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अच्छा भला अनु के नमकीन जिस्म के मज़े ले रहा था, इसने बीच में आकर सब खराब कर दिया

बिनोद :देखो मंसूर भाई, समझो ज़रा, आज ही बड़ी मुश्किल से हाथ आई है वो मेरे…और मुझे पता है की एक बार वो मेरे नीचे आ गयी तो कहीं नही जाएगी, अभी मामला कच्चा है, तुम्हे देखेगी तो सब गड़बड़ हो जाएगा, तुम मेरा साथ दो तो मेरा वादा है की मैं तुम्हे भी मज़े दिलवा कर रहूँगा…”

वो जितना सीरीयस होकर बोल रहा था मंसूर को उसमें सच्चाई दिखी और अपने लिए एक मौका भी

वो बोला : “चल ठीक है, तू जाकर मज़े ले उसके साथ पर मेरी एक शर्त है, आज के लिए मैं भी तुम्हे छुपकर देखूँगा”

बिनोद की तो कुछ समझ नही आया की क्या बोले, वो पहले से ही फँसा हुआ था, इसलिए उसने ज़्यादा बहस करनी उचित नही समझी, उसे ये भी डर था की ज्यादा बिताया तो अनु कहीं भाग ही न जाए

इसलिए वो बोला : “ठीक है…पर ध्यान से,, उसे पता ना चले”

इतना कहकर वो वापिस अनु की तरफ चल दिया और मंसूर वापिस मैन गेट की तरफ

ताकि घूमकर वो पीछे से छुपकर वहां पहुँच सके और उनकी रंगरेलियां देख सके.

बिनोद घबराया हुआ सा वापिस पहुँचा

इन सब बातों से मैं अभी तक अंजान थी, मेरी चूत के मज़े में खलल डालने वाले से मुझे वैसे भी काफ़ी चिढ़ मचती है

इसलिए मैं लगभग गरजते हुए बोली : “क्या हुआ, ये मुँह क्यों लटका रखा है…क्या बोल रहा था वो कमीना”

मैने मंसूर को पहचान तो लिया था पर उन दोनो के बीच क्या बात हो रही थी इतनी देर से उसका अंदाज़ा नही था

और मुझे ये भी पता नही था की जब तक मैं ये पूछ रही थी उससे, वो कमीना मंसूर दूसरी तरफ से घूमकर एक पेड़ के पीछे छुप गया था

बिनोद : “वो…कुछ नही…..मंसूर था, अपना चोकीदार, वो हम दोनो एक साथ लंच करते है ना, इसलिए पूछ रहा था की काम करते-2 एकदम से कहाँ गायब हो गया”

मैं : “और तुमने क्या कहा ? “

मेरा हाथ फिर से अपने बूब्स पर आ चुका था, क्योंकि अब लग रहा था की डरने वाली उतनी भी बात नही है जितना मैं सोच रही थी

बिनोद : “मैने क्या कहना है, कुछ भी तो नही…बस उसे टरका दिया और कुछ देर बाद आने को कहा”

मेरे चेहरे पर सकून के साथ अब एक सैक्सी मुस्कान थी

मैं बोली : “तो….अब तुम वो खाना खाने जाओगे या इस से अपनी भूख मिटाओगे….”

मैंने अपने बूब्स पर लगे निप्पल्स को उमेठते हुए कहा

दूर पेड़ के पीछे छिपे मंसूर ने जब अनु को टॉपलेस होकर बिनोद के साथ देखा तो वो उसे एकदम से पहचान गया

पहचानता भी क्यो नही, वो स्कूल की सबसे सैक्सी लड़की जो थी

अपनी गांड मटका कर जब वो स्लो मोशन में चलती थी तो सभी के साथ-2 उसके दिल की धड़कन भी बंद सी हो जाती थी

और अब उस जवान और कमसिन लड़की को अर्धनग्न हालत में बिनोद के साथ देखकर उसकी झाँटे सुलग कर रह गयी

एक मन तो किया की वो अभी निकल कर बाहर जाए और उन्हे रंगे हाथो पकड़ कर डराए और खुद भी उनके साथ उस काम में शामिल हो जाए

पर बिनोद का कहना सही था

उसे पूरी तरह से उनके जाल में फंसने देना चाहिए

बाद में वो खुद उसके साथ मज़े दिलवाएगा

काश वो अपना मोबाइल फोन साथ लाया होता

वो उसे चार्जिंग पर लगाकर आया था

फ़ोन होता तो इनका वीडियो बना लेता जो बाद में काम आता

फिलहाल तो उसे अपनी आँखो का ही कैमरा बनाकर अपने दिमाग़ में वो सब रिकॉर्ड करना था जो वो दोनो कर रहे थे

बिनोद ने अनु के बूब्स को देखा और उनपर टूट पड़ा

वो उन्हे ऐसे चूस चाट रहा था जिसकी वजह से उनपर लगे निशान 3-4 दिन से पहले जाने वाले नही थे

वो भी सोच रही थी की कितना फ़र्क है सुधीर सर जैसे पड़े लिखे इंसान और इस जंगली और अनपड़ बिनोद के प्यार करने के तरीके में

मज़ा तो दोनो ही देते है पर दोनो का तरीका कितना अलग है

वो कितने प्यार से और आराम से उसे प्यार करते है, जैसे फूल चूम रहे हो

और ये ऐसे प्यार कर रहा है जैसे आम की गुठली से गूदा चूस रहा हो

उनका लॅंड भी कितना प्यारा सा, गोरा और सॉफ सुथरा है, खुशबूदार सा

और इसका झांतो से भरा, काला भुसन्ड पर एक मादक सी गंध से भरा हुआ

और सुधीर सर कितने प्यार से उसकी चूत को चूसते है

अभी तो इस जंगली से अपनी चूत चुसवाना बाकी है, पता नही क्या हाल करेगा वो इसका

उसकी गुलाब की पंखुड़ी जैसी चूत को वो अपने काले होंठो से कैसे मर्दन करेगा

उसमें अपनी बीड़ी वाली महक से कैसे फूँक मारकर उसके अंगारों को सुलगाएगा उसकी कल्पना मात्र से ही मेरे शरीर में एक अजीब सी ऐंठन होने लगी

मुझे इस जंगलिपन मे काफ़ी मज़ा मिल रहा था

मेरे हाथ फिसलकर एक बार फिर से बिनोद के फ़ुफ़कार रहे लॅंड पर आ लगे और उसकी पेंट नीचे करके उसे आज़ाद कर दिया

मेरी लार की वजह से बिनोद का काला लॅंड अभी तक गीला था

मैं उसे हाथ में लेकर मसलने लगी

और दूसरे हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी

ये सब देखकर दूर खड़े मंसूर से सब्र नही हुआ और उसने भी अपना लॅंड पेंट से बाहर निकाल लिया और उसे मसलने लगा

“भेंन चोद, इस फटीचर बिनोद के छोटे लॅंड में क्या रखा है साली रंडी….मेरे लॅंड को देख, ये होता है असली मर्द का मोटा लॅंड, जो तेरी जैसी लोंड़ियां को बिठा कर दुनिया की सेर करवा सकता है…”

सच में उसका गोरखपूरिया लॅंड काफ़ी मोटा और लंबा था

अनु की कमसिन चूत में जाना तो दूर की बात है, उसका टोपा ही उसे खीरे की तरह चीर डालेगा

उधर अनु के दिमाग़ में जब ये सोच आई की बिनोद कैसे उसकी चूत को चूसेगा तो उसके हाथ अपनी छूट से हट ही नही रहे थे, वो उसे मसले जा रही थी

और साथ ही बिनोद के लॅंड को चूसकर उसे आसमान की सैर भी करवा रही थी

बिनोद के लिए ये सब किसी सपने के जैसा था जहाँ उसके लॅंड को एक परी आकर चूस रही थी

इसलिए ना चाहते हुए भी उसके लॅंड का गाड़ा रस भरभराकर निकलने लगा

बेचारी अनु को संभलने का मौका भी नही मिला और पहली धार सीधा उसके हलक से होती हुई उसके पेट में पहुँच गयी

दूसरी धार जब उसकी जीभ पर पड़ी तब उसे उसके स्वाद का एहसास हुआ

जो एकदम गाड़े और खट्टे दहीं जैसा था

बस स्वाद नही था, पर था काफ़ी गाड़ा जैसे रसमलाई में चीनी मिलाना भूल गया हो हलवाई

पर इस हलवाई की ये फीकी रसमलाई उसे काफ़ी पसंद आई थी

इसलिए उसने अगली बौछार का इंतजार किए बिना उसके लॅंड को मटन की नल्ली की तरह अंदर की तरफ चूसना शुरू कर दिया ताकि जो गाड़ा रस लॅंड की नसों से धीरे-2 बाहर निकल रहा था उसे वो जल्द से जल्द अपने अंदर समेट सके

उसके चेहरे पर लगी मलाई देखकर दूर खड़े मंसूर के लॅंड का पानी भी हवा में उछल-2 कर नीचे गिरने लगा

जो शायद कई पेड़ों की पानी और खाद बनने का काम करने वाला था

वो बुदबुदाया : “भेंन की लोड़ी , उसके लॅंड का पानी चपर -2 पी रही है…कसम पैदा करने वाले की, एक दिन तुझे अपने पानी से ना नहलाया तो मेरा नाम भी मंसूर नही….”

इतना कहते हुए उसने जेब से रुमाल निकालकर अपने हाथ और लॅंड को अच्छे से सॉफ किया और उसे वही फेंक कर वापिस चल दिया

वैसे भी लॅंड झड़ने के बाद अब उसमें पहले जैसा उत्साह नही रह गया था उन्हे देखने का

पर बाद में क्या करना है ये उसने अच्छे से सोच लिया था

मंसूर तो चला गया वहां से पर वो शायद एक ऐसा सीन मिस करने वाला था जिसका उसे जिंदगी भर पछतावा होने वाला था

अपनी चूत को मसलते-2 अनु के शरीर की चींटियां एक साथ चिल्लाने लगी की इन उंगलियो से कुछ नही होने वाला, और उनकी बात मानकर अनु ने भी अपने शरीर की बात मानते हुए बिनोद के सामने खड़े होकर अपनी कच्छी उतार दी

एक पल के लिए तो बिनोद समझा की वो उससे चुदवा ही लेगी

पर अगले ही पल वो उस चबूतरे पर खुद बैठ गयी और बिनोद को इशारा करके अपने सामने आने को कहा

और जैसे ही वो घुटनो के बल उसके सामने बैठा, उसने अपने ताजमहल को पूरी तरह से बेपर्दा कर दिया

संगमरमर जैसा गोरा ताज महल एक चूत के रूप मे उसकी नज़रों के सामने था

बेचारे का लॅंड अभी झड़ा था पर फिर भी वो उठने की भरपूर कोशिश कर रहा था ऐसा द्रिश्य देखकर

अनु : “चूसो इसे…..”

उसकी गहरी आवाज़ में जो सैक्स टपक रहा था वो उसका हाल बयान कर रहा था

बिनोद को भी दूसरी बार कहने की ज़रूरत नही पड़ी

वो अपनी लपलपाति जीभ लेकर उस कुँवारी, मक्खन की डली पर टूट पड़ा

ऐसी चूत तो उसने आज तक सिर्फ़ पॉर्न वीडियो में देखी थी

उसकी बीबी की चूत भी ऐसी नही थी जब उसे पहली बार चोदा था, वो भी काली थी

ये कान्वेंट में पढ़ने वाली सभी लड़कियों की चूत ऐसी ही होती है क्या

2 दिनों में उसे दूसरी कच्ची चूत चूसने को मिल रही थी

उसके होंठ जब अनु की चूत पर लगे तो उसे ये एहसास हो गया की अभी तक ये कुँवारी है

क्योंकि उसमें बड़ी मुश्किल से उसकी जीभ जा पा रही थी

लॅंड गया होता तो जीभ जाने में ऐसी मुश्किल ना आती

उसका अनुभव बोल रहा था ये

पर कुँवारी चूत को चूसने का सोभाग्या उसे मिल रहा था , ये उसके लिए बहुत था

और वो इसका भरपूर मज़ा लेना चाहता था

और ले भी रहा था

नीचे हाथ डालकर वो अपने लटके हुए लॅंड को मसल कर फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा था

वैसे भी उसके लॅंड को कुँवारी चूत से निकले रस की गंध आ चुकी थी, वो भी उसे उठाने के लिए काफ़ी था

बिनोद ने अपनी उंगली उसकी चूत में डालकर ढेर सारा रस निकाला और उसे लेजाकर अपने लॅंड पर मल दिया

और जैसे चमत्कार हुआ,एक ही झटके में उसका सुस्ता रहा लॅंड फिर से उठकर कड़क हो गया

इस जादुई तेल को तो इकट्ठा करके एमेजॉन पर बेचना चाहिए , मुँह माँगे पैसे मिलेंगे

पर अभी तो ये उसके लिए भी फ्री था

जिसे वो जी भरकर पी भी रहा था और अपने लॅंड को पीला भी रहा था

बिनोद के सामने कुँवारी चूत अपनी टांगे फेलाए पड़ी थी और हाथ में खड़ा हुआ लॅंड

उसने अगला कदम लेने की सोची और लॅंड को लेजाकर उसने उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया

उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…..

एक पल के लिए तो अनु भी सुलग कर रह गयी उसकी गर्माहट पाकर

ऐसा लगा जैसे कोई स्टील की बॉल उसकी चूत पर गर्म करके लगा दी हो

उसकी आँखे झत्ट से खुल गयी और उसने बिनोद को धक्का देकर अपनी चूत से हटाया

और हिसहिसाई : “जितना बोला है उतना करो….जब इसके लिए बोलूँगी तभी करना, वरना कुछ भी नही मिलेगा”

बेचारा बिनोद भीगी बिल्ली की तरह फिर से नीचे बैठकर अपनी जीभ से उसकी चूत चाटने लगा

अनु अपनी जवानी की शक्तियों को इस तरह से इस्तेमाल करके अपने आप को किसी महारानी से कम नही समझ रही थी

उससे दुगनी उम्र का आदमी उसके सामने कुत्ता बना बैठा था

जैसा वो बोल रही थी वैसा वो कर रहा था

वो उसे पैरों से इशारा करके नीचे बिठाती या बाल पकड़ कर उपर करती

वो सब करता

एक औरत के जिस्म की ताक़त का उसे एहसास होने लगा था

वो मर्दो पर इसका इस्तेमाल करके क्या -2 करवा सकती है

पर अभी के लिए तो वो उसके बालों को पकड़ कर अपनी चूत पर मूली की तरह घिस्स रही थी

उसकी बाहर निकली जीभ उसकी क्लिट पर दबाव डालकर उसे उत्तेजना के एक नये शिखर पर ले जा रही थी

और वो उस जवानी की आग मे तड़पति हुई, बिलबिलाती हुई, अपने ही निप्पल को बुरी तरह से कचोटती हुई उसे गंदी-2 गालियां देते हुए झड़ने के करीब पहुँच रही थी

“चूस साले ……हरामखोर …….चाट मेरी चूत को…..आअह्ह्ह्ह भेंन चोद ….. लॅंड डालेगा….. कुत्ते साले ……. यही चाट अभी तू….इसी के लायक है अभी तू…….आआआआआआहह भेंन के लंड …. खा जा मेरी चूत को…..खा जा मेरी चूत के दाने को………….. अहह……. बिनोद……………साले भड़वे …… मैं तो गयी……मैं तो गयी……”

इतना कहते हुए उसने बिनोद के मुँह पर अपनी जवानी के छींटों की बौछार कर दी

जिसमें भीगकर वो अपने आप को धन्य समझ रहा था

जब सब शांत हुआ तो उसने बिनोद को उपर खींचा और उसके पसीने से भीगे जिस्म को अपने से सटाकर उसे ज़ोर से दबोच लिया और बिनोद ने भी बिना कोई देरी किए अपने गीले होंठ उसके होंठो पर रखकर उसे स्मूच करना शुरू कर दिया

उसकी चूत का रस और बिनोद के पसीने की बदबू की गंध एक अजीब सा नशा दे रही थी उसे

अनु को अपने कपड़ो के गंदे होने की भी चिंता नही थी

पता नही कितनी देर तक वो उस चबूतरे पर उसके शरीर से लिपटे उसे किस्स करती रही और उसे अपने जिस्म से खेलने देती रही

करीब 20 मिनट बाद जब सब शांत हुआ तो वो उठी और अपने कपड़े समेटकर पहनने लगी

बिनोद ने अपना रुमाल निकालकर उसकी चूत और चेहरे को अच्छे से सॉफ किया और उस रुमाल को निशानी बनाकर अपनी जेब मे वापिस रख लिया

अपने कपड़े पहनने के बाद उसने बिनोद की तरफ देखा जो उसकी तरफ टकटकी लगाए बैठा था

वो शायद ये जानना चाहता था की कल भी ये सब होगा या नही

मज़ा तो अनु को भी काफ़ी आया था, इसलिए उसने बिनोद के गालो को थपथपाते हुए कहा : “जितना बोलू, उतना ही करना, तभी नेक्स्ट टाइम के लिए हां कहूँगी…समझा…”

ये सुनकर बिनोद का चेहरा ताजे कमाल की तरहा खिल उठा

अनु ने अपना बेग उठाया और भागती हुई बाहर निकल गयी

बाहर जाते हुए उसने गार्ड केबिन में बैठे मंसूर को उसने नरंदाज किया, वो उससे नज़रें मिलाकर उसे शक करने का कोई बहाना नही देना चाहती थी

पर बेचारी ये नही जानती थी की उसकी आधी से ज़्यादा पिक्चर तो वो देख ही चूका है

अब आगे क्या करना है उसके लिए बिनोद के साथ बैठकर उसे अपना प्लान समझने वाला था वो

अनु भी आज बहुत खुश थी, उसकी चूत का पुर्जा-2 खुल सा गया था आज की चुसाई से

जैसे सर की तेल मालिश करने से होता है, ठीक वैसे ही

अब तो उसे बस लॅंड का इंतजार था

जो सुधीर सर लिए बैठे थे

आज वो उनसे कुछ ना कुछ तो करवाकर रहेगी

ये सोचते हुए वो घर की तरफ चली जा रही थी.

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