अनु : “आपको देखना है की मॉम कैसे करती है वो सब…मेरे साथ….”
अँधा क्या चाहे, दो आँखे
वो लगभग चिल्ला पड़ा : “हाँ …..देखना है…बिल्कुल देखना है, क्या ये पासिबल है..?”
अनु उनके करीब आई और उनके होंठो को चूमकर बोली : “अपने प्यारे पापा के लिए इतना तो मैं कर ही सकती हूँ …आप एक काम करना, आज शाम मेरे घर आना…मैं आपको दिखाने का इंतज़ाम करती हूँ ..”
इतना कहकर वो उनके गालो को सहलाती हुई बाहर निकल गयी
और पीछे छोड़ गयी सुधीर को, जो अभी तक उन माँ बेटी के रिश्तो की सच्चाई जानकार सदमे में था और उससे ज़्यादा सदमा या ये कहलो खुशी का सदमा ये की वो उन्हे ये सब दिखाने के लिए अपने घर इन्वाइट भी कर गयी है
भले ही सिर्फ़ 1 मिनट हुआ था उन्हे झड़े हुए, पर पता नहीं क्यो फिर से उनके लॅंड में एक तनाव सा उत्पन्न होने लगा
और ये तब तक रहने वाला था जब तक उन माँ बेटी की रासलीला वो अपनी आँखो से नही देख लेता.
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अब आगे
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घर पहुँचकर अनु ने सबसे पहले तो बाथरूम में जाकर अपनी पुस्सी के बाल हटाए…
उसे चमकाकर ऐसा चिकना बना दिया की सुधीर सर तो क्या अगर मॉम भी उसपे अपने नर्म होंठ लगाए तो फिसल जाए
एक तो कमसिन कुँवारी कसी हुई और उपर से बिन बालों के, वो और उसकी चूत चमक रहे थे
मन तो बहुत कर रहा था उसका की रगड़ डाले उसे और निकाल दे अपनी चूत की आँखो से पानी
पर कुछ सोचकर उसने अपने आप को रोका
उसके ना चाहते हुए भी उसके काँपते हुए हाथ के पंजे ने उसकी चूत को जकड़ लिया
और वो आँखे मूंद कर सीसीया उठी
और बोली : “उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…….रुका नही जाता…..पर अब तो इसकी माँग सुधीर सर की जीभ से ही भरेगी….मेरी उंगलियो से नही….उंगलियों से नही….”
और फिर एक बार ज़ोर से झंझोड़ कर उसने चूत के अंदर धधक रहे जवानी के अंगारो को शांत किया और इससे पहले की उसका ईमान फिर से डोल जाए, वो टॉवल से बदन पोंछकर अपने कमरे में गयी और टॉप और शॉर्ट स्कर्ट पहन ली
हमेशा की तरह अंदर उसने अंडरगार्मेंट्स नही पहने थे
उसकी चिकनी जांघे किसी केले के तने की तरह दूर से ही चमक रही थी
कोई भी उन्हे देखकर अपनी लार गिराने पर मजबूर हो जाए
सर की तो हालत खराब करने वाली थी आज वो
शाम को जब उसकी मॉम आई तो हमेशा की तरह उसने मॉम से गले मिलकर उनका स्वागत किया
पिछले कुछ दिनों से उनके बीच जो नज़दीकियां आई थी उसके बाद तो किस्स करना भी आम बात हो गयी थी
मॉम का मूड अच्छा होता और वो ज़्यादा थकी ना होती तो किस्स लंबी चलती थी
वरना वो हल्का सा चुम्मा देकर अंदर चली जाती थी
आज भी उन्होने सिर्फ़ एक छोटा सा चुम्मा ही दिया
यानी आज ज़रूर कुछ बात हुई थी, ऑफीस में या फिर कुछ और
उन्हे अभी टोकना सही नही था, घर अभी जो आई थी वो
जब वो कपड़े बदल कर आई तो अनु उनके लिए चाय बनाकर लाई और दोनो बाल्कनी में जाकर बैठ गये
अनु : “मॉम ….क्या हुआ, सब ठीक है ना, आपका मूड ठीक नही लग रहा..”
शेफाली : “पूछ मत अनु…आज पूरा दिन ऑफीस में दिमाग़ चाट कर रख दिया मेरे लीचड़ बॉस ने”
अनु : “ग़लत जगह चाट रहा था , वहाँ नीचे चाट्ता तो आपका मूड भी अच्छा रहता और उसे आप लीचड़ नही स्वीटर कहती”
उसकी बात सुनकर शेफाली के चेहरे पर स्माइल आ गयी और उसने एक चपत लगा दी उसके कंधे पर
फिर एक ठंडी आ भरकर बोली : “उम्म्म्मम….मन तो बहुत कर रहा है….पर…”
अनु ने आँखे गोल करके कहा : “कहो तो सुधीर सर को बुला दूँ …”
शेफाली : “बड़ी बदमाश हो गयी है तू आजकल…एक तरफ उनसे शादी की बात चला रही है, यानी तेरे पापा बनने वाले है वो और उन्ही के लिए ऐसी बाते कर रही है..”
अनु : “हाँ तो, उसमें क्या ग़लत है, आप भी तो मेरी माँ हो, आपके साथ भी तो ये सब करती हूँ …सब कुछ करती हूँ जो एक मियाँ बीबी करते है, अब वो हमारी फॅमिली में आएँगे तो इसका मतलब ये नही की हमारे बीच जो रिश्ता है वो बदल जाएगा, इनफेक्ट मैं तो कहती हूँ की होने वाले पापा को भी इसमें शामिल कर लो, बड़ा मज़ा आएगा जब साथ बैठेंगे तीनो यार, आप मैं और होने वाले पापा”
उसकी ऐसी फिल्मी स्टाइल में अनोखी बात सुनकर शेफाली की भी हँसी छूट गयी
अनु समझ गयी की उन्हे अपने शीशे में उतारने में ज़्यादा परेशानी नही होगी
अनु ने कुछ देर रुक कर कहा : “वैसे….आज मेरा भी बहुत मूड कर रहा है…चाटने का और चटवाने का”
शेफाली तो पहले से ही ख़यालो में खोकर वो सब सोच रही थी जिसके बारे में अनु ने कुछ देर पहले कहा था
यानी थ्रीसम के बारे में
उसने सुना तो बहुत था इसके बारे मे पर कभी ऐसा करने का मौका मिलेगा ये नही सोचा था
पर अनु की बाद वाली बात सुनकर वो यथार्थ के धरातल पर आ गयी और अपनी जांघे रगड़ती हुई बोली : “तो चल फिर अंदर, देर किस बात की, मैं नहाकर आती हूँ , फिर करते है…”
पर तभी अनु ने वो बम फोड़ दिया : “पर अभी तो…शायद सुधीर सर आने वाले है…”
अचानक शेफाली के चेहरे के भाव बदल गये…वो बोली : “वो…यहाँ । …. इस वक़्त….मेरी तो कॉल्स भी नही उठाई उन्होने…और तुझे बता दिया की आ रहे है”
अनु : “हाँ ….बस कल वो ओलम्पियाड है तो आज पूरा दिन वो उसी मे लगे रहे….लास्ट की कुछ रिपोर्ट्स रह गयी है, उसी के लिए आ रहे है बस..”
कुछ देर पहले तक जो शेफाली अपनी बेटी से चूत चटवाने के लिए तड़प रही थी, अब सुधीर सर के लॅंड के सपने देखने लगी
वो सोच रही थी की अनु के बाद वो उसके साथ कुछ टाइम तो बिताएँगे ही, उसी में उनके साथ….
अपने बैडरूम में
खुलकर चुसवायेगी
उफ़फ्फ़….अब तो उसकी चूत रानी पहले से ज़्यादा बहने लगी थी
आने वाली चुसाई और चुदाई के बारे में सोच कर
पर वो इस बात से अंजान थी की आज सुधीर सर के आने का मकसद शेफाली की चुदाई नही बल्कि उन माँ बेटी के आपसी प्यार को देखना था
जिसे सुनकर उनके मुँह से लार और लॅंड से माल टपक गया था
खैर, सुधीर सर के आने की बात सुनकर शेफाली फ़ौरन अपने रूम में जाकर तैयार होने लगी
नहा धोकर एक सैक्सी सी वनपीस की शॉर्ट ड्रेस पहनी
जिसे पहनकर वो अपनी पहली डेट पर भी गयी थी उस बंदे से मिलने जिसने उसे खड़ी ट्रेन में चोदा था
कुछ देर बाद सुधीर सर भी आ गये, उनके चेहरे पर जो हवस के बादल तैर रहे थे वो सॉफ देखे जा सकते थे
अनु से इशारा करके उन्होने पूछा की कब होगा वो सब, तो उसने इशारा में ही बताया की होगा सरजी जल्दी ही होगा
शेफाली जब सुधीर के लिए पानी लेकर आई तो वो ऐसे शर्मा रही थी जैसे उन्हे लड़का देखने आया है
सुधीर भी उसके सैक्सी फिगर को देखकर एक ठंडी आ भरकर रह गया
नंगा करके वो उसे चोद तो चुका ही था
पर इन सैक्सी कपड़ो में उसके कसावट वाले जिस्म को उपर से नीचे तक देखकर उसके दिल ने वो फ़ैसला एक पल में कर लिया जिसके लिए वो कब से सोचे जा रहा था
यानी शेफाली के साथ शादी करने का फ़ैसला
उस जैसी सैक्सी औरत उसकी लाइफ में आ गयी तो उसकी तो दिन रात ऐश रहनी है
उपर से बोनस के रूप में उसकी जवान बेटी जो खुद उसकी दीवानी है
यानी अनु भी मिल रही थी
बस अब उन माँ बेटी के उन हसीन पलों को देखना बाकी था जिसके लिए वो यहाँ आया था
जब शेफ़ाली वापिस जाने लगी तो अनु ने अपनी माँ से कहा : “मॉम .अब सर और मैं थोड़ी देर के लिए मेरे रूम रहे है, बाकी का बचा हुआ काम कंप्लीट कर ले बस ओलम्पियाड वाला …ओके ”
यानी वो उन्हे डिस्टर्ब ना करने के लिए कह रही थी
शेफाली सिर हिला कर अपने रूम में जाकर टीवी देखने लगी
अब अनु के पास करीब आधा घंटा था , जिसमें वो सर के साथ कुछ मज़े ले सकती थी
अपने रूम जाते ही वो उछलकर उनकी गोद चढ़ गयी और उनके होंठो से होंठ लगाकर उन्हे चूसने लगी
सुधीर भी कब से तड़प रहा था किस्स के लिए
अब वो चाहे अनु से मिले या शेफाली से, की फ़र्क पैंदा हे
दोनो करीब 5 मिनट तक एक दूसरे के होंठो को चूसते रहे…
सुधीर सर ने उसकी फूली हुई गांड पर नीचे से हाथ रखकर उसे सहारा भी दिया हुआ था और उसकी स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर उसके नंगे कूल्हों को मसल भी रहे थे…
अचानक सुधीर सर ने एक उंगली उसकी गांड के छेद में घुसा दी
और वो चिंहुँक कर थोड़ा और उपर खिसक गयी, जैसे बिजली का झटका लगा हो उसे
उपर होते ही उनकी किस्स भी टूट गयी और उसकी नन्ही बूबियाँ सर की आँखो के सामने आ गयी
सुधीर ने टी शर्ट के उपर से ही उसे चूम लिया और उसके कड़क निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगे कपड़े के उपर से ही
वो हवा मे लटकी हुई सिसक उठी, चीख भी नही सकती थी, बाहर माँ जो थी
सर धीरे-2 अपनी बीच वाली उंगली उसकी गांड के कसे हुए छेद में उतार रहे थे
पहले तो उसे बड़ा अजीब लगा था, थोड़ा दर्द भी हुआ, पर वो उंगली ही थी वो इसलिए ज़्यादा ताकीफ़ नही हुई अंदर जाने में उसे
कुछ ही देर में वो सर की उंगली पर बैठी थी और वो उंगली उसके पूरा अंदर तक धँसी हुई थी
एक अजीब सा सेंसेशन हो रहा था उसके शरीर में
जो उसके चुतड़ों से शुरू होकर उपर आता हुआ उसके निप्पल तक पहुँच रहा था, जैसे कोई बिजली सप्लाइ हो रही थी उसके अंदर जो उसे और भी ज़्यादा उत्तेजक बना रही थी
सर ने उसे नीचे उतारा और दिवार से सटा कर खड़ा कर दिया
उसकी साँसों के साथ उसका सीना भी ऊपर नीचे हो रहा था
और उसी उत्तेजना में भरकर उसने अपनी टी शर्ट सिर से घुमा कर निकाल फेंकी अब वो सिर्फ़ एक नन्ही सी स्कर्ट में , उपर से नंगी होकर उनके सामने खड़ी थी
आज उसे पिछली बार की तरह मॉम का भी डर नही था
अगर वो अंदर आ भी जाती तो शायद वो अंदर ही अंदर जानती थी की वो उन्हे कुछ ना कुछ बोलकर समझा ही लेगी
अब शायद वो उनके इस संबंध को पहले की तरह बुरी नज़रों से नही देखेंगी
इतना तो वो अपनी माँ के बारे में समझ ही चुकी थी
सुधीर ने जब उसके नन्हे कड़क बूब्स को अपने चेहरे के बिल्कुल सामने देखा तो अपने गीले होंठ उसपर टीका कर उसका रास्पान करने लगे
जो मिठास अनु के होंठो से मिल रही थी अब तक, वही अब उसके बूब्स से चूस्कर निकालने लगे वो
छोटे बूब्स को चूसने का भी अपना अलग ही मज़ा है, एक ही बार में पूरा निगल जाओ अपने मुँह में
गले के पास जहां से जीभ शुरू होती है, वहां निप्पल जब टच करता है तो मुँह एक सकिंग मशीन सा बन जाता है, जो उस नन्हे गुब्बारे की सारी हवा अंदर चूस लेना चाहता है, फिर चाहे ऐसा करते हुए खुद का ही गला क्यो ना बंद हो जाए
पर सुधीर सर इतने शातिर हो चुके थे इस काम मे की वो साँस भी ले पा रहे थे और उसके बूब्स को चूस भी रहे थे, ऊँगली एक बार फिर से गांड के छेद में डाल कर उसे हिलाने लगे,
सर की उंगली ने उसकी गांड के छेद में हुड़दंग मचा रखा था
वो सोच रही थी की इसमे लॅंड कैसे जा पाता होगा…
वो जब जाएगा तब जाएगा, अभी तो उसकी चूत भी कुँवारी थी, पहले तो उसे उसके उद्घाटन समारोह के बारे में सोचना था
पर वो काम अब तभी होगा जब सुधीर सर उसके पापा बनकर उसके घर आ जाएँगे
और इसके लिए अपनी कुँवारी चूत को वो अपनी मॉम के नाम, उनकी शादी का चारा बनाकर कुर्बान कर देना चाहती थी
अपनी माँ के लिए एक बेटी इतना तो कर ही सकती है, वो भी करेगी
और कर भी रही थी
ये सब सोचते हुए उसमे एकदम ऐसा जोश भरा की वो सर के बालों को पकड़ कर अपनी छाती पर ज़ोर से दबाने लगी
ताकि वो ज़्यादा से ज़्यादा उसके बूब्स को अपने मुँह के अंदर उतार सके और चूस ले
“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…….म्म्म्ममममममममम……. सुक्ककककककककककककक इट पाााआआआपाआ……..अपनी प्यारी बेटी के बूब्स को सक करो….पी जाओ इन्हे……पपाााआआआ….ये आपके लिए ही हैं….पूरी लाइफ …….आपको इन्हे चूसना है……बड़ा करना है…..खाना है…..खा जाओ इन्हे पापा….मेरे प्यारे स्वीट पापा….माय हीरो…….आई लव यू पापा…..आई लव यू ….”
वो बावली सी होकर बदहवासी में कुछ भी अनाप शनाप बोले जा रही थी
सॉफ पता चल रहा था की उत्तेजना ने उसके शरीर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है
इस वक़्त सुधीर सर अगर चाहते तो उसकी चूत में लॅंड डालकर उसे पेल भी सकते थे और वो मना भी नही करती
सारी प्लॅनिंग धरी की धरी रह जानी थी उसकी
पर सुधीर सर समझदार थे
वो जानते थे की ऐसी कुँवारी लड़की की चुदाई उसकी माँ के रहते नही कर सकता वो
उसके लिए एकांत चाहिए
जहाँ वो जितना भी चीखे चिल्लाए
कोई सुनने वाला या दखल देने वाला ना हो
दोनो खुलकर आनंद के साथ चीखें और सिसकारियां भी मार पाए
कोई डिस्टर्ब ना करे उन्हे
ना चाहते हुए भी अनु के मुँह की सिसकारियाँ बाहर निकल ही गयी जिसे शेफाली ने सुन लिया
पहले तो उसे लगा की ये कैसी आवाज़ है जो कमरे से आ रही है, फिर कुछ अनहोनी की आशंका के साथ वो आवाज़ लगाती हुई उनके रूम की तरफ चल दी
“अनु…….अनु…..सब ठीक है ना…”
अपनी माँ की आवाज़ सुनते ही वो चीते की रफ्तार से सर को पीछे किया और अपनी टी शर्ट उठा कर पहन ली
पक्क की आवाज़ के साथ सर की उंगली उसकी गांड के छेद से निकल आई, जो बुरी तरह से फंसी हुई थी अंदर
शेफ़ाली के आने से पहले दोनो ने बड़ी चालाकी से टेबल पर गुरु शिष्य की तरह आराम से बैठकर लॅपटॉप में काम करने का नाटक शुरू कर दिया








