अब तो कुछ हो नही सकता था
जब सब शांत हो गया तो उसने धीरे से मुझे नीचे उतरा
बाहर भी प्रेयर की आवाज़ बंद हो चुकी थी
कुछ ही देर में यहाँ फिर से भीड़ लगने वाली थी
इसलिए मैने जल्दी से अपने कपड़े सही किए
बाहर जाकर अपने बाल बनाए और लगभग भागती हुई सी अपनी क्लास की तरफ चल दी
ये भी नही देखा की बाद में बिनोद कब निकला , कहाँ गया
मुझे बस चिंता थी की कोई हमें एक साथ वहां ना देख ले
पर मेरी चालाकी कुछ काम नही आई
सुधीर सर ने मुझे दूर से ही बाहर निकलते हुए देख लिया था
और बाद मे बिनोद को भी
अब मेरी शामत आने वाली
अब आगे
———–
सुधीर सर की तो झांटे सुलग कर रह गयी वो नजारा देखकर
पहले तो उन्हें लगा की प्रेयर में अनु नहीं आयी है शायद क्लास में बैठ गयी होगी
उन्हें फ़िक्र हो रही थी की कहीं उनके जंगलीपन वाली चुदाई ने उस फूल सी बच्ची की चूत ना सुजा दी हो जिसकी वजह से वो बहार नहीं आ पायी
पर यहाँ तो नजारा ही कुछ और था
वैसे जो वो देख रहे थे शायद वो उनका वहम भी हो सकता था
पर उन दोनों की तेज चाल देखकर साफ़ पता चल रहा था की दोनों के मन में चोर है
पहला पीरियड उन्ही का था इसलिए वो सीधा उसकी क्लास में पहुँच गए
दोनों की नजरें मिली तो वो मुस्कुरा दी
उसके चेहरे को देखकर पता ही नहीं चल रहा था की वो चालाकी दिखा रही है या सच में वो मासूम है
खैर
उन्होंने ठान लिया की दोपहर को घर जाते हुए वो अनु से सब उगलवा लेंगे
उधर क्लास में एक बार फिर से अपनी सहेली को देखकर उसकी सहेली निशा काफी खुश थी
पूरे 4 दिन बाद वो स्कूल आयी थी
वो उससे सब सवाल जवाब पूछने लगी की इन चार दिनों में उसने क्या किया
वैसे तो अनु का मन कर रहा था की वो उसे सब बता दे
पर सुधीर सर की बात उसे याद आ गयी की अभी स्कूल में किसी को भी ये बात पता ना चले
पर निशा के पास बताने के लिए बहुत कुछ था
उसने बताया की किस तरह उसने पिछले दो दिनों में अपने बाय्फ्रेंड संजू के साथ मस्ती की
एक बार तो उसने संजू को स्कूल में ही बुला लिया था और उसके साथ उसी पेड़ के नीचे चुदाई की जहाँ उसने बिनोद के साथ मज़े लिए थे
बिनोद का नाम आते ही अनु की चूत एक बार फिर से रिसने लगी
हालाँकि अभी कुछ देर पहले सुधीर सर को देखकर भी उसका मन कर रहा था की काश वो इसी वक़्त उसे पूरी क्लास के सामने किस्स कर ले तो क्या होगा
वो उनका लॅंड चूसने बैठ जाएगी सब के सामने
अपने पूरे कपड़े निकाल कर उसी बेंच पर टांगे फेला कर लेट जाएगी जिसपर इस वक़्त वो निशा के साथ बैठी थी
और पूरी क्लास उसकी और सुधीर सर की चुदाई देखेगी
उफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
क्या हसीन खुली आँखो से देखा सपना था ये
काश ऐसा हो पाए किसी दिन
पर अभी तो उसकी सुई बिनोद की तरफ अटकी हुई थी
उसका आधा लॅंड अपनी पुस्सी में लेकर वो उसकी मोटाई और उससे मिलने वाले मज़े के बारे में तो जान ही चुकी थी
अब उसे अंदर लेने के बाद ही उसका असली मज़ा महसूस होगा
पर ये स्कूल शायद उसकी पहली चुदाई के लिए सही जगह नही है
उसे किसी और जगह का इंतज़ाम करना पड़ेगा
इसी उधेड़बुन में सारी क्लासेस निकल गयी
लास्ट पीरियड के बाद जब वो क्लास से बाहर निकली तो सुधीर सर को पहले से ही बाहर खड़े पाया
उसने देखा की उनके ठीक पीछे बिनोद भी खड़ा है
शायद वो उसे स्कूल के पिछले हिस्से में ले जाने के लिए खड़ा था
पर सुधीर सर के होते हुए वो उसके साथ कैसे जा सकती थी
जा तो क्या, उसके साथ बात भी करेगी तो उन्हें शक हो जायेगा
पर वो भी किसी से कम नही थी
उसने ठान लिया था की उसे जो करना है वो करना ही है
उसकी चुदाई के बीच सुधीर सर तो क्या उसकी माँ भी नही आ सकती
सुधीर सर ने उसे साथ चलने के लिए बोला तो उसने कहा की आज वो निशा के साथ जाएगी
उसका आज बर्थडे है और वो उसे पार्टी दे रही है
एक मिनट के लिए तो सुधीर सर की सुलग कर रह गयी
क्योंकि अंदर ही अंदर उन्हे पता था की ये ज़रूर उनसे झूठ बोल रही है
पर वो बेचारे कुछ कर भी नही सकते थे
स्कूल का मामला जो था
सभी के सामने वो उसके बाप बनकर उसपर हुक्म तो चला नही सकते थे
थोड़ी देर में निशा भी बाहर आई और अनु उसका हाथ पकड़ कर बाहर चल दी
अभी तक निशा को उसके प्लान के बारे में कुछ भी पता नही था
अनु ने चलते -2 उसे दबी ज़ुबान में सारी स्टोरी समझाई और दोनो बाहर निकल कर एक रिक्शे में बैठ कर निशा के घर की तरफ चल दिए
बिनोद बेचारे का लॅंड सिकुड कर रह गया ये देखकर
बेचारा अनमना सा होकर स्कूल के क्लासरूम चेक करके उन्हें एक-2 करके बंद करने लगा
सारा काम निपटा कर वो मंसूर के पास आकर बैठ गया
सुधीर सर भी अपनी गाड़ी लेकर निकल चुके थे
अब सिर्फ़ वो दोनो ही थे स्कूल में
मंसूर : “क्या हुआ , आज कहाँ गयी वो तेरी मुर्गी, मेरा नाम सुनकर उड़ तो नही गयी”
उसने अपने पान वाले दाँत निपोरते हुए कहा
एक तो पहले से ही अनु के चले जाने से उसका दिमाग़ खराब हो रखा था उपर से मंसूर की बातें उसे और गुस्सा दिला रही थी
पर वो कुछ बोला नही क्योंकि मंसूर उसके राज के बारे में जानता था
वो बाते कर ही रहे थे की तभी बिनोद को अनु का रिक्शा फिर से वापिस आता हुआ दिखाई दिया
निशा भी उसमे बैठी थी
उसकी तो बाँछे ही खिल गयी
वो समझ गया की सुधीर सर को चकमा देने के लिए उन दोनो ने ये प्लान बनाया था
उनके स्कूल के बाहर रुकते ही बिनोद उनके करीब जा पहुँचा
अनु : “बिनोद….यहाँ स्कूल में कुछ भी करना ख़तरनाक होगा और पूरा मज़ा भी नहीं आएगा, कोई और जगह है क्या जहाँ हमें कोई डिस्टर्ब ना करे और रिलैक्स होकर एन्जॉय भी कर सके ..”
वो बेचारा अपनी आँखे फाड़े कभी उसे तो कभी निशा को देखे जा रहा था
उसे तो विश्वास ही नही हो रहा था की अनु उसके साथ किसी ऐसी जगह पर चलने को तैयार है जहाँ वो खुल कर चुदाई कर सके
और रिलैक्स होने से उसका मतलब शायद बेड से था जिसपर लेटकर वो चुदना चाहती थी
उसका एक मन तो करा की किसी ओयो होटल में ले जाए उसे
पर स्कूल की बच्ची को किसी चपड़ासी के साथ देखकर उसे कोई कमरा देगा ही नही
उसे अपने घर भी नही ले जा सकता क्योंकि उसकी बीबी और बच्चे घर पर थे
तभी उसे मंसूर का ध्यान आया और एक प्लान भी
क्योंकि मंसूर भी अनु के साथ मज़े लेना चाहता था
मंसूर दूसरे शहर का था और उसके बीबी बच्चे भी वहीं रहते थे
उसने यहाँ एक घर किराए पर ले रखा था जो स्कूल के पास ही था
और उसकी एंट्री भी एकांत में थी
कोई आते – जाते देख नही सकता था उन्हें
उसका कमरा लिया तो एहसान के बदले शायद अनु उसके साथ मज़े लेने के लिए भी तैयार हो जाए
पर इस निशा का क्या करे
वो अभी तक क्यो चिपकी हुई है अनु के साथ
खैर, उसे क्या, वो जल्दी से मंसूर के पास गया और उसे सारी बात समझाई
एक ही मिनट में दोनो ने एक प्लान बना लिया और मंसूर ने उसे अपने कमरे की चाबी निकाल कर दे दी
निशा ने जब उसे मंसूर के पास जाते देखा तो वो समझ गयी की इस हरामी ने उनके बीच की बातें उस कमीने गार्ड को बता दी है
तभी वो उसे स्कूल मे आते जाते घूर-घूरकर देख रहा था
वैसे तो ऐसे मर्दों के घूरने में उसे आजकल ज़्यादा ही मज़ा आने लगा था
सामने से कोई उसे देखता तो वो छाती चौड़ी करके और बाहर निकाल लेती थी ताकि उसके उभरे हुए निप्पल्स और ज़्यादा बाहर निकल आए
और जब आगे निकल जाती थी तो पीछे से देखने वालो के लिए उसकी चाल में एक अजीब सी मस्ती शामिल हो जाती थी
जैसे दो मटकियां आपस में रगड़ खाती हुई हिलोरे लेते हुए पानी में बहती चली जा रही हो
ताकि देखने वाला उसकी रसीली गांड की थिरकन देखकर अपना लंड मसल सके
मंसूर भी उसके अगाड़े और पिछवाड़े का दीवाना था
हालाँकि उसकी शक्ल अनु को ज़्यादा पसंद नही थी पर उसकी 6 फुट की हाईट और बलिशट शरीर देखकर सॉफ पता चलता था की वो बिस्तर पर पहलवान बनकर क्या धमाल मचाता होगा
पर अभी के लिए तो उसका पहलवान बिनोद था
जिसके मोटे लॅंड को लेने के लिए उसने आज सुधीर सर से झूठ बोलकर ये प्लान बनाया था
बिनोद वापिस आया और उछलकर उस ए रिक्शा में बैठ गया
रास्ते में उसने बताया की उससे रिक़वेस्ट करके उसने उसके घर की चाभी ली है जो पास में ही है
वहां कोई डिस्टर्ब नही करेगा
सवाल तो बहुत आ रहे थे अनु के मान में पर चुदाई के सामने सब दब कर रह गये
कुछ ही समय बाद वो उसके घर के सामने पहुँच गये
वो एक पुरानी कॉलोनी का आख़िरी सिरा था, जहाँ गिनती के 4-5 मकान बने हुए थे
सभी बंद पड़े थे, उनकी हालत काफ़ी जर्जर थी
और इतनी सुनसानियत इसलिए भी थी वहां क्योंकि उसके ठीक पीछे की तरफ रेल की पटरी थी, शायद ट्रेनों की आवाज की वजह से वहां बसावट कम थी
बिनोद तेज़ी से चलता हुआ एक मकान के सामने पहुँचा और उसका ताला खोलकर वो सब अंदर आ गये
अंदर आने से पहले अनु ने चारों तरफ देखा , पर दूर -2 तक उन्हे देखने वाला कोई भी नही था
इस लिहाज से अनु को ये जगह काफ़ी पसंद आई थी
अंदर एक ड्रॉयिंग रूम था और सामने 2 कमरे थे
एक कमरा बंद था और दूसरे में एक बेड लगा हुआ था
मंसूर को देखकर लग नही रहा था की उसका घर इतना सॉफ सुथरा होगा
सब कुछ सलीके से बिछा हुआ था
बेड भी गद्देदार था
अब सिर्फ़ निशा की चिंता हो रही थी बिनोद को
उसने इशारा करके अनु से जब पूछा तो वो बोली
“अब इससे छुपाने वाली क्या बात है, ये सब जानती है की उस दिन इसकी चुदाई करने वाले तुम ही थे”
वो उसे स्कूल के पीछे वाली उस बात की याद दिला रही थी जब उसने निशा की आँखो पर पट्टी बांधकर उसकी चुदाई की थी
अब देखा जाए तो निशा पहले से ही बिनोद से चुदवा चुकी थी और अनु उसका आधा लॅंड अपने अंदर ले चुकी थी
ऐसे में दोनो को एक साथ चोदने का ख़याल भी उसके मन में आया और ऐसा सोचते ही बिनोद के लॅंड में तनाव आना शुरू हो गया
पर अनु बोली : “पर ज़्यादा खुश होने की ज़रूरत नही है, निशा को सिर्फ़ मैं अपनी सैफ्टी के लिए साथ लाई हूँ , ना की इसे हम दोनो के साथ थ्रीसम करवाने के लिए, मुझे जब मज़े लेने है तो पूरे लेने है, नो शेयरिंग”
इतना कहते हुए उसने एक आँख मार दी और अपनी नन्ही सी गांड मटकाती हुई अंदर बेडरूम की तरफ चल दी
निशा वहीँ बाहर सोफे पर बैठ गयी
वहां से बैठकर वो उनकी चुदाई का नज़ारा देखने वाली थी
अंदर जाते ही अनु ने अपना बेग साइड की टेबल पर रख दिया और बेड पर पसर गयी
बेड से निकल रही मर्दाना महक उसे मदहोश कर रही थी
मंसूर के बदन की महक उस बिस्तर से आ रही थी
पर अभी तो उसे बिनोद के बदन की महक लेनी थी
जिसके लिए उसकी चूत ना जाने कब से फड़क रही थी
उसने आँखे खोल कर देखा तो उसे बेड के किनारे पर ही खड़े पाया
वो अपनी शर्ट के बटन खोल रहा था
आज उसके जीवन का सबसे रंगीन सपना सच जो होने वाला था
स्कूल की सबसे हसीन लड़की आज उसके सामने अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार पड़ी थी
अनु ने उसका चौड़ा सीना देखा तो उसके अंदर की आग और भड़क उठी
उसने जल्दी से अपनी स्कर्ट को नीचे किया और अपनी पेंटी भी नीचे करके ज़मीन पर गिरा दिया
उसकी गर्म पानी उगलती चूत अब बिनोद की आँखो के सामने थी
उसके अंदर से भभक कर निकल रही चिकनाई देखकर उसके मुँह में पानी आ गया
वो झट से नीचे ज़मीन पर बैठा और उसकी टांगो को फैला कर अपने होंठ सीधा उस रसीले तालाब पर लगा दिए जिसका पानी पीने के लिए वो काफ़ी देर से तड़प रहा था
अनु ज़ोर से चिल्ला पड़ी
“आआआआआआआआआआआआहह…… ओह बिनोद………………….उम्म्म्ममममममममममममममम”
उसने एक ही पल में अपनी शर्ट के बटन खोलकर उसे भी निकाल फेंका
अब वो उस बेड पर पूरी नंगी थी और उस जंगली से अपनी चूत बड़ी बेदर्दी से चुसवा कर उसका भरपूर मज़ा ले रही थी
बिनोद ने अपने हाथ आगे बढ़ाकर उसके बूब्स को पकड़ लिया और उन्हे निचोड़ने लगा
उसकी मोसम्मियाँ वो ऐसे निचोड़ रहा था जैसे उनमे से अभी जूस निकलेगा और वो ग्लास भरकर उसे पी जायेगा
उनका कार्यकरम देखकर बाहर सोफे पर बैठी निशा का भी बुरा हाल था
काश वो अपने बाय्फ्रेंड संजू को भी यहीं बुला लेती
पर अब क्या हो सकता था
बेचारी के पास अपनी उंगलियो से चूत रगड़ने के सिवा कोई और चारा नही था
अंदर का माहौल धीरे-2 गर्म होने लगा था अब
निशा ने बिनोद के बाल पकड़ कर कुछ देर तक तो उसे अपनी चूत पर बुरी तरह से रगड़ा और फिर उसे उपर खींचकर उसके गीले होंठो को अपनी छातियों पर रगड़वाया
बिनोद तो उसकी कठपुतली बनकर वो जैसा उससे करवा रही थी वही कर रहा था
इतनी टाइट चूत का पानी पीकर उसके जन्मो -2 की प्यास आज बुझ गयी थी
और उसके नर्म बूब्स को चूसकर ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई मालपुवा खा रहा हो
इतना मीठापन था उसके जिस्म में
और फिर अनु ने जब उसे उपर खींचकर अपने रसीले होंठ उसके हवाले किए तो बिनोद तो पागल ही हो गया
कच्ची जवानी से भरी लड़कियों के रसीले होंठ चूसना उसकी फॅंटेसी थी
उसका बस चलता तो स्कूल की हर लड़की के होंठ चूस लेता वो
इतना दीवाना था वो स्मूच का
इस अवस्था में पहुँचकर उसके शरीर का पूरा भार अनु के उपर था
उसने बिनोद को बेड पर धक्का दिया और खुद उपर आ गयी
और उपर आते ही सबसे पहले उसने उसकी पेंट उतारकर उसे भी नीचे से नंगा किया ताकि उसके नंगे शरीर का पूरा मज़ा ले सके
पेंट उतरते ही उसका काला मोटा नाग फुफकारता हुआ सामने प्रकट हो गया
जिसे उसने बड़े प्यार से अपने दोनो हाथों में पकड़ा और उतने ही प्यार से अपनी जीभ निकाल कर उसका राज्यभिषेक किया
उसकी गंध जब उसके नथुनों के पार गयी तो उसपर एक अजीब सा नशा चड़ने लगा
और उसी नशे में डूबकर उसने बिनोद के लॅंड को मुँह में भरकर चूसना शुरू कर दिया
हालाँकि वो मुँह में फिट नही हो रहा था पर फिर भी अपने मुँह को जितना हो सकता था उतना खोलकर वो उसे अंदर निगल गयी
कुछ ही देर में वो उसे अंदर तक निगलने में कामयाब हो गयी
आजकल की लड़कियो की यही बात बिनोद को सबसे ज़्यादा पसंद आई थी
की वो चुदाई से पहले लॅंड चूसना पसंद करती है
उसकी बीबी तो लॅंड चूसने के नाम से ही चिढ़ जाती है
और शायद उसी बात का असर था की ऐसी खूबसूरत बीबी होने के बावजूद आज वो इस तरह एक स्कूल की लड़की के साथ मज़े ले रहा था
कुछ ही देर में उसका लॅंड उसने पूरा रंवा कर दिया
अब वो उसकी चूत में जाने के लिए पूरा तैयार था
वो धीरे-2 उपर की तरफ खिसक आई और उसके लॅंड को निशाना बनाकर अपनी चूत पर लगाया
और धीरे-2 उसपर बैठकर अपना भार उसपर गिराने लगी और फिर उसे पूरा अंदर लेने के बाद आगे पीछे होकर उसपर रगड़ लगाकर लंड का भरपूर मजा लेने लगी
यही वो पल था जब बाहर बैठी निशा भी लगभग नंगी हालत में अपनी 4 उंगलिया अंदर ले चुकी थी और आँखे फाड़े अपनी सहेली को पहली बार चुदाई करते हुए देख रही थी
अपनी चूत में तो उसने काफ़ी बार लॅंड लिया था पर किसी और की चुदाई वो आज पहली बार देख रही थी
और ये उसे उत्तेजित भी कर रही थी
तभी तो उसकी चूत से पिचकारियाँ मारकर उसका रस बाहर निकल रहा था
हालाँकि वो अभी झड़ी नही थी पर उसकी चूत से इतना पानी निकल चुका था की उसने सोफा तक गीला कर दिया था
तभी उसकी और बिनोद की नज़रें आपस में मिल गयी
एक पल के लिए तो वो उसे अपने हाथों से अपनी जवानी की खुदाई करते देखकर पसीज ही गया की उसके रहते हुए वो भला ऐसा क्यों कर रही है
पर बेचारा चाहकर भी उसकी मदद नही कर सकता था
क्योंकि उसके चक्कर में उससे भी ज़्यादा गर्म माल उसके हाथ से निकल जाता
उसकी तो वो पहले भी मार ही चूका था और जिस अंदाज से अपनी टांगे फेला कर वो उसे ललचा रही थी इससे सॉफ था की अगली बार के लिए भी वो टांगे ऐसे ही खुली मिलेंगी
इसलिए उसने अपनी पूरी एकाग्रता के साथ अनु की चूत मारते रहने का फ़ैसला किया
अब अनु उसके उपर सवारी करके पूरे लॅंड को अपने अंदर महसूस कर पा रही थी
ये सैक्स भी कितनी अजीब चीज़ है, हर बन्दे के साथ अलग ही अनुभव होता है
रोमांच का, उत्तेजना का और सैक्स से भरपूर चुदाई का
काश वो इस धरती पर मोजूद हर मर्द से चुदाई करवा पाए
ये ख़याल आते ही वो खुद ही बुदबुदा उठी
‘साली रंडी….’
उसकी आवाज़ बिनोद ने भी सुन ली और वो समझा की वो उसे रंडी कहने के लिए बोल रहा है
क्योंकि घर पर अपनी बीबी के साथ चुदाई करते वक़्त भी जब वो ऐसे शब्दों का प्रयोग करता था तो उसकी बीबी काफ़ी उत्तेजित हो जाती थी
इसलिए उसने अपने दोनो हाथ उसके नर्म मुलायम गुब्बारों पर रखे और नीचे से धक्के मारता हुआ ज़ोर से चिल्ला पड़ा
“साली……एक नंबर की रंडी है तू…..भेंन की लोड़ी ….पूरे स्कूल मे अपनी गांद मटका कर घूमती है….बिना कच्छी के स्कर्ट पहन कर आती है स्कूल…..ब्रा भी नही पहनती और अपने निप्पल दिखाती फिरती है…..भेंन चोद …..तुझे तो पूरे स्कूल के सामने घोड़ी बना कर चोदना चाहिए….साली हरामजादी ..रंडी कहीं की….”

हालाँकि अनु ने ऐसा एक्सपेक्ट नही किया था की बिनोद उसके साथ ऐसी भाषा का प्रयोग करेगा पर पता नही क्यो ऐसे वक़्त मे उसके मुँह से निकले ये शब्द उसे अपनी तारीफ में पड़े गये कसीदे जैसे लग रहे थे
उसने जब पूरे स्कूल के सामने उसे चोदने की बात कही तो उसकी उत्तेजना अपने चरम शिखर पर पहुँच गयी
और वो भी झड़ते हुए, हाँफती हुई सी उसकी बातों का जवाब देने लगी
“आआआआआआआआहह…….. हाsssss बिनोद….हूँ मैं रंडी……तेरी रंडी…….चोद मुझे बिनोद…..जैसे चाहे चोद ….पूरे स्कूल के सामने चोद …..हेडमास्टर की टेबल पर चोद ……सारे बच्चों के सामने……टीचर्स रूम मे चोद ….मंसूर के कैबिन में चोद, जहाँ तेरा मन करे वहाँ आएगी ये तेरी पर्सनल रंडी बिनोद….मेरे गले मे पट्टा बांधकर अपने साथ ले जा और कही भी चोद मुझे….”
ऐसा कहते-2 उसका जिस्म अकड़ने लगा और वो हाँफती हुई सी उसके उपर गिर पड़ी
उसका शरीर शिथिल पड़ चुका था
बिनोद ने अपना लॅंड उसकी चूत से निकाला और उसे घोड़ी बनाकर उसकी पीछे से चुदाई करने लगा
कुछ ही देर मे अपने दाँत पीसता हुआ वो झड़ने के करीब पहुँच गया
और जब उसने अपना लॅंड बाहर निकाल कर उसकी पीठ पर अपने वीर्य की पिचकारी मारी तो उसके मुँह से सिर्फ़ एक ही शब्द निकला….
“आआआआआआअहह………………..साली रंडी………”
और फिर अपने लॅंड की आख़िरी बूँद भी उसकी गांड से पोंछकर वो वहीं बेड पर लुढ़क गया
दोनो गहरी साँसे ले रहे थे
पर बाहर बैठी निशा की हालत पतली हो रही थी
उन्हे देखकर वो अभी तक 2 बार झड़ चुकी थी पर एक लॅंड वाली चुदाई का मज़ा अलग ही होता है
और शायद उसकी मन की आवाज़ उपर वाले ने सुन ली थी
क्योंकि अगले ही पल दरवाजा खोलकर मंसूर उसके सामने खड़ा था
वो अपनी फिंगरिंग मे इतनी खोई हुई थी की उसे उसके आने का एहसास भी नही हुआ
पर जब हुआ तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी, उसकी खुली टांगो के बीच का नंगा नगीना उसने देख लिया था
जिसे देखकर वो अपनी पेंट मे खड़े लॅंड को अपने हाथ से मसल रहा था
हालाँकि वो अभी कुछ देर पहले तक एक लॅंड की तमन्ना कर रही थी पर इतना तगड़ा लॅंड वो ले भी पाएगी या नही और वो भी इस सांड जैसे, पान खाने वाले मंसूर का…उसे तो डर ही लगने लगा
पर अब कुछ नही हो सकता था
जो होना था वो मंसूर ने ही करना था








