु की चूत थी

जिसे उसने चूस चूसकर इतना गीला कर दिया था की उसके अंदर लंड अपने आप फिसल कर जाने वाला था

वैसे भी बिनोद ने उसके हिस्से का आधा काम तो कर ही दिया था

बिनोद का लंड उस जितना ना सही पर उसके आस पास तो था

इसलिए उसकी चूत मारने में उसे ज्यादा तकलीफ नहीं होने वाली थी

इसलिए उसने अनु की कमर पर हाथ डालकर उसे ऊपर उठाया और उसे घोड़ी बना दिया

और उसकी देखा देखि बिनोद भी उसकी बगल में आया और निशा को उसने घोड़ी बना दिया

दोनों घोड़ियों ने एक दूसरे की नजरों में देखा, वो अब भी मुस्कुराये जा रही थी

आज वो पहली बार एक साथ चुदाई करवा रही थी

दो पक्की सहेलियां एक साथ लंड लेती है तो ऐसी मुस्कराहट आ ही जाती है होंठो पर

और तभी वो मुस्कराहट एक बार फिर से सिसकारियों में बदल गयी क्योंकि उनके पीछे लगे दोनों हरामियों ने एक साथ अपने लंड पर थूक लगाकर उसे दोनों की चुतों में धकेल दिया था

निशा की सिसकारी धीमी थी क्योंकि उसके अंदर मंसूर के बाद बिनोद का लंड गया था

पर अनु की सिसकारी ज्यादा तेज थी

क्योंकि उसकी लाइफ का सबसे मोटा और लम्बा लंड गया था उसके अंदर

पर एहसास बड़ा मजेदार था उसका

जैसे किसी ने उसे अंदर तक भर दिया हो

वो नीचे रखे तकिये में अपना मुंह रखकर किसी लोमड़ी की तरह चिल्ला उठी

“अअअअअअअ आआह्ह्ह ओफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ उम्मम्मम मजाआए आआआ गयाए , जोर से मारो आआह्ह्ह्ह मेरी चुत को मंसूर , जोर से “

एक जानदार मर्द को इससे ज्यादा भला क्या चाहिए

जब उसका लंड लेने के बाद लड़की ऐसा बोले तो जबरदस्त चुदाई करनी तो बनती ही है

इसलिए उसने इसकी नरम कमर को स्टेयरिंग बनाकर अपने लंड का ट्रक उसकी चूत के हाईवे पर सरपट दौड़ा दिया

फचा फच की आवाजों से पूरा कमरा भर उठा

निशा भी बिनोद का लंड एक बार फिर से लेने के बाद खुश थी

पहले जो काम छुप छुपकर किया था आज वो खुलकर हो रहा था

उन दोनों पीयून और गार्ड की जोड़ी को अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं हो रहा था की ऐसी कच्ची उम्र की स्कूल में पड़ने वाली लड़कियां उनका लंड ले रही है

पर जो भी था उन सभी को बहुत मजा आ रहा था

दोनों उनका लंड लेने के बाद दोहरी हुए जा रही थी

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और जल्द ही दोनों अपने-२ ओर्गास्म के करीब पहुँच गए

और झड़ते वक़्त दोनों ने ही अपने-२ लंड बाहर निकाल लिए और उसे पिचकारी बनाकर अपने लंड की बौछार उनकी कमर पर कर दी

होली आने वाली है, इनके नंगे शरीर के साथ ऐसी होली खेलनी तो बनती ही है

दोनों पलट कर अपनी पीठ के बल लेट गयी ताकि बाकी का बचा हुआ रस वो अपने चेहरे और पूरे बदन पर महसूस कर पाए

बाकी का पानी उन्होंने अपने स्तनों और चेहरे पर मलकर अपने पूरे शरीर को चमका डाला

और फिर हँसते हुए उन ट्रक ड्राइवरों के गियर को अपने मुंह में डालकर बाकी का बचा हुआ रस सडप -२ करके पी गए

आज निशा के साथ-२ अनु को भी अपने जिस्म की ताकत का एहसास हुआ था

जिसका इस्तेमाल करके वो किसी भी मर्द को अपने सामने झुका सकते थी

और साथ ही इस बात का भी की अनुभव वाले आदमी से ही चुदवाने में ज्यादा मजा है क्योंकि वो जो मजा देते है उसका कोई मुकाबला नहीं है

अब तो ऐसे मजे वो आने वाले दिनों में लेने ही वाले थे

सुधीर सर से मिले मजे के बाद इस दुगने मजे ने उसके इस हौसले में काफी इजाफा किया था

क्योंकि अब वो अपनी माँ की तरह अपने नशीले जिस्म का इस्तेमाल करके अपनी लाइफ में आने वाले हर लड़के और मर्द का अच्छे से इस्तेमाल करना सीख गयी थी

और अभी तो उसके चुदाई से भरे जीवन की ये शुरुवात ही थी

आने वाले समय में उसके जिस्म की किताब पर न जाने कितनों ने अपनी कहानियां अपने लंड की कलम से लिखनी थी

ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा

**********

समाप्त

***********

दोस्तों

इस कहानी को मैं यही समाप्त कर रहा हूँ

वैसे तो अभी काफी सम्भावनाये हो सकती है, कई और पात्र भी जुड़ सकते है पर वो सब रिपीट ही लगेगा

क्योंकि हमारी कहानी की नायिका अनु की जिंदगी में अभी तक जो भी आया है, सबके साथ वो मजा या सेक्स कर ही चुकी है

कहानी को आप सभी ने पसंद किया इस का दिल से आभारी हूँ

आजकल थोड़ा व्यस्त हूँ इसलिए भी कहानी को ज्यादा लटकाना सही नहीं है

जल्द ही एक नयी कहानी के साथ आपके बीच फिर से उपस्थित होऊंगा

तब तक के लिए आप सभी को प्यार

आपका

अशोक

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